प्री वेडिंग फोटोशूट: समाज को लगी एक घातक बीमारी

कैसे लगी समाज को प्री वेडिंग फोटोशूट की घातक बीमारी? ये बीमारी हमारे समाज में तेजी से क्यों फैल रही हैं और इससे समाज पर क्या दुष्परिणाम हो रहे हैं?

प्री वेडिंग फोटोशूट: समाज को लगी एक घातक बीमारी
हमारे समाज को प्री वेडिंग फोटोशूट  (pre wedding photoshoot) की घातक बीमारी लगी तो पिछले एक-दो सालों से ही हैं किंतु ये समाज में बहुत तेजी से फैल रही हैं। प्री वेडिंग फोटोशूट की शुरवात होने का कारण बड़ा ही रोचक हैं। जैसे इंटेरियर डेकोरेशन वाले अपना importance साबित करने के लिए, कुछ नई डिझाइन बताने के लिए हमारे घर के छोटे से हॉल में इतने लाइट्स लगवाते हैं कि उतने लाइट्स की हमें आवश्यकता ही नहीं रहती। ठीक वैसे ही अपना importance साबित करने के लिए इवेंट मैंनेजमेंट वालों ने मालदार पार्टियों को कुछ नया इवेंट बताने के लिए प्री वेडिंग फोटोशूट की शुरवात करवाई। जैसे हमारे घर के छोटे से हॉल में इतने सारे लाइट्स की आवश्यकता ही नहीं रहती ठीक वैसे ही शादी जैसे पवित्र संस्कार में ऐसे बेहुदा इवेंट की आवश्यकता ही नहीं हैं।

प्री वेडिंग फोटोशूट क्या हैं? what is  pre wedding photoshoot
प्री वेडिंग फोटोशूट में होने वाले दूल्हा-दुल्हन अपने परिवार वालों की सहमती से शादी से पुर्व फोटोग्राफर के एक समुह को अपने साथ लेकर शादी के बाद पति-पत्नी हनीमुन मनाने जाते हैं ऐसी सुंदर जगहों पर जाकर फोटोशूट करवाते हैं। कई फोटो दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे की बांहों में समाए हुए हैं ऐसे भी लिए जाते हैं। कई बार दुल्हन कम से कम परिधानों में होती हैं। शादी के दिन एक बड़ी स्क्रीन लगा कर इसे दिखाया जाता हैं। हम किसी की भी शादी में जाते हैं दूल्हा-दुल्हन के जीवनसाथी बनने के साक्षी बनने एवं उन्हें आशिर्वाद देने। कल्पना कीजिए कि आप किसी की शादी में गए और वहां पर बड़ी सी स्क्रीन पर दूल्हा-दुल्हन पहले से ही एक-दूसरे के बाहों में समाए हुए हैं... तो ये दृश्य देख कर आपको कैसा लगेगा? यहीं लगेगा न कि इन लोगों को हमारे साक्षी होने की आवश्यकता ही नहीं हैं...फ़िर हमें शादी में बुलाया ही क्यों? क्योंकि हमारी हिंदू संस्कृती में शादी से पुर्व इतना खुलापन स्विकार्य नहीं हैं। ये पाश्चात्य संस्कृति हैं।

प्री वेडिंग फोटोशूट समाज को लगी घातक बीमारी क्यों हैं?
• ये फोटोशूट करवाने के लिए 1 से 5 लाख रुपए तक का खर्चा होता हैं। इस फोटोशूट को सही कहने वालों का कहना होता हैं कि शादी हमारे बच्चों की हैं…पैसा हमारा हैं…तो हमारे बच्चों की खुशी के लिए यदि हम 5 लाख रुपए खर्च करते हैं तो गलत क्या हैं? जिसके पास पैसा नहीं हैं वो ये फोटोशूट न करवाए। लेकिन जिसके पास पैसा हैं उन्हें क्यों नहीं करने देते? बात बराबर हैं। इंसान बच्चों की खुशी के लिए ही सब कुछ करता हैं। यदि हम बच्चों की खुशी के तौर पर इसे देखेंगे तो इसमें कुछ भी गलत नहीं हैं। लेकिन कोई भी इवेंट सही हैं या गलत इस बात का फैसला इसी से होता हैं कि समाज पर उसके क्या परिणाम हो रहे हैं। शोध बताते हैं कि प्री वेडिंग फोटोशूट से कई शादियां टूट रही हैं। कहीं-कहीं तो दुल्हन ने दूल्हे की बजाय फोटोग्राफर से ही शादी कर ली! बच्चों की खुशी के लिए ही आम इंसान जिसके पास इतना पैसा नहीं हैं वो कर्जा लेकर भी यह फोटोशूट करवाएगा। इससे शादी के खर्च को लेकर पहले से टेंशन में जी रहे आम इंसान का टेंशन और बढ़ेगा। संस्कृत में कहा जाता हैं, चिंता समम नास्ति शरीर शोषणम्। मतलब चिंता जैसा शरीर का शोषण और कोई नहीं करता। टेंशन इंसान को अंदर से खोखला कर देता हैं। जिस फोटोशुट से समाज के ज्यादातर लोग टेंशन में जिएंगे वो फोटोशूट एक घातक बीमारी ही हुई न?

• शादी में पहले से ही इतने सारे इवेंट्स होते हैं कि जिनकी तैयारी करने के लिए...कुंकू-चावल से लेकर तो मेहमानों की बिदाई तक का सामान जुटाते-जुटाते परिवार वालों को नानी की नानी याद आ जाती हैं। शादी का सामान जुटाने का हमारा टेंशन बढाने के लिए क्या हमें एक और इवेंट की आवश्यकता हैं?

• सिर्फ़ दो वाक्य सुनने के लिए इंसान शादी में इतना खर्चा करता हैं। वो दो वाक्य हैं, ''वा...व्व...क्या बढ़िया शादी की...दिल खोल कर पैसा खर्च किया!'' सिर्फ़ ये दो वाक्य सुनने के लिए इंसान बच्चों की शादी से कई साल पहले से पैसा जमा करता हैं और कई लोग तो शादी के कई साल बाद तक कर्जा पटाते हैं। एक तरफ़ समाजसुधारक इस बात का गहरा चिंतन कर रहे हैं कि शादी के खर्चे को कैसे कम किया जाएं...इसके लिए वे शादी में दी जाने वाली दावत के व्यजंनों की संख्या कम कर रहे हैं...मिलनी के रुपयों की संख्या तय कर रहे हैं ताकि समाज के मध्यमवर्गिय और निचले तबके के लोगों को शादी के अनावश्यक खर्चों के टेंशन से मुक्ति मिले। दूसरी तरफ ये ही धनवान लोग अपने बच्चों की शादी में प्री वेडिंग फोटोशूट करवाकर समाज के ज्यादातर लोगों का टेंशन बढ़ा रहे हैं!

• इस इवेंट के लिए लगने वाला अतिरिक्त पैसा आएगा कहां से? पैसा कमाने के साधन तो पहले थे आज भी उतने ही रहेंगे। मतलब जो इंसान जॉब कर रहा हैं उसकी सैलरी पहले से फिक्स हैं। इस इवेंट के पैसों के लिए कंपनी वाले उसकी सैलरी तो नहीं बढ़ायेंगे। बिझनेस वालों की भी कमाई अचानक नहीं बढ़ सकती। ऐसे में लोग ये अतिरिक्त पैसा अनैतिक तरीके से कमाने की कोशिश करेंगे...रिश्वत लेंगे...इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा! जिस फोटोशूट से समाज में अनैतिकता फैलेगी, भ्रष्टाचार बढ़ेगा वो फोटोशूट समाज के लिए एक घातक बीमारी ही हैं! यह बीमारी समाज में तेजी से फैल रही हैं क्योंकि हर युवा चाहत हैं कि वो भी हिरो-हिरोइनों की तरह बडे पर्दे पर दिखे और बच्चों की खुशी के लिए माता-पिता कर्ज लेकर भी उनकी इच्छाएं पूरी कर रहे हैं।

प्री वेडिंग फोटोशूट से समाज पर हो रहे दुष्परिणामों को देख कर आजकल कुछ जगहों पर इस पर बंदिश लगाई जा रही हैं। उज्जैन में सिंधी समाज ने इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया हैं। इसका उलंघन करने पर वर और वधू दोनों पक्षों से दस-दस हजार रुपए जूर्माना वसुला जाएगा। अखिल भारतिय महेश्वरी समाज ने भी इस पर रोक लगाई हैं। इसके लिए वे समाज को जागरुक कर रहे हैं। जो परिवार ये फोटोशूट करवाएगा वहां पर ये लोग शादी में सिर्फ़ लिफाफा देकर आयेंगे और खाना न खा कर अपना विरोध प्रदर्शित करेंगे!

निवेदन-
दोस्तों, आप सभी से मेरा करबद्ध निवेदन हैं कि प्री वेडिंग फोटोशूट जैसी घातक बीमारी को समाज में फैलने न दे... तभी हमारा समाज खुशहाल रहेगा और समाज में नैतिकता के उचित मापदंड स्थापित होंगे।

Keywords: pre wedding photoshoot, shaadi, 

COMMENTS

BLOGGER: 19
  1. समाज में बढती इस बीमारी पर आपने सार्थक चिंतनशील रचना प्रेसित की है ज्योति बहन।
    ऐसी सार्थक रचनाऐं हो सकता है कुछ विचार शील लोगों को चेतना दे नही तो सच सामाजिक दुर्दशा साफ दिख रही है।
    साधुवाद ।

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  2. आपका चिन्तन सहीं है ज्योति जी . केवल दिखावा करने के पीछे केवल धन और संस्कारों अनदेखी है . सब से बडी बात....., व्यक्तिगत क्षणों के सार्वजनिक दिखावे का औचित्य समझ से बाहर है .

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  3. ऐसा भी होता है क्या..मेरे लिए नयी जानकारी है यह ज्योति जी। इसे पढ़कर जब इतना अजीब लग रहा,शायद यह अभी तक उच्च वर्गीय संभ्रात संस्कृति में प्रचलित होगा, जाने कैसे-कैसे फैशन करते है आज लोग स्टेटस मेंटेन के लिए। विचारणीय लेख समाज को जागृत करने में सक्षम।

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  4. बहुत ज़बरदस्त और धारदार लेख I समाज को सोचने पे मज़बूर करती रचना I

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  5. My salute to you for being courageous enough to write this post, totally agree with your points, very logically discussed. Even i have never found it logical to spend huge money in marriage...for which i have to face lots of questions.
    Following the trend without making proper analysis is nothing but reflection of dull brain and also the height of show off nature.

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  6. जी, प्री वेडिंग शूट का ताम झाम मेरे पल्ले भी नहीं पड़ता। मुझे वो फिजूल का खर्चा लगता है। हाँ,अगर लव मैरिज है तो एक बार को यह किया भी जा सकता है। अगर arrange मैरिज है तो इसका कोई औचित्य नहीं है क्योंकि वैसे भी वर वधु अनजान होते हैं। इसके बनिस्पत मैं तो चाहूँगा ऐसे शूट शादी के पाँच साल के बाद हों तो बेहतर रहेगा। उससे यह एक तरह से शादी के इतने वर्ष साथ गुजारने के उपलक्ष में किया गया होगा जो कि उचित होगा।


    लेकिन इधर मैं ये भी कहना चाहता हूँ कि अगर लोग खुश हैं तो उन्हें करना देना चाहिए। बंदिश और जुर्माने वाली बात तो हास्यास्पद है। मैं ऐसे समाज का हिस्सा ही नहीं बनना चाहूँगा जहाँ इस तरह से आम आदमी के जीवन को जुर्माना लगाकर निर्धारित करें। ये वही समाज हैं जो समाज से बाहर शादी करने वाले के परिवार को बेदखल कर देते हैं। इसी कारण हॉनर किल्लिंग भी होती है। ऐसे तुगलकी फरमान का मेरे नजर में तो कम से कम विरोध होना चाहिए।

    दूसरी बात आपने फोटोग्रफेर से शादी की बात करी। यह तो अच्छी बात है। अगर कोई लड़की मेरे साथ शादी के लिए हाँ करके किसी फोटोग्राफर को पसंद कर लेती है तो मेरा केवल पैसे का नुकसान होगा। ज़िन्दगी फिर भी बच जाएगी। जो शादी के लिए arrange किये फोटोग्राफेर से शादी कर सकती है वो शादी के बाद भी सम्बन्ध स्थापित कर सकती है। फिर ऐसी शादी करके क्या फायदा? इसका न होना ही ठीक है। यही बात मर्दों पर भी लागू होती है तो ऐसे व्यक्ति से शादी न ही हो तो बेहतर।

    बाकी मैं आपके इस विचार से सहमत हूँ कि यह बेफिजूल का नखरा है। लोगों को समझदारी से काम लेना चाहिए। और शादी करते हुए ऐसे व्यक्ति का चुनाव करना चहिये जो कि इतना समझदार हो कि समझ सके क्या जरूरी है क्या नहीं।

    ये प्री वेडिंग फोटो शूट ही नहीं हर तरह के रिवाज पर लागू होता है। कुछ दिनों पहले करवाचौथ था। हमारे इधर गढ़वाल में इसका कोई रिवाज नहीं है। मेरी मम्मी ने कभी यह व्रत नहीं रखा और न दादी ने रखा। लेकिन नई गढ़वाली लड़कियों को जब मैं इस व्रत को रखते हुए देखता हूँ तो मुझे यह भी बेतुका लगता है।

    ये सब ट्रेंड हैं जो आते रहते हैं वरना तो विडियो ग्रफेर और फोटो ग्रफेर रखने की जरूरत ही मुझे महसूस नहीं होती है।

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  7. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (25-11-2018) को "सेंक रहे हैं धूप" (चर्चा अंक-3166) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  8. सही कहा ज्योति जी यह एक घातक बीमारी ही है
    जो आज बड़े धनाढ्य लोगों से शुरू हुई है और कल आम लोगों तक पहुँच जायेगी फिर अपने सामर्थ्य को नजरअंदाज करके सभी इसे भी रस्मोरिवाज में शामिल कर देंगे..... समाज कोइसका बहिष्कार करना चाहिये...
    बहुत सुन्दर....

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  9. Bahut sahi samasya par dhyan diya hai aapne.....mere hisab se bhi yeh pratha galat hai.....ese articles ke liye Dhanyavad!

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  10. Sahi hai pre wedding photo shoot band honi chahiye

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  11. बिलकुल सही कहा .....निस्संदेह बहुत ही सही विषय चुना ज्योति इस बार ...सस्नेह बधाई

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  12. बहुत सही मुद्दा उठाया है आपने ज्योति जी , अभी हाल में एक शादी अटेंड कर के लौटी हूँ , वहां प्रीवेडिंग शूट तो नहीं था पर दूल्हा दुल्हन को आपस में इतना करीब कर तरह -तरह के पोज ले रहे थे जो बरात में गए बुजुर्गों की उपस्थिति में अभद्र लग रहा था | कुछ लोग पहले प्री वेडिंग शूट करा कर बाद में अपनी बहुओं से पल्ला करवाने की इच्छा रखते हैं | इतना खुलने के बाद वापस लड़की का दुबारा उसी संस्कार को ग्रहण करना मुश्किल है , जो कलह की वजह बनता है | हालांकि ये चलन रुकने वाला नहीं है ... फिर भी ये गंभीर चिंतन का विषय है

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  13. विकास नैनवाल जी, लव मैरेज हो या अरैंज मैरेज प्री वेडिंग फोटोशूट दोनों ही तरह की शादी में गलत हैं। आपने ऑनर किलिंग की बात की हैं वो एक अलग मुद्दा हैं। ऑनर कीलिंग पुरी तरह गलत हैं। जहां तक गलत रितीरिवाजों पर समाज द्वारा जुर्माना लगाने की बात हैं मैं इसे सही मानती हूं। क्योंकि जब तक गलत बातों का विरोध नहीं होगा तब तक समाज में सुधार नहीं हो सकता।

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  14. अभी तो न जाने क्या क्या आना है ...
    जब नया आता अहि तो पुराने को पीछे कर देता है ... प्रे वेडिंग शूट बाज़ार का एक वाद है जो आएगा रोकना शायद मुश्किल है इसे ...

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  15. सही लिखा है,प्री wedding shoot ज्योति जी ,आधुनिकता की अंधी दौड़ है सब आधुनिकता के नाम पर दौड़ रहे हैं । इसके लिए तो हम सब को जागरूक होना पड़ेगा ।

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  16. बहुत सही बात है ये ।

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नाम

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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: प्री वेडिंग फोटोशूट: समाज को लगी एक घातक बीमारी
प्री वेडिंग फोटोशूट: समाज को लगी एक घातक बीमारी
कैसे लगी समाज को प्री वेडिंग फोटोशूट की घातक बीमारी? ये बीमारी हमारे समाज में तेजी से क्यों फैल रही हैं और इससे समाज पर क्या दुष्परिणाम हो रहे हैं?
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
https://www.jyotidehliwal.com/2018/11/pre-wedding-photoshoot-samaj-ko-lagi-ek-ghatak-bimari.html
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