हिंदी दिवस: हिंदी बोलने पर शर्म नहीं, गर्व कीजिए...

इंसान की कल्पनाशक्ती का विकास मातृभाषा में ही हो सकता हैं। सच्चाई यहीं हैं कि अंग्रेजी की तुलना में हिंदी इंसान को ज्यादा समृद्ध बना सकती हैं।

हिंदी दिवस: हिंदी बोलने पर शर्म नहीं, गर्व कीजिए...
हिंदी हमारी राजभाषा हैं। आज भी कई लोग हिंदी को ही राष्ट्रभाषा समझते हैं! लेकिन हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं, राजभाषा हैं!! भारत की कोई राष्ट्रभाषा नहीं हैं। क्योंकि भारत में कई प्राचीन भाषाएं हैं जो पूरी तरह विकसित हैं और बड़े जनसमूह द्वारा बोली जाती हैं। भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी हैं। हमारे देश के 77% लोग हिंदी लिखते, पढ़ते, बोलते और समझते हैं। हिंदी उनके कामकाज का भी हिस्सा हैं। इसलिए 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा घोषित किया। इसी निर्णय के चलते सन 1953 से संपूर्ण भारत में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ मनाया जाता हैं।

किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी भाषा और संस्कृति से होती हैं। हमें दूसरों की भाषा सीखने का मौका मिले यह अच्छी बात हैं लेकिन दूसरों की भाषा के चलते हमें अपनी मातृभाषा को छोड़ना पड़े तो कहीं न कहीं दिक्कत का सामना ज़रुर करना पड़ता हैं। हमने अंग्रेजी को हिंदी में इतना ज्यादा मिला दिया हैं कि शुद्ध हिंदी लिखना ही भूल गए। बाजार में विभिन्न दुकानों के नामों पर गौर कीजिए...

• अजय सर्विस सेंटर
• संजय फोटो कॉपी सेंटर
• विजय हेयर कटिंग सैलून
• अभय बार एंड होटल
• अनय हॉस्पिटल
• मोहन लॉन
• सुदिप मेडिकल स्टोर
• संदीप बिरयानी कॉर्नर

और आजकल व्हाट्स एप जैसे सोशल मीडिया पर तो हिंदी ऐसे लिखी जा रही हैं कि बेचारी हिंदी को ही शर्म आती होगी। शायद ही दुनिया में 'हिंदी दिवस' की तरह किसी और भाषा के नाम पर दिवस का आयोजन होता हो! क्योंकि दुनिया के हर मुल्क के लोगों को अपनी भाषा पर गर्व हैं। और गर्व होने की बात वे लोग सिर्फ़ बोलते ही नहीं तो उसे व्यवहार में अपनाते भी हैं। लेकिन हम लोग हिंदी दिवस पर 'हिंदी हमारी मातृभाषा हैं, हमें हिंदी पर गर्व हैं...' ऐसा बोलते तो हैं पर असलियत में हिंदी में बातचीत करने वालों को आज भी हेय दृष्टि से ही देखा जाता हैं। यदि कोई व्यक्ति दो-चार वाक्य फर्राटेदार अंग्रेजी में बोलता हैं तो सब उसे बहुत होशियार समझते हैं।
एक बार एक नेता द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर दिए गए भाषण के कुछ अंश देखिए। आज अपने देश में हिंदी की क्या हालत हैं यह समझ में आ जाएगा।

''लेडीज एंड जेंटलमेन, ब्रदर्स एंड सिस्टर्स,
हम इंडिया के सिटिजन हैं।
हिंदी में बोलना हमारी ड्युटी हैं, पर हिंदी की किस्मत फूटी हैं!
आज की यंग जनरेशन व्हेनएव्हर माउथ खोलती हैं,
ओनली एंड ओनली इंग्लिश बोलती हैं,
परसन की एबिलिटी को अंग्रेजियत में तोलती हैं।
यह कम्पलिटली रॉंग हैं।
हमें हिंदी को अपने डेली यूज में लाना हैं।
हिंदी को वर्ल्ड में फैलाना हैं।
आओ हिंदी को स्ट्रॉंग बनाएं...
सभी भारतीय हिंदी यूज करें...
क्योंकि वुई लव हिंदी...
वुई लव इंडिया...!!!''

दोस्तों, कैसी लगी आपको नेताजी की हिंदी? इन थोड़ी सी पंक्तियों से ही हिंदी की वर्तमान स्थिति स्पष्ट हो जाती हैं। जब बच्चे का जन्म होता हैं तो घर के लोगों से हिंदी सुन कर बच्चा भी हिंदी बोलने और समझने लगता हैं। पर जैसे ही बच्चे को स्कूल भेजने की बात आती हैं तो हिंदी मीडियम स्कूलों के हालात अच्छे न होने से हमारे पास बच्चे को अंग्रेजी स्कूल में भेजने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं रहता। यहीं से बच्चे की हिंदी कमजोर होने लगती हैं। इसलिए ही अंग्रेजी में पढ़ा-लिखा नौजवान सब्जी वाले से हिसाब-किताब करते वक्त उन्यासी और नवासी का फर्क समझ नहीं पाता। सच्चाई यहीं हैं कि अंग्रेजी की तुलना में हिंदी इंसान को ज्यादा समृद्ध बना सकती हैं। लेकिन तकनीक और बाजार में अंग्रेजी का दबदबा कायम होने से हिंदी रोजी-रोटी का मजबूत जरिया नहीं बन सकती।

फ़िर भी हमें हिंदी पर गर्व होना चाहिए, क्योंकि...
• हिंदी की खास बात यह हैं कि इसमें जिस शब्द को जिस प्रकार उच्चारित किया जाता हैं, उसे लिपि में लिखा भी उसी प्रकार जाता हैं।
• इंसान की कल्पनाशक्ती का विकास मातृभाषा में ही हो सकता हैं।
• इंग्लिश आज की जरुरत हैं। लेकिन क्या जरुरत के लिए नींव को छोड़ा जा सकता हैं?
• आज दैनंदिन काम भी इंटरनेट के बिना नहीं हो सकते। जरा सोचिए, यदि इंटरनेट का उपयोग करने के लिए हर एक व्यक्ति पहले इंग्लिश लिखना-पढ़ना सिखेगा तो इंग्लिश सिखने में ही उसको बहुत समय लग जाएगा। तो वह अपने काम समय पर कैसे पूरे करेगा? इसलिए ही गूगल खुद भी आजकल हिंदी को प्रोत्साहन दे रहा हैं।
• अंग्रेजी भाषा 'A for apple से मतलब एक फल से शुरू हो कर Z for zebra' याने एक जानवर पर खत्म होती हैं। लेकिन हमारी हिंदी भाषा 'अ अननस का से शुरु हो कर मतलब एक फल से शुरु होकर ज्ञ ज्ञानी का' पर खत्म होती हैं। दूसरे उदाहरण में 'अ अनपढ़ का से शुरु हो कर ज्ञ ज्ञानी का' पर खत्म होती हैं। याने हिंदी भाषा एक अनपढ़ को ज्ञानी बनाती हैं तो अंग्रेजी जानवर!
• हिंदी हमारी अपनी भाषा हैं और अंग्रेजी मेहमान हैं। हमें इस बात पर गौर करना चाहिए कि मेहमान, आखिरकार मेहमान होता हैं...उसे घर का सदस्य नहीं बनाया जा सकता!!
हिंदी उच्च नीच को नहीं मानती इसलिए हिंदी में • न ही कोई कैपिटल लेटर होता हैं और न ही कोई स्मॉल। इतना ही नहीं तो आधे अक्षर को साथ देने के लिए पूरा अक्षर हमेशा तैयार रहता हैं।

अत: हमें हिंदी बोलने पर शर्म नहीं, गर्व करना चाहिए!!
                   हर भाषा की इज्जत करों,
                         पर हिंदी को न बेइज्जत करों!!!

 Keywords: Hindi divas, Rashtrabhasha, rajbhasha, mother tongue, matrubhasha

COMMENTS

BLOGGER: 40
  1. हिंदी दिवस पर लिखा गया अच्छा लेख, ज्योति दी :)

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (03-09-2018) को "योगिराज का जन्मदिन" (चर्चा अंक- 3083) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    श्री कृष्ण जन्मोत्सव की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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  3. बहुत अच्छी तरह से लिखा है लेख। ज्योती जी

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  4. अपनी राष्ट्रभाषा हिन्दी पर विचारणीय सारगर्भित लेख ज्योति जी ।

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  5. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, नए दौर की गुलामी “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  6. हमेशा की तरह बहुत ही अच्छा आर्टिकल। Share करने के लिए धन्यवाद। :)

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  7. Very logical post in Hindi language, even the distortions is Bengali among the Bengali speaking people i have noticed several time...so ridiculous it is.
    Yes, it has became a trend to send the children in English medium schools and sometime they are scolded badly for speaking or replying in Hindi(In Bengali also).

    The change is not possible if certain individuals respect the language until vast people are involved.

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  8. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 04/09/2018
    को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

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  9. अंग्रेजी z फॉर ज़ेबरा यानी जानवर पर खत्म होती है और हिंदी ज्ञ से ज्ञानी पर ... बहुत सुंदर अनोखा तर्क दिया आपने ज्योति जी |अंग्रेजी के अलावा हिंदी या कोई भी भाषा बोलने में अपने को कम पढ़ा -लिखा समझना मूर्खता है परतु ऐसा होता जा रहा है | ये तो भला हो इन्टरनेट का जिसकी वजह से हिंदी का प्रचार प्रसार बढ़ा और केवल हिंदी पढने समझने वाले लोग भी अपने ज्ञान में बढ़ोत्तरी कर पाए | हिंदी पखवारे पर एक सार्थक लेख ... बधाई

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  10. हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं, राजभाषा हैं
    ये सच कितना कटु है, हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा न मिलना, दुःखद है
    बहुत अच्छी प्रेरक प्रस्तुति

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  11. मानसिक गुलामी ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही। दुकानों इत्यादि के नामों में अंग्रेजी की बैसाखी तो लगती ही है, भाई लोग मंदिरों को भी नहीं छोड़ते ! जनकपुरी में एक चतुर विद्वान ने पैदल पथ पर एक मंदिर बना नाम रख दिया ''ग्रैजुएट हनुमान मंदिर'' ! लोग आते भी हैं ! मंगल-शनि पर चढ़ावा भी चढ़ता है !!

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  12. जी, आपने सही कहा हिन्दी हमारे देश की राज भाषा है। हमे इसमें अपने विचार व्यक्त करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए और न ही शर्म महसूस करनी चाहिए। हाँ, आपने लेख में कुछ उदाहरण दिए हैं जैसे फोटो कॉपी,प्रिंट इत्यादि। मेरा मानना है कि हिन्दी में इन शब्दों को जस का तस प्रयोग करना चाहिए। इनकी उत्पत्ति उधर ही हुई है इसलिए इनका अनुवाद करना वैसे ही होगा जैसे पीटर नाम को हिंदी में अनूदित करना। बाकी बढ़िया लेख। काफी जरूरी बातों पर प्रकाश डालता है। आभार आपका।

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    1. विकास जी, मैं ने अपने लेख में यह कहीं नहीं कहा कि फोटो कॉपी,प्रिंट इत्यादि शब्दों का उपयोग करना गलत हैं। मैं ने तो सिर्फ़ यह बताया हैं कि हिंदी में अंग्रेजी भाषा कैसे मिल गई हैं! वैसे भी सर्वे बताते हैं कि जो भाषा दूसरी भाषा को अपने में समाहित करती हैं वो उतनी ही समृद्दध होती हैंं। वैसे भी शुद्ध हिंदी बोलना या लिखना आज हमारे लिए एक नामुमकिन काम हो गया हैं। यदि हम रेलगाडी को लोहपथगामिनी कहेंगे तो कितने लोगों को समझेगा?

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    2. जी, आपने सही कहा। जिस चीज की उत्पप्ति जिधर होती है वही नाम इस्तेमाल करने के लिए सही होता है। अब खीर, पूरी, भठूरे,जलेबी इत्यादि को अंग्रेजी में भी यही कहा जाएगा। इनका अनुवाद वो करने लगे तो नानी याद आना तय है।
      मैने ईमेल वगेरह के लिए भाषा की सेटिंग हिंदी करी हुई है। उधर अनुवाद का प्रकोप देखने को मिलता है। यही हाल word या गूगल drive का भी है। कई बार अनुवाद के चक्कर में चीजें और कठिन हो जाती हैं जिससे उसका उपयोग अपने आप घट जाता है।

      जी, भाषा तो वही रहेगी जो सबको अपना बनाकर आगे बढ़ेगी। मुझे लगता है हिंदी का सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों ने किया है जो शुद्धता के नाम पर इसे जड़ बनाना चाहते हैं। यह आम जनमानस से भाषा को काटती है और इसे अकादमियों या सरकारी दफ्तरों तक ही इसे सीमित रखती है।

      हमे एक बीच का रास्ता अपनाना होगा ताकि भाषा की सहजता और गरिमा दोनों बनी रहें।

      मेरी टिप्पणी से अगर आपको बुरा लगा हो तो माफ़ी। मैं यह कहना चाह रहा था कि क्योंकि हम लोग ग्लोबलाइजेशन के दौर में हैं और अलग अलग जगह से निर्मित वस्तुओं और तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं तो ऐसे में इन चीजों और तकनीक के नाम को जस का तस भाषा में प्रयोग करेंगे। शायद मैं ढंग से अपनी बात लिख न सका।

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    3. विकास जी, बुरा लगने लायक ऐसा कुछ भी गलत आपने नहीं लिखा हैं। मुझे तो खुशी हैं कि आपने मेरा लेख ध्यानपूर्वक पढ़ा और उस पर सविस्तर टिप्पणी भी की। बहुत बहुत धन्यवाद, आपका।

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  13. अरे दी,क्या करियेगा,आधुनिक समाज में बदलाव की हवा में हिंदी बोलकर कौन अपने को गँवार दिखाये।सही कहा गगन जी ने मानसिक गुलामी केक्षशिकार हैं हम सब।
    हमेशा की.तरह बेहद प्रेरक लेख है।

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  14. बेहद जानदार लेख

    हिंदी में मिलावट हिंदी का कमजोर होना नही है बल्कि हिंदी के दायरे का विकाश का घोतक होना चाहिए
    चाहे वह अंग्रेजी की मिलावट हो चाहे वह पंजाबी की हो या फिर अन्य किसी भी बोली या भाषा की हो.

    मिलावटी रूप में ही क्यूँ न हो वह बोलचाल की भाषा जरुर होनी चाहिए.

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    उत्तर
    1. रोहोतास जी, मैं ने लेख में यह नहीं कहा हैं कि हिंदी में मिलावट से हिंदी कमजोर होती हैं। आपने सही कहा कि मिलावट से हिंदी का विकास ही होगा।

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  15. bilkul shi title chuna hain apne, aisa hona hi chiaye

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  16. हालाँकि मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ की "हिंदी भाषा एक अनपढ़ को ज्ञानी बनाती हैं तो अंग्रेजी जानवर!" लेकिन आपके लेख के उद्द्येश्य से ज़रूर सहमत हूँ I हिंदी के पिछड़ने का एक कारण यह भी है की ऊँचे स्तर की पढ़ाई जिसमे भौतिकी, रसायन शाश्त्र ,जिव विज्ञान, भू विज्ञान आदि शामिल है, तो उसके समझ के अंतर्राष्ट्रीय आदान प्रदान में अंग्रेजी जिस सुविधाजनक रूप से काम में आ सकती है शायद उतनी सुविधाजनक हिंदी न हो I तो एक जोड़ने वाली भाषा के रूप में अंग्रेजी का स्थान तो है I भाषा की लचीलता का भी एक महत्व है की क्या एक भाषा हर प्रकार के विचार को सम्प्रेषित करने में सक्षम है ? और अगर हाँ तो वो लोकप्रिय होगी हीं होगी I लेकिन शायद कभी संस्कृत के जैसे, जिसमे हर प्रकार के वैज्ञानिक विषयों पे टिकाएं उपलब्ध होती थीं और हैं और उसका अध्ययन अंग्रेजी बोलने वाले लोग भी करते हैं और करते रहे हैं , वो स्थान हिंदी भी पा जाए लेकिन इसके लिए देश की क्षमता और उसके विकास का भी अपना महत्त्व है I

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  17. नीरज जी, अंग्रेजी इंसान को जानवर बनाती हैं इस वाक्य का शब्दशः मतलब सही नहीं हो सकता। कोई भी भाषा इंसान को जानवर नहीं बना सकती। ये उदाहरण सिर्फ हिंदी और अंग्रेजी की वर्णमाला के दृष्टिकोण से व्यंगात्मक रूप में दिया गया हैं।
    आपने बिल्कुल सही कहा कि यदि विज्ञान आदि विषय हिंदी में सरलता से उपलब्ध हो तो हिंदी का विकास हो सकता है।
    इतनी सविस्तर और बढ़िया टिप्पणी के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

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  18. बहुत बढ़िया | हिंदी हमें सबसे प्यारी |

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  19. इस लेख को पढ़कर मुझे भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित प्रसिद्ध कविता “मातृभाषा के प्रति” याद आ गयी, जिसकी चार पंक्तियाँ यह हैं :- निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
    बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल ।

    अंग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन
    पै निज भाषा-ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन ।

    सच में आज हिंदी आगे बढ़ रही हैं, लेकिन इसमें इंग्लिश के शब्द इतने ज्यादा शामिल हो गये हैं की अब हिंदी से परिवर्तित होकर हिंगलिश बन गयी हैं. हिंदी बोलने, लिखने और पढ़ने में स्वयं को गौरवान्वित होना चाहिए. माना की अंग्रेजी आज के युग में विकास के लिए जरूरी हैं, परन्तु हिंदी हमारी आत्मा हैं. हिंदी को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना खुद भारत में ही करना पड़ता हैं, खास करके दक्षिण भारत के राज्य हिंदी को पसंद नहीं करते है. हिंदी हर सच्चे भारतीय को आनी ही चाहिए...

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  20. कबीर जी,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित प्रसिद्ध कविता के अंश बहुत ही अच्छे हैं। शेयर करने के लिए धन्यवाद। इतनी सारगर्भित टिप्पणी के लिए भी आभार।

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  21. Bilkul sahi kaha mam apne muje garv hai hindi pe Hindustan pe par kuch log hai jo khud ko angrej ke bache samj liye hindi me kuch bol to asa shock hote hai jase asli angrej ye hi thi saram ani chahiye jise hindi nahi ata ya jo hindi ka majak udate hai jai hindi diwas amar rahe

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  22. प्रिय ज्योति बहन आपने हिन्दी को लेकर बहुत ही सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किए चिंतन देती आपकी व्याख्याएं सटीक है ।
    हम हर भाषा को मान लें, सीखें कोई ग़लत नहीं हैं बस मां को मां का स्थान दें मौसी के लाड़ में मां को न भुलें।
    आपका लेख बहुत ही मनोवैज्ञानिक है साथ ही बहुआयामी भी ।
    साधुवाद।

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  23. हिंदी उच्च नीच को नहीं मानती इसलिए हिंदी में • न ही कोई कैपिटल लेटर होता हैं और न ही कोई स्मॉल। इतना ही नहीं तो आधे अक्षर को साथ देने के लिए पूरा अक्षर हमेशा तैयार रहता हैं।

    पूरे लेख का सार ये अन्तिम पंक्तियां हिन्दी की महानता और गौरव का प्रतीक....
    बहुत ही सारगर्भित लेख के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं ज्योति जी!

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  24. मैंने अभी आपका ब्लॉग पढ़ा है, यह बहुत ही ज्ञानवर्धक और मददगार है।

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  25. ज्योति, हिंदी दिवस पर किसी मूर्ख नेता का बचकाना भाषण उद्धृत करना तो एक गंभीर विषय को मज़ाकिया मोड़ देने जैसा है. अध्यापन में सारी उम्र बिताने के बाद मैं तो इस नतीजे पर पहुंचा हूँ कि फ़िलहाल भारत में तरक्की करने के लिए नई पीढ़ी को अंग्रेज़ी तो सीखनी ही पड़ेगी और अगर हो सके तो कोई अन्य भाषा जैसे चीनी या जापानी भी कोई सीख ले तो उसे आगे बढ़ने से फिर कोई नहीं रोक सकता. हिंदी की विशेषता गिनाते समय हमको यह नहीं भूलना चाहिए कि सिर्फ़ हिंदी का ज्ञान हमको सफल नेता तो बना सकता है लेकिन अन्य क्षेत्रों में हमारा पिछड़ना तय है. हमारे-तुम्हारे जैसे पढ़े-लिखे हिंदी भाषी शायद ही कोई अन्य भारतीय भाषाएँ जानते हैं. क्या यह हमारे लिए शर्म की बात नहीं है? तमिल और बांगला जैसी महान भाषाओँ के ग्रंथों को मूल रूप में हम हिंदी भाषी पढ़ ही नहीं सकते. हिंदी का विकास हो रहा है पर वह बाज़ार की आवश्यकता है. हिंदी का प्रचार मुम्बैया सिनेमा की बदौलत हो रहा है तो इस पर भी हमको गर्व करने का अधिकार नहीं है. हमने हिंदी को सक्षम बनाने के लिए कुछ नहीं किया है. मुझे हिंदी बोलने में शर्म नहीं आती लेकिन मुझे हम हिंदी भाषियों की काहिली पर, हमारी हठवादिता पर बहुत शर्म आती है.

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    1. गोपेश भाई, नेता का बचकाना भाषण इसलिए ताकि हमारे नेता लोग हिंदी के नाम पर क्या क्या और कैसे बोलते है यह बता सकु।
      मैं आपके इस कथन से, ""मुझे हिंदी बोलने में शर्म नहीं आती लेकिन मुझे हम हिंदी भाषियों की काहिली पर, हमारी हठवादिता पर बहुत शर्म आती है." सहमत हूं।
      सार्थक प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद।

      हटाएं
  26. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (15-9 -2020 ) को "हिंदी बोलने पर शर्म नहीं, गर्व कीजिए" (चर्चा अंक 3825) पर भी होगी,आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    ---
    कामिनी सिन्हा

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    उत्तर
    1. मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, कामिनी दी।

      हटाएं

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'रेप प्रूफ पैंटी',1,#मीटू अभियान,1,#साड़ीट्विटर,1,10 मिनट रेसिपी,1,14 नवम्बर,1,15 अगस्त,3,25 दिसम्बर,1,26 जनवरी,1,5000 रुपए किलों का गुड़,1,8 मार्च,4,अंंधविश्वास,1,अंकुरित अनाज,1,अंगदान,1,अंगुठी,1,अंगूर,1,अंगूर की लौंजी,1,अंगूर की सब्जी,1,अंग्रेजी,2,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस,6,अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस,1,अंतिम संस्कार,1,अंधविश्वास,21,अंधश्रद्धा,18,अंधश्रध्दा,3,अंश,1,अग्निपरीक्षा,1,अग्रवाल,1,अग्रसेन जयंती,1,अग्रसेन जयंती की शुभकामनाएं,1,अचार,13,अच्छी पत्नी,1,अच्छी पत्नी चाहिए तो...,1,अच्छे काम,1,अजब-गजब,3,अजय नागर,1,अतित,1,अदरक,1,अदरक का चूर्ण,1,अदरक-लहसुन पेस्ट,1,अनमोल वचन,10,अनरसा,1,अनुदान,1,अनुप जलोटा,1,अनोखी शादी,1,अन्न,1,अन्य,32,अन्याय,1,अपमान,1,अपेक्षा,1,अप्पे,4,अमरुद,1,अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी,1,अमीरी,1,अमेजन,1,अरबी,1,अरुणा शानबाग,1,अरुनाचलम मुरुगनांथम,1,अलगाव,1,अवधेश,1,अवार्ड,2,अशोक चक्रधारी,1,असली हीरो,23,अस्पताल,1,अस्पतालों में बच्चों की मौत,1,आंवला,8,आंवला कैंडी,1,आंवला चटनी,1,आंवला मुरब्बा,1,आंवला लौंजी,1,आंवले का अचार,1,आंवले का शरबत,1,आंवले की गटागट,1,आइसक्रीम,1,आईसीयू ग्रेंडपा,1,आग,1,आज के जमाने की अच्छाइयां,1,आजादी,2,आज़ादी,1,आतंकवादी,2,आत्महत्या,5,आत्मा,1,आदित्य तिवारी,1,आम,10,आम का अचार,1,आम का पना,2,आम का मुरब्बा,2,आम की बर्फी,1,आम पापड़,1,आयशा खान,1,आयशा सुसाइड साबरमती,1,आरओ,1,आरक्षण,3,आरती मोर्य,1,आलू,6,आलू की पापडी,1,आलू की मठरी,1,आलू की सब्जी,1,आलू को स्टोर करना,1,आलू चाट पराठा,1,आलू पोहा अप्पे,1,आलू प्याज के स्टफ्ड पकोड़े,1,आलू साबूदाना पापड़,1,इंसान,2,इंसानियत का पाठ,1,इंस्टंट डोसा,2,इंस्टंट पनीर मखनी,1,इंस्टंट मावा,1,इंस्टंट स्नैक्स,1,इंस्टट ढोकला,1,इंस्टेंट कलाकंद बर्फी,1,इंस्टेंट कुल्फी,1,इंस्टेंट मिठाई,1,इडली,3,इन्डियन टाइम,1,इमली,1,इरोम शर्मिला,1,ईद,1,ईश्वर,7,ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना,1,ईसा मसीह,1,उटी,1,उपमा,3,उपवास,1,उपवास का हांडवो,1,उपवास की इडली,1,उपहार,2,उमा शर्मा,1,उम्र,1,उम्र का लिहाज,1,ऋषि पंचमी,1,एक सवाल,1,एल्युमिनियम फॉयल पेपर,1,ऐनी दिव्या,1,ऐश ट्रे,1,ऐस्टरॉइड,1,ऑनलाइन,1,ओट्स,1,ओट्स वेजिटेबल ढोकला,1,ओरैया,1,और इज्जत बच गई,1,औरंगाबाद हादसा,1,कंघा,1,कंडेंस्ड मिल्क,1,कंसन्ट्रेट आम पना,1,कच्चे आम,1,कच्चे आम का चटपटा पापड़,1,कछुआ,1,कटलेट्स,1,कढ़ी,1,कद्दु,1,कद्दु के गुलगुले,1,कद्दू,1,कद्दू का बेसन,1,कन्यादान,3,कबीर सिंह मूवी,1,कम तेल की रेसिपी,1,कमाने वाली बहू,1,करवा चौथ,2,करवा चौथ शायरी,1,करवा-चौथ,5,कल्पना सरोज,1,कल्याणी श्रीवास्तव,1,कहानी,37,कांजी,1,काजू,1,काजू करी,1,कानून,1,कामवाली बाई,4,कालीन,1,किचन टिप्स,17,किटी पार्टी,1,किन्नर,1,कियारा आडवानी,1,किराए पर बीवियां,1,किसान,1,किसान आंदोलन,1,कुंडली मिलान,1,कुंबाकोणाम,1,कुंभ मेला,1,कुरकुरे,1,कुरकुरे भिंडी बाइट्स,1,कुल्फी,1,कुल्फी प्रीमिक्स,1,कूकर,1,कृषि विधेयक 2020,1,केईएम् अस्पताल,1,केचप,1,कैंडी,1,कैरी मिनाती,1,कॉर्न,4,कॉर्न इडली,1,कोंडागांव,1,कोको कोला,1,कोरोना,4,कोरोना टिप्स,1,कोरोना वरीयर्स,2,कोरोना वायरस,8,कोरोना वैक्सीन,1,कोल्ड ड्रिंक,2,कोविड-19,2,कोवीड-19,2,कौए,1,क्रिसमस डे,2,क्रिसमस डे की शुभकामनाएं,1,क्रिस्टियानो रोनाल्डो,1,क्रिस्पी डोसा बनाने के सिक्रेट्स,1,क्षमा,2,खजूर,1,खत,6,खबर,3,खरबूजा,2,खरबूजे का शरबत,1,खरेदी,1,खांडवी,1,खाद्य पदार्थ,1,खाना,1,खारक,1,खारी गरम,1,खाली पेट चाय,1,खीर,1,खुले में शौच,1,खुशी,2,खेल,1,खोया,2,गणतंत्र दिवस,1,गणेश चतुर्थी,3,गणेश चतुर्थी पर शायरी,1,गणेश चतुर्थी प्रसाद रेसिपी,1,गणेश जी,1,गन्ने का रस,1,गरम मसाला,1,गर्दन दर्द,1,गर्भावस्था,1,गर्भाशय,1,गलत व्यवहार,1,गलती,2,गांधी जयंती,1,गाजर,6,गाजर अप्पे,1,गाजर के पैनकेक,1,गाजर के लड्डू,1,गाजर मूली का अचार,1,गाजर-मूली के दही बडे,1,गाय,1,गाली,1,गुजरात,1,गुजराती डिश,1,गुजिया,1,गुड़,1,गुड टच और बैड टच,2,गुड़हल,1,गुनगुना पानी,1,गुरु पूर्णिमा,1,गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं,1,गुलगुले,1,गुलाब जामुन,1,गुस्सा,1,गृहस्वामिनी,1,गेहूं,1,गेहूं का आटा,1,गेहूं के आटे की मठरी,1,गैस बर्नर,2,गोभी और चना दाल के बडे,1,गोरखपुर,1,गोरा रंग,1,गोल्डन ग्रेवी प्रीमिक्स,1,गोल्फ,1,गौरी पराशर,1,ग्रीन टी,1,घंटी,1,घिया,1,घी,2,घी की नदी,1,घी खाने के फायदे,1,चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति,1,चकली,1,चटनी,9,चमत्कार,1,चाँद पर जमीन,1,चाय,2,चाय मसाला,1,चावल,3,चावल के पापड़,1,चावल के फ्रायम,1,चाशनी,1,चाशनी वाली मावा गुजिया,1,चींटी,1,चींटीया,1,चीज,1,चीनी देवता,1,चीला,4,चुर्ण,1,चूर्ण,6,छाछ,1,छींक,1,छोटी बाते,1,छोटे लेकिन काम के टिप्स,5,जज्बा,2,जनसंख्या,1,जन्मदिन,3,जन्मदिन की शुभकामनाएं,2,जन्माष्टमी,3,जन्माष्टमी रेसिपी,1,जमाना,1,जलेबी,1,जाट आंदोलन,1,जात-पात,1,जाति,2,जादुई दिया,1,जाम,1,जास्वंद,1,जिंदगी,2,जिम्नास्टिक,1,जींस,1,जीएसटी,1,जीरो ऑइल रेसिपी,5,जोक्स,5,जोमैटो,1,जोयिता मंडल,1,जोरु का गुलाम,1,ज्योतिष विद्या,1,ज्वार की रोटी,1,ज्वेलरी,1,झारखंड,1,झाले-वारणे,2,झूठ,1,टमाटर,1,टमाटर केचप,1,टमाटर प्यूरी,1,टमाटर सूप,1,टिप्स कॉर्नर,61,टी.व्ही. और सिनेमा,1,टोक्यो ओलंपिक,1,टोमैटो केचप,1,ठंडा पानी,1,ठंडे पेय,6,ठेचा,1,डर,2,डैंड्रफ,1,डॉक्टर,2,डॉटर्स डे,2,डोनाल्ड ट्रम्प,1,डोसा,2,ड्राई फ्रूट,2,ड्राई फ्रूट मोदक,1,ड्राई फ्रूट्स लड्डू,1,ड्रेगन,1,ढाबा स्टाइल सब्जी,2,ढाबे वाली दम अरबी,1,ढोकला,1,ढोकले,1,तरबूज,3,तरबूज के छिलके का हलवा,1,तरबूज खरीदने के टिप्स,1,तलाक,1,ताजे नारियल की बर्फी,1,तिल,4,तिल की कुरकुरी चिक्की,1,तिल के लड्डू,2,तिल गुड़ की रेवड़ी,1,तुलसी,1,तेजतर्रार बहू,1,तेल,1,तेलंगाना,1,तोहफ़ा,1,त्यौहार,1,थ्री इडियट्स,1,दक्षिणा,1,दर्द,1,दर्द का रिश्ता,1,दवा,1,दशहरा,1,दशहरा की शुभकामनाएं,1,दशहरा शायरी फोटो,1,दही,6,दही और लहसुन की चटनी,1,दही मसाला भिंडी,1,दही वाली लौकी 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रेसोल्युशन,1,न्यूजीलैंड,1,पकोडे,3,पकोड़े,2,पक्षी,1,पढ़ा-लिख़ा कौन?,1,पढ़ाई,1,पति,1,पति का अहं,1,पति की मौत,1,पति-पत्नी,1,पति-पत्नी संबंध,1,पत्ता गोभी,3,पत्ता गोभी की मुठिया,1,पत्नी,1,पत्र,1,पनीर,3,पनीर बटर मसाला,1,पनीर मोदक,1,पपीता,1,परंपरा,3,परफ्यूम,1,परवरिश,7,पराठे,3,परीक्षा,2,परेशानी,1,पर्स,1,पल्ली उत्सव,1,पवित्र,1,पवित्रता,2,पसंदीदा शिक्षक को पत्र,1,पान गुलकंद मोदक,1,पानी,1,पानी कैसे पीना चाहिए,1,पापड़,8,पालक,4,पालक के नमक पारे,1,पालक चीला,1,पालक बडी,2,पाश्चात्य संस्कृति,1,पिता,2,पीरियड,1,पीरियड पॉलिसी,1,पीरियड्स,3,पीरियड्स डिले टेबलेट्स,1,पुण्य,2,पुरानी मान्यताएं,1,पुलवामा हमला,1,पुष्कर,1,पूडी,1,पूरी,1,पूरी या पराठे,1,पेड-पौधे,2,पेड़े,1,पेढे,1,पैड्मैन,1,पैदाइशी गरीब नहीं हूँ,1,पैनकेक,2,पैर हिलाना,1,पैरेंटीग,1,पोर्न मूवी,1,पोषण,1,पोहा,2,पोहे के कुरकुरे,1,पौधे,1,प्याज,5,प्याज की चटनी,1,प्याज के क्रिस्पी पकोड़े,1,प्यार,4,प्यासा कौआ,1,प्रत्यूषा,1,प्रद्युम्न,1,प्रवासी मजदूर,2,प्रसन्न,1,प्राणियों से सीख,1,प्रियंका रेड्डी,1,प्री वेडिंग फोटोशूट,1,प्रीमिक्स,4,प्रेम,1,प्लास्टिक बाल्टी कैसे 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पेढे,1,ब्रेड मलाई रोल,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,7,ब्ल्यू व्हेल गेम,1,भक्ति,1,भगर,5,भगर की इडली,1,भगर के उत्तपम,1,भगर के कटलेट,1,भगवान,4,भजिए,2,भरता,1,भरवां मिर्च,1,भरवां शिमला मिर्च,1,भरवां हरी मिर्च का अचार,1,भाई दूज शायरी,1,भाकरवड़ी,1,भागीरथी अम्मा,1,भाभी,1,भारत,1,भारतीय नारी,1,भारतीय मसाले,1,भिंडी,2,भिखारी,1,भुट्टे के पकोड़े,1,भूकंप,1,भोंदू,1,भोजन,1,भ्रुण हत्या,1,मंदसौर गैंग रेप,1,मंदिर,3,मंदिरों में ड्रेस कोड़,1,मंदिरों में दक्षिणा,1,मकई,5,मकई उपमा,1,मकई चीला,1,मकई पकोडे,1,मकर संंक्रांति,1,मकर संक्रांति,4,मकर संक्रांति की शुभकामनाएं,1,मकर संक्राति,1,मखाना,1,मखाने के लड्डू,1,मजेदार पहेलियाँ,2,मटके पर औंधा लोटा,1,मटर,4,मटर के अप्पे,1,मटर के पकोड़े,1,मटर पनीर,1,मठरी,5,मठ्ठा,1,मथुरा के पेड़े,1,मदर्स डे,5,मदर्स डे का गिफ्ट,1,मम्मी,2,मर्द,1,मलाई,2,मलाई फ्रूट सलाद,1,मल्ला तामो,1,मसाला छाछ,1,मसाला मठरी,1,मस्जिद,1,महात्मा गांधी जी,2,महानता,1,महाराजा अग्रसेन जी,1,महाराष्ट्र में आरक्षण,1,महिला आजादी,1,महिला आरक्षण,1,महिला दिवस,3,महिला सशक्तिकरण,4,महिला सुरक्षा,1,महिलाओं का पहनावा,1,माँ,6,माँ की हिम्मत,1,माउथ फ्रेशनर,1,माता यशोदा,1,माता लक्ष्मी,1,मातृभाषा,1,मायका,2,मारवाड़ी,1,मार्केटिंग स्ट्रेटेजी,1,माला,1,मावा,1,मावा कुल्फी,1,मासिक धर्म,3,माहवारी,7,मिठाई,38,मिठाई मेट,1,मित्र,2,मिलावट,1,मिलावट पहचानने के घरेलू तरीके,1,मिलिबग्स,1,मिल्क पाउडर,1,मिल्कमेड,1,मिस इंडिया 2019,1,मीठे चावल,1,मीठे जर्दा चावल,1,मुक्ति,1,मुखवास,1,मुनगा,1,मुबारकपुर कला,1,मुरब्बा,1,मुरमुरा,1,मुरमुरा लड्डू,1,मुलेठी,1,मुस्लिम,1,मुस्लिम मंच,1,मुहूर्त,1,मूंग की सूखी दाल का हलवा,1,मूंग दाल,1,मूंग दाल डोसा,1,मूंगदाल और आटे की कुरकुरी मठरी,1,मूंगफली,1,मूंगफली की सूखी चटनी,1,मूली,4,मूली का अचार,1,मूली के पत्तों के कुरकुरे कटलेट्स,1,मेंढक,1,मेंस्ट्रुअल कप,1,मेंहदी,8,मेडिसिन बाबा,1,मेथी,1,मेथी दाना चुर्ण,1,मेथी मटर मलाई,1,मेनु,1,मेरा मंत्र,3,मेरा सपना,1,मेरी बात,15,मैंगो फ्रूटी,1,मैंगो श्रीखंड,1,मैनर्स,1,मोदक,3,याकूब मोहम्मद,1,युरो 2020,1,यू ए ई,1,रंग,1,रंग पंचमी,1,रक्तदान,1,रक्तदान के फायदे,1,रक्षा बंधन,2,रक्षाबंधन,2,रक्षाबंधन शायरी,1,रजस्वला नारी,5,रवा इडली,1,रसे वाली अरबी,1,रसोई,172,रांगोली,3,राखी,4,राखी स्पेशल मिठाई,1,राज की बात,1,राजभाषा,1,राजस्थानी समाज,2,राजस्व,1,राम,1,राम नाम सत्य है,1,राम मंदिर,1,राम रहीम,1,रामनवमी,1,रामनवमी की शुभकामनाएं,1,राशिफल,1,राशी-भविष्य,1,राष्ट्रगान,1,राष्ट्रगीत,1,राष्ट्रभाषा,1,रिती-रिवाज,1,रिफाइंड ऑयल,1,रिफाइंड ऑयल के नुकसान,1,रिफाइंड तेल,1,रीतिरिवाज,1,रुपया-पैसा,1,रेणुका मिश्रा,1,रेन वाटर हार्वेस्टिंग,1,रेवड़ी,1,रेसोल्युशन,1,रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम,1,रेस्टोरेंट स्टाइल सब्जी,2,रैंचो,1,रोटी,5,रोस्टेड मूंगफली,1,लकड़ी की राख,1,लघुकथा,17,लच्छेदार मठरी,1,लड्डू,8,लहसुन,1,लाइटर,1,लाइफ स्किल्स,1,लाफिंग बुद्धा,1,लार,1,लाल मिर्च,1,लाल मिर्च का अचार,1,लाल मिर्च की सूखी चटनी,1,लिव इन,1,लिव इन रिलेशनशिप,1,लीव इन रिलेशनशिप,1,लेसवा का भरवां अचार,1,लेसुए,1,लैंगिक समानता,1,लॉकडाउन,3,लॉटरी,1,लोकल ट्रेन,1,लोकसभा चुनाव,1,लोग क्या कहेंगे?,1,लौंजी,1,लौकी,4,लौकी का भरता,1,लौकी का हलवा,1,लौकी की बड़ी,1,लौकी की सब्जी,1,वक्त,1,वटसावित्री व्रत,1,वर,1,वर्जिनिटी टेस्ट,1,वर्तमान,1,वर्षा जल संग्रहण,1,वर्षा जल संचयन,1,वाटर प्यूरीफायर,1,वायरल फोटो,1,वारी के हनुमान,1,विदर्भ स्पेशल रेसिपी,1,विधवा,2,विधवा ने किया कन्यादान,1,विधवा विवाह,1,विरुद्ध आहार,1,विशाखापट्टनम रेप कांड,1,वृंदावन,1,वृद्धावस्था,1,वेजिटेबल डोसा,1,वेजिटेबल पैनकेक,1,वैलेंटाइन गिफ़्ट,1,वैलेंटाइन डे,4,वैलेंटाइन डे शायरी,1,वैश्विक महामारी,1,वोट,1,वोट की किंमत,1,व्यंग,14,व्यायाम,1,व्रत,2,व्रत के दही भल्ले,1,व्रत रेसिपी,22,व्रत स्पेशल,2,शकरकंद,2,शकरकंद की जलेबी,1,शकरकंद को कैसे भुने,1,शकुन-अपशकुन,2,शक्करपारे,1,शनि देव,1,शबनम मौसी,1,शब्द,1,शरबत,6,शराब की दुकान,1,शर्बत,1,शर्म,3,शवयात्रा,1,शहद,1,शादी,8,शादी की खरेदी,1,शादी की फ़िजूलखर्ची का बिल,1,शादी के सालगिरह की शुभकामनाएं,1,शादी-ब्याह,3,शायरी,9,शावर,1,शाहिद कपूर,1,शिक्षक दिन,2,शिक्षक दिवस पर शायरी,1,शिक्षा,6,शिमला मिर्च,1,शिवपुरी,1,शिवलिंग,1,शुद्ध शहद की पहचान,1,शुभ मुहूर्त,1,शुभ-अशुभ,4,शुभकामना संदेश,1,शुभम जगलान,1,श्राद्ध,3,श्राद्ध का खाना,1,श्रीकृष्ण,3,श्रेष्ठता,1,संत निकोलस,1,संसद,1,संस्कार,1,संस्मरण,10,सकारात्मक पहल,2,सच बोलने की प्रेरणा,1,सजा मुझे क्यों,1,सतबीर ढिल्लो,1,सपना,1,सफलता,1,सफेद कीड़े,1,सफेद बाल,1,सब्जियों का अचार,1,सब्जियों की कांजी,1,सब्जी,21,समय,1,समाजसेवा,2,समाजिक,1,समाधान,1,समावत चावल,3,समोसा,1,सर के बाल,1,सलाद,2,ससुराल,3,सस्ते कपड़े,1,सहजन,1,सहजन/मुनगा की कढ़ी,1,सहशिक्षा,1,सांता क्लॉज,1,सांप,1,सांभर वडी,1,सांवला या काला रंग,1,साउथ इंडियन डिश,3,साक्षात्कार,5,सागर में ज्वार,1,सातवीं सालगिरह,1,साफ-सफाई,1,साबुदाना,3,साबुदाना के अप्पे,1,साबुदाना पापड़,2,साबुदाने लड्डू,1,साबुन,1,साबूदाना,3,साबूदाना खिचड़ी,1,साबूदाना वड़ा,1,सामाजिक,94,सामाजिक कार्यकर्ता,1,सालगिरह,7,सावन,2,सास,4,साहित्य,118,सिंगल पैरेंट,1,सिंदूर,1,सीएए,1,सीख-सुहानी,1,सीनू कुमारी,1,सुंदरता,1,सुई,1,सुखी,1,सुजी,1,सूजी,2,सूजी के पापड़,1,सूजी के लड्डू,2,सूप,1,सेनेटरी नेपकिन,1,सेब,2,सेब के छिलके,1,सेलिब्रिटी,1,सेलिब्रेटी,1,सेव मेरिट सेव नेशन,1,सेवई उपमा,1,सेहत,6,सैंडविच,1,सोच,1,सोनम वांंगचुक,1,सोलर हीटेड मिलिट्री टेंट,1,सोलो यूट्यूबर,1,सोशल मीडिया,1,सौंफ,1,सौंफ का शरबत,1,सौंफ प्रीमिक्स,1,सौतेली माता,1,स्कूल,2,स्टफ्ड आम पापड़,1,स्टफ्ड मैंगो रोल,1,स्टार्टर,1,स्टैच्यु ऑफ यूनिटी,1,स्त्री,2,स्नैक्स,65,स्वतंंत्रता दिन,1,स्वतंत्रता दिन,2,स्वयं से प्यार,1,स्वर्ग और नर्क,1,स्वाभिमान,1,स्वास्थ,2,स्वास्थ्य,23,स्वीट कॉर्न,1,स्वीट कॉर्न खीर,1,हंस,1,हनुमान जी,2,हरी मटर,1,हरी मटर के पैनकेक,1,हरी मटर को कैसे स्टोर करें,1,हरी मिर्च,5,हरी मिर्च का अचार,1,हलवा,3,हांडवो,2,हाउसवाइफ,1,हाथी,1,हिंदी उखाणे,1,हिंदी उखाने,1,हिंदी कहानी,3,हिंदी दिवस,1,हिंदी शायरी,32,हिंदु,1,हेयर कलर,1,हैंड सैनिटाइजर,1,हैंडल,1,हैसियत,1,होटल,1,होममेकर,1,होली की शुभकामनाएं,1,होली रेसिपी,1,
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: हिंदी दिवस: हिंदी बोलने पर शर्म नहीं, गर्व कीजिए...
हिंदी दिवस: हिंदी बोलने पर शर्म नहीं, गर्व कीजिए...
इंसान की कल्पनाशक्ती का विकास मातृभाषा में ही हो सकता हैं। सच्चाई यहीं हैं कि अंग्रेजी की तुलना में हिंदी इंसान को ज्यादा समृद्ध बना सकती हैं।
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
https://www.jyotidehliwal.com/2018/09/Hindi-divas-Hindi-bolane-par-sharm-nahi-garv-kijie.html
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