नहीं माँ, मैं नहीं आ पाउंगी...!!!

जानिए, दिल को छूती कड़वी सच्चाई...शादी के बाद बिदा होती शिल्पा ने अपनी माँ और भाई से ऐसा क्यों कहा कि जब उसका मन करे तब वो मायके उनसे मिलने नहीं आ सकती जबकि उसका ससुराल सिर्फ़ दो घंटे की दूरी पर था और ससुराल के लोग बहुत अच्छे थे!

नहीं माँ, मैं नहीं आ पाउंगी...!!!
शादी के बाद शिल्पा की बिदाई हो रही थी। उपस्थित सभी लोगों की आँखें नम थी। माहौल एकदम गमगीन था। बड़े भाई ने कहा, ''पढ़ाई करने पुणे जाने पर भी तो घर से, हम सब से दूर थी न! तो अभी भी सोच ले कि तू पढ़ाई करने ही बाहर जा रही हैं। जब दिल करे तब मिलने चली आना।'' माँ ने भी सांत्वना देते हुए कहा, ''ऐसे मत रो बेटा। कोई विदेश थोड़े ही जा रहीं हैं? दो घंटे का तो रास्ता हैं, जब दिल करे तब चली आना!'' 

तब शिल्पा ने कहा, ''नहीं माँ, जब मेरा दिल करे तब मैं नहीं आ पाऊंगी...ये बात मैं अच्छे से जानती हूं और आप भी ये बात बहुत अच्छे से जानती हैं।'' ''बेटा, तू ऐसा क्यों कह रहीं हैं? तेरे ससुराल के लोग बहुत ही अच्छे हैं। सास-ससूर तो इतने अच्छे हैं कि वो तुझे मम्मी-पापा की कमी महसूस ही नहीं होने देंगे। वो लोग हमसे भी ज्यादा ख्याल रखेंगे तेरी इच्छाओं का! और दामाद जी, वो तो लाखों में एक हैं। जान देते हैं तुम पर! वो तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी करने आकाश-पाताल एक कर देंगे। इतना अच्छा ससुराल और ससुराल वाले मिलने पर भी तुम ऐसा क्यों कह रहीं हो कि जब दिल करे तब नहीं आ पाउंगी?''

''मम्मी, आप भी तो अच्छी सास हो ना? भैया भी तो भाभी से बहुत प्यार करते हैं न? तो फ़िर भाभी क्यों नहीं जा पाती मायके जब उनका दिल करें?''
''जाती तो हैं...हर साल तो मायके जाती हैं तेरी भाभी!'' 
''हाँ मम्मी, भाभी हर साल मायके जाती हैं लेकिन जब उनके मायके वालों को भाभी की सख्त जरुरत थी, जब भाभी का भी बहुत दिल कर रहा था मायके जाने तब तो भाभी को आप लोगों ने नहीं भेजा था न? भाभी की बहन की शादी के दो दिन पहले भाभी की माँ को जोरदार अस्थामा का अटैक आया था। मरते-मरते बची थी वो। फेरे के वक्त किसी तरह उन्हें कन्यादान हेतु बैठाया गया था। ऐसे में भाभी के मायके वालों ने भैया से कितना कहा था कि 4-5 दिन भाभी को मायके में और छोड़ दीजिए ताकि भाभी की माँ को सहारा हो जाए। क्योंकि शादी के बाद भी शादी के घर में ढेर सारे काम होते हैं, उनकी बिमार माँ अकेली वो सब काम कैसे करती? लेकिन भैया ने यह कह कर भाभी को मायके नहीं छोड़ा था कि उनको मायके में पहले ही 8 दिन हो गए हैं। वो और ज्यादा मायके में रुकी तो आपको यहां काम करने में परेशानी होंगी! तब भाभी का कितना दिल कर रहा होगा मायके में रुकने के लिए। क्यों नहीं रहने दिया भैया आपने भाभी को 4-5 दिन और? क्या आप अच्छे पति नहीं थे? क्या आप भाभी से प्यार नहीं करते थे? फ़िर क्यों आपको भाभी की भावनाओं का ख्याल नहीं रहा?
मम्मी, जब भाभी के पिताजी की ओपन हार्ट सर्जरी होने वाली थी तब भाभी की मम्मी का फोन आया था कि उन्हें चिकन गुनिया हो गया हैं और पापा का ऑपरेशन अभी करना जरुरी हैं। ऐसे में कृपया बिटिया को 7-8 दिनों के लिए भेज दीजिए। तब आपने यह कह कर मना कर दिया था कि भाभी की चार-चार भुआ भी तो हैं, वे आकर रह सकती हैं! भाभी की मम्मी जिस तरह भाभी को कोई भी काम बता सकती थी, क्या उतनी ही सरलता से वे अपनी नणंद को काम बता सकती थी? क्या उस वक्त भाभी का मन अंदर-अंदर रो नहीं रहा होगा? क्या उनका दिल नहीं कर रहा होगा कि ऐसी परिस्थिती में उन्हें मम्मी-पापा के पास रहना चाहिए था। जब भाभी के मायके वालों को भाभी की सख्त जरुरत थी...जब भाभी का दिल मायके जाने को मचल रहा था...तब हमारा परिवार इतना अच्छा संस्कारवान, पढ़ा-लिखा होने के बावजूद, भाभी मायके नहीं जा सकी...तो मैं मेरे ससुराल से चाहे वह दो घंटे की दूरी पर ही क्यों न हो...जब मेरा दिल करे तब कैसे आ सकती हूँ? भैया, मम्मी, जब मेरा दिल करे तब मैं ससुराल से नहीं आ पाऊंगी...नहीं, मैं नहीं आ पाउंगी....!!!! ये कह कर शिल्पा फूट-फूट कर रोने लगी।

इमेज-गूगल से साभार

Keywords: Daughter, sasural, myka, women, laws house

COMMENTS

BLOGGER: 11
  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 22 जनवरी 2019 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. यही तो समाज की दोहरी मानसिकता है ,यथार्थ लेख.... ज्योति जी, सादर स्नेह

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (22-01-2019) को "गंगा-तट पर सन्त" (चर्चा अंक-3224) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    उत्तरायणी की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. रिश्तों की सामाजिक हक़ीक़त का सटीक चित्रण किया है आपने ज्योति जी !

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  5. सत्य बयान करती कहानी ...
    काश इंसान जो अपने लिए सोचता है वो ख़ुद का उदाहरण बन के दूसरों के लिए करे ... पर शायद यही सच है ...

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  6. धन्यवाद, यशोदा दी।

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  7. धन्यवाद,आदरणीय शास्त्री जी।

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  8. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  9. सुंदर व रोआंस पैदा करने वाला लेखन.
    ज्यादा कुछ बोल भी नहीं सकता क्यूंकि मैं भी इसी सिस्टम का हिस्सा हूँ.
    स्वागत है ठीक हो न जाएँ 

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  10. सही कहा ससुराल चाहे कितना भी पास होऔर ससुराल वाले कितने भी अच्छे हों ,बहू को पूछकर ही मायके जाना होता है जब मन करे तब...ये सब कहने की बात है ....लड़की विदाई के बाद पराई हो जाती है ...बहुत ही हृदयस्पर्शी कहानी...।

    उत्तर देंहटाएं
  11. सच्चाई को बयां करती बेहतरीन पोस्ट

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नाम

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पंचमी,1,रक्तदान,1,रक्तदान के फायदे,1,रक्षा बंधन,1,रक्षाबंधन,1,रक्षाबंधन शायरी,1,रजस्वला नारी,3,रवा इडली,1,रसोई,101,रांगोली,3,राखी,2,राजभाषा,1,राजस्थानी समाज,2,राम रहीम,1,राशी-भविष्य,1,राष्ट्रगान,1,राष्ट्रगीत,1,राष्ट्रभाषा,1,रिती-रिवाज,1,रीतिरिवाज,1,रुपया-पैसा,1,रेणुका मिश्रा,1,रोटी,2,रोस्टेड मूंगफली,1,लघुकथा,11,लड्डू,2,लहसुन,1,लाइटर,1,लाइफ स्किल्स,1,लाल मिर्च की सूखी चटनी,1,लीव इन रिलेशनशिप,1,लेसुए,1,लॉटरी,1,लोकल ट्रेन,1,लोकसभा चुनाव,1,लोग क्या कहेंगे?,1,लौंजी,1,लौकी,2,लौकी का हलवा,1,लौकी की बड़ी,1,वक्त,1,वटसावित्री व्रत,1,वर,1,वर्जिनिटी टेस्ट,1,वर्तमान,1,वारी के हनुमान,1,विधवा,1,विधवा ने किया कन्यादान,1,विधवा विवाह,1,विशाखापट्टनम रेप कांड,1,वृंदावन,1,वृद्धावस्था,1,वेजिटेबल डोसा,1,वेजिटेबल पैनकेक,1,वैलेंटाइन डे,1,वोट,1,वोट की किंमत,1,व्यंग,11,व्यायाम,1,व्रत,2,व्रत रेसिपी,15,व्रत स्पेशल,2,शकरकंद,2,शकरकंद की जलेबी,1,शकरकंद को कैसे भुने,1,शकुन-अपशकुन,1,शक्करपारे,1,शनि देव,1,शब्द,1,शरबत,4,शर्बत,1,शर्म,2,शादी,5,शादी की खरेदी,1,शादी की फ़िजूलखर्ची का बिल,1,शादी के सालगिरह की 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