ईश्वर प्रद्युम्न के माता-पिता को दु:ख सहने की शक्ति दे...!

दुनिया की कोई भी अदालत और कोई भी क़ानून उनका प्रद्युम्न उन्हें नहीं लौटा सकता!!! इसलिए हम सब मिल कर ईश्वर से यहीं दुआ कर सकते हैं कि प्रद्युम्न के माता-पिता को दु:ख सहने की शक्ति दे.......!!!

ईश्वर प्रद्युम्न के माता-पिता को दु:ख सहने की शक्ति दे...!
आज टीवी चैनल पर, अखबारों में और सोशल मीडिया पर सभी तरफ़ प्रद्युम्न के साथ हुई दिल दहलाने वाली घटना छाई हुई हैं। जब-जब टीवी पर मासूम प्रद्युम्न का चेहरा दिखता हैं रुह कांप जाती हैं मेरी! कितना प्यारा और कितना मासूम दिख रहा हैं प्रद्युम्न! कितना निर्दयी राक्षस होगा उसका हत्यारा! क्या उसका दिल थोड़ा सा भी नहीं पसीजा होगा इतने मासूम बच्चे का कत्ल करते वक्त! कहां से लाया होगा उस हत्यारे ने इतना कठोर हृदय? क्या बीत रही होगी प्रद्युम्न के माता-पिता पर? सोच कर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उन्हें सांत्वना देने के लिए किसी के भी पास शब्द नहीं हैं। उनके दु:खी हृदय के नीरव क्रंदन से पूरे देशवासियों के अंतरात्मा की श्रवणेन्द्रिया लहुलुहान हो गई हैं। उन्हें क्या पता था कि जिस बच्चे को वे स्कूल में अच्छा-भला तंदुरुस्त छोड़ आए हैं सिर्फ़ आधे घंटे बाद उस बच्चे की खून से लथपथ लाश देखने को मिलेगी! सचमुच, हम सब उनके दु:ख की सिर्फ़ कल्पना भी नहीं कर सकते!

कितना दर्द सहती हैं एक माँ...बच्चे को गर्भ में पालते वक्त...फ़िर बच्चे को जन्म देते समय...और बच्चे के जन्म के बाद तो माता-पिता की पूरी दुनिया ही बच्चे के इर्द-गिर्द सिमट जाती हैं। बच्चे के हंसने से माता-पिता हंसते हैं और बच्चे को जरा सी चोट आने से वे खुद दर्द से तड़प जाते हैं। किसी भी चोट से जितना दर्द बच्चे को स्वयं को नहीं होता होगा उतना दर्द माता-पिता को होता हैं। जब बच्चा थोड़ा सा बड़ा होता हैं तब बच्चे को स्कूल भेजते वक्त खासकर माँ को बहुत तकलीफ़ होती हैं। क्योंकि अभी तक जागते-सोते, खाते-पीते, सुबह-शाम और रात-दिन बच्चा माँ के इर्द-गिर्द ही घुमता रहता हैं। बच्चा पूरी तरह अपनी माँ पर ही निर्भर रहने से बच्चे को स्कूल भेजते वक्त माँ को एक अनजाना भय सताते रहता हैं की अब उसका बच्चा उसके बिना स्कूल में कैसे रहेगा...बच्चा स्कूल में रोएगा तो नहीं...उसे भूख तो नहीं लगी होगी...स्कूल के अन्य लड़के और लड़कियां उसे तंग तो नहीं करेंगे...इन्हीं सब भयों के साथ हर माँ अपने दिल पर पत्थर रख कर अपने कलेजे के टुकड़े को स्कूल भेजती हैं। इसी आशा के साथ कि एक दिन उसका बच्चा पढ़-लिख कर अच्छा इंसान बनेगा। लेकिन प्रद्युम्न की घटना ने हर माँ के हृदय को छलनी कर दिया हैं। अभी तक तो बच्चे के रोने की, खाने-पीने की ही चिंता हर माँ को सताती थी लेकिन अब अपने बच्चे को खोने का डर भी उसे सताने लगा हैं। बहुत ही भयानक डर बैठ गया हैं हर माता-पिता के मन में...अभी तो हम अपने बच्चे को खुशी-खुशी स्कूल भेज रहे हैं...लेकिन शाम को हमारा बच्चा घर वापस आएगा की नहीं...सभी को पता हैं कि हर बच्चे के साथ ऐसा नहीं होगा लेकिन इस बात की क्या गारंटी हैं कि उनके बच्चे के साथ ऐसा नहीं होगा! अभी तक प्रद्युम्न के स्कूल बस के कंडक्टर को ही मीडिया दोषी बता रहा था लेकिन पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार मामला कुछ और ही हैं...क्या हैं असल मामला...? यह तो जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा...लेकिन इस घटना ने पूरे देश के माता-पिता को बुरी तरह डरा दिया हैं। अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर हर माता-पिता आशंकित हैं। इतने डर के बावजूद भी यह करोड़ों माता-पिता की मजबूरी हैं वे अपने बच्चे को घर में बंद कर कर नहीं रख सकते!

