हनुमान जी, आप खुद ही आकर क्यों नहीं बताते कि आपकी जाति क्या हैं?

आजकल देश में हनुमान जी की जाति बताने की होड मची हुई हैं। असल में हनुमान जी कौन सी जाति के थे...इस बात का फैसला कैसे होगा? हे हनुमान जी, आप खुद ही आकर क्यों नहीं बताते कि आपकी जाति क्या हैं?

व्यंग- हनुमान जी, आप खुद ही आकर क्यों नहीं बताते कि आपकी जाति क्या हैं?
आजकल देश में हनुमान जी की जाति बताने की होड मची हुई हैं। बोलनेवाला इस तरह बता रहा हैं, जैसे उसने पुराणों का गहन अध्ययन किया हो! हनुमान जी की जाति पर नेताओं की बयानबाजी सुनकर ऐसा लग रहा हैं कि जैसे हमारे देश में एकदम से अमन-शांती का माहौल हो गया हो। देश में ज्वलंत समस्यायें नगण्य हो गई हो। क्योंकि यदि ऐसा नहीं होता तो क्या हमारे देश के कर्णधारों को इतनी फुरसत मिलती कि वे हनुमान जी की जाति पर गहन शोध करके बयान देते? कोई हनुमान जी को 'दलित' बता रहा हैं तो कोई 'जाट'। कोई हनुमान जी को 'मुसलमान ' बता रहा हैं तो कोई 'क्षत्रिय'! ऐसी बयानबाजी देख कर तो हनुमान जी को बहुत दुख हो रहा होगा! क्योंकि मैं ने सुना हैं कि हनुमान जी अजरामर होने से पृथ्वी पर ही हैं। पृथ्वी पर ही होने से ये बयानबाजी उनके कानों तक जल्द पहूंच रही होगी! असल में हनुमान जी कौन सी जाति के थे...इस बात का फैसला कैसे होगा? हे हनुमान जी, आप खुद ही आकर क्यों नहीं बताते कि आपकी जाति क्या हैं? यही सब सोचते-सोचते रात को कब मुझे नींद लग गई पता ही नहीं चला।

थोड़ी ही देर में जोर से गर्जना सुनाई दी...''जय श्रीराम! जय श्रीराम!'' गर्जना के साथ ही अचानक साक्षात हनुमान जी मेरे सामने प्रगट हो गए! मैं एकदम आश्चर्यचकित रह गई। 
''हनुमान जी आप? मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा कि आप मुझे दर्शन दे सकते हैं? क्योंकि मैं ने मंगलवार और शनिवार के व्रत किए ही नहीं। फ़िर आप मुझ पर प्रसन्न होकर मुझे दर्शन कैसे दे सकते हैं? वैसे मुझे पूरा विश्वास हैं कि ईश्वर हैं। लेकिन मैं इन व्रत-उपवासों में विश्वास नहीं करती। मैं ने सुना हैं कि आपको प्रसन्न करने के लिए मंगलवार या शनिवार के उपवास करना पड़ता हैं। किंतु मैं तो...''
''तुमने आज मुझे सच्चे मन से स्मरण किया...इसलिए मैं ने तुम्हें दर्शन दिए। और दुसरी बात तुम एक ब्लॉगर हो। अत: तुम मेरी बात देश की जनता के सामने रख सकती हो। यहीं सोच कर मैं तुम्हारे सामने प्रगट हुआ हूँ। अब बताओ क्या समस्या हैं?''
''हनुमान जी, आप तो सर्वज्ञ हैं...आप सब जानते हैं। फ़िर भी आप मेरे मुंह से सुनना चाहते हैं, तो सुनिए...
सबसे पहले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27 नवंबर को राजस्थान के अलवर में चुनावी रैली में भाषण के दौरान आपको 'दलित' बताया। उनके इस बयान के बाद देश भर में आपकी जाति को लेकर राजनीति होने लगी। यूपी में बीजेपी के एमएलसी बुक्कल नवाब ने आपको मुसलमान बताया। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि इस्लाम में कई नाम आपके नाम से मिलते-जुलते हैं। जैसे कि रहमान, रमजान, फरमान, जीशान, कुर्बान आदि। बीजेपी सांसद उदित राज ने आपको आदिवासी बताया तो कीर्ति आजाद ने आपको चीनी बताया। उत्तर प्रदेश के धर्मार्थ कार्यमंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने आपको जाट बताया तो बाबा रामदेव ने आपको क्षत्रिय बताया। राज्यसभा सांसद गोपाल नारायण सिंह ने तो हद कर दी। उन्होंने कहा कि हनुमान जी तो बंदर थे और बंदर पशु होता हैं, जिसका दर्जा दलित से भी नीचे होता हैं। वो तो राम ने उन्हें भगवान बना दिया...इस तरह आपकी जाति को लेकर बयानबाजी हो रही हैं। मुझे एक बात समझ में नहीं आती कि ये देश के कर्णधार देश की समस्याएं हल करने की बजाय आपकी जाति के पीछे क्यों पड़े हैं? आपकी जाति कोई भी हो, इससे आम जनता को और आपको क्या फ़र्क पड़ने वाला हैं? यदि आप मुसलमान साबित हो गये तो संभव हैं कि हिंदू आपकी पूजा करना बंद कर देंगे। पूजा करने के लिए हिंदुओं के पास तो वैसे भी देवी-देवताओं की कमी नहीं हैं। हिंदू दुसरे देवताओं को ज्यादा पूजने लगेंगे! और रहा सवाल आपका तो आप तो साक्षात ईश्वर ही हो। यदि हिंदुओं ने आपकी पूजा करना बंद कर दी तो भी आपको कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला। फ़िर ये उलटी-सुलटी बयानबाजी क्यों?''
हनुमान जी ने कहा, ''ऐसा हैं कि मेरी जाति को लेकर जिस तरह की बयानबाजी हो रही हैं, वो सुन कर मैं खुद अचंभित हूँ। असल में देश की ज्वलंत समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए ही ऐसी बेतुकी बयानबाजी की जा रहीं हैं। मैं तुम्हें राज की बात बताता हूँ...असल में मेरी जाती कौन सी हैं इस बारे में नैं ने कभी सोचा ही नहीं और न ही सोचना चाहता हूँ! क्योंकि मैं ने कभी भी अपने आप को हिंदू, मुस्लिम, जाट और क्षत्रिय इन रुपों में देखा ही नहीं और न ही देखना चाहता हूं! मेरा तो एक ही धर्म हैं, एक ही जाति हैं और एक ही पहचान हैं और वो हैं रामभक्त हनुमान! मैं चाहता हूं कि पूरी दुनिया मुझे इसी रुप में पहचाने रामभक्त हनुमान। अपने रामभक्त होने का प्रमाण देने के लिए ही भरे दरबार में मैं ने अपनी छाती चीर कर प्रभु श्रीराम और माता सीता को दिखाया था। इतना बड़ा प्रमाण देने पर भी इंसान मेरे नाम को तुच्छ जातियों से जोड़ रहा हैं? अपने ब्लॉग के माध्यम से सबको बता देना कि मैं अंजनी पुत्र हनुमान, रामभक्त था...रामभक्त हूँ...और रामभक्त हनुमान ही रहूंगा!! ये लोग मेरी जाति को लेकर कितनी भी राजनीति कर ले मैं हमेशा 'रामभक्त हनुमान' ही कहलाऊंगा!!!
इतना कह कर 'जय श्रीराम' की गर्जना करते हुए वे अंतर्ध्यान हो गए।

Keywords: hanuman, God, God bajrangbali, cast, religion

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