लघुकथा- परवरिश

शिल्पा की बेटी दिपाली ने ऐसा क्या किया कि घर के सभी लोग उसकी परवरिश पर सवाल उठाने लगे? लेकिन असलियत पता चलते ही सब चूप क्यों हो गए?

लघुकथा- परवरिश
''शिल्पा, ओ शिल्पा...शिल्पा, ओ शिल्पा...'' पडौसी ताईजी की गुस्से वाली आवाज सुन कर मैं हैरान हो गई। क्योंकि ताईजी को आज तक किसी ने भी गुस्से में नहीं देखा था। वे बहुत ही मृदुभाषी, विनम्र और मोहल्ले में सबसे मिल-जूल कर रहनेवाली बुजुर्ग महिला थी। उनकी तेज आवाज से मेरे सास-ससुर जी और नणंद सभी ड्राइंगरुम में आ गए। आज रविवार होने से पतिदेव उपर अपने कमरे में क्रिकेट देख रहे थे। ताईजी की आवाज इतनी तेज और गुस्से वाली थी कि जो पतिदेव चाहे कुछ भी हो जाएं क्रिकेट मैच देखते-देखते टस से मस नहीं होते थे, वे भी नीचे आ गए। मैं भी किचन में से बाहर आ गई। मुझे देखते ही ताईजी ने गुस्से से पुछा, ''दिपाली कहां हैं? कहां हैं दिपाली?''
''वो तो बाहर खेलने गई हैं। क्यों, क्या हुआ ताईजी?''
''क्या हुआ? अरे तुम्हें पता नहीं कि क्या किया तुम्हारी बेटी ने!'' मैं किसी अनहोनी की आशंका से डर गई। ससुरजी, सासुजी आदी सभी पुछने लगे कि क्या हुआ?
''अरे बच्चों को सर पर बैठाना चाहिए...लेकिन इतना भी नहीं कि वे अपनों से बडों से, 60 साल के बुजुर्ग से ऐसी मस्ती करे!''
पतिदेव ने पुछा, ''लेकिन ताईजी ये तो बताइए कि दिपाली ने आखिर किया क्या हैं?''
''क्या बताऊं बेटा, दिपाली ने इनकी (उनके पतिदेव) आँखों में न जाने क्या फेंक दिया ...इनकी आँखें बहुत जलन कर रही हैं...इन्होंने ठंड़े-ठंड़े पानी से आँखें दो-चार बार धो ली...लेकिन जलन कम नहीं हो रही! थोड़ी देर ओर देखते हैं, नहीं तो दिपक उनको डॉक्टर के पास लेकर जाएगा।''

सासुजी को तो बस मौका ही चाहिए था मुझ पर ताने कसने का! वो तो ऐसे शुरु हो गई जैसे ताऊजी की आँखों में मैं ने ही कुछ डाला हैं या मैं ने दिपाली से ऐसा करने कहा हैं!
''हमारे भी इतने बच्चे हुए...लेकिन मजाल हैं किसी ने भी बड़े-बुजुर्गों के साथ ऐसी बदतमीजी की हो! आखिर ये अपनी-अपनी परवरिश का नतीजा हैं। ये आजकल की बहुओं को अपने खुद के सजने-संवरने और घुमने-फिरने से फुरसत मिले तब तो ये बच्चों के तरफ ध्यान दे ना!''
माँ को बोलते देख पतिदेव कहाँ चूपचूप रहने वाले थे? वे भी बोलने लगे, ''मैं तो दिन भर ऑफिस में रहता हूं। अब ये तो शिल्पा का काम हैं न कि वो बच्चों को अच्छी परवरिश दे। मैं कुछ बोलता हूं तो इसका मुंह बन जाता हैं। इसलिए मैं तो अब घर में कुछ बोलता ही नहीं। लेकिन इसका ये मतलब नहीं हैं न कि शिल्पा बच्चों को इतना बिगाड़ दे कि वे पडौसियों को परेशान करने लगे। नाम तो मेरा ही ख़राब होगा न!''
ससुरजी ने कहा, ''आज तक हमारे घर के बच्चों की किसी ने भी शिकायत नहीं की।'' सासुजी ने कहा, ''हमारे तो आठ-आठ बच्चे थे। इनसे सिर्फ़ दो बच्चे भी संभाले नहीं जाते। अब बस ये ही दिन देखना बाकि रह गए थे!''

मैं सब चुपचाप गर्दन नीची कर सुन रही थी। और क्या करती? आखिर गलती तो मेरी बेटी ने ही की थी न! जब बच्चे कोई भी गलती करते हैं तो उसमें बच्चों से ज्यादा कसुरवार माँ को ही ठहराया जाता हैं। और बच्चे जब अच्छा काम करते हैं तो ये यह उनके खानदान के खून का असर रहता हैं। दिपाली अभी चौथी कक्षा में हैं। उसने कभी किसी के साथ बदतमीजी नहीं की। घर-बाहर सभी का कहना वो मानती हैं। घर के छोटे-छोटे कामों में हाथ भी बटाती हैं। छोटे भाई का ख्याल रखती हैं। हर साल सिर्फ़ खुद की कक्षा में ही नहीं तो पूरे स्कूल में अव्वल आती हैं। स्कूल में विभिन्न प्रतियोगिता में, मोहल्ले के गणेशोत्सव आदि में भी हर बार इनाम जीतती हैं। तब कभी भी घर के लोगों ने दिपाली की अच्छे से परवरिश करने के लिए मेरी तारीफ़ नहीं की और आज बिना यह जाने कि दिपाली ने ऐसा क्यों किया मेरी परवरिश पर ही सवाल खड़े कर दिए? मुझे मन ही मन दिपाली पर बहुत गुस्सा आ रहा था। कितना ज्यादा वक्त देती हूं मैं अपने बच्चों को...उन्हें हर बात बहुत प्यार से समझाने की कोशिश करती हूं...उसका ये नतीजा? आने दो उसे...आज तक कभी दोनों बच्चों पर हाथ नहीं उठाया मैं ने...लेकिन लगता हैं कि लातों के भुत बातों से नहीं मानेंगे! बस आने दो उसे...

इतने में दिपाली को आते देख ताईजी बोलने लगे, ''लो आ गई महारानी। पुछो अपनी लाडली से... क्या फेंका उसने बाबुजी की आंखों में और क्यों फेंका? मासुम तो इतनी बन रही हैं जैसे इसने कुछ किया ही नहीं!''

दिपाली के चेहरे से बिल्कुल ऐसा नहीं लग रहा था कि उसने कोई गलती की हैं। वो मेरे पास आकर कहने लगी, ''मम्मी, कल आपने मुझे समझाया था न कि गुड टच और बैड टच क्या होता हैं। दादाजी कई बार मुझे टच करते थे तो मुझे अच्छा नहीं लगता था। लेकिन ऐसे में मैं क्या करूं मुझे समझ में नहीं आता था। आपके समझाने पर मेरी समझ में आया कि ये बैड टच हैं और इसे हमें रोकना चहिए। आपने मुझे मिर्च स्प्रे दिया था और कहा था कि यदि कोई तुमको बार-बार बैड टच करे, मना करने पर भी नहीं माने तो यह मिर्च स्प्रे उसकी आंखों में डाल देना। आज तो दादाजी ने मुझे अकेली देख कर जोर से पकड़ लिया था। इसलिए मैं ने वो मिर्च स्प्रे दादाजी की आंखों में डाल दिया!!!''

Keywords: short story, good touch and bad touch, upbringing, child abuse, children

COMMENTS

BLOGGER: 20
  1. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 13/11/2018
    को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

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    1. मेरी रचना को 'पांच लिंकों का आनंद' में शमिल कार्ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, कुलदिप जी!

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  2. समाज की सड़न को उधेड़ के रखती रचना I
    ज़बरदस्त कथा !

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  3. अच्छा किया जो सप्रे का इस्तेमाल किया ... ज़रूरी है ऐसे सनक सिखाना इन बुज़ुर्गों को ....
    अच्छी सूझ भरी कहानी ...

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  4. Great concept.....Jyoti i really liked it very much. Such articles/stories are really need of the day.

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  5. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (13-11-2018) को "छठ माँ का उद्घोष" (चर्चा अंक-3154) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    उत्तर
    1. मेरी रचना को "चर्चा मंच"में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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  6. समाज को सही दिशा दिखाती बहुत अच्छी कहानी ज्योति जी , जरूरी है हर बच्चे को ये ज्ञान हो और वो ऐसे बुजुर्गों को सबक सिखा सके |

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  7. Wah didi very nice aur Baccho n Maao ke padhne ke liye

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  8. समाज को सही दिशा दिखाती ,एक बहुत ही खूबसूरत कहानी लिखी है अपने ज्योति ।

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  9. गुड टच और बैड टच के बारे में सुन्दर सीख देती बहुत ही लाजवाब कहानी....आज के समाज में यही परवरिश हर माँ को देनी चाहिए अपनी बेटी को...सही समझ रखते हुए बेहिचक आवाज उठाने की हिम्मत हो चाहे अपराधी अपना ही क्यों न हो...।

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    1. सही कहा सुधा दी कि सही समझ रखते हुए बेहिचक आवाज उठाने की हिम्मत हो चाहे अपराधी अपना ही क्यों न हो...। तभी हमारे बच्चे सुरक्षित रह पाएंगे।

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  10. बहुत अच्छा विचार।
    एक सार्थक रचना।आज समाज को इसी तरह से कदम उठाकर ठीक करना होगा।और बच्चों को ऐसी स्थिती के लिए भी आगाह करने की जरूरत हैं।
    आभार

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  11. Awesome presentation, holding my breath i was waiting to how it will be finished and at the end i as surprised with the twist..
    Very nicely written.

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  12. आवरण में लपटी गंदगी का खुलासा करती बहुत बहुत प्रेरणादायी कहानी प्रिय ज्योति,सच बच्चियों में सजगता भरनी जरूरी है।
    अप्रतिम कथा के लिये साधुवाद ।

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  13. जी बिलकुल सटीक स्टोरी हैं.. बड़ो को भी उनके संस्कारो का ध्यान रखना चाहिए

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  14. समाज की घिनौनी तस्वीर,माँ को अपनी बेटियों को गुड टच बेड टच के बारे में जानकारी देना रिश्तों को बदनाम करने वालों से बचा सकती है।बहुत सुंदर शिक्षाप्रद कहानी

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  15. बहुत अच्छा लेख सखी
    सादर

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नाम

'रेप प्रूफ पैंटी',1,#मीटू अभियान,1,15 अगस्त,3,26 जनवरी,1,8 मार्च,1,अंकुरित अनाज,1,अंगदान,1,अंगुठी,1,अंग्रेजी,2,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस,3,अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस,1,अंधविश्वास,10,अंधश्रद्धा,8,अंधश्रध्दा,2,अंश,1,अग्निपरीक्षा,1,अग्रवाल,1,अचार,6,अच्छी पत्नी,1,अच्छी पत्नी चाहिए तो...,1,अच्छे काम,1,अजब-गजब,2,अतित,1,अदरक,1,अदरक का चूर्ण,1,अदरक-लहसुन पेस्ट,1,अनमोल वचन,10,अनुदान,1,अनुप जलोटा,1,अन्न,1,अन्य,23,अन्याय,1,अपेक्षा,1,अप्पे,4,अमरुद,1,अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी,1,अमीरी,1,अमेजन,1,अरुणा शानबाग,1,अरुनाचलम मुरुगनांथम,1,अवार्ड,2,असली हीरो,12,अस्पतालों में बच्चों की मौत,1,आंवला,3,आंवला चटनी,1,आंवला लौंजी,1,आइसक्रीम,1,आईसीयू ग्रेंडपा,1,आज के जमाने की अच्छाइयां,1,आजादी,2,आज़ादी,1,आतंकवादी,2,आत्महत्या,2,आत्मा,1,आदित्य तिवारी,1,आम,6,आम का अचार,1,आम का पना,1,आम का मुरब्बा,1,आम की बर्फी,1,आम पापड़,1,आरक्षण,1,आलू,1,आलू पोहा अप्पे,1,इंसान,2,इंस्टंट डोसा,1,इंस्टंट स्नैक्स,1,इंस्टट ढोकला,1,इंस्टेंट कुल्फी,1,इडली,3,इन्डियन टाइम,1,इमली,1,इरोम शर्मिला,1,ईद,1,ईश्वर,6,ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना,1,उटी,1,उपमा,1,उपवास,1,उपवास की इडली,1,उपहार,2,उमा शर्मा,1,ऋषि पंचमी,1,एक सवाल,1,ऐनी दिव्या,1,ऐश ट्रे,1,ऑनलाइन,1,और इज्जत बच गई,1,कंघा,1,कच्चे आम,1,कच्चे आम का चटपटा पापड़,1,कटलेट्स,1,कद्दु,1,कद्दु के गुलगुले,1,कन्यादान,3,करवा चौथ शायरी,1,करवा-चौथ,3,कल्याणी श्रीवास्तव,1,कहानी,14,कांजी,1,कानून,1,कामवाली बाई,4,कालीन,1,किचन टिप्स,13,किटी पार्टी,1,किराए पर बीवियां,1,कुंडली मिलान,1,कुरकुरे,1,कुल्फी,1,कुल्फी प्रीमिक्स,1,कूकर,1,केईएम् अस्पताल,1,कॉर्न,4,कॉर्न इडली,1,कौए,1,क्षमा,2,खजूर,1,खत,3,खबर,3,खरबूजा,1,खांडवी,1,खाद्य पदार्थ,1,खाना,1,खारक,1,खारी गरम,1,खुले में शौच,1,खुशी,2,खेल,1,गणतंत्र दिवस,1,गणेश चतुर्थी पर शायरी,1,गणेश चतुर्थी प्रसाद रेसिपी,1,गरम मसाला,1,गर्दन दर्द,1,गर्भाशय,1,गलत व्यवहार,1,गलती,2,गाजर,4,गाजर अप्पे,1,गाजर के लड्डू,1,गाजर-मूली के दही बडे,1,गाय,1,गुजरात,1,गुड टच और बैड टच,2,गुलगुले,1,गुस्सा,1,गृहस्वामिनी,1,गोरखपुर,1,गोल्फ,1,गौरी पराशर,1,घंटी,1,घिया,1,घी,1,घी की नदी,1,चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति,1,चकली,1,चटनी,7,चाँद पर जमीन,1,चाय,1,चाय मसाला,1,चावल,2,चावल के 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संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर गैंगरेप,1,बेटा,1,बेटा पढाओ,1,बेटी,6,बेटी बचाओ अभियान,2,बेसन,2,बैंगन,1,ब्रेकअप,1,ब्रेड,4,ब्रेड की रसमलाई,1,ब्रेड पकोडा,1,ब्रेड पिस्ता पेढे,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,5,ब्ल्यू व्हेल गेम,1,भक्ति,1,भगर,3,भगर की इडली,1,भगर के उत्तपम,1,भगर के कटलेट,1,भगवान,3,भजिए,1,भरवां मिर्च,1,भाई दूज शायरी,1,भाकरवड़ी,1,भाभी,1,भारत,1,भारतीय मसाले,1,भुट्टे के पकोड़े,1,भूकंप,1,भोजन,1,भ्रुण हत्या,1,मंदसौर गैंग रेप,1,मंदिर,2,मंदिरों में ड्रेस कोड़,1,मंदिरों में दक्षिणा,1,मकई,4,मकई उपमा,1,मकई चीला,1,मकई पकोडे,1,मकर संक्रांति,2,मकर संक्रांति की शुभकामनाएं,1,मकर संक्राति,1,मटर,3,मटर के अप्पे,1,मदर्स डे,3,मम्मी,1,मलाई,2,मलाई फ्रूट सलाद,1,महानता,1,महाराजा अग्रसेन जी,1,महिला आजादी,1,महिला आरक्षण,1,महिला सशक्तिकरण,4,महिला सुरक्षा,1,महिलाओं का पहनावा,1,माँ,3,माता यशोदा,1,मातृभाषा,1,मायका,2,मारवाड़ी,1,मार्केट जैसे साबूदाना पापड़,1,माला,1,मावा कुल्फी,1,मासिक धर्म,2,माहवारी,3,मिठाई,17,मित्र,2,मिलावट,1,मिलावट पहचानने के घरेलू तरीके,1,मुक्ति,1,मुबारकपुर कला,1,मुस्लिम मंच,1,मुहूर्त,1,मूंग की सूखी दाल का हलवा,1,मूंगफली,1,मूंगफली की सूखी चटनी,1,मूली,3,मूली का अचार,1,मूली के पत्तों के कुरकुरे कटलेट्स,1,मेंस्ट्रुअल कप,1,मेंहदी,6,मेडिसिन बाबा,1,मेथी,1,मेथी दाना चुर्ण,1,मेथी मटर मलाई,1,मेनु,1,मेरा मंत्र,3,मेरी बात,15,मैंगो श्रीखंड,1,मैनर्स,1,रंग,1,रंग पंचमी,1,रक्तदान,1,रक्तदान के फायदे,1,रक्षाबंधन,1,रक्षाबंधन शायरी,1,रजस्वला नारी,3,रवा इडली,1,रसोई,90,रांगोली,3,राखी,1,राजभाषा,1,राजस्थानी समाज,2,राम रहीम,1,राशी-भविष्य,1,राष्ट्रगान,1,राष्ट्रगीत,1,राष्ट्रभाषा,1,रिती-रिवाज,1,रीतिरिवाज,1,रुपया-पैसा,1,रोटी,2,रोस्टेड मूंगफली,1,लघुकथा,9,लड्डू,2,लहसुन,1,लाइटर,1,लाल मिर्च की सूखी चटनी,1,लीव इन रिलेशनशिप,1,लेसुए,1,लॉटरी,1,लोकल ट्रेन,1,लोग क्या कहेंगे?,1,लौकी,2,लौकी का हलवा,1,लौकी की बड़ी,1,वक्त,1,वटसावित्री व्रत,1,वर,1,वर्जिनिटी टेस्ट,1,वर्तमान,1,वारी के हनुमान,1,विधवा,1,विधवा ने किया कन्यादान,1,विधवा विवाह,1,विशाखापट्टनम रेप कांड,1,वृंदावन,1,वृद्धावस्था,1,वेजिटेबल डोसा,1,वेजिटेबल पैनकेक,1,वैलेंटाइन डे,1,व्यंग,11,व्यायाम,1,व्रत,2,व्रत रेसिपी,15,व्रत स्पेशल,2,शकरकंद,1,शकरकंद की जलेबी,1,शकुन-अपशकुन,1,शक्करपारे,1,शनि देव,1,शब्द,1,शरबत,1,शर्बत,1,शर्म,2,शादी,5,शादी की खरेदी,1,शादी की फ़िजूलखर्ची का बिल,1,शादी के सालगिरह की शुभकामनाएं,1,शादी-ब्याह,3,शायरी,9,शिक्षक दिन,1,शिक्षा,4,शिवपुरी,1,शुभ मुहूर्त,1,शुभ-अशुभ,3,शुभम जगलान,1,श्राद्ध,3,श्राद्ध का खाना,1,श्रीकृष्ण,2,श्रेष्ठता,1,संस्कार,1,संस्मरण,9,सकारात्मक पहल,2,सच बोलने की प्रेरणा,1,सतबीर ढिल्लो,1,सपना,1,सफेद बाल,1,सब्जियों का अचार,1,सब्जियों की कांजी,1,सब्जी,2,समय,1,समाजसेवा,2,समाजिक,1,समाधान,1,समावत चावल,2,सर के बाल,1,सलाद,1,ससुराल,2,सहशिक्षा,1,सांवला या काला रंग,1,साउथ इंडियन डिश,2,साक्षात्कार,3,सागर में ज्वार,1,साफ-सफाई,1,साबुदाना,2,साबुदाना के अप्पे,1,साबुदाना पापड़,2,साबुदाने लड्डू,1,साबूदाना,2,सामाजिक,58,सामाजिक कार्यकर्ता,1,सालगिरह,5,सास,2,साहित्य,77,सिंगल पैरेंट,1,सिंदूर,1,सीख-सुहानी,1,सीनू कुमारी,1,सुखी,1,सुजी,1,सूजी,1,सूजी के लड्डू,1,सेनेटरी नेपकिन,1,सेब,1,सेलिब्रेटी,1,सेवई उपमा,1,सेहत,1,सैंडविच,1,सौंफ,1,सौंफ का शरबत,1,सौंफ प्रीमिक्स,1,सौतेली माता,1,स्कूल,1,स्त्री,2,स्नैक्स,30,स्वतंंत्रता दिन,1,स्वतंत्रता दिन,2,स्वर्ग और नर्क,1,स्वाभिमान,1,स्वास्थ,2,स्वास्थ्य,9,हंस,1,हनुमान जी,2,हरी मटर के पैनकेक,1,हरी मिर्च,3,हरी मिर्च का अचार,1,हलवा,2,हाउसवाइफ,1,हाथी,1,हिंदी उखाणे,1,हिंदी उखाने,1,हिंदी दिवस,1,हिंदी शायरी,22,हैंडल,1,होटल,1,होममेकर,1,होली की शुभकामनाएं,1,
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: लघुकथा- परवरिश
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शिल्पा की बेटी दिपाली ने ऐसा क्या किया कि घर के सभी लोग उसकी परवरिश पर सवाल उठाने लगे? लेकिन असलियत पता चलते ही सब चूप क्यों हो गए?
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