अब ईश्वर से ही प्रार्थना हैं कि वो करोड़ों माता-पिता के दिल की आवाज़ सुने...किसी प्रद्युम्न के साथ फ़िर से ऐसी कोई घटना न हो...और प्रद्युम्न के हत्यारे को कड़ी से कड़ी सजा हो...इतनी कि ऐसा घिनौना अपराध करने से पहले अपराधी की खुद की रुह कांप उठे! और स्कूलों में सुरक्षा के ऐसे इंतज़ाम हो कि हर माँ-बाप अपने जीगर के टुकड़े को सहजता से स्कूल भेज सके!

क़ानूनन हत्यारों को सजा मिलने से प्रद्युम्न के माता-पिता के दिल को थोड़ी सी ही सही राहत तो मिलेगी। लेकिन, सबसे बड़ी सच्चाई यहीं हैं कि दुनिया की कोई भी अदालत और दुनिया का कोई भी क़ानून उनका प्रद्युम्न उन्हें नहीं लौटा सकता!!! इसलिए हम सब मिल कर ईश्वर से यहीं दुआ कर सकते हैं कि प्रद्युम्न के माता-पिता को दु:ख सहने की शक्ति दे.......!!!


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COMMENTS

BLOGGER: 19
  1. सही बात ।निष्पक्ष जाँच और तदोपरांत कानूनी कार्रवाई से ही ऐसे बेरहम हत्यारों को सबक मिलेगा ।कठोर सजा के हकदार हैं ये मासूम के हत्यारे ।

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  2. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. बहुत ही मार्मिक है ऐसी घटनाएँ जो हर मात पिता के मन में भय और असुरक्षा पैदा करती है। लेख मर्मस्पर्शी है बहुत ज्योति जी।

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  4. इस घटना ने पूरे देश को गुस्से और दुःख से भर दिया है !! सच कहें तो डर लगता है बच्चों को स्कूल भेजने में !!

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  5. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (15-09-2017) को
    "शब्द से ख़ामोशी तक" (चर्चा अंक 2728)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    भगवान प्रद्युमन् की आत्मा को शक्ति दें और उसके माता-पिता को दुख सहन करने की शक्ति दें।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  6. Bilkul sahi kaha aapne.un mata pita per kya beet rahi hogi iss waqt ye ham soch bhi nahi sakte hai.

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  7. बहुत ही हृदयविदारक घटना है ये......
    सही कहा आपने भगवान प्रद्युम्न के माता पिता को शक्ति दे.....बहुत ही हृदयस्पर्शी आलेख....

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  8. इस घटना की जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच होकर, हत्यारे को कठोर सजा मिलनी चाहिए।
    बहुत अच्छा लेख। शुक्रिया।

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    1. अपार संभावनाओं से भरे एक निर्दोष बालक की नृशंस ह्त्या ओर उस पर कातिल का सही पता नहीं -- माँ बाप के लिए इससे बड़ा आघात क्या होगा कि स्वस्थ बच्चा घर से सुबह जाये और एक घंटे में उसके ना रहने की खबर आ जाये | ये दारुण दुःख जो सहे वही जाने --- फिर भी समय सब घावों का मरहम है -ईस्वर प्रद्युमन के माता - पिता को भी सब्र देगा | सारा देश शोकाकुल है इस दुखद प्रकरण से ------

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  9. अब ईश्वर से ही प्रार्थना हैं कि वो करोड़ों माता-पिता के दिल की आवाज़ सुने...किसी प्रद्युम्न के साथ फ़िर से ऐसी कोई घटना न हो...

    ऐसी ही कामना है। सभी पालकों को अपने अपने विद्यालयों में सामूहिक रूप से सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायज़ा लेना चाहिये और आवश्यक कदमों उठाने के लिए उन्हें मजबूर करना चाहिए। आवाज़ उठाते रहना आवश्यक है। बहुत संवेदन शील लेख। बहुत मार्मिक एवम उम्दा प्रासंगिक चर्चा।

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  10. ये एक ऐसी घटना है जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया है |हर माँ डरी हुई है | बच्चे स्कूल में ही सुरक्षित नहीं हैं | जबकि स्कूल बच्चो की शिक्षा और सुरक्षा के नामपर मोटी फीस लेते हैं | प्रद्युम्न के माता - पिता की हालत को सहज ही समझा जा सकता है |इश्वर उन्हें शक्ति दे | बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा सबसे अहम् है | आपने एक जरूरी मुद्दा उठाया है |

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  11. बहुत ही दर्दनाक घटना है ...अभी इसने दुनियां में देखा ही क्या था ..... महिला हो या बच्चे आज कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं...इनकी सुरक्षा पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है....और इसी में देश पिछड़ रहा है....ईश्वर बच्चे की आत्मा को शांति दे ....और उसके घरवालों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति दे.....

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  12. बहुत दुख होता है जब किसी निर्दोष की बिना किसी गलती के हत्या कर दी जाती है और वह तो एक मासूम बालक था । क्या बीती होगी उस मॉ पर जिसके बेटे की नृशंस ह्त्या कर दी गई। ये दारुण दुःख जो सहता है वही जानता है । लेकिन बिडम्बना तो यह है कि इस तरह की मर्मस्पर्शी घटनाएं कुछ दिन तक तो खुब चर्चा मे रहती है पर कुछ समय बाद सब भूल जाते है । वह भूल जाते है कि समाज मे सैकडो हजारों बहसी दरिंदे घुम रहे जो मौका पाते अपना काम कर जाते है । दुखद प्रकरण ।

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  13. ओह्ह्हह्ह्ह्ह कुछ नही कहा जा सकता आज के जमाने को

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  14. प्रद्धुम्‍न के साथ घटी घटना ने पूरे देश के माता पिता को झकझाोर कर रख दिया है। इंसाफ मिलना ही चाहिए

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  15. इस तरह की हृदय विदारक घटनाओं से अभिभावकों के मन में असुरक्षा और भय का भाव भरता है वहीं शिक्षण संस्थानों पर से भरोसा भी उठ जाता है .

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    1. प्रेरणादायक फ़ीडबैक के आपका बहुत बहुत धन्यवाद। मैं आपको विश्वास दिलाती हूं कि आगे भी आपको इसी तरह अच्छे अच्छे पोस्ट पढ़ने मिलेंगे। सहयोग बना कर रखिएगा।

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कुरकुरे,1,प्याज,3,प्याज की चटनी,1,प्यार,1,प्यासा कौआ,1,प्रत्यूषा,1,प्रद्युम्न,1,प्रसन्न,1,प्राणियों से सीख,1,प्री वेडिंग फोटोशूट,1,फर्रुखाबाद,1,फल,1,फल और सब्जी खरीदने से पहले,1,फलाहार,1,फल्लिदाने,1,फादर्स डे,2,फूल गोभी के परांठे,1,फेसबुक,2,फैशन,1,फ्रिज,1,फ्रेंडशीप डे,1,फ्रेंडशीप डे शायरी,1,बकरीद,1,बची हुई सामग्री का उपयोग,1,बच्चे,8,बच्चे की ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर गैंगरेप,1,बेटा,1,बेटा पढाओ,1,बेटी,7,बेटी बचाओ अभियान,2,बेसन,2,बेसन के लड्डू,1,बैंगन,1,बोझ,1,ब्रेकअप,1,ब्रेड,4,ब्रेड की रसमलाई,1,ब्रेड पकोडा,1,ब्रेड पिस्ता पेढे,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,5,ब्ल्यू व्हेल गेम,1,भक्ति,1,भगर,3,भगर की इडली,1,भगर के उत्तपम,1,भगर के कटलेट,1,भगवान,3,भजिए,1,भरवां मिर्च,1,भरवां शिमला मिर्च,1,भाई दूज शायरी,1,भाकरवड़ी,1,भाभी,1,भारत,1,भारतीय नारी,1,भारतीय मसाले,1,भुट्टे के 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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: ईश्वर प्रद्युम्न के माता-पिता को दु:ख सहने की शक्ति दे...!
ईश्वर प्रद्युम्न के माता-पिता को दु:ख सहने की शक्ति दे...!
दुनिया की कोई भी अदालत और कोई भी क़ानून उनका प्रद्युम्न उन्हें नहीं लौटा सकता!!! इसलिए हम सब मिल कर ईश्वर से यहीं दुआ कर सकते हैं कि प्रद्युम्न के माता-पिता को दु:ख सहने की शक्ति दे.......!!!
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
https://www.jyotidehliwal.com/2017/09/ishvar-Pradyuman-ke-mata-pita-ko-dukh-sahane-ki-shakti-de.html
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