दो पुरानी कहानीयां... आधुनिक अंदाज में...! (2 Old stories... in modern ways...!)

पढ़िए, "बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा?" एवं "प्यासा कौआ"... वहीं जुनी कहानियां...आधुनिक अंदाज में...

पढ़िए, दो जुनी कहानीयां... आधुनिक अंदाज में...!
दोस्तो, कुछ कहानियां ऐसी होती है, जो लगभग हर व्यक्ति की सूनी या पढ़ी हुई होती है। जैसे बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा वाली कहानी या प्यासे कौए की कहानी। सदियों से इंसान इन कहानियों को अपनी अगली पिढ़ी को सुना रहा है। लेकिन कितना अच्छा हो यदि ये कहानियां हमें आज के समय के आधुनिक अंदाज में पढ़ने मिलें! तो आइए, मजा लीजिए… "बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा?" एवं "प्यासा कौआ"... वहीं पुरानी कहानियां...आधुनिक अंदाज में पढ़ने का।

कहानी: बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा?
हमें यह कहानी पता है कि बिल्ली से परेशान चुहों ने अपनी जान बचाने के लिए बिल्ली के गले में घंटी बांधने की योजना बनाई थी। लेकिन आजतक वे इस योजना नें सफल नहीं हो पाएं। लेकिन अब इक्किसवी सदी की हवा चुहों को भी लग गई। चुहों के बच्चों ने इस पर आपातकालिन बैठक बुलाई। सभी ने इस पर गहरा विचारमंथन किया। पहले तो इंसानों की तरह... समस्या के समाधान के पुराने तरीके पर खुब विचार किया गया। लेकिन जैसा की अकसर इंसानों की सभा में होता है बिल्ली के गले में घंटी बांधने की समस्या का भी पुराने तरीके से कोई समाधान नहीं निकल पा रहा था। तब एक चुहे के बच्चे ने समाधान पेश करने की पेशकश की। लेकिन बड़े-बुजुर्ग चुहों ने उसका यह कहकर विरोध किया कि हम सदियों से इस समस्या का समाधान नहीं खोज पाएं, तो तू आज का छोटा सा बच्चा क्या कर लेगा? आखिरकार तुझे ज्ञान ही कितना है? वो मायुस होकर चूप बैठने ही वाला था कि चुहे के सरदार ने कहा, "एक बार इस बच्चे की भी सुन लेते है...क्या पता सही में कोई समाधान निकल आएं। यदि समाधान न भी निकला, तो भी हमें यह तो समाधान रहेगा कि हमने हमारे बच्चे की बात सुनी! ज्यादा से ज्यादा क्या होगा हमारे दो मिनट ही तो बर्बाद होंगे।" तब जाकर उस चुहे के बच्चे को अपनी बात रखने की अनुमती दी गई।
चुहों की सभा 
उस चुहे के बच्चे ने कहा, "कल मैं एक दवाई की दुकान में गया था। वहां पर एक ग्राहक ने दुकानदार से नींद की गोली मांगी। मतलब यह एक ऐसी गोली है जिसे खाने से नींद आती है। अब जब दूबारा कोई नींद की गोली लेने आएगा तब मैं ख्याल रखुंगा कि दुकानदार वह गोली कहां रखता है, यह गोली एक बार हमें मिल गई कि हमारी समस्या का समाधान हो सकता है।" इतने में एक बुजुर्ग चुहे ने गुस्से से तमतमाते हुए कहा, "मैं तो पहले ही बोल रहा था कि इस नई पिढ़ी के पास शेखी बघारने के अलावा कोई काम नहीं है। आताजाता तो कुछ नहीं चले समस्या का समाधान बताने...!!" चुहे के सरदार ने फ़िर हस्तक्षेप करकर उसे शांत किया और बच्चे को उसकी बात आगे बढ़ाने की अनुमती दी। "हां तो बता, उस नींद की गोली का हम क्या करेंगे?" बच्चे ने कहा, "हम वो नींद की गोली दुध में मिला कर, वो दुध बिल्ली को पिलाएंगे। जब बिल्ली को नींद लग जाएगी तब हम बड़ी आसानी से उसके गले में घंटी बांध देंगे!" हजारों सालों की समस्या का इतना आसान समाधान सुनकर सभी बड़े-बुजुर्ग चुहों ने करतल ध्वनी से उस बच्चे का समर्थन किया।
और दूसरे दिन तय योजना के अनुसार दुध में नींद की गोली डालकर, वो दुध बिल्ली को पिला कर... उसके गले में घंटी बांध दी गई। इस तरह आज इक्किसवी सदी के चुहों के बच्चों ने अपना दिमाग लगाकर बिल्ली के गले में घंटी बांध ही दी। जबकि हजारों सालों से बुढ़े चुहे यहीं कह रहे थे कि बिल्ली के गले में घंटी बांधना नामुमकिन है!

शिक्षा-
• इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि नामुमकिन कुछ भी नहीं है। जो भी समाज परंपरा से चिपके रहेगा नई बातों और विचारों को प्रोत्साहन नहीं देगा, वो समाज विकसित हो ही नहीं सकता। 
• यदि हमें सफ़लता पानी है तो पुरानी पिढ़ी के अनुभव और नई पिढ़ी के नए विचार, इन दोनों का सही संतुलन स्थापित करना होगा।

प्यासे कौए की कहानी
पढ़िए, दो जुनी कहानीयां... आधुनिक अंदाज में...!
प्यासे कौए की कहानी लगभग हर कोई जानता है, जिसमें एक प्यासा कौआ पानी की तलाश में भटकता रहता है। बहुत खोजने पर उसे एक मटका दिखाई देता है। मटके में पानी तो रहता है लेकिन बहुत थोड़ा पानी होने से वहां तक उसकी चोच नहीं पहुंच सकती थी। तब कौए ने अपनी चोंच से एक-एक पत्थर लाकर मटके में डाले और पानी उपर आ गया। इस तरह इस कहानी में कौए ने अपनी प्यास बुझाई थी।

अब पढ़िए आधुनिक कौए की कहानी। इक्किसवी सदी के कौए को प्यास लगती है। पानी के लिए वह इधर-उधर बहुत भटकता है लेकिन उसे पानी नहीं मिलता। बहुत खोजने पर उसे एक मटके में थोड़ा सा पानी दिखाई देता है। लेकिन समस्या वहीं पुरानी कि पानी तक उसकी चोंच नहीं पहुंचती! तब इक्किसवी सदी का कौआ सोचता है कि यदि मैं अपने बाप-दादाओं की तरह एक-एक पत्थर लाकर मटके में डालुंगा तो पानी तो उपर आ जाएगा लेकिन इस काम में बहुत समय लग जाएगा और मुझे तो बहुत जोर से प्यास लगी है। ऐसे में मैं क्या करुं... क्या करूं...? वो अपना दिमाग दौडाता है। उसने कई जगहों पर इंसानों को स्ट्रॉ से कोल्ड ड्रिंक पीते हुए देखा था। वो सोचता है कि जब इंसान स्ट्रॉ से कोल्ड ड्रिंक पी सकता है तो मैं स्ट्रॉ से पानी क्यों नहीं पी सकता? थोड़ा सा ढ़ूंढने पर ही उसको एक स्ट्रॉ दिखाई देती है। वो अपनी चोंच में स्ट्रॉ पकड कर लाता है और बड़े आराम से पानी पीकर उड जाता है। इस तरह इक्किसवी सदी के कौए ने बिल्कुल कम मेहनत और कम समय में पानी पीने में सफलता प्राप्त की!

शिक्षा-
• इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि हमें हर समस्या के समाधान के लिए हमारे पुराणों के तरफ देखने की आवश्यकता नहीं है। हम समस्या के समाधान हेतु आज के समय के हिसाब से नए रास्ते खोज सकते है।

• इन दोनों कहानीयों यह निहितार्थ बिल्कुल नहीं है कि हमारे बुजुर्ग गलत ही थे। हमारे बुजुर्गों ने जो भी निर्णय लिए वो तब की परिस्थितियों के अनुसार उचित हो सकते है लेकिन आज की आधुनिक परिस्थिती के अनुसार हमें समस्या के समाधान भी आधुनिक ही खोजने होंगे।

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COMMENTS

BLOGGER: 30
  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 09 जनवरी 2017 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. behad saral bhasha ke prayog se gadhi gayi rachna

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  3. समस्या का समाधान नयी तकनीकी के साथ।
    वाह! बहुत खूब।

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  4. आपकी रचनाओं में मुझे यही सबसे अच्छी बात लगती है कि आप नए और पुराने विचारों को एक संतुलित तरीके से पेश करती हैं। कुछ अच्छा आज है और कुछ अच्छा कल था , अगर दोनों मिल जाएं तो और भी अच्छा होगा। मुझे ये दोनों कहानियां पढ़ कर बहुत मज़ा आया और मैं अपने बच्चों को ये ज़रूर सुनाऊँगी और अपने दोस्तों को भी पढ़ाऊंगी। सीख के लिए बहुत शुक्रगुज़ार हूँ आपकी।

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    1. सुनैना, आपकी यही हौसला अफ़जाई मुझे और बेहतर लिखने की प्रेरणा देती है। इतने सुंदर शब्दों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

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  5. Bachpan me dono kahani suni thi....aapne tarotaza kar di.....inka moral bahut accha hai....itni acchi story share karne ke liye aapka bahut dhanyavad!

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  6. हाहाहा ! बचपन की कहानी फिर से पढ़कर अच्छा लगा !!

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  7. Wah ,Jyoti ji ,bahut hi behtreen tareeke se aapne apne vicharon ko pesh kiya hai .sachmuch bahut badi seekh di hai aapne .bahut hi umda rachna

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  8. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति है।

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  9. पुरानी कहानियो का नया अंदाज, बहुत खूब । धन्यवाद ।

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  10. कभी बचपन में पढ़ी थी यह कहानिय़ॉ , नए अन्दाज़ में पढ़ कर अच्छा लगा......... आभार
    http://savanxxx.blogspot.in

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  11. Naye andaaz pe padH ke bahut hi achchha laga, bahut hi sundar.

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  12. हमेशा की तरह एक और शानदार post के लिए Thanks. :)

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  13. Tanks.
    For promote your life read this blog:-maheshchandrarahi.blogspot.com

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  14. बहुत ही शानदार कहानी लिखी है आपने. काफी बेहतरीन है।

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  15. ज्ञानवर्धक कहानियाँ ....पढ़कर अच्छा लगा.....अच्छी प्रस्तुति

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  16. बहुत ही बढ़िया . पढकर काफी अच्छा लगा .....थैंक्स फॉर शेयर ज्योति मैडम

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  17. Thanks for sharing knowledhe+ techniques in story

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  18. रोच्झाक अंदाज़ में टर्न दिया है ... अच्छी लगीं कहानियाँ ...

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  19. अहा मजा आ गया समाधान कितने आधुनिक। आज बिल्ली और कौवे भी हाईटेक कम्प्यूटराइज दिमाग रखने वाले हो गये।
    वाह ज्योति बहन सच बहुत अच्छा लगा कहानियों का नवीनीकरण।

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  20. यदि हमें सफ़लता पानी है तो पुरानी पिढ़ी के अनुभव और नई पिढ़ी के नए विचार, इन दोनों का सही संतुलन स्थापित करना होगा।

    बिलकुल सही ,ज्योति जी मजेदार कहानी के माध्यम से एक बहुत जरुरी सीख दे दी आपने

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  21. वाह !बहुत ही अच्छे अंदाज़ में लिखी आप ने दोनों कहानी बहन
    सादर

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  22. कहानी वही पर अंदाज नया, समाधान नया. सुंदर 👏 👏

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नाम

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की शुभकामनाएं,1,
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: दो पुरानी कहानीयां... आधुनिक अंदाज में...! (2 Old stories... in modern ways...!)
दो पुरानी कहानीयां... आधुनिक अंदाज में...! (2 Old stories... in modern ways...!)
पढ़िए, "बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा?" एवं "प्यासा कौआ"... वहीं जुनी कहानियां...आधुनिक अंदाज में...
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
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