कहानी- जब तक मैं जिंदा हूं...

कैसा होता हैं पति-पत्नी का रिश्ता? एक दूसरे के लिए कितना बड़ा सुरक्षा कवच और एक दूसरे के बिना कितने असहाय! शिल्पा सोचने लगी कि काश, कोई दूसरा रिश्ता भी ऐसा होता जो कहता कि जब तक मैं जिंदा हूं...!!!

कहानी- जब तक मैं जिंदा हूं...
शिल्पा अपने नए फ्लैट में शिफ्ट हुई। नए फ्लैट में सब सामान सेट करते-करते दिन कब खत्म होता और सुबह कब होती उसे पता ही नहीं चलता। घर सेट करते-करते वो इतनी थक जाती कि सोचने लगती कि इंसान घर में इतनी सारी चीजें जमा ही क्यों करता हैं? ये भी होना और वो भी होना! हर चीज बस होना ही होना!! जबकि उसे अच्छे से पता हैं कि जब उपरवाले का बुलावा आएगा तो सब कुछ यहीं छूट जाएगा!!! लेकिन जीते जी तो घर में हर चीज चाहिए ही न। छोटी से छोटी सूई भी यदि वक्त पर पास में नहीं रही तो उसके बिना काम रुक जाता हैं। नए घर में कौन सा सामान कहां रखू यह सोचते-सोचते उसका सर दर्द करने लगता। क्योंकि पति महाशय और बच्चों के लिए तो ये बाते मायने ही नहीं रखती थी। वो तो यह कह कर फ्री हो जाते थे कि अरे उसमें इतना क्या सोचना? जैसा समझ में आएं वैसा रख दो सामान। इसके लिए कौन तुमको सर्टिफ़िकेट देने वाला हैं? जैसे घर सिर्फ़ शिल्पा का अकेली का था। खैर...

नए फ्लैट में आने के बाद दूसरे ही दिन जब सोकर उठने के बाद उसने बेडरुम की गैलरी का दरवाज़ा खोला तो गैलरी में ढेर सारा कचरा! अब तीसरे मंज़िल की फ्लैट की गैलरी में कचरा डालने कौन आएगा? बहुत सोचने पर समझ में आया कि हो न हो यह कचरा चौथे मंज़िल के फ्लैट वालों ने ही अपनी खिड़की से फेंका होगा। पहले ही काम की थकान और उपर से यह कचरा...सुबह-सुबह ही उसका मूड ख़राब हो गया। खैर, जैसे ही वक्त मिलेगा उपर जाकर उनसे मिलकर बात करूंगी ऐसा सोचकर शिल्पा काम में लग गई।
दोपहर को काम खत्म कर जब शिल्पा सो रही थी तो अचानक डोअर बेल बजी। अब इतनी धूप में कौन आया ऐसा बड़बडाते ही उसने दरवाज़ा खोला तो सामने कोई भी नहीं...आजू बाजू में भी कोई नहीं...नए आए लोगों से कौन ऐसी शरारत कर सकता हैं?...सोचते-सोचते वो चुपचाप अंदर चली गई। शाम को सब्जी ले के वापस आते वक्त वो लिफ्ट के पास गई तो पता चला कि चौथे मंज़िल पर किसी ने लिफ्ट का दरवाज़ा बराबर बंद नहीं किया हैं इसलिए लिफ्ट काम नहीं कर रही। थकान के बावजूद मजबुरीवश हाथ में सब्जियों का थैला लेकर उसे सीढ़ियों से चढ़कर जाना पड़ा। तीसरे दिन सो कर उठने के बाद गैलरी का दरवाज़ा खोला तो बिन बरसात गैलरी में पानी भरा था। मन ही मन उसे बहुत गुस्सा आ रहा था कि ऐसे कैसे लोग हैं चौथी मंज़िल पर? जो शरारत पर शरारत करते रहते हैं? मैं तो उन्हें जानती तक नहीं फ़िर वो लोग मुझे क्यों तंग कर रहे हैं? दोपहर को बाजुवाले फ्लैट वाली दिपाली आई तो शिल्पा ने उससे इस बारे में बात की तब उसने बताया कि चौथे मंजिल पर एक बुजुर्ग दंपंती रहते हैं। जो बुजुर्ग अंकल हैं वो कभी-कभी इस तरह की हरकते करते हैं। इतने में बच्चे स्कूल से आ गए और बात अधूरी रह गई।
अगले दिन सुबह जब शिल्पा मॉर्निंग वॉक के लिए सोसायटी के बगीचे में गई तो उसे चौथी मंजिल वाली बुजुर्ग आंटी टहलते हुए मिल गई। उन्हें देखते ही शिल्पा अपने-आप को रोक नहीं पाई और उनसे कहने लगी,“आंटी, तंग आ गई हुं मैं आपके पति से! समझा दीजिए उन्हें, नहीं तो मैं सोसायटी ऑफ़िस में जाकर लिखित शिकायत कर दूंगी!” बुजुर्ग आंटी ने बिल्कुल शांत भाव से जबाब दिया,"बेटा, उनकी तरफ़ से मैं माफ़ी मांगती हूं। माफ़ कर दो उन्हें। वह छोटे बच्चे जैसे ही हैं इसलिए बच्चों जैसी हरकते करते हैं! पिछले तीन-चार दिनों से मेरी तबियत अच्छी न होने से मैं उनकी ओर ख्याल नहीं दे पा रहीं थी। इसलिए उन्होंने तुमको परेशान कर दिया। आगे से ऐसा नहीं होगा।'' बुजुर्ग आंटी ने इतने शांती से ये बाते कहीं कि शिल्पा का गुस्सा रफुचक्कर हो गया। उसने पूछा, ''बच्चे जैसे? मतलब?...मेंटली डिस्टर्ब?'' उन्होंने कहा- 'हां'' 'आंटी, क्या आपको बच्चे नहीं हैं?'' ''मुझे एक बेटा और एक बेटी हैं। दोनों की शादी हो गई हैं। बेटा-बहु दोनों सरकारी नौकरी में बड़े पद पर हैं। बच्चों को इतनी उंचाई पर पहुंचाने वाले उनके पापा अब उनके लिए एक पागल पुरुष भर हैं। इसलिए बच्चे चाहते हैं कि मैं उन्हें पागलखाने...। लेकिन मैंने उनको साफ कह दिया हैं कि जब तक मैं जिंदा हूं... मैं उनको पागलखाने नहीं जाने दूंगी। चाहे इसके लिए मुझे कितनी भी तकलीफ़े उठानी पड़े! इस बात को लेकर घर में रोज-रोज कलह होने लगी। मेरे न मानने पर बेटा और बहू ने दूसरे शहर में ट्रांसफर करवा लिया। इनकी पेंशन मिलती हैं जिससे हम दो लोगों का जैसे-तैसे गुजारा हो जाता हैं।'' ''बाप रे...आंटी, इस उम्र में जब आपसे खुद से ज्यादा काम नहीं होता तब भी आपको अंकल की इतनी परवाह हैं! ज़रुर अंकल आपसे बहुत प्यार करते होंगे, हैं न?'' ''वो मुझसे कितना प्यार करते थे यह तो मैं नहीं जानती।'' 'मतलब?'  ''ऐसा हैं बेटा कि प्यार की सबकी अपनी-अपनी परिभाषाएं हैं। उनके दृष्टिकोन से पत्नी को जरुरत की सभी भौतिक सुख-सुविधाएँ मुहैया करवाना ही प्यार हैं। रोटी, कपड़ा और मकान के अलावा पत्नी को कुछ और भी चाहिए ये उन्हें पता ही नहीं था। हमारी शादी को पचपन साल हो गए हैं लेकिन इतने सालों में एक बार भी उन्होंने मेरी ओर उस प्यार भरी निगाहों से नहीं देखा जिस निगाहों से इंसान शरमाकर अपने-आप में समाता जाता हैं। जिस निगाहों को सिर्फ़ याद करकर भी इंसान मन ही मन मुस्कराने लगता हैं!'' ''फ़िर भी आप अंकल के लिए इतना कर रहीं हैं?'' ''नहीं, मैं अंकल के लिए नहीं अपने खुद के लिए कर रही हूं। बेटा, हम किसी को मजबूर तो नहीं कर सकते न कि वो हमें प्यार करे...लेकिन हमें प्यार करने से कौन रोक सकता हैं? मैं इनसे बहुत प्यार करती थी, करती हूं और करती रहूँगी! इसलिए मैं ये सब मेरे प्यार के लिए कर रहीं हूं। जब तक मैं जिंदा हूं...मैं मेरे प्यार को पागलखाने नहीं जाने दूंगी!'' 'इस उम्र में अकेले घर-बाहर के काम करना और  अंकल को भी संभालना ये सब आप कैसे करती हैं?' ''जिंदगी के हर मोड़ पर उन्होंने मेरा साथ दिया हैं। प्यार के अलावा उन्होंने मुझे किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी! मैं ही नसीब में प्यार लिखा के नहीं लाई थी तो इसमें उनका क्या कसूर? एक दुर्घटना से उनके दिमाग पर बहुत असर होने से वो ऐसे हो गए हैं तो मैं अपने कर्तव्यों से पिछे कैसे हटू? मैं अपना कर्तव्य निभाने की कोशिश कर रहीं हूं। उनका इलाज चालू हैं। मुझे पूरा विश्वास हैं कि दवाइयाँ और मेरे प्यार से एक न एक दिन वो पूरी तरह ठीक हो जायेंगे। मुझे मेरे प्यार पर पूरा-पूरा विश्वास हैं। इतना कह कर वे चली गई।'' आंटी अपने दांपत्य जीवन को संभालते हुए अंकल की बहुत अच्छे से देखभाल कर रहीं थी। दिन भर अंकल बच्चों जैसी शरारते करके आंटी के नाक में दम करते थे। फ़िर भी आंटी चुपचाप उनके द्वारा बिगाडे गए कामों सुधारने में लगी रहती! अब पूरी बिल्डिंग में उनके बारे में सभी को पता होने से कोई भी नाराज़ नहीं होता था। साल-दो साल में उनकी बेटी ज़रुर मिलने आ जाती थी। लेकिन बेटा और बहू तो एक बार भी नहीं आएं। पांच-सात साल बाद सचमुच आंटी के प्यार और समर्पण से अंकल कुछ हद तक ठीक हो गए। लेकिन अब आंटी की तबियत ज्यादा ख़राब रहने लगी...आंटी के शरीर ने जबाब दे दिया...और आंटी को अपने प्यार को छोड कर हमेशा के लिए जाना पड़ा! कल ही आंटी के बारवे की रस्म पूरी हूई। मैं गैलरी में खड़ी थी तो देखा कि पागलखाने की गाड़ी आई हुई हैं और वो लोग अंकल को ले जा रहे हैं।

सचमुच आंटी ने अपने जीते जी अपने प्यार को पागलखाने जाने नहीं दिया। आखिर कैसा होता हैं पति-पत्नी का रिश्ता? एक दूसरे के लिए कितना बड़ा सुरक्षा कवच और एक दूसरे के बिना कितने असहाय! शिल्पा सोचने लगी कि काश, कोई दूसरा रिश्ता भी ऐसा होता जो कहता कि जब तक मैं जिंदा हूं...!!!

Keywords: husband and wife relationship, a story in hindi, emotional story

COMMENTS

BLOGGER: 23
  1. मार्मिक कहानी । आजकल के समाज की हक़ीक़त भी ,जहाँ बड़े हो चुके बच्चे अपना अलग आशियाने में मशगूल हो जाते हैं ।वृद्ध माँ-बाप को दो वक्त की रोटी देना भी उन्हें भारी लगता है ।हाँ,उनकी संपत्ति का वारिस बनने का अधिकार लेना नहीं भूलते, चाहे अपना कर्त्तव्य भूल जाएं ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सही कहा सरिता। ज्यादातर मामलों में ऐसा ही देखने मिलता हैं।

      हटाएं
  2. दिल को छू गई बहुत ही मार्मिक कहानी

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (01-07-2018) को "करना मत विश्राम" (चर्चा अंक-3018) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
  4. दिल को छू गई..हृदयस्पर्शी

    जवाब देंहटाएं
  5. वर्तमान का यथार्थ एवं मर्मस्पर्शी चित्रण

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत ही मार्मिक कहानी ज्योति जी , आज का यथार्थ भी यही है की बच्चे पूंछते नहीं बस पति -पत्नी ही एक दूसरे का सहारा होते हैं |

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत ही ह्रदयस्पर्शी कहानी हैं.

    जवाब देंहटाएं
  8. मार्मिक ...
    कहानी ने अंत तक बांधे रखा ... रोचक ... समर्पण की कोई सीमा कहाँ होती है प्रेम में ... पर आजकल के बच्चे ये नहि समझते पति पत्नी का रिश्ता समझना आसान नहीं आज की दुनिया में ...

    जवाब देंहटाएं
  9. मार्मिक कहानी...अंत तक बांधे रखा..

    जवाब देंहटाएं
  10. मन को छू गयी दी कहानी।
    सचमुच माँ-बाप जाने कैसे बोझ हो जाते है। ऐसे जीवनसाथी का साथ मिलना सौभाग्य से होता है।

    जवाब देंहटाएं
  11. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  12. आज के समाज की सोच को आईना दिखाती हुईं, सुंदर रचना।

    जवाब देंहटाएं
  13. हृदयस्पर्शी कहानी ...आज के यथार्थ पर खरी उतरती..... सच कहा पति पत्नी के रिश्ते में प्रेम समर्पण और विश्वास है तो इसके समान कोई दूसरा रिश्ता नहीं...."जब तक मै जिन्दा हूँ" बहुत ही लाजवाब एवं सटीक कहानी।

    जवाब देंहटाएं
  14. बेहतरीन लेख
    बेहद लाजबाब!

    Hindi Panda

    जवाब देंहटाएं
  15. मरमर्मस्पर्शी कहानी और इतना गहरा एक सत्य जिसे महसूस किया जाता है तो बहुत मुश्किल
    आपने अपनी कहानी के जरिए उस सत्य को सुंदर परिभाषा दी है
    अप्रतिम ।

    जवाब देंहटाएं
  16. एक पत्नी के प्यार प्यार और समर्पण की मर्मस्पर्शी दस्ता ,सच मन द्रवित हो गया, बस इसे ही सच्चा प्यार कहते हैं ,आप की लेखन शैली भी लाजबाब ,अंत तक बांधे रखी ,स्नेह सखी

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. इतने सुंदर शब्दों से उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, कामिनी दी।

      हटाएं

नाम

'रेप प्रूफ पैंटी',1,#मीटू अभियान,1,#साड़ीट्विटर,1,14 नवम्बर,1,15 अगस्त,3,26 जनवरी,1,8 मार्च,1,अंकुरित अनाज,1,अंगदान,1,अंगुठी,1,अंगूर,1,अंगूर की लौंजी,1,अंगूर की सब्जी,1,अंग्रेजी,2,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस,3,अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस,1,अंधविश्वास,10,अंधश्रद्धा,10,अंधश्रध्दा,2,अंश,1,अग्निपरीक्षा,1,अग्रवाल,1,अचार,7,अच्छी पत्नी,1,अच्छी पत्नी चाहिए तो...,1,अच्छे काम,1,अजब-गजब,2,अतित,1,अदरक,1,अदरक का चूर्ण,1,अदरक-लहसुन पेस्ट,1,अनमोल वचन,10,अनुदान,1,अनुप जलोटा,1,अन्न,1,अन्य,25,अन्याय,1,अपेक्षा,1,अप्पे,4,अमरुद,1,अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी,1,अमीरी,1,अमेजन,1,अरुणा शानबाग,1,अरुनाचलम मुरुगनांथम,1,अवार्ड,2,असली हीरो,15,अस्पतालों में बच्चों की मौत,1,आंवला,4,आंवला चटनी,1,आंवला लौंजी,1,आंवले की गटागट,1,आइसक्रीम,1,आईसीयू ग्रेंडपा,1,आग,1,आज के जमाने की अच्छाइयां,1,आजादी,2,आज़ादी,1,आतंकवादी,2,आत्महत्या,3,आत्मा,1,आदित्य तिवारी,1,आम,9,आम का अचार,1,आम का पना,2,आम का मुरब्बा,2,आम की बर्फी,1,आम पापड़,1,आरक्षण,3,आलू,1,आलू पोहा अप्पे,1,इंसान,2,इंस्टंट डोसा,1,इंस्टंट मावा,1,इंस्टंट स्नैक्स,1,इंस्टट ढोकला,1,इंस्टेंट कुल्फी,1,इडली,3,इन्डियन टाइम,1,इमली,1,इरोम शर्मिला,1,ईद,1,ईश्वर,6,ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना,1,उटी,1,उपमा,2,उपवास,1,उपवास की इडली,1,उपहार,2,उमा शर्मा,1,ऋषि पंचमी,1,एक सवाल,1,ऐनी दिव्या,1,ऐश ट्रे,1,ऑनलाइन,1,और इज्जत बच गई,1,कंघा,1,कंसन्ट्रेट आम पना,1,कच्चे आम,1,कच्चे आम का चटपटा पापड़,1,कटलेट्स,1,कद्दु,1,कद्दु के गुलगुले,1,कद्दू,1,कद्दू का बेसन,1,कन्यादान,3,कबीर सिंह मूवी,1,करवा चौथ,1,करवा चौथ शायरी,1,करवा-चौथ,4,कल्याणी श्रीवास्तव,1,कहानी,21,कांजी,1,कानून,1,कामवाली बाई,4,कालीन,1,किचन टिप्स,14,किटी पार्टी,1,कियारा आडवानी,1,किराए पर बीवियां,1,कुंडली मिलान,1,कुरकुरे,1,कुल्फी,1,कुल्फी प्रीमिक्स,1,कूकर,1,केईएम् अस्पताल,1,कॉर्न,4,कॉर्न इडली,1,कौए,1,क्षमा,2,खजूर,1,खत,5,खबर,3,खरबूजा,2,खरबूजे का शरबत,1,खरेदी,1,खांडवी,1,खाद्य पदार्थ,1,खाना,1,खारक,1,खारी गरम,1,खुले में शौच,1,खुशी,2,खेल,1,खोया,1,गणतंत्र दिवस,1,गणेश चतुर्थी पर शायरी,1,गणेश चतुर्थी प्रसाद रेसिपी,1,गणेश जी,1,गरम मसाला,1,गर्दन दर्द,1,गर्भावस्था,1,गर्भाशय,1,गलत व्यवहार,1,गलती,2,गाजर,4,गाजर अप्पे,1,गाजर के लड्डू,1,गाजर-मूली के दही बडे,1,गाय,1,गुजरात,1,गुजराती डिश,1,गुड टच और बैड टच,2,गुरु पूर्णिमा,1,गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं,1,गुलगुले,1,गुस्सा,1,गृहस्वामिनी,1,गेहूं का आटा,1,गैस बर्नर,1,गोरखपुर,1,गोरा रंग,1,गोल्फ,1,गौरी पराशर,1,घंटी,1,घिया,1,घी,1,घी की नदी,1,चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति,1,चकली,1,चटनी,7,चना दाल,1,चाँद पर जमीन,1,चाय,1,चाय मसाला,1,चावल,2,चावल के पापड़,1,चाशनी,1,चींटी,1,चीज,1,चीला,2,चुर्ण,1,चूर्ण,4,छाछ,1,छींक,1,छोटी बाते,1,छोटे लेकिन काम के टिप्स,2,छोटे-छोटे काम के टिप्स,2,जज्बा,2,जनसंख्या,1,जन्मदिन,3,जन्मदिन की शुभकामनाएं,2,जन्माष्टमी,2,जमाना,1,जलेबी,1,जाट आंदोलन,1,जात-पात,1,जाति,2,जाम,1,जिंदगी,1,जीएसटी,1,जीरो ऑइल रेसिपी,5,जोक्स,5,जोयिता मंडल,1,ज्वार की रोटी,1,ज्वेलरी,1,झारखंड,1,झाले-वारणे,2,झूठ,1,टिप्स कॉर्नर,31,टी.व्ही. और सिनेमा,1,ठंडे पेय,6,ठेचा,1,डर,1,डैंड्रफ,1,डॉक्टर,2,डॉटर्स डे,2,ढाबा स्टाइल सब्जी,1,ढोकले,1,तरबूज,2,तरबूज के छिलके का हलवा,1,तलाक,1,ताजे नारियल की बर्फी,1,तिल,2,तिल की कुरकुरी चिक्की,1,तिल के लड्डू,1,तेलंगाना,1,तोहफ़ा,1,त्यौहार,1,थंडा पानी,1,दक्षिणा,1,दर्द का रिश्ता,1,दवा,1,दशहरा,1,दशहरा की शुभकामनाएं,1,दशहरा शायरी फोटो,1,दही,5,दही सैंडविच,1,दहेज,3,दाग-धब्बे,1,दान,1,दासी,1,दिपावली बधाई संदेश,3,दिवाली,1,दिशा,1,दीपावली शुभकामना संदेश,1,दीवाली रेसिपी,1,दुध पावडर,1,दुर्गा माता,1,दुल्हा,1,दुश्मन,1,दूध,2,देशभक्ति,3,देशभक्ति शायरी,2,देहदान,1,दोस्त,2,धनिया,1,धर्म,3,धर्मग्रंध,1,धार्मिक,29,नजर,1,नजर कैसे उतारु,1,नदी में पैसे,1,नन्ही परी,1,नमक पारे,1,नमकीन,1,नवरात्र,1,नवरात्र स्पेशल,2,नवरात्रि,3,नवरात्रि की शुभकामनाएं,1,नवरात्रि शायरी फोटो,1,नवरात्री रेसिपी,6,नववर्ष,2,नववर्ष की शुभकामनाएं,2,नाइंसाफी,1,नानी,1,नारियल बर्फ़ी,1,नारी,48,नारी अत्याचार,10,नारी शिक्षा,1,नाश्ता,1,निंबु का अचार,1,निचली जाती,1,निर्णयक्षमता,1,निर्भया,2,निवाला,1,नींबू,1,नीडल थ्रेडर,1,नेत्रदान,1,नेपाल त्रासदी,1,नेल आर्ट,1,न्याकिम गैटवेच,1,न्यूजीलैंड,1,पकोडे,2,पक्षी,1,पढ़ा-लिख़ा कौन?,1,पढ़ाई,1,पति,1,पति का अहं,1,पति-पत्नी,1,पत्ता गोभी,2,पत्ता गोभी और चना दाल के बडे,1,पत्ता गोभी की मुठिया,1,पत्नी,1,पत्र,1,पपीता,1,परंपरा,2,परवरिश,6,पराठे,1,परीक्षा,2,परेशानी,1,पल्ली उत्सव,1,पवित्र,1,पवित्रता,2,पसंदीदा शिक्षक को पत्र,1,पानी,1,पानी कैसे पीना चाहिए,1,पापड़,3,पालक,1,पालक के नमक पारे,1,पालक बडी,1,पाश्चात्य संस्कृति,1,पिता,2,पुण्य,2,पुरानी मान्यताएं,1,पुलवामा हमला,1,पूडी,1,पूरी,1,पेढे,1,पैड्मैन,1,पैनकेक,1,पैरेंटीग,1,पोर्न मूवी,1,पोषण,1,पोहा,2,पोहे के कुरकुरे,1,प्याज,3,प्याज की चटनी,1,प्यार,1,प्यासा कौआ,1,प्रत्यूषा,1,प्रद्युम्न,1,प्रसन्न,1,प्राणियों से सीख,1,प्री वेडिंग फोटोशूट,1,फर्रुखाबाद,1,फल,1,फल और सब्जी खरीदने से पहले,1,फलाहार,1,फल्लिदाने,1,फादर्स डे,2,फूल गोभी के परांठे,1,फेसबुक,2,फैशन,1,फ्रिज,1,फ्रिज में सब्जी,1,फ्रेंडशीप डे,1,फ्रेंडशीप डे शायरी,1,बकरीद,1,बची हुई सामग्री का उपयोग,1,बच्चे,8,बच्चे की ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल दिवस,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बिस्किट,1,बिस्कुट,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर गैंगरेप,1,बेटा,1,बेटा पढाओ,1,बेटी,7,बेटी बचाओ अभियान,2,बेसन,2,बेसन के लड्डू,1,बैंगन,1,बोझ,1,ब्रेकअप,1,ब्रेड,4,ब्रेड की रसमलाई,1,ब्रेड पकोडा,1,ब्रेड पिस्ता पेढे,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,5,ब्ल्यू व्हेल गेम,1,भक्ति,1,भगर,3,भगर की इडली,1,भगर के उत्तपम,1,भगर के कटलेट,1,भगवान,3,भजिए,1,भरवां मिर्च,1,भरवां शिमला मिर्च,1,भाई दूज शायरी,1,भाकरवड़ी,1,भाभी,1,भारत,1,भारतीय नारी,1,भारतीय मसाले,1,भुट्टे के पकोड़े,1,भूकंप,1,भोजन,1,भ्रुण हत्या,1,मंदसौर गैंग रेप,1,मंदिर,2,मंदिरों में ड्रेस कोड़,1,मंदिरों में दक्षिणा,1,मकई,4,मकई उपमा,1,मकई चीला,1,मकई पकोडे,1,मकर संक्रांति,2,मकर संक्रांति की शुभकामनाएं,1,मकर संक्राति,1,मखाना,1,मखाने के लड्डू,1,मटर,3,मटर के अप्पे,1,मठरी,1,मठ्ठा,1,मदर्स डे,3,मम्मी,1,मलाई,2,मलाई फ्रूट सलाद,1,मसाला छाछ,1,मसाला मठरी,1,महात्मा गांधी जी,1,महानता,1,महाराजा अग्रसेन जी,1,महाराष्ट्र में आरक्षण,1,महिला आजादी,1,महिला आरक्षण,1,महिला सशक्तिकरण,4,महिला सुरक्षा,1,महिलाओं का पहनावा,1,माँ,3,माता यशोदा,1,मातृभाषा,1,मायका,2,मारवाड़ी,1,मार्केट जैसे साबूदाना पापड़,1,माला,1,मावा,1,मावा कुल्फी,1,मासिक धर्म,2,माहवारी,3,मिठाई,21,मित्र,2,मिलावट,1,मिलावट पहचानने के घरेलू तरीके,1,मिल्क पाउडर,1,मिस इंडिया 2019,1,मुक्ति,1,मुबारकपुर कला,1,मुरब्बा,1,मुस्लिम,1,मुस्लिम मंच,1,मुहूर्त,1,मूंग की सूखी दाल का हलवा,1,मूंगफली,1,मूंगफली की सूखी चटनी,1,मूली,3,मूली का अचार,1,मूली के पत्तों के कुरकुरे कटलेट्स,1,मेंस्ट्रुअल कप,1,मेंहदी,7,मेडिसिन बाबा,1,मेथी,1,मेथी दाना चुर्ण,1,मेथी मटर मलाई,1,मेनु,1,मेरा मंत्र,3,मेरा सपना,1,मेरी बात,15,मैंगो फ्रूटी,1,मैंगो श्रीखंड,1,मैनर्स,1,रंग,1,रंग पंचमी,1,रक्तदान,1,रक्तदान के फायदे,1,रक्षा बंधन,1,रक्षाबंधन,1,रक्षाबंधन शायरी,1,रजस्वला नारी,3,रवा इडली,1,रसोई,106,रांगोली,3,राखी,2,राज की बात,1,राजभाषा,1,राजस्थानी समाज,2,राम रहीम,1,राशी-भविष्य,1,राष्ट्रगान,1,राष्ट्रगीत,1,राष्ट्रभाषा,1,रिती-रिवाज,1,रीतिरिवाज,1,रुपया-पैसा,1,रेणुका मिश्रा,1,रोटी,3,रोस्टेड मूंगफली,1,लघुकथा,12,लड्डू,3,लहसुन,1,लाइटर,1,लाइफ स्किल्स,1,लाल मिर्च की सूखी चटनी,1,लिव इन,1,लिव इन रिलेशनशिप,1,लीव इन रिलेशनशिप,1,लेसुए,1,लैंगिक समानता,1,लॉटरी,1,लोकल ट्रेन,1,लोकसभा चुनाव,1,लोग क्या कहेंगे?,1,लौंजी,1,लौकी,2,लौकी का हलवा,1,लौकी की बड़ी,1,वक्त,1,वटसावित्री व्रत,1,वर,1,वर्जिनिटी टेस्ट,1,वर्तमान,1,वायरल फोटो,1,वारी के हनुमान,1,विधवा,1,विधवा ने किया कन्यादान,1,विधवा विवाह,1,विशाखापट्टनम रेप कांड,1,वृंदावन,1,वृद्धावस्था,1,वेजिटेबल डोसा,1,वेजिटेबल पैनकेक,1,वैलेंटाइन डे,1,वोट,1,वोट की किंमत,1,व्यंग,11,व्यायाम,1,व्रत,3,व्रत रेसिपी,16,व्रत स्पेशल,2,शकरकंद,2,शकरकंद की जलेबी,1,शकरकंद को कैसे भुने,1,शकुन-अपशकुन,1,शक्करपारे,1,शनि देव,1,शब्द,1,शरबत,4,शर्बत,1,शर्म,2,शादी,6,शादी की खरेदी,1,शादी की फ़िजूलखर्ची का बिल,1,शादी के सालगिरह की शुभकामनाएं,1,शादी-ब्याह,3,शायरी,9,शाहिद कपूर,1,शिक्षक दिन,1,शिक्षा,6,शिमला मिर्च,1,शिवपुरी,1,शुभ मुहूर्त,1,शुभ-अशुभ,3,शुभम जगलान,1,श्राद्ध,3,श्राद्ध का खाना,1,श्रीकृष्ण,2,श्रेष्ठता,1,संसद,1,संस्कार,1,संस्मरण,9,सकारात्मक पहल,2,सच बोलने की प्रेरणा,1,सतबीर ढिल्लो,1,सपना,1,सफेद बाल,1,सब्जियों का अचार,1,सब्जियों की कांजी,1,सब्जी,8,समय,1,समाजसेवा,2,समाजिक,1,समाधान,1,समावत चावल,2,सर के बाल,1,सलाद,1,ससुराल,2,सहशिक्षा,1,सांवला या काला रंग,1,साउथ इंडियन डिश,2,साक्षात्कार,4,सागर में ज्वार,1,साफ-सफाई,1,साबुदाना,2,साबुदाना के अप्पे,1,साबुदाना पापड़,2,साबुदाने लड्डू,1,साबूदाना,2,सामाजिक,65,सामाजिक कार्यकर्ता,1,सालगिरह,5,सास,2,साहित्य,86,सिंगल पैरेंट,1,सिंदूर,1,सीख-सुहानी,1,सीनू कुमारी,1,सुंदरता,1,सुई,1,सुखी,1,सुजी,1,सूजी,1,सूजी के लड्डू,1,सेनेटरी नेपकिन,1,सेब,1,सेलिब्रेटी,1,सेव मेरिट सेव नेशन,1,सेवई उपमा,1,सेहत,1,सैंडविच,1,सौंफ,1,सौंफ का शरबत,1,सौंफ प्रीमिक्स,1,सौतेली माता,1,स्कूल,1,स्त्री,2,स्नैक्स,34,स्वतंंत्रता दिन,1,स्वतंत्रता दिन,2,स्वर्ग और नर्क,1,स्वाभिमान,1,स्वास्थ,2,स्वास्थ्य,10,हंस,1,हनुमान जी,2,हरी मटर के पैनकेक,1,हरी मिर्च,3,हरी मिर्च का अचार,1,हलवा,3,हांडवो,1,हाउसवाइफ,1,हाथी,1,हिंदी उखाणे,1,हिंदी उखाने,1,हिंदी दिवस,1,हिंदी शायरी,25,हिंदु,1,हैंडल,1,हैसियत,1,होटल,1,होममेकर,1,होली की शुभकामनाएं,1,
ltr
item
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: कहानी- जब तक मैं जिंदा हूं...
कहानी- जब तक मैं जिंदा हूं...
कैसा होता हैं पति-पत्नी का रिश्ता? एक दूसरे के लिए कितना बड़ा सुरक्षा कवच और एक दूसरे के बिना कितने असहाय! शिल्पा सोचने लगी कि काश, कोई दूसरा रिश्ता भी ऐसा होता जो कहता कि जब तक मैं जिंदा हूं...!!!
https://4.bp.blogspot.com/-eoMxXMuWpJI/WzM1s1EGdxI/AAAAAAAAIOY/4j96JM95iPQqOxbn7wY5qUyR4wr2bBKBQCLcBGAs/s320/jab%2Btak%2Bmain%2Bjinda%2Bhuu.jpg
https://4.bp.blogspot.com/-eoMxXMuWpJI/WzM1s1EGdxI/AAAAAAAAIOY/4j96JM95iPQqOxbn7wY5qUyR4wr2bBKBQCLcBGAs/s72-c/jab%2Btak%2Bmain%2Bjinda%2Bhuu.jpg
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
https://www.jyotidehliwal.com/2018/06/kahani-jab-tak-main-jinda-hun.html
https://www.jyotidehliwal.com/
https://www.jyotidehliwal.com/
https://www.jyotidehliwal.com/2018/06/kahani-jab-tak-main-jinda-hun.html
true
7544976612941800155
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy