''कबीर सिंह'' महिला विरोधी होने के बावजूद क्यों महिलाओं को कबीर के किरदार से दिक्कत नहीं हैं?

महिलाओं को ऐसा क्यों लगता हैं कि एक पुरुष का गुस्सैल और आक्रमक होना…महिलाओं का अपमान करना...अपनी पत्नी पर हाथ उठाना...कोई बड़ी बात नहीं हैं? ''कबीर सिंह'' महिला विरोधी होने के बावजूद क्यों महिलाओं को कबीर के किरदार से दिक्कत नहीं हैं?

''कबीर सिंह'' महिला विरोधी होने के बावजूद क्यों महिलाओं को कबीर के किरदार से दिक्कत नहीं हैं?
हाल ही में रिलीज हुई शाहिद कपूर की फिल्म 'कबीर सिंह' को महिला विरोधी कहा जा रहा हैं। फिल्म के लिए 'toxic masculinity' शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा हैं, जिसका मतलब हैं 'विषाक्त पुरुषत्व!'। कबीर सिंह के हिट होने और उसके आपत्तिजनक दृश्यों को पसंद किए जाने से फिल्मों में महिलाओं की स्थिति और उनके समाज पर होने वाले असर को लेकर चर्चा हो रही हैं...शाहिद कपूर के किरदार को पुरुष सही ठहराते हैं, तो यह बात समझी जा सकती हैं। लेकिन जब महिलाएं कहती हैं कि उनको शाहिद के किरदार से कोई दिक्कत नहीं हैं, तो यह सोचने वाली बात हैं!! महिलाओं को ऐसा क्यों लगता हैं कि एक पुरुष का गुस्सैल और आक्रमक होना…महिलाओं का अपमान करना...अपनी पत्नी पर हाथ उठाना...कोई बड़ी बात नहीं हैं? चौंकाने वाली बात यह हैं कि इंडिया टुडे की सर्च में यह पाया गया कि पति से पिटनेवाली आधी से ज्यादा महिलाओं को उन पर की गई हिंसा में कोई बड़ी बात नजर नहीं आती! उनका मानना हैं कि मर्द तो ऐसे ही होते हैं!! आइए, इस बात पर थोड़ा गौर करते हैं कि आखिरकार 'कबीर सिंह' महिला विरोधी होने के बावजूद क्यों महिलाओं को कबीर के किरदार से दिक्कत नहीं हैं... 

कबीर सिंह में आपत्तिजनक ऐसा क्या हैं? 
कबीर सिंह के कई दृश्यों पर आपत्ति जताई जा रही हैं। दरअसल कबीर सिंह जो एक मेडिकल स्टूडेंट हैं, बहुत जिद्दी, महिलाओं की बेइज्जती करने वाला, जबरदस्ती करने वाला और नशेडी किरदार हैं। कबीर चाकू की नोक पर एक लड़की को कपड़े उतारने को कहता हैं, हीरोइन को मारता हैं, कामवाली के हाथ से कांच का ग्लास फुटने पर उसे मारने दौडता हैं, बिना लड़की की इच्छा जाने कॉलेज में घोषणा करता हैं कि यह उसकी 'बंदी' हैं और कोई भी उसे नहीं देखेगा, वह हीरोइन पर शादी के लिए दबाव बनाता हैं! 
कबीर को उसकी जूनियर प्रीति सिक्का (कियारा आडवानी) से पागलपन की हद तक प्यार हो जाता हैं। प्रीति को एक ऐसी लड़की बताया गया हैं, जो हर मौके पर चूप रहती हैं, लड़का टच करे तो पलटकर जवाब नहीं देती, परिवारवाले अपनी मर्जी थोपे तो वो अपनी राय नहीं बता सकती, लड़के जबरदस्ती करे तो पुलिस स्टेशन तक नहीं जा सकती!! 

कबीर सिंह महिला विरोधी होने के बावजूद क्यों महिलाओं को कबीर के किरदार से दिक्कत नहीं हैं... 
कबीर सिंह का इतना महिला विरोधी किरदार होने के बावजूद महिलाओं को उसके किरदार से दिक्कत नहीं हैं। इसमें दोष महिलाओं का नहीं हैं। दोष हैं उनकी परवरिश का! परवरिश का असर कैसा होता हैं यह हाथी की कहानी से बहुत अच्छे से समझ में आता हैं... 
एक महावत के घर के बाहर एक हाथी बहुत पतली रस्सी से बंधा हुआ था। एक आदमी ने यह देखा तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ कि इतना बलशाली हाथी और इतनी पतली रस्सी से कैसा बंधा रह सकता हैं? उसने महावत से पूछा, ''आपने हाथी को इतनी पतली रस्सी से बांधा हैं, ये रस्सी तो यह कभी भी तोड कर भाग सकता हैं।'' 
महावत ने जवाब दिया, ''नहीं ये रस्सी इस हाथी से कभी नहीं टूट सकती! '' व्यक्ति आश्चर्यचकित होकर बोला, ''हाथी तो बहुत ताकतवर होता हैं, वो तो अपनी सूंड से ही 350 किलोग्राम वजन उठा सकता हैं। फिर वह इतनी पतली सी रस्सी क्यों नहीं तोड़ सकता?'' 
महावत ने कहा, ''जब हाथी छोटा था तब मैं इसे मजबूत जंजीरों से बांधा करता था। तब इसने कई बार जंजीरे तोडने की कोशिश की। लेकिन कामयाब नहीं हुआ। धीरे-धीरे उसके मन में विश्वास बैठ गया कि वह इन जंजीरों को नहीं तोड़ सकता। बाद में उसने जंजीरे तोडने के लिए कोशिश करना ही छोड़ दिया। अब मैं इसे कितनी भी पतली रस्सी से बांध दू उसके दिमाग में यह बात अच्छी तरह बैठ गई हैं कि वो रस्सी को नहीं तोड़ सकता!'' 
दोस्तों, जिस तरह एक बलशाली हाथी एक पतली सी रस्सी को नहीं तोड सकता इसका कारण उसकी परवरिश में छिपा हैं ठीक उसी तरह महिलाओं का अपने आप को हीन मानना, पुरुषों द्वारा प्रताडित होने पर भी इसे सामान्य घटना मानने का कारण महिलाओं की परवरिश में छिपा हैं। बचपन से जिस तरह से महिलाओं को पाला जाता हैं, हर कदम पर उन्हें एहसास दिलाया जाता हैं कि पुरुष श्रेष्ठ हैं! महिलाओं ने उनकी हर आज्ञा का पालन करना ही चाहिए। बचपन से ये ही सब देखते-सूनते उनमें एक तरह की हीन भावना घर कर जाती हैं। महिलाओं को लगता हैं कि उन्हें अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का हक ही नहीं हैं...उनका अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं हैं...ये दुनिया पुरुषों की हैं...जैसे उनके पिता, पति और बेटे कहेंगे (चाहे वह बात गलत ही हो!) उन्हें उस बात का समर्थन करना ही हैं! इस तरह हीन भावना से ग्रसित होने के कारण यदि पति उन्हें मारे तो भी वे इसे गलत नहीं मानती। उन्हें लगता हैं कि पुरुषों को अधिकार हैं महिलाओं को मारने का..! इसी मानसिकता के कारण कबीर सिंह महिला विरोधी होने के बावजूद महिलाओं को कबीर के किरदार से दिक्कत नहीं हैं!!!

Keywords: kabir singh movie, Shahid kapoor, kiara Advani, women, story of elephant

COMMENTS

BLOGGER: 15
  1. मुझे तो बहुत बाहियात लगी ये मुवी ना कहानी ना मौरल, बस बहशियाना जुनून बेहूदा सा।
    और एक गूंगी महिला किरदार पत्थर जैसे निर्जीव सौंदर्य के साथ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. कुसुम दी, किसी भी स्वाभिमानी नारी को यह फ़िल्म अच्छी नहीं लगेगी। लेकिन महिलाओं को जो बचपन से संस्कार मिले हैं उसके कारण शोधों के अनुसार ज्यादातर महिलाओं को उसमें अनुचित कुछ भी नहीं लग रहा हैं।

      हटाएं
  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में गुरुवार 04 जुलाई 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. मेरी रचना को 'पांच लिंको का आनंद' में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, रविन्द्र जी।

      हटाएं
  3. पुरुष-प्रधान समाज में पुरुषों का दबदबा क़ायम रखने के लिए स्त्रियाँ भी पुरुषों जितनी ही ज़िम्मेदार हैं. अगर कोई पति अपनी पत्नी का सम्मान करता है, उसकी भावनाओं की कद्र करता है, घर के काम में उसका हाथ बटाता है तो उसे जोरू का गुलाम और जनाना कहने वालों में तमाम औरतें भी शामिल हो जाती हैं.
    औरतों को इस परंपरागत सोच को बदलने के लिए बाग़ी होना पड़ेगा वरना - 'अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आँचल में है दूध और आँखों में पानी' गाते हुए हम 'कबीर सिंह' जैसी स्त्री विरोधी फ़िल्म को सुपर हिट बनाते रहेंगे.

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. गोपेश जी, जैसा कि मैंने अपने लेख में कहा हैं कि महिलाओं की इस सोच के पीछे उनकी परवरिश हैं। वो अपने आपन को हीन समझती हैं। पुरुषों को श्रेष्ठ समझती हैं। इसलिए पुरुषों ने थोड़ी सी भी अपनी पत्नियों की मदद की तो उन्हें गलत लगता हैं।

      हटाएं
  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (05-07-2019) को ", काहे का अभिसार" (चर्चा अंक- 3387) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

      हटाएं
  5. प्रिय ज्योति बहन आप के लेखन की जितनी तारीफ़ की जाये वह भी कम ही होगी |लाज़बाब लेखन है आप का...
    आज के समाज का आईना दिखाती मूवी है आप ही के शब्दों से पता चला | मैं मूवी न के बराबर देखती हूँ | परन्तु यह समाज में घट रही घटना है |इस मूवी से औरतों में आत्मसमान की भावना उपजेगी,वह घिनौना पन समझ पाएगी |उन लड़कियों को आभास होगा जो उन के साथ हो रहा है वह ग़लत है |औरतों की आत्मा निचोड़ने के लिए सायद यह मूवी बनी हो |समाज का यह पक्ष सामने आना मेरे ख़्याल से जरूरी था |दिखावें का लिबास कब तक हम पहने.....
    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, अनिता दी।

      हटाएं
  6. I have always loved your bold writings on such burning issues. Very nicely and logically penned.

    जवाब देंहटाएं
  7. सटीक उदाहरण दिया आपने ज्योति जी! जंजीर सा डरा विशालकाय हाथी पतली रस्सी से आजीवन बंधा रहता है ...।इसी डर को नियति मान बैठी औरतें सब सामान्य लेकर जीने की आदि हो चुकी बहुत ही सुन्दर लेख...।लाजवाब...।

    जवाब देंहटाएं
  8. हाथी के पसंग के माध्यम से बहुत बडी बात कह दी आपने। कोई भी इंसान उसको मिली परवरिश का आइना होता है। मैंने तो अभी ये फिल्म नहीं देखी, पर इसको देखने वाली महीलाओं का कहना सही है वो सहानुभूति का पात्र है, क्यो कि उसे सही तरबियत सही नहीं मिली। सस्नेह आभार इस सुंदर लेख के लिए।

    जवाब देंहटाएं

नाम

'रेप प्रूफ पैंटी',1,#मीटू अभियान,1,#साड़ीट्विटर,1,15 अगस्त,3,26 जनवरी,1,8 मार्च,1,अंकुरित अनाज,1,अंगदान,1,अंगुठी,1,अंगूर,1,अंगूर की लौंजी,1,अंगूर की सब्जी,1,अंग्रेजी,2,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस,3,अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस,1,अंधविश्वास,10,अंधश्रद्धा,10,अंधश्रध्दा,2,अंश,1,अग्निपरीक्षा,1,अग्रवाल,1,अचार,7,अच्छी पत्नी,1,अच्छी पत्नी चाहिए तो...,1,अच्छे काम,1,अजब-गजब,2,अतित,1,अदरक,1,अदरक का चूर्ण,1,अदरक-लहसुन पेस्ट,1,अनमोल वचन,10,अनुदान,1,अनुप जलोटा,1,अन्न,1,अन्य,23,अन्याय,1,अपेक्षा,1,अप्पे,4,अमरुद,1,अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी,1,अमीरी,1,अमेजन,1,अरुणा शानबाग,1,अरुनाचलम मुरुगनांथम,1,अवार्ड,2,असली हीरो,15,अस्पतालों में बच्चों की मौत,1,आंवला,3,आंवला चटनी,1,आंवला लौंजी,1,आइसक्रीम,1,आईसीयू ग्रेंडपा,1,आग,1,आज के जमाने की अच्छाइयां,1,आजादी,2,आज़ादी,1,आतंकवादी,2,आत्महत्या,3,आत्मा,1,आदित्य तिवारी,1,आम,9,आम का अचार,1,आम का पना,2,आम का मुरब्बा,2,आम की बर्फी,1,आम पापड़,1,आरक्षण,3,आलू,1,आलू पोहा अप्पे,1,इंसान,2,इंस्टंट डोसा,1,इंस्टंट स्नैक्स,1,इंस्टट ढोकला,1,इंस्टेंट कुल्फी,1,इडली,3,इन्डियन टाइम,1,इमली,1,इरोम शर्मिला,1,ईद,1,ईश्वर,6,ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना,1,उटी,1,उपमा,2,उपवास,1,उपवास की इडली,1,उपहार,2,उमा शर्मा,1,ऋषि पंचमी,1,एक सवाल,1,ऐनी दिव्या,1,ऐश ट्रे,1,ऑनलाइन,1,और इज्जत बच गई,1,कंघा,1,कंसन्ट्रेट आम पना,1,कच्चे आम,1,कच्चे आम का चटपटा पापड़,1,कटलेट्स,1,कद्दु,1,कद्दु के गुलगुले,1,कद्दू,1,कद्दू का बेसन,1,कन्यादान,3,कबीर सिंह मूवी,1,करवा चौथ शायरी,1,करवा-चौथ,3,कल्याणी श्रीवास्तव,1,कहानी,17,कांजी,1,कानून,1,कामवाली बाई,4,कालीन,1,किचन टिप्स,14,किटी पार्टी,1,कियारा आडवानी,1,किराए पर बीवियां,1,कुंडली मिलान,1,कुरकुरे,1,कुल्फी,1,कुल्फी प्रीमिक्स,1,कूकर,1,केईएम् अस्पताल,1,कॉर्न,4,कॉर्न इडली,1,कौए,1,क्षमा,2,खजूर,1,खत,5,खबर,3,खरबूजा,2,खरबूजे का शरबत,1,खरेदी,1,खांडवी,1,खाद्य पदार्थ,1,खाना,1,खारक,1,खारी गरम,1,खुले में शौच,1,खुशी,2,खेल,1,गणतंत्र दिवस,1,गणेश चतुर्थी पर शायरी,1,गणेश चतुर्थी प्रसाद रेसिपी,1,गरम मसाला,1,गर्दन दर्द,1,गर्भावस्था,1,गर्भाशय,1,गलत व्यवहार,1,गलती,2,गाजर,4,गाजर अप्पे,1,गाजर के लड्डू,1,गाजर-मूली के दही बडे,1,गाय,1,गुजरात,1,गुजराती डिश,1,गुड टच और बैड टच,2,गुरु पूर्णिमा,1,गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं,1,गुलगुले,1,गुस्सा,1,गृहस्वामिनी,1,गैस बर्नर,1,गोरखपुर,1,गोरा रंग,1,गोल्फ,1,गौरी पराशर,1,घंटी,1,घिया,1,घी,1,घी की नदी,1,चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति,1,चकली,1,चटनी,7,चना दाल,1,चाँद पर जमीन,1,चाय,1,चाय मसाला,1,चावल,2,चावल के पापड़,1,चाशनी,1,चींटी,1,चीज,1,चीला,2,चूर्ण,4,छाछ,1,छींक,1,छोटी बाते,1,छोटे लेकिन काम के टिप्स,2,छोटे-छोटे काम के टिप्स,2,जज्बा,2,जनसंख्या,1,जन्मदिन,3,जन्मदिन की शुभकामनाएं,2,जन्माष्टमी,2,जमाना,1,जलेबी,1,जाट आंदोलन,1,जात-पात,1,जाति,1,जाम,1,जिंदगी,1,जीएसटी,1,जीरो ऑइल रेसिपी,5,जोक्स,5,जोयिता मंडल,1,ज्वार की रोटी,1,ज्वेलरी,1,झारखंड,1,झाले-वारणे,2,झूठ,1,टिप्स कॉर्नर,31,टी.व्ही. और सिनेमा,1,ठंडे पेय,6,ठेचा,1,डर,1,डैंड्रफ,1,डॉक्टर,2,डॉटर्स डे,2,ढाबा स्टाइल सब्जी,1,ढोकले,1,तरबूज,2,तरबूज के छिलके का हलवा,1,तलाक,1,ताजे नारियल की बर्फी,1,तिल,2,तिल की कुरकुरी चिक्की,1,तिल के लड्डू,1,तेलंगाना,1,तोहफ़ा,1,थंडा पानी,1,दक्षिणा,1,दवा,1,दही,5,दही सैंडविच,1,दहेज,3,दाग-धब्बे,1,दान,1,दासी,1,दिपावली बधाई संदेश,3,दिशा,1,दीपावली शुभकामना संदेश,1,दीवाली रेसिपी,1,दुध पावडर,1,दुर्गा माता,1,दुल्हा,1,दुश्मन,1,दूध,2,देशभक्ति,3,देशभक्ति शायरी,2,देहदान,1,दोस्त,2,धनिया,1,धर्म,2,धर्मग्रंध,1,धार्मिक,28,नजर,1,नजर कैसे उतारु,1,नदी में पैसे,1,नन्ही परी,1,नमक पारे,1,नमकीन,1,नवरात्र,1,नवरात्र स्पेशल,2,नवरात्रि,1,नवरात्री रेसिपी,5,नववर्ष,2,नववर्ष की शुभकामनाएं,2,नाइंसाफी,1,नानी,1,नारियल बर्फ़ी,1,नारी,48,नारी अत्याचार,10,नारी शिक्षा,1,नाश्ता,1,निंबु का अचार,1,निचली जाती,1,निर्णयक्षमता,1,निर्भया,2,निवाला,1,नींबू,1,नीडल थ्रेडर,1,नेत्रदान,1,नेपाल त्रासदी,1,नेल आर्ट,1,न्याकिम गैटवेच,1,न्यूजीलैंड,1,पकोडे,2,पक्षी,1,पढ़ा-लिख़ा कौन?,1,पढ़ाई,1,पति,1,पति का अहं,1,पति-पत्नी,1,पत्ता गोभी,2,पत्ता गोभी और चना दाल के बडे,1,पत्ता गोभी की मुठिया,1,पत्नी,1,पत्र,1,पपीता,1,परंपरा,2,परवरिश,6,पराठे,1,परीक्षा,2,परेशानी,1,पल्ली उत्सव,1,पवित्र,1,पवित्रता,2,पसंदीदा शिक्षक को पत्र,1,पानी,1,पानी कैसे पीना चाहिए,1,पापड़,3,पालक,1,पालक के नमक पारे,1,पालक बडी,1,पाश्चात्य संस्कृति,1,पिता,2,पुण्य,2,पुरानी मान्यताएं,1,पुलवामा हमला,1,पूडी,1,पेढे,1,पैड्मैन,1,पैनकेक,1,पैरेंटीग,1,पोर्न मूवी,1,पोषण,1,पोहा,2,पोहे के कुरकुरे,1,प्याज,3,प्याज की चटनी,1,प्यार,1,प्यासा कौआ,1,प्रत्यूषा,1,प्रद्युम्न,1,प्रसन्न,1,प्राणियों से सीख,1,प्री वेडिंग फोटोशूट,1,फर्रुखाबाद,1,फल,1,फल और सब्जी खरीदने से पहले,1,फलाहार,1,फल्लिदाने,1,फादर्स डे,2,फूल गोभी के परांठे,1,फेसबुक,2,फैशन,1,फ्रिज,1,फ्रिज में सब्जी,1,फ्रेंडशीप डे,1,फ्रेंडशीप डे शायरी,1,बकरीद,1,बची हुई सामग्री का उपयोग,1,बच्चे,8,बच्चे की ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर गैंगरेप,1,बेटा,1,बेटा पढाओ,1,बेटी,7,बेटी बचाओ अभियान,2,बेसन,2,बेसन के लड्डू,1,बैंगन,1,बोझ,1,ब्रेकअप,1,ब्रेड,4,ब्रेड की रसमलाई,1,ब्रेड पकोडा,1,ब्रेड पिस्ता पेढे,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,5,ब्ल्यू व्हेल गेम,1,भक्ति,1,भगर,3,भगर की इडली,1,भगर के उत्तपम,1,भगर के कटलेट,1,भगवान,3,भजिए,1,भरवां मिर्च,1,भरवां शिमला मिर्च,1,भाई दूज शायरी,1,भाकरवड़ी,1,भाभी,1,भारत,1,भारतीय नारी,1,भारतीय मसाले,1,भुट्टे के पकोड़े,1,भूकंप,1,भोजन,1,भ्रुण हत्या,1,मंदसौर गैंग रेप,1,मंदिर,2,मंदिरों में ड्रेस कोड़,1,मंदिरों में दक्षिणा,1,मकई,4,मकई उपमा,1,मकई चीला,1,मकई पकोडे,1,मकर संक्रांति,2,मकर संक्रांति की शुभकामनाएं,1,मकर संक्राति,1,मटर,3,मटर के अप्पे,1,मठरी,1,मठ्ठा,1,मदर्स डे,3,मम्मी,1,मलाई,2,मलाई फ्रूट सलाद,1,मसाला छाछ,1,मसाला मठरी,1,महात्मा गांधी जी,1,महानता,1,महाराजा अग्रसेन जी,1,महाराष्ट्र में आरक्षण,1,महिला आजादी,1,महिला आरक्षण,1,महिला सशक्तिकरण,4,महिला सुरक्षा,1,महिलाओं का पहनावा,1,माँ,3,माता यशोदा,1,मातृभाषा,1,मायका,2,मारवाड़ी,1,मार्केट जैसे साबूदाना पापड़,1,माला,1,मावा कुल्फी,1,मासिक धर्म,2,माहवारी,3,मिठाई,18,मित्र,2,मिलावट,1,मिलावट पहचानने के घरेलू तरीके,1,मिस इंडिया 2019,1,मुक्ति,1,मुबारकपुर कला,1,मुरब्बा,1,मुस्लिम मंच,1,मुहूर्त,1,मूंग की सूखी दाल का हलवा,1,मूंगफली,1,मूंगफली की सूखी चटनी,1,मूली,3,मूली का अचार,1,मूली के पत्तों के कुरकुरे कटलेट्स,1,मेंस्ट्रुअल कप,1,मेंहदी,6,मेडिसिन बाबा,1,मेथी,1,मेथी दाना चुर्ण,1,मेथी मटर मलाई,1,मेनु,1,मेरा मंत्र,3,मेरा सपना,1,मेरी बात,15,मैंगो फ्रूटी,1,मैंगो श्रीखंड,1,मैनर्स,1,रंग,1,रंग पंचमी,1,रक्तदान,1,रक्तदान के फायदे,1,रक्षा बंधन,1,रक्षाबंधन,1,रक्षाबंधन शायरी,1,रजस्वला नारी,3,रवा इडली,1,रसोई,102,रांगोली,3,राखी,2,राजभाषा,1,राजस्थानी समाज,2,राम रहीम,1,राशी-भविष्य,1,राष्ट्रगान,1,राष्ट्रगीत,1,राष्ट्रभाषा,1,रिती-रिवाज,1,रीतिरिवाज,1,रुपया-पैसा,1,रेणुका मिश्रा,1,रोटी,2,रोस्टेड मूंगफली,1,लघुकथा,12,लड्डू,2,लहसुन,1,लाइटर,1,लाइफ स्किल्स,1,लाल मिर्च की सूखी चटनी,1,लीव इन रिलेशनशिप,1,लेसुए,1,लैंगिक समानता,1,लॉटरी,1,लोकल ट्रेन,1,लोकसभा चुनाव,1,लोग क्या कहेंगे?,1,लौंजी,1,लौकी,2,लौकी का हलवा,1,लौकी की बड़ी,1,वक्त,1,वटसावित्री व्रत,1,वर,1,वर्जिनिटी टेस्ट,1,वर्तमान,1,वायरल फोटो,1,वारी के हनुमान,1,विधवा,1,विधवा ने किया कन्यादान,1,विधवा विवाह,1,विशाखापट्टनम रेप कांड,1,वृंदावन,1,वृद्धावस्था,1,वेजिटेबल डोसा,1,वेजिटेबल पैनकेक,1,वैलेंटाइन डे,1,वोट,1,वोट की किंमत,1,व्यंग,11,व्यायाम,1,व्रत,2,व्रत रेसिपी,15,व्रत स्पेशल,2,शकरकंद,2,शकरकंद की जलेबी,1,शकरकंद को कैसे भुने,1,शकुन-अपशकुन,1,शक्करपारे,1,शनि देव,1,शब्द,1,शरबत,4,शर्बत,1,शर्म,2,शादी,5,शादी की खरेदी,1,शादी की फ़िजूलखर्ची का बिल,1,शादी के सालगिरह की शुभकामनाएं,1,शादी-ब्याह,3,शायरी,9,शाहिद कपूर,1,शिक्षक दिन,1,शिक्षा,5,शिमला मिर्च,1,शिवपुरी,1,शुभ मुहूर्त,1,शुभ-अशुभ,3,शुभम जगलान,1,श्राद्ध,3,श्राद्ध का खाना,1,श्रीकृष्ण,2,श्रेष्ठता,1,संसद,1,संस्कार,1,संस्मरण,9,सकारात्मक पहल,2,सच बोलने की प्रेरणा,1,सतबीर ढिल्लो,1,सपना,1,सफेद बाल,1,सब्जियों का अचार,1,सब्जियों की कांजी,1,सब्जी,8,समय,1,समाजसेवा,2,समाजिक,1,समाधान,1,समावत चावल,2,सर के बाल,1,सलाद,1,ससुराल,2,सहशिक्षा,1,सांवला या काला रंग,1,साउथ इंडियन डिश,2,साक्षात्कार,3,सागर में ज्वार,1,साफ-सफाई,1,साबुदाना,2,साबुदाना के अप्पे,1,साबुदाना पापड़,2,साबुदाने लड्डू,1,साबूदाना,2,सामाजिक,64,सामाजिक कार्यकर्ता,1,सालगिरह,5,सास,2,साहित्य,82,सिंगल पैरेंट,1,सिंदूर,1,सीख-सुहानी,1,सीनू कुमारी,1,सुंदरता,1,सुई,1,सुखी,1,सुजी,1,सूजी,1,सूजी के लड्डू,1,सेनेटरी नेपकिन,1,सेब,1,सेलिब्रेटी,1,सेव मेरिट सेव नेशन,1,सेवई उपमा,1,सेहत,1,सैंडविच,1,सौंफ,1,सौंफ का शरबत,1,सौंफ प्रीमिक्स,1,सौतेली माता,1,स्कूल,1,स्त्री,2,स्नैक्स,33,स्वतंंत्रता दिन,1,स्वतंत्रता दिन,2,स्वर्ग और नर्क,1,स्वाभिमान,1,स्वास्थ,2,स्वास्थ्य,10,हंस,1,हनुमान जी,2,हरी मटर के पैनकेक,1,हरी मिर्च,3,हरी मिर्च का अचार,1,हलवा,3,हांडवो,1,हाउसवाइफ,1,हाथी,1,हिंदी उखाणे,1,हिंदी उखाने,1,हिंदी दिवस,1,हिंदी शायरी,23,हैंडल,1,हैसियत,1,होटल,1,होममेकर,1,होली की शुभकामनाएं,1,
ltr
item
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: ''कबीर सिंह'' महिला विरोधी होने के बावजूद क्यों महिलाओं को कबीर के किरदार से दिक्कत नहीं हैं?
''कबीर सिंह'' महिला विरोधी होने के बावजूद क्यों महिलाओं को कबीर के किरदार से दिक्कत नहीं हैं?
महिलाओं को ऐसा क्यों लगता हैं कि एक पुरुष का गुस्सैल और आक्रमक होना…महिलाओं का अपमान करना...अपनी पत्नी पर हाथ उठाना...कोई बड़ी बात नहीं हैं? ''कबीर सिंह'' महिला विरोधी होने के बावजूद क्यों महिलाओं को कबीर के किरदार से दिक्कत नहीं हैं?
https://1.bp.blogspot.com/-piaRm8dIrRA/XRwa-F5Te-I/AAAAAAAAMSI/0YUwbwB7Vw8JUdM8tVdEvDwpaM3ZMAw9gCLcBGAs/s320/kabir%2Bsingh.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-piaRm8dIrRA/XRwa-F5Te-I/AAAAAAAAMSI/0YUwbwB7Vw8JUdM8tVdEvDwpaM3ZMAw9gCLcBGAs/s72-c/kabir%2Bsingh.jpg
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
https://www.jyotidehliwal.com/2019/07/kabir-singh-mahila-virodhi-hone-ke-bavajud-kyo-mahilao.html
https://www.jyotidehliwal.com/
https://www.jyotidehliwal.com/
https://www.jyotidehliwal.com/2019/07/kabir-singh-mahila-virodhi-hone-ke-bavajud-kyo-mahilao.html
true
7544976612941800155
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy