हिंदी दिवस: हिंदी बोलने पर शर्म नहीं, गर्व कीजिए...

इंसान की कल्पनाशक्ती का विकास मातृभाषा में ही हो सकता हैं। सच्चाई यहीं हैं कि अंग्रेजी की तुलना में हिंदी इंसान को ज्यादा समृद्ध बना सकती हैं।

हिंदी दिवस: हिंदी बोलने पर शर्म नहीं, गर्व कीजिए...
हिंदी हमारी राजभाषा हैं। आज भी कई लोग हिंदी को ही राष्ट्रभाषा समझते हैं! लेकिन हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं, राजभाषा हैं!! भारत की कोई राष्ट्रभाषा नहीं हैं। क्योंकि भारत में कई प्राचीन भाषाएं हैं जो पूरी तरह विकसित हैं और बड़े जनसमूह द्वारा बोली जाती हैं। भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी हैं। हमारे देश के 77% लोग हिंदी लिखते, पढ़ते, बोलते और समझते हैं। हिंदी उनके कामकाज का भी हिस्सा हैं। इसलिए 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा घोषित किया। इसी निर्णय के चलते सन 1953 से संपूर्ण भारत में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ मनाया जाता हैं।

किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी भाषा और संस्कृति से होती हैं। हमें दूसरों की भाषा सीखने का मौका मिले यह अच्छी बात हैं लेकिन दूसरों की भाषा के चलते हमें अपनी मातृभाषा को छोड़ना पड़े तो कहीं न कहीं दिक्कत का सामना ज़रुर करना पड़ता हैं। हमने अंग्रेजी को हिंदी में इतना ज्यादा मिला दिया हैं कि शुद्ध हिंदी लिखना ही भूल गए। बाजार में विभिन्न दुकानों के नामों पर गौर कीजिए...

• अजय सर्विस सेंटर
• संजय फोटो कॉपी सेंटर
• विजय हेयर कटिंग सैलून
• अभय बार एंड होटल
• अनय हॉस्पिटल
• मोहन लॉन
• सुदिप मेडिकल स्टोर
• संदीप बिरयानी कॉर्नर

और आजकल व्हाट्स एप जैसे सोशल मीडिया पर तो हिंदी ऐसे लिखी जा रही हैं कि बेचारी हिंदी को ही शर्म आती होगी। शायद ही दुनिया में 'हिंदी दिवस' की तरह किसी और भाषा के नाम पर दिवस का आयोजन होता हो! क्योंकि दुनिया के हर मुल्क के लोगों को अपनी भाषा पर गर्व हैं। और गर्व होने की बात वे लोग सिर्फ़ बोलते ही नहीं तो उसे व्यवहार में अपनाते भी हैं। लेकिन हम लोग हिंदी दिवस पर 'हिंदी हमारी मातृभाषा हैं, हमें हिंदी पर गर्व हैं...' ऐसा बोलते तो हैं पर असलियत में हिंदी में बातचीत करने वालों को आज भी हेय दृष्टि से ही देखा जाता हैं। यदि कोई व्यक्ति दो-चार वाक्य फर्राटेदार अंग्रेजी में बोलता हैं तो सब उसे बहुत होशियार समझते हैं।
एक बार एक नेता द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर दिए गए भाषण के कुछ अंश देखिए। आज अपने देश में हिंदी की क्या हालत हैं यह समझ में आ जाएगा।

''लेडीज एंड जेंटलमेन, ब्रदर्स एंड सिस्टर्स,
हम इंडिया के सिटिजन हैं।
हिंदी में बोलना हमारी ड्युटी हैं, पर हिंदी की किस्मत फूटी हैं!
आज की यंग जनरेशन व्हेनएव्हर माउथ खोलती हैं,
ओनली एंड ओनली इंग्लिश बोलती हैं,
परसन की एबिलिटी को अंग्रेजियत में तोलती हैं।
यह कम्पलिटली रॉंग हैं।
हमें हिंदी को अपने डेली यूज में लाना हैं।
हिंदी को वर्ल्ड में फैलाना हैं।
आओ हिंदी को स्ट्रॉंग बनाएं...
सभी भारतीय हिंदी यूज करें...
क्योंकि वुई लव हिंदी...
वुई लव इंडिया...!!!''

दोस्तों, कैसी लगी आपको नेताजी की हिंदी? इन थोड़ी सी पंक्तियों से ही हिंदी की वर्तमान स्थिति स्पष्ट हो जाती हैं। जब बच्चे का जन्म होता हैं तो घर के लोगों से हिंदी सुन कर बच्चा भी हिंदी बोलने और समझने लगता हैं। पर जैसे ही बच्चे को स्कूल भेजने की बात आती हैं तो हिंदी मीडियम स्कूलों के हालात अच्छे न होने से हमारे पास बच्चे को अंग्रेजी स्कूल में भेजने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं रहता। यहीं से बच्चे की हिंदी कमजोर होने लगती हैं। इसलिए ही अंग्रेजी में पढ़ा-लिखा नौजवान सब्जी वाले से हिसाब-किताब करते वक्त उन्यासी और नवासी का फर्क समझ नहीं पाता। सच्चाई यहीं हैं कि अंग्रेजी की तुलना में हिंदी इंसान को ज्यादा समृद्ध बना सकती हैं। लेकिन तकनीक और बाजार में अंग्रेजी का दबदबा कायम होने से हिंदी रोजी-रोटी का मजबूत जरिया नहीं बन सकती।

फ़िर भी हमें हिंदी पर गर्व होना चाहिए, क्योंकि...
• हिंदी की खास बात यह हैं कि इसमें जिस शब्द को जिस प्रकार उच्चारित किया जाता हैं, उसे लिपि में लिखा भी उसी प्रकार जाता हैं।
• इंसान की कल्पनाशक्ती का विकास मातृभाषा में ही हो सकता हैं।
• इंग्लिश आज की जरुरत हैं। लेकिन क्या जरुरत के लिए नींव को छोड़ा जा सकता हैं?
• आज दैनंदिन काम भी इंटरनेट के बिना नहीं हो सकते। जरा सोचिए, यदि इंटरनेट का उपयोग करने के लिए हर एक व्यक्ति पहले इंग्लिश लिखना-पढ़ना सिखेगा तो इंग्लिश सिखने में ही उसको बहुत समय लग जाएगा। तो वह अपने काम समय पर कैसे पूरे करेगा? इसलिए ही गूगल खुद भी आजकल हिंदी को प्रोत्साहन दे रहा हैं।
• अंग्रेजी भाषा 'A for apple से मतलब एक फल से शुरू हो कर Z for zebra' याने एक जानवर पर खत्म होती हैं। लेकिन हमारी हिंदी भाषा 'अ अननस का से शुरु हो कर मतलब एक फल से शुरु होकर ज्ञ ज्ञानी का' पर खत्म होती हैं। दूसरे उदाहरण में 'अ अनपढ़ का से शुरु हो कर ज्ञ ज्ञानी का' पर खत्म होती हैं। याने हिंदी भाषा एक अनपढ़ को ज्ञानी बनाती हैं तो अंग्रेजी जानवर!
• हिंदी हमारी अपनी भाषा हैं और अंग्रेजी मेहमान हैं। हमें इस बात पर गौर करना चाहिए कि मेहमान, आखिरकार मेहमान होता हैं...उसे घर का सदस्य नहीं बनाया जा सकता!!
अत: हमें हिंदी बोलने पर शर्म नहीं, गर्व करना चाहिए!!
                   हर भाषा की इज्जत करों,
                         पर हिंदी को न बेइज्जत करों!!!

 Keywords: Hindi divas, Rashtrabhasha, rajbhasha, mother tongue, matrubhasha

COMMENTS

BLOGGER: 30
  1. हिंदी दिवस पर लिखा गया अच्छा लेख, ज्योति दी :)

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (03-09-2018) को "योगिराज का जन्मदिन" (चर्चा अंक- 3083) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    श्री कृष्ण जन्मोत्सव की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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  3. बहुत अच्छी तरह से लिखा है लेख। ज्योती जी

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  4. अपनी राष्ट्रभाषा हिन्दी पर विचारणीय सारगर्भित लेख ज्योति जी ।

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  5. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, नए दौर की गुलामी “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  6. हमेशा की तरह बहुत ही अच्छा आर्टिकल। Share करने के लिए धन्यवाद। :)

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  7. Very logical post in Hindi language, even the distortions is Bengali among the Bengali speaking people i have noticed several time...so ridiculous it is.
    Yes, it has became a trend to send the children in English medium schools and sometime they are scolded badly for speaking or replying in Hindi(In Bengali also).

    The change is not possible if certain individuals respect the language until vast people are involved.

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  8. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 04/09/2018
    को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

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  9. अंग्रेजी z फॉर ज़ेबरा यानी जानवर पर खत्म होती है और हिंदी ज्ञ से ज्ञानी पर ... बहुत सुंदर अनोखा तर्क दिया आपने ज्योति जी |अंग्रेजी के अलावा हिंदी या कोई भी भाषा बोलने में अपने को कम पढ़ा -लिखा समझना मूर्खता है परतु ऐसा होता जा रहा है | ये तो भला हो इन्टरनेट का जिसकी वजह से हिंदी का प्रचार प्रसार बढ़ा और केवल हिंदी पढने समझने वाले लोग भी अपने ज्ञान में बढ़ोत्तरी कर पाए | हिंदी पखवारे पर एक सार्थक लेख ... बधाई

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  10. हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं, राजभाषा हैं
    ये सच कितना कटु है, हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा न मिलना, दुःखद है
    बहुत अच्छी प्रेरक प्रस्तुति

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  11. मानसिक गुलामी ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही। दुकानों इत्यादि के नामों में अंग्रेजी की बैसाखी तो लगती ही है, भाई लोग मंदिरों को भी नहीं छोड़ते ! जनकपुरी में एक चतुर विद्वान ने पैदल पथ पर एक मंदिर बना नाम रख दिया ''ग्रैजुएट हनुमान मंदिर'' ! लोग आते भी हैं ! मंगल-शनि पर चढ़ावा भी चढ़ता है !!

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  12. जी, आपने सही कहा हिन्दी हमारे देश की राज भाषा है। हमे इसमें अपने विचार व्यक्त करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए और न ही शर्म महसूस करनी चाहिए। हाँ, आपने लेख में कुछ उदाहरण दिए हैं जैसे फोटो कॉपी,प्रिंट इत्यादि। मेरा मानना है कि हिन्दी में इन शब्दों को जस का तस प्रयोग करना चाहिए। इनकी उत्पत्ति उधर ही हुई है इसलिए इनका अनुवाद करना वैसे ही होगा जैसे पीटर नाम को हिंदी में अनूदित करना। बाकी बढ़िया लेख। काफी जरूरी बातों पर प्रकाश डालता है। आभार आपका।

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    1. विकास जी, मैं ने अपने लेख में यह कहीं नहीं कहा कि फोटो कॉपी,प्रिंट इत्यादि शब्दों का उपयोग करना गलत हैं। मैं ने तो सिर्फ़ यह बताया हैं कि हिंदी में अंग्रेजी भाषा कैसे मिल गई हैं! वैसे भी सर्वे बताते हैं कि जो भाषा दूसरी भाषा को अपने में समाहित करती हैं वो उतनी ही समृद्दध होती हैंं। वैसे भी शुद्ध हिंदी बोलना या लिखना आज हमारे लिए एक नामुमकिन काम हो गया हैं। यदि हम रेलगाडी को लोहपथगामिनी कहेंगे तो कितने लोगों को समझेगा?

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    2. जी, आपने सही कहा। जिस चीज की उत्पप्ति जिधर होती है वही नाम इस्तेमाल करने के लिए सही होता है। अब खीर, पूरी, भठूरे,जलेबी इत्यादि को अंग्रेजी में भी यही कहा जाएगा। इनका अनुवाद वो करने लगे तो नानी याद आना तय है।
      मैने ईमेल वगेरह के लिए भाषा की सेटिंग हिंदी करी हुई है। उधर अनुवाद का प्रकोप देखने को मिलता है। यही हाल word या गूगल drive का भी है। कई बार अनुवाद के चक्कर में चीजें और कठिन हो जाती हैं जिससे उसका उपयोग अपने आप घट जाता है।

      जी, भाषा तो वही रहेगी जो सबको अपना बनाकर आगे बढ़ेगी। मुझे लगता है हिंदी का सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों ने किया है जो शुद्धता के नाम पर इसे जड़ बनाना चाहते हैं। यह आम जनमानस से भाषा को काटती है और इसे अकादमियों या सरकारी दफ्तरों तक ही इसे सीमित रखती है।

      हमे एक बीच का रास्ता अपनाना होगा ताकि भाषा की सहजता और गरिमा दोनों बनी रहें।

      मेरी टिप्पणी से अगर आपको बुरा लगा हो तो माफ़ी। मैं यह कहना चाह रहा था कि क्योंकि हम लोग ग्लोबलाइजेशन के दौर में हैं और अलग अलग जगह से निर्मित वस्तुओं और तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं तो ऐसे में इन चीजों और तकनीक के नाम को जस का तस भाषा में प्रयोग करेंगे। शायद मैं ढंग से अपनी बात लिख न सका।

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    3. विकास जी, बुरा लगने लायक ऐसा कुछ भी गलत आपने नहीं लिखा हैं। मुझे तो खुशी हैं कि आपने मेरा लेख ध्यानपूर्वक पढ़ा और उस पर सविस्तर टिप्पणी भी की। बहुत बहुत धन्यवाद, आपका।

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  13. अरे दी,क्या करियेगा,आधुनिक समाज में बदलाव की हवा में हिंदी बोलकर कौन अपने को गँवार दिखाये।सही कहा गगन जी ने मानसिक गुलामी केक्षशिकार हैं हम सब।
    हमेशा की.तरह बेहद प्रेरक लेख है।

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  14. बेहद जानदार लेख

    हिंदी में मिलावट हिंदी का कमजोर होना नही है बल्कि हिंदी के दायरे का विकाश का घोतक होना चाहिए
    चाहे वह अंग्रेजी की मिलावट हो चाहे वह पंजाबी की हो या फिर अन्य किसी भी बोली या भाषा की हो.

    मिलावटी रूप में ही क्यूँ न हो वह बोलचाल की भाषा जरुर होनी चाहिए.

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    1. रोहोतास जी, मैं ने लेख में यह नहीं कहा हैं कि हिंदी में मिलावट से हिंदी कमजोर होती हैं। आपने सही कहा कि मिलावट से हिंदी का विकास ही होगा।

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  15. bilkul shi title chuna hain apne, aisa hona hi chiaye

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  16. हालाँकि मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ की "हिंदी भाषा एक अनपढ़ को ज्ञानी बनाती हैं तो अंग्रेजी जानवर!" लेकिन आपके लेख के उद्द्येश्य से ज़रूर सहमत हूँ I हिंदी के पिछड़ने का एक कारण यह भी है की ऊँचे स्तर की पढ़ाई जिसमे भौतिकी, रसायन शाश्त्र ,जिव विज्ञान, भू विज्ञान आदि शामिल है, तो उसके समझ के अंतर्राष्ट्रीय आदान प्रदान में अंग्रेजी जिस सुविधाजनक रूप से काम में आ सकती है शायद उतनी सुविधाजनक हिंदी न हो I तो एक जोड़ने वाली भाषा के रूप में अंग्रेजी का स्थान तो है I भाषा की लचीलता का भी एक महत्व है की क्या एक भाषा हर प्रकार के विचार को सम्प्रेषित करने में सक्षम है ? और अगर हाँ तो वो लोकप्रिय होगी हीं होगी I लेकिन शायद कभी संस्कृत के जैसे, जिसमे हर प्रकार के वैज्ञानिक विषयों पे टिकाएं उपलब्ध होती थीं और हैं और उसका अध्ययन अंग्रेजी बोलने वाले लोग भी करते हैं और करते रहे हैं , वो स्थान हिंदी भी पा जाए लेकिन इसके लिए देश की क्षमता और उसके विकास का भी अपना महत्त्व है I

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  17. नीरज जी, अंग्रेजी इंसान को जानवर बनाती हैं इस वाक्य का शब्दशः मतलब सही नहीं हो सकता। कोई भी भाषा इंसान को जानवर नहीं बना सकती। ये उदाहरण सिर्फ हिंदी और अंग्रेजी की वर्णमाला के दृष्टिकोण से व्यंगात्मक रूप में दिया गया हैं।
    आपने बिल्कुल सही कहा कि यदि विज्ञान आदि विषय हिंदी में सरलता से उपलब्ध हो तो हिंदी का विकास हो सकता है।
    इतनी सविस्तर और बढ़िया टिप्पणी के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

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  18. बहुत बढ़िया | हिंदी हमें सबसे प्यारी |

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  19. इस लेख को पढ़कर मुझे भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित प्रसिद्ध कविता “मातृभाषा के प्रति” याद आ गयी, जिसकी चार पंक्तियाँ यह हैं :- निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
    बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल ।

    अंग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन
    पै निज भाषा-ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन ।

    सच में आज हिंदी आगे बढ़ रही हैं, लेकिन इसमें इंग्लिश के शब्द इतने ज्यादा शामिल हो गये हैं की अब हिंदी से परिवर्तित होकर हिंगलिश बन गयी हैं. हिंदी बोलने, लिखने और पढ़ने में स्वयं को गौरवान्वित होना चाहिए. माना की अंग्रेजी आज के युग में विकास के लिए जरूरी हैं, परन्तु हिंदी हमारी आत्मा हैं. हिंदी को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना खुद भारत में ही करना पड़ता हैं, खास करके दक्षिण भारत के राज्य हिंदी को पसंद नहीं करते है. हिंदी हर सच्चे भारतीय को आनी ही चाहिए...

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  20. कबीर जी,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा रचित प्रसिद्ध कविता के अंश बहुत ही अच्छे हैं। शेयर करने के लिए धन्यवाद। इतनी सारगर्भित टिप्पणी के लिए भी आभार।

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'रेप प्रूफ पैंटी',1,#मीटू अभियान,1,15 अगस्त,3,26 जनवरी,1,8 मार्च,1,अंकुरित अनाज,1,अंगदान,1,अंगुठी,1,अंग्रेजी,2,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस,3,अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस,1,अंधविश्वास,10,अंधश्रद्धा,8,अंधश्रध्दा,2,अंश,1,अग्रवाल,1,अचार,6,अच्छी पत्नी चाहिए तो...,1,अच्छे काम,1,अजब-गजब,2,अतित,1,अदरक,1,अदरक का चूर्ण,1,अदरक-लहसुन पेस्ट,1,अनमोल वचन,10,अनुदान,1,अनुप जलोटा,1,अन्न,1,अन्य,23,अन्याय,1,अपेक्षा,1,अप्पे,4,अमरुद,1,अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी,1,अमीरी,1,अमेजन,1,अरुणा शानबाग,1,अरुनाचलम मुरुगनांथम,1,अवार्ड,2,असली हीरो,12,अस्पतालों में बच्चों की मौत,1,आंवला,3,आंवला चटनी,1,आंवला लौंजी,1,आइसक्रीम,1,आईसीयू ग्रेंडपा,1,आज के जमाने की अच्छाइयां,1,आजादी,2,आज़ादी,1,आतंकवादी,2,आत्महत्या,2,आत्मा,1,आदित्य तिवारी,1,आम,6,आम का अचार,1,आम का पना,1,आम का मुरब्बा,1,आम की बर्फी,1,आम पापड़,1,आरक्षण,1,आलू,1,आलू पोहा अप्पे,1,इंसान,2,इंस्टंट डोसा,1,इंस्टंट स्नैक्स,1,इंस्टट ढोकला,1,इंस्टेंट कुल्फी,1,इडली,2,इन्डियन टाइम,1,इमली,1,इरोम शर्मिला,1,ईद,1,ईश्वर,6,ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना,1,उटी,1,उपमा,1,उपवास,1,उपहार,2,उमा शर्मा,1,ऋषि पंचमी,1,एक सवाल,1,ऐनी दिव्या,1,ऐश ट्रे,1,ऑनलाइन,1,और इज्जत बच गई,1,कंघा,1,कच्चे आम,1,कच्चे आम का चटपटा पापड़,1,कटलेट्स,1,कद्दु,1,कद्दु के गुलगुले,1,कन्यादान,3,करवा चौथ शायरी,1,करवा-चौथ,3,कल्याणी श्रीवास्तव,1,कहानी,14,कांजी,1,कानून,1,कामवाली बाई,4,कालीन,1,किचन टिप्स,13,किटी पार्टी,1,किराए पर बीवियां,1,कुंडली मिलान,1,कुरकुरे,1,कुल्फी,1,कुल्फी प्रीमिक्स,1,कूकर,1,केईएम् अस्पताल,1,कॉर्न,4,कॉर्न इडली,1,कौए,1,क्षमा,2,खजूर,1,खत,3,खबर,3,खरबूजा,1,खांडवी,1,खाद्य पदार्थ,1,खाना,1,खारक,1,खारी गरम,1,खुले में शौच,1,खुशी,2,खेल,1,गणतंत्र दिवस,1,गणेश चतुर्थी पर शायरी,1,गणेश चतुर्थी प्रसाद रेसिपी,1,गरम मसाला,1,गर्दन दर्द,1,गर्भाशय,1,गलत व्यवहार,1,गलती,2,गाजर,4,गाजर अप्पे,1,गाजर के लड्डू,1,गाजर-मूली के दही बडे,1,गाय,1,गुजरात,1,गुड टच और बैड टच,2,गुलगुले,1,गुस्सा,1,गृहस्वामिनी,1,गोरखपुर,1,गोल्फ,1,गौरी पराशर,1,घंटी,1,घिया,1,घी,1,घी की नदी,1,चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति,1,चकली,1,चटनी,6,चाँद पर जमीन,1,चाय,1,चाय मसाला,1,चावल,2,चावल के पापड़,1,चाशनी,1,चीज,1,चीला,2,चूर्ण,4,छींक,1,छोटी बाते,1,छोटे लेकिन काम के टिप्स,1,छोटे-छोटे काम के टिप्स,2,जज्बा,1,जनसंख्या,1,जन्मदिन,3,जन्मदिन की शुभकामनाएं,2,जन्माष्टमी,2,जमाना,1,जाट आंदोलन,1,जात-पात,1,जाति,1,जाम,1,जिंदगी,1,जीएसटी,1,जीरो ऑइल रेसिपी,5,जोक्स,5,जोयिता मंडल,1,ज्वार की रोटी,1,ज्वेलरी,1,झारखंड,1,झाले-वारणे,2,झूठ,1,टिप्स कॉर्नर,25,टी.व्ही. और सिनेमा,1,ठंडे पेय,1,ठेचा,1,डॉक्टर,2,डॉटर्स डे,2,ढाबा स्टाइल सब्जी,1,ढोकले,1,तरबूज,1,तलाक,1,ताजे नारियल की बर्फी,1,तिल,2,तिल की कुरकुरी चिक्की,1,तिल के लड्डू,1,तेलंगाना,1,तोहफ़ा,1,थंडा पानी,1,दक्षिणा,1,दवा,1,दही,5,दही सैंडविच,1,दहेज,3,दाग-धब्बे,1,दान,1,दासी,1,दिपावली बधाई संदेश,3,दिशा,1,दीपावली शुभकामना संदेश,1,दीवाली रेसिपी,1,दुध पावडर,1,दुर्गा माता,1,दुल्हा,1,दुश्मन,1,दूध,2,देशभक्ति,3,देशभक्ति शायरी,2,देहदान,1,दोस्त,2,धनिया,1,धर्म,2,धर्मग्रंध,1,धार्मिक,26,नदी में पैसे,1,नन्ही परी,1,नमक पारे,1,नमकीन,1,नवरात्र,1,नवरात्र स्पेशल,2,नवरात्री रेसिपी,4,नववर्ष,2,नववर्ष की शुभकामनाएं,2,नाइंसाफी,1,नानी,1,नारियल बर्फ़ी,1,नारी,42,नारी अत्याचार,9,नारी शिक्षा,1,नाश्ता,1,निंबु का अचार,1,निचली जाती,1,निर्णयक्षमता,1,निर्भया,2,निवाला,1,नींबू,1,नेत्रदान,1,नेपाल त्रासदी,1,नेल आर्ट,1,पकोडे,2,पक्षी,1,पढ़ा-लिख़ा कौन?,1,पढ़ाई,1,पति,1,पति का अहं,1,पति-पत्नी,1,पत्ता गोभी,1,पत्ता गोभी की मुठिया,1,पत्नी,1,पत्र,1,पपीता,1,परंपरा,2,परवरिश,4,पराठे,1,परीक्षा,1,परेशानी,1,पल्ली उत्सव,1,पवित्र,1,पवित्रता,1,पसंदीदा शिक्षक को पत्र,1,पापड़,3,पालक,1,पालक के नमक पारे,1,पालक बडी,1,पाश्चात्य संस्कृति,1,पिता,1,पुण्य,1,पुरानी मान्यताएं,1,पुलवामा हमला,1,पूडी,1,पेढे,1,पैड्मैन,1,पैनकेक,1,पैरेंटीग,1,पोर्न मूवी,1,पोषण,1,पोहा,1,पोहे के कुरकुरे,1,प्याज,2,प्यार,1,प्यासा कौआ,1,प्रत्यूषा,1,प्रद्युम्न,1,प्रसन्न,1,प्राणियों से सीख,1,प्री वेडिंग फोटोशूट,1,फर्रुखाबाद,1,फलाहार,1,फल्लिदाने,1,फादर्स डे,1,फूल गोभी के परांठे,1,फेसबुक,2,फैशन,1,फ्रिज,1,फ्रेंडशीप डे,1,फ्रेंडशीप डे शायरी,1,बकरीद,1,बची हुई सामग्री का उपयोग,1,बच्चे,5,बच्चे की ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर 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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: हिंदी दिवस: हिंदी बोलने पर शर्म नहीं, गर्व कीजिए...
हिंदी दिवस: हिंदी बोलने पर शर्म नहीं, गर्व कीजिए...
इंसान की कल्पनाशक्ती का विकास मातृभाषा में ही हो सकता हैं। सच्चाई यहीं हैं कि अंग्रेजी की तुलना में हिंदी इंसान को ज्यादा समृद्ध बना सकती हैं।
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
https://www.jyotidehliwal.com/2018/09/Hindi-divas-Hindi-bolane-par-sharm-nahi-garv-kijie.html
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