क्या ऑनलाइन भक्ति से ईश्वर प्रसन्न हो सकते हैं?

क्या सोशल मीडिया पर देवी-देवताओं की फोटो डालने से, उन पोस्ट्स पर लाइक और कॉमेंट करने से ईश्वर प्रसन्न हो सकते हैं?

क्या ऑनलाइन भक्ति से ईश्वर प्रसन्न हो सकते हैं?
आज हम इतने ज्यादा व्यस्त हो गए हैं कि हमारे पास ईश्वर की भक्ति के लिए भी समय नहीं हैं। भई समय लाये तो कहां से लाएं? ट्विटर, फेसबुक और व्हाट्स एप से फुरसत मिले तब न! अब ईश्वर की भक्ति ही नहीं करेंगे तो ईश्वर मिलेंगे कैसे? इंसान मुलत: जुगाडू प्राणी हैं। अत: हमने इसका भी जुगाड लगा दिया! ईश्वर को भी हायटेक कर दिया! अरे भई, जब हम लोग ज्यादातर समय ऑनलाइन रहेंगे तो हमसे मिलने और हमको आशिर्वाद देने ईश्वर को भी ऑनलाइन आना पड़ेगा न! ईश्वर खुद तो ऑनलाइन आयेंगे नहीं। इसलिए कई लोग फेसबुक एवं व्हाट्स एप पर देवी देवताओं की फोटो डालते हैं और फ़िर लिखते हैं...

• “मेरी विनती हैं माँ बस एक उपकार कर देना...जो लिखे माँ उस की झोली खुशियों से भर देना...”

• “क्या आपके पास 2 मिनट का समय है दोस्तो,
बाबा पर विश्वास है तो दिल से कमेंट करो.. 
बाबा आपकी सारी मुराद पूरी करेंगे…”

• ''एक सेकंद में लाईक करें..., कौन-कौन मुझे लाइक करता हैं? इग्नोर मत करना आज शनिवार हैं। जल्दी लाइक करों शाम तक अच्छी ख़बर मिलेगी।''

मैं ने एक दिन ऐसी एक पोस्ट को सिर्फ़ लाइक ही नहीं किया तो शेयर भी किया...और बेसब्री से किसी अच्छी ख़बर का इंतजार करने लगी...लेकिन शायद मेरी ही किस्मत ख़राब थी जो शाम तक तो क्या पूरे हफ्ते भी कोई अच्छी ख़बर मुझे नहीं मिली।

• ये पोस्ट डालने वाले ने तो हद ही कर दी!
अब इंसान मुलत: बहुत ही डरपोक प्राणी हैं। हिटलर इतना बड़ा तानाशाह लेकिन वो अंदर से इतना डरपोक था कि उसने सिर्फ़ इसलिए शादी नहीं की थी कि कहीं रात को बीबी गला न दबा दे! मरने के सिर्फ़ दो घंटे पहले शादी की जब दुश्मन दरवाजे पर थे और मौत सुनिश्चित थी! अत: राधे-राधे नहीं लिखा और सचमुच में ज्यादा ठंड लग गई तो...यहीं सोच कर इस पोस्ट पर भी 3700-3800 लोगों ने राधे-राधे लिखा!

• 
इस पोस्ट पर 9.5k लाइक्स, 1325 शेयर्स और 1.1k कॉमेंट थे। हम जैसे ब्लॉगर्स तो सौ-पचास लाइक्स और शेयर मिलने पर ही फुल कर कुप्पा हो जाते हैं। माता जी इतने सारे कॉमेंट पाकर कितनी प्रसन्न हुई होंगी? इतने सारे लाइक्स और शेयर देख कर मुझे लगा कि 'जय माता दी' लिखने से प्रसाद मिलता होगा...नहीं तो इतने सारे लोग ऐसे ही इतने लाइक्स देकर 'जय माता दी' क्यों लिखते? इसलिए प्रसाद पाने की उम्मीद में मैं ने भी 'जय माता दी' लिख दिया! और प्रसाद पाने ले लिए हाथ भी आगे कर दिया! लेकिन बहुत देर इंतजार करने पर भी मुझे प्रसाद का एक दाना भी नहीं मिला!

अब तो ऑनलाइन इतनी सुविधा हो गई हैं कि आपको जो देवता पसंद हैं...जो मंदिर पसंद हैं उनके लिए क्रेडिट कार्ड से भुगतान कर ऑनलाइन पूजा कर सकते हैं। महाकाल हो या तिरुपति...आप पंजीकरण कराइए...ऑनलाइन भुगतान करिए...आप की ओर से उन मंदिरों में पुजा करा दी जाएगी। यहीं नहीं, पंजीकृत उपभोक्ता को हर महीने चुने हुए मंदिर का प्रसाद डाक से भेजा जाता हैं। इस तरह दूर बैठे तमाम भक्तों के लिए कुछ बड़े-बड़े मंदिरों के भगवान पास आ गए हैं! पंजीकरण करवाइए और आपके नाम की डुबकी प्रयाग में या कुंभ मेले में लगवा दी जाएगी! जरा सोचिए...हमारे नाम से कोई दुसरा व्यक्ति पुजा कर रहा हैं...कोई दूसरा व्यक्ति डुबकी लगा रहा हैं तो उसका पुण्य हमें कैसे मिलेगा? यह तो ये ही बात हुई कि कोई हमारा नाम लेकर अपना मोबाइल चार्जिंग पर लगाए और हम सोचे की हमारा मोबाइल चार्ज हो जाएगा!

दोस्तों, क्या सचमुच इस तरह सोशल मीडिया पर ईश्वर की फोटो पर लाइक करने से...टिप्पणी करने से...राम-राम या माँ लिखने मात्र से...हमारे नाम से किसी और के पुजा करने से...ईश्वर प्रसन्न हो जाते हैं? क्या हो गया हैं हमें? क्यों करते हैं हम ऐसी बचकानी हरकते? दरअसल इक्किसवी सदी में भी हम अंदर से बहुत ही डरपोक हैं! हमें लगता हैं कि यदि ऐसी किसी भी पोस्ट को नजरअंदाज कर हम आगे बढ़ गए और सचमुच में ईश्वर हमसे नाराज हो गए तो? गुजरात चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी 5 मंदिरों में गए जबकि राहुल गांधी 27 मंदिरों में गए! लेकिन जीता कौन? सिर्फ़ 5 मंदिरों में जाने वाले नरेंद्र मोदी न की  27 मंदिरों में जाने वाले राहुल गांधी! अब सोचने वाली बात ये हैं कि जब मंदिरों में जाने से भी ईश्वर प्रसन्न नहीं होते तो ऑनलाइन भक्ति से कैसे प्रसन्न हो सकते हैं? जब सरलता से उपलब्ध चीजें भी सिर्फ़ रटने मात्र से नहीं मिल सकती जैसे कि पानी...पानी...पानी... सौ-सौ बार, हजार-हजार बार रटने से भी पानी नहीं मिल सकता, शक्कर...शक्कर...शक्कर... बोलने से मुंह मिठा नहीं होता...तो सर्वशक्तिमान ईश्वर इतनी सरलता से कैसे प्रसन्न होंगे? इसलिए इस पोस्ट के माध्यम से मैं आप से निवेदन करना चाहती हूं कि इस तरह की नादानियां करना बंद करे। सोशल मीडिया पर देवी-देवताओं की पोस्ट डालना बंद करे। इससे ईश्वर प्रसन्न नहीं होंगे! व्हाट्स एप्प पर यह मैसेज देख कर लगा कि शायद ईश्वर ऐसा ही सोचते होंगे!!




ईश्वर को प्रसन्न करने का सिर्फ़ और सिर्फ़ एक ही रास्ता हैं और वो हैं ईश्वर को SMS करों! आप यहीं सोच रहे हैं न कि ईश्वर को SMS कैसे करेंगे? अरे भई, ईश्वर को SMS करों मतलब ईश्वर को सच्चे मन से स्मरण करों! ईश्वर जरुर प्रसन्न होंगे!!

इमेजेज: फेसबुक से साभार

Keywords: God, glad, devotion, online devotion

COMMENTS

BLOGGER: 18
  1. हम सब ऐसी फोटो देख कर आजिज़ आ चुके हैं, ऑनलाइन भक्ति पर बहुत करार कटाक्ष किया है , कोई दूसरा व्यक्ति हमारे नाम से पूजा करे तो उसके अन्दर वो भावना कैसे हो सकती है ... जरूरी है हम खुद ईश्वर को sms करें ... जागरूकता फैलाने वाला लेख

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  2. Aajkal online bhakti ki to baadh si aa gayi hai.sachmuch jagruk Karne wala lekh hai ye.

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (14-04-2017) को "डा. भीमराव अम्बेडकर जयन्ती" (चर्चा अंक-2940) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. If There is any God, then He/She is inside our temple of heart. :)

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  6. कभी भी नहीं हो सकती online भक्ति । बड़ा अजीब लगता है ऐसे msg देख कर ