मंदसौर गैंग रेप के आरोपियों को फांसी की सजा नहीं होनी चाहिए...!!!

दोस्तों, शिर्षक पढ़ कर शायद आपको लग रहा होगा कि शायद मेरे लिखने में कहीं गलती हो गई हैं! नहीं, मैंने बिल्कुल सही लिखा हैं कि मंदसौर गैंग रेप के आरोपियों को फांसी की सजा नहीं होनी चाहिए! क्योंकि...

मंदसौर गैंग रेप के आरोपियों को फांसी की सजा नहीं होनी चाहिए...!!!
दोस्तों, शीर्षक पढ़ कर शायद आपको लग रहा होगा कि शायद मेरे लिखने में कहीं गलती हो गई हैं! नहीं, मैंने बिल्कुल सही लिखा हैं कि मंदसौर गैंग रेप के आरोपियों को फाँसी की सजा नहीं होनी चाहिए! सोचिए, क्या इन लोगों की हैवानियत के लिए सिर्फ़ फाँसी की सजा काफ़ी होगी? फाँसी से तो उनकी तकलीफों का दो मिनट में ही अंत हो जाएगा! समाज में रह कर एक बलात्कार पीड़िता कैसे तिल-तिल मर कर...अपमान के जहर रुपी घूंट पी-पी कर जीती हैं...उसे कितने और कैसे-कैसे व्यंग्य बाणों का निशाना बनना पड़ता हैं... इस बात का अंदाजा आरोपियों को कैसे होगा? आखिर उन्हें भी तो पता चले कि समाज की अवहेलना क्या होती हैं? अपमान क्या होता हैं? मर-मर कर जीना क्या होता हैं? सहीं कह रहीं हूं न?

मंदसौर गैंग रेप के आरोपियों को पहली सजा ये दी जानी चाहिए कि उन्हें रसायनों द्वारा नपुंसक बनाया जाएं जिसे केमिकल कैस्ट्रेशन कहा जाता हैं। रुस और उत्तर कोरिया में तो बलात्कार के मामलों में केमिकल कैस्ट्रेशन की सजा ही दी जाती हैं। सवाल यह हैं कि जब हत्या के मामले में फाँसी की सजा से लोग नहीं डरते तो केमिकल कैस्ट्रेशन क्या डरेंगे! बात कुछ हद तक सही भी हैं। हमारे यहां आरोपियों को कानून का डर हैं ही नहीं क्योंकि हमारे यहां आरोपियों पर ज़ुल्म साबित करना ही टेढ़ी खीर हैं। कानून को सबूत चाहिए होता हैं और कोई भी बलात्कारी किसी के सामने तो बलात्कार नहीं करेगा न! इसलिए होता यह हैं कि सनी देओल के ‘दामिनी’ फिल्म के मशहूर डायलॉग की तरह सिर्फ़ तारीख पर तारीख... तारीख पर तारीख... तारीख पर तारीख मिलती जाती हैं। मंदसौर गैंग रेप के मामले एक अच्छी बात यह हैं कि आरोपी पकड़े गए हैं। लेकिन क्या इससे उस मासूम बच्ची की पीड़ा कम होगी? बलात्कार के ज्यादातर मामलों में सर्वप्रथम यहीं कहा जाता हैं कि उसने छोटे कपड़े पहन रखे थे…वो रात को अकेली बाहर निकली थी...लेकिन ये बच्ची तो स्कूल ड्रेस में थी। शाम को 5 बजे स्कूल गेट पर अपने परिजनों का इंतजार कर रहीं थी...फ़िर इस बच्ची के साथ गैंग रेप क्यों हुआ? अभी तो वो इतनी छोटी हैं कि बेचारी को बलात्कार शब्द भी मालूम नहीं होगा! लेकिन जब वो बड़ी होगी तब क्या वो समाज की घूरती निगाहों को सहन कर पायेंगी? उसके साथ हुए इस दर्दनाक हादसे को वो ताउम्र भूल पायेंगी? उसके चेहरे पर अब तक जो मासूम हंसी रहती होगी, क्या वो वैसी खुल कर कभी हंस पायेंगी? क्योंकि हमारे समाज में बलात्कार पीड़िता का जीना हराम कर दिया जाता हैं। इन्हीं सब बातों को ख्याल में रख कर मुझे ऐसा लगता हैं कि मंदसौर गैंग रेप के आरोपियों को ऐसी सजा मिले कि वो भी समाज के बीच रह कर बलात्कार पीड़िता से भी ज्यादा अपमान झेले! आरोपियों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएं। यदि वो कॉलेज में पढ़ रहे होंगे, तो उनको कॉलेज से निष्काशित किया जाएं और दूसरी कोई भी कॉलेज उन्हें अपने यहां admission न दे। यदि वो नौकरी कर रहे होंगे तो, उन्हें नौकरी से निकाला जाएं और कोई भी उन्हें नौकरी पर न रखें। यदि वो दुकानदारी कर रहे होंगे, तो कोई भी उनकी दुकान से सामान न ख़रीदे! समाज में कोई भी उनसे बात न करें। समाज की अवहेलना क्या होती हैं उन्हें पता चले! जब हमारा समाज इस तरह की सजा पुराने जमाने की सजा देना शुरु करेगा तब यकीनन बलात्कारियों की रुह कांप जायेंगी।

आज हमारे देश में हर घटना को धर्म के आईने में तोला जाता हैं। इस घटना को भी उसी आईने से तोला जा रहा हैं। लेकिन क्या सामान्य कैटेगरी की लड़कियाँ/महिलाओं को दलित या मुस्लिम समाज की लड़कियाँ/महिलाओं की तुलना में बलात्कार का दर्द कम होता हैं? ये बात हम कब समझेंगे कि इंसान का धर्म कोई भी हो... दर्द एक सा ही होता!!

मंदसौर गैंग रेप की घटना
मध्यप्रदेश के मंदसौर में 26 जून 2018 को 7 साल की बच्ची को अगवा कर उसका गैंग रेप किया गया। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली यह बच्ची शाम पांच बजे स्कूल छूटने के बाद गेट पर अपनी दादी का इंतजार कर रही थी। उसकी दादी को आने में थोड़ी देर हो गई। इतने में एक व्यक्ति उसके पास आया और उसे टॉफी या लड्डू कुछ दिया। मैं तुम्हें और मिठाई देता हूं ऐसा लालच देकर उसे अपने साथ जंगल में ले गया। वहां पर उसका एक साथी पहले से ही मौजूद था। उन्होंने बच्ची के गर्दन पर धारदार हथियार रख कर उसके साथ दो घंटे तक बलात्कार किया। यहीं नहीं, उन्होंने गैंग रेप के बाद काफ़ी देर तक उन वस्तुओं की तलाश की जिससे उसके प्रायवेट पार्ट्स को नुकसान पहुंचाया जा सके! उन्होंने उसके शरीर पर कई वार भी किए। गर्दन काटने के बाद वे लोग शराब पी रहे थे, जबकि बच्ची का खून बह रहा था। उसे उसी हालात में छोड़ कर वे भाग गए। रात भर बच्ची वहीं पर दर्द से तडपती हुई पड़ी रहीं। दूसरे दिन सुबह 10 बजे ग्रामिणों ने उसे देखा तब उसे अस्पताल पहुंचाया गया। फिलहाल बच्ची इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती हैं। बच्ची के गर्दन, हाथ और पैरों पर कई ज़ख्म हैं और पूरे शरीर पर पट्टियां बंधी हुई हैं। डॉक्टर भी बच्ची की हालत देख कर कांप गए। बच्ची की आंत और नाजुक अंग भीतर से अलग हो गए हैं। डॉक्टरों ने बताया हैं कि बच्ची के जख़्मी अंगों का ऑपरेशन किया जा चुका हैं। घाव भरने में अभी दो हफ्तों का समय लग सकता हैं। बच्ची दर्द से इतनी तड़प रहीं हैं कि अपनी माँ से कह रही हैं, ‘’माँ, क्या तो मुझे ठीक कर दो या मुझे मार दो!!” सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी इरफान की पहचान कर ली गई हैं। उसी ने दूसरे आरोपी आसिफ़ के बारे में बताया। इन लोगों ने गैंग रेप की पूरी प्लानिंग की थी! उन्होंने मासूम बच्ची को इसलिए ही चुना ताकि वो विरोध न कर सके!

अब आप ही बताइयें, ऐसी दरिंदगी के लिए क्या सिर्फ़ फाँसी की सजा काफ़ी होगी? फांसी से तो आरोपियों को थोड़ी देर में ही तकलीफ़ों से मुक्ति मिल जाएगी। जिंदा रह कर तकलिफों को कैसे सहन करना पड़ता हैं… समाज के व्यंगबाणों को कैसे सहा जाता हैं? बलात्कारियों को भी तो इस बात का पता चले...तब ही शायद ऐसी वारदातों पर कुछ लगाम लग पाएगा। क्योंकि हत्या के लिए फाँसी की सजा होने के बाद भी लोगों के मन में कानून का डर नहीं हैं। शायद समाज की अवेहलना और समाज के व्यंगबाणों से ये लोग डरे!!!

इमेज- गूगल से साभार

Keywords: rape, samuhik balatkar ,Mandsaur gang rape, women

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'रेप प्रूफ पैंटी' 15 अगस्त 8 मार्च अंकुरित अनाज अंगदान अंगुठी अंग्रेजी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस अंधविश्वास अंधश्रद्धा अंधश्रध्दा अंश अग्रवाल अचार अच्छी पत्नी चाहिए तो... अच्छे काम अजब-गजब अतित अनमोल वचन अनुदान अनुप जलोटा अन्न अन्य अन्याय अपेक्षा अप्पे अमरुद अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी अमीरी अमेजन अरुणा शानबाग अरुनाचलम मुरुगनांथम अवार्ड असली हीरो अस्पतालों में बच्चों की मौत आंवला आंवला लौंजी आइसक्रीम आईसीयू ग्रेंडपा आज के जमाने की अच्छाइयां आजादी आज़ादी आतंकवादी आत्महत्या आत्मा आदित्य तिवारी आम आम का अचार आम का पना आम का मुरब्बा आम की बर्फी आम पापड़ आरक्षण आलू इंसान इंस्टंट डोसा इंस्टंट स्नैक्स इंस्टट ढोकला इडली इन्डियन टाइम इमली इरोम शर्मिला ईद ईश्वर ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना उटी उपमा उपवास उपहार उमा शर्मा ऋषि पंचमी एक सवाल ऐनी दिव्या ऐश ट्रे ऑनलाइन कंघा कच्चे आम कच्चे आम का चटपटा पापड़ कद्दु कद्दु के गुलगुले कन्यादान करवा-चौथ कल्याणी श्रीवास्तव कहानी कांजी कानून कामवाली बाई कालीन किचन टिप्स किटी पार्टी किराए पर बीवियां कुंडली मिलान कुरकुरे कूकर केईएम् अस्पताल कॉर्न कॉर्न इडली कौए क्षमा खजूर खत खबर खरबूजा खांडवी खाद्य पदार्थ खाना खारक खारी गरम खुले में शौच खुशी खेल गणेश चतुर्थी पर शायरी गणेश चतुर्थी प्रसाद रेसिपी गरम मसाला गर्दन दर्द गर्भाशय गलत व्यवहार गलती गाजर गाजर के लड्डू गाजर-मूली के दही बडे गाय गुजरात गुड टच और बैड टच गुलगुले गुस्सा गृहस्वामिनी गोरखपुर गोल्फ गौरी पराशर घंटी घिया घी घी की नदी चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति चकली चटनी चाय चाय मसाला चावल चावल के पापड़ चाशनी चीज चीला चूर्ण छोटी बाते छोटे लेकिन काम के टिप्स छोटे-छोटे काम के टिप्स जज्बा जनसंख्या जन्मदिन जन्मदिन की शुभकामनाएं जन्माष्टमी जमाना जाट आंदोलन जात-पात जाम जिंदगी जीएसटी जीरो ऑइल रेसिपी जोक्स जोयिता मंडल ज्वेलरी झारखंड झाले-वारणे झूठ टिप्स कॉर्नर टी.व्ही. और सिनेमा ठंडे पेय ठेचा डॉक्टर डॉटर्स डे ढोकले तरबूज ताजे नारियल की बर्फी तिल के लड्डू तेलंगाना थंडा पानी दक्षिणा दवा दही दहेज दासी दिपावली बधाई संदेश दिशा दीपावली शुभकामना संदेश दुध पावडर दुल्हा दुश्मन दूध देशभक्ति देहदान दोस्त धनिया धर्म धर्मग्रंध धार्मिक नदी में पैसे नन्ही परी नवरात्र स्पेशल नवरात्री रेसिपी नववर्ष नववर्ष की शुभकामनाएं नाइंसाफी नानी नारी नारी अत्याचार नारी शिक्षा नाश्ता निंबु का अचार निचली जाती निर्णयक्षमता निर्भया निवाला नींबू नेत्रदान नेपाल त्रासदी नेल आर्ट पकोडे पक्षी पढ़ा-लिख़ा कौन? 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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: मंदसौर गैंग रेप के आरोपियों को फांसी की सजा नहीं होनी चाहिए...!!!
मंदसौर गैंग रेप के आरोपियों को फांसी की सजा नहीं होनी चाहिए...!!!
दोस्तों, शिर्षक पढ़ कर शायद आपको लग रहा होगा कि शायद मेरे लिखने में कहीं गलती हो गई हैं! नहीं, मैंने बिल्कुल सही लिखा हैं कि मंदसौर गैंग रेप के आरोपियों को फांसी की सजा नहीं होनी चाहिए! क्योंकि...
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
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