पुलवामा हमला: सिर्फ़ सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देने से हमारा कर्तव्य पूरा नहीं होगा!!

पुलवामा हमले की जितनी निंदा की जाएं उतनी कम हैं। एक आम इंसान शहीदों को श्रद्धांजलि देने के अलावा कर भी क्या सकता हैं? नहीं दोस्तों, यहीं पर हम गलत हैं।

14 फरवरी के पुलवामा हमले के बाद सोशल मीडिया पर गम और गुस्से की बौछार होने लगी हैं। फेसबुक और व्हाट्स एप्प पर तो मोमबत्ती का फोटो लगा कर श्रद्धांजलि व्यक्त करते संदेशों की बाढ सी आ गई हैं। होना भी चाहिए...क्योंकि ऐसे कायराना हमलों की जितनी निंदा की जाए उतनी कम हैं। एक आम इंसान शहीदों को श्रद्धांजली देने के अलावा कर भी क्या सकता हैं? नहीं दोस्तों, यहीं पर हम गलत हैं। आम इंसान की ताकत कम नहीं हैं। क्या आपको याद हैं कि कुछ साल पहले टी व्ही पर एक सीरियल ‘सास भी कभी बहू थी’ आता था। इस सीरियल में आम जनता के पसंदिदा चरित्र मिहिर की मौत हो जाने पर उस सीरियल की निर्मात्री एकता कपूर को आम जनता की ओर से इतने खत गए कि मूल कहानी में फेरबदल करके निर्मात्री को मरे हुए पात्र को जिंदा करना पड़ा था! ये हैं आम जनता की ताकत! पुलवामा हमले के बाद अचानक यह घटना याद आने पर मुझे लग रहा हैं कि यदि आम जनता को अपने 40 जवानों की शहादत का थोड़ा सा भी दु:ख हैं तो उसे सिर्फ़ अपना गुस्सा सोशल मीडिया पर शेयर करके चूपचाप नहीं बैठना चाहिए! आम जनता ने कुछ ऐसे अभियान चलाने चाहिए कि सरकार आतंकवादियों का सफाया करने पर मजबूर हो जाएं! जैश–ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों का नामोनिशान मिट जाएं। शहीदों के विधवाओं की भी यहीं पुकार हैं कि साहेब, हमें विकास नहीं चाहिए...हम भुखे रह लेंगे...लेकिन 40 शहिदों के बदले...पूरा लाहौर जलना चाहिए!! प्रधानमंत्रीजी ने कहा हैं कि शहीद जवानों के खून की बूंद-बूंद का बदला लिया जाएगा। लेकिन कुछ राजनेता ऐसे हैं कि जब हमारे जवान शहीद होते हैं तो वे चुप्पी साध लेते हैं। उनका कोई ट्वीट नहीं आता। लेकिन यदि कोई आतंकवादी मरता हैं तो तुरंत ट्वीट आता हैं। जैसे उनके खुद का कोई मर गया हो! कब तक हमारे नेता शहीदों की शहादत पर राजनीति करते रहेंगे? देश का दुर्भाग्य हैं कि जो लोग इस तरह की आतंकी हमलों को भारी-भारी शब्दों में धिक्कारते हैं, वहीं अंदर बैठ कर आतंकवादियों को पुचकारते हैं! यदि किसी आतंकवादी को सजा देने का सिर्फ़ एलान होता हैं, तो कई मानवाधिकार वाले उसके समर्थन में आगे आते हैं। लेकिन जब हमारे जवान शहीद होते हैं और जवानों पर पत्थर बरसाएं जाते हैं तो यहीं मानवाधिकार वाले चुप्पी साध लेते हैं। आखिर क्यों? हमें सोशल मीडिया के ही सहारे से ऐसे नेताओं पर इतना दबाव बनाना चाहिए कि कोई भी नेता आतंकवादियों और अलगाववादियों को शह न दे सके। कम से कम हम इतना ही कर पाएं तो उन शहीदों के प्रति यह हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी! 

पुलवामा हमला- 
14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में सीआरपीएफ के 2500 यकाफ़िले में सीआरपीएफ की 78 गाड़ियां थी। जैश-ए-मोहम्मद का एक आतंकवादी आदिल अहमद वकास (जो पुलवामा जिले के ही काकपोरा का रहने वाला था) विस्फोटकों से भरी कार लेकर बसों के काफ़िले में घुस गया और जोर दार ब्लास्ट हुआ। इस ब्लास्ट में हमारे 40 जवान शहीद हो गए और कई घायल हुए।

देश का कोई भी युवा आतंकवादी न बने- 
जब जब ऐसे आतंकवादी हमले होते हैं मेरे मन में बार-बार यहीं सवाल आते हैं कि आखिर ये युवा आतंकवादी क्यों बनते हैं? आतंकवादी संगठन उन्हें ऐसा कौन सा लालच देते होंगे कि वे खुद का जीवन बरबाद कर औरों के जीवन को बरबाद करने तैयार हो जाते हैं? आतंकवादियों और अलगावावादियों ने जम्मू-कश्मीर की जनता का ऐसा ब्रेन वॉश कैसे किया होगा कि वे लोग उनकी जान की हिफ़ाजत करने वाले जवानों को अपना दुश्मन मान, उन्हीं पर पत्थर बरसाते हैं? आदिल अहमद का हमले के पहले का वीडिओ आया हैं, जिसमें वो कह रहा हैं कि जब तक यह वीडिओ आप लोगों तक पहुंचेगा उस समय मैं जन्नत में मजे लूट रहा होउंगा! कितना जहरीला बयान? आदिल की उम्र सिर्फ़ 21 साल थी। इतनी कम उम्र में जैश-ए-मोहम्मद के संगठन ने आदिल का ब्रेन वॉश करके उसे दूसरों की हत्या करके खुद आत्महत्या करने पर कैसे तैयार किया होगा? यदि आतंकवादी संगठन युवाओं का ब्रेन वॉश करके उन्हें आतंकवादी बना सकते हैं तो हम हमारे युवाओं का ब्रेन वॉश करके उनमें देशभक्ति की भावना क्यों नहीं जगा सकते? हम सभी आतंकवादियों को यह क्यों नहीं समझा सकते कि किसी को भी मार कर ‘जन्नत’ की प्राप्ति नहीं हो सकती? ये मुर्खता हैं...तुम इन लोगों के बहकावे में मत आओं...आतंक किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता! दोस्तों, क्या हम 130 करोड लोग ऐसी कोई व्यवस्था निर्मित नहीं कर सकते ताकि देश के युवाओं को सही-गलत की पहचान हो? देश के युवा गुमराह न हो? मैं तो इस विषय पर बहुत सोचती हूं लेकिन अभी तक इस समस्या का समाधान मेरी समझ में नहीं आया हैं। लेकिन मुझे लगता हैं कि 130 करोड लोगों में से किसी के पास तो इसका समाधान होगा! कोई तो बता सकेगा कि हम हमारे युवाओं को भटकाव से कैसे रोके? क्या देश के 40 जवानों के जान की कोई किंमत नहीं हैं? क्या बीती होगी उन जवानों के परिवार वालों पर जब जवानों के शत-विशत शव उनके परिवार वालों को सौंपे गए होंगे? क्या बीती होगी उन शहीदों की पत्नियों पर जब वैलेंटाइन डे के दिन उनको यह मनहूस ख़बर मीली होगी? उस भयावह दृश्य की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती! दोस्तों, आप सभी से एक नम्र निवेदन हैं कि यदि आपको हमारे युवाओं को भटकाव से रोकने का कोई उपाय समझ में आता हैं तो कृपया टिप्पणी द्वारा जरुर बताइएगा। मैं वो उपाय आपके नाम के साथ एक स्वतंत्र पोस्ट लीख कर प्रकाशित करुंगी। फ़िर इस उपाय को कैसे अमल में लाया जाएं इस बात पर सोचेंगे। कुछ तकनिकी ख़राबी की वजह से फिलहाल मेरे ब्लॉग पर टिप्पणियां नहीं दिख रहीं हैं। लेकिन सभी टिप्पणियां मैं ब्लॉगर डैशबोर्ड पर पढ़ पा रहीं हूं। इसलिए टिप्पणी करके अपनी राय जरुर दीजिएगा। शायद कुछ हल निकल जाएं। हमारे युवाओं को भटकाव से रोकना ही शहीदों को सही श्रद्धांजली होगी!!! 

मेरी तमन्न्न इतनी ही हैं कि खुन सड़कों पर न बहे...वह धमनियों में दौडे...और रगों में रहे...!!!

Keywords: pulwama attach, terrorist attach

COMMENTS

BLOGGER: 9
  1. Dhanyavad Mam .... bahut hi Badiya likha hai mam... Ye saari baatein Dhayan rakhna Sabse jarori hai .

    Jo ho wo wapas ta nahi AA Sakta Lekin usse sudhra ja Sakta aur aane waale kal Ko Badla ja Sakta

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (17-02-2019) को "श्रद्धांजलि से आगे भी कुछ है करने के लिए" (चर्चा अंक-3250) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    अमर शहीदों को श्रद्धांजलि के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. मेरी रचना को चर्चा मंच में स्थान देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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  4. SACH ME FB YA SOCIAL media SE KAM NHI HOGA KUCH AGE KRNA HOGA

    https://www.techvipul.xyz/2019/02/how-to-make-website-for-free-in-hindi.html?m=1

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  5. सही कहा ज्योति जी युवाओं को भटकाव से रोकना भी श्रद्धांजलि है युवा वर्ग आतंकवादियों का साथ न दे तो आतंकवाद बढ़ने से स्वतः ही रुक जाय.....युवाओं का इस दिशा में बढना शायद उनकी मजबूरी हो मजबूरी जैसे बेरोजगारी या नशाखोरी.... आदि।देश का युवा प्रशिक्षित होकर भी बेरोजगार है मूलभूत आवश्यकताओं के लिए मारा मारा फिर रहा है ऐसे में भटकाव स्वाभाविक है....बाकी और भी अनेक कारण हैंं....

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  6. बहुत अच्छा लेख सखी
    सादर

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  7. Very strong and potential write up, agree with your points.
    We are in hope that one day such activities will come to an end but this is what we are expecting from last 72 years...

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  8. I have just joined today on indiblogger. My blog is antijihadclass. I blog about terror topics. Tomorrow, I will be submitting my post on this very issue. I look forward to an enlightening dialogue on this with you also on twitter

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  9. आपके लेख से पूरी तरह सहमत हूँ ज्योति जी , अब समय आ गया है कि कुछ ठोस कदम उठाये जाए, कब तक हमारे जवान मरते रहेंगे और हम फेसबुक पर श्रद्धांजलि अर्पित करते रहेंगे |

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नाम

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यशोदा,1,मातृभाषा,1,मायका,2,मारवाड़ी,1,मार्केट जैसे साबूदाना पापड़,1,माला,1,मावा कुल्फी,1,मासिक धर्म,2,माहवारी,3,मिठाई,17,मित्र,2,मिलावट,1,मिलावट पहचानने के घरेलू तरीके,1,मुक्ति,1,मुबारकपुर कला,1,मुरब्बा,1,मुस्लिम मंच,1,मुहूर्त,1,मूंग की सूखी दाल का हलवा,1,मूंगफली,1,मूंगफली की सूखी चटनी,1,मूली,3,मूली का अचार,1,मूली के पत्तों के कुरकुरे कटलेट्स,1,मेंस्ट्रुअल कप,1,मेंहदी,6,मेडिसिन बाबा,1,मेथी,1,मेथी दाना चुर्ण,1,मेथी मटर मलाई,1,मेनु,1,मेरा मंत्र,3,मेरी बात,15,मैंगो श्रीखंड,1,मैनर्स,1,रंग,1,रंग पंचमी,1,रक्तदान,1,रक्तदान के फायदे,1,रक्षाबंधन,1,रक्षाबंधन शायरी,1,रजस्वला नारी,3,रवा इडली,1,रसोई,92,रांगोली,3,राखी,1,राजभाषा,1,राजस्थानी समाज,2,राम रहीम,1,राशी-भविष्य,1,राष्ट्रगान,1,राष्ट्रगीत,1,राष्ट्रभाषा,1,रिती-रिवाज,1,रीतिरिवाज,1,रुपया-पैसा,1,रोटी,2,रोस्टेड मूंगफली,1,लघुकथा,9,लड्डू,2,लहसुन,1,लाइटर,1,लाल मिर्च की सूखी चटनी,1,लीव इन रिलेशनशिप,1,लेसुए,1,लॉटरी,1,लोकल ट्रेन,1,लोग क्या कहेंगे?,1,लौकी,2,लौकी का हलवा,1,लौकी की बड़ी,1,वक्त,1,वटसावित्री व्रत,1,वर,1,वर्जिनिटी टेस्ट,1,वर्तमान,1,वारी के 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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: पुलवामा हमला: सिर्फ़ सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देने से हमारा कर्तव्य पूरा नहीं होगा!!
पुलवामा हमला: सिर्फ़ सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देने से हमारा कर्तव्य पूरा नहीं होगा!!
पुलवामा हमले की जितनी निंदा की जाएं उतनी कम हैं। एक आम इंसान शहीदों को श्रद्धांजलि देने के अलावा कर भी क्या सकता हैं? नहीं दोस्तों, यहीं पर हम गलत हैं।
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
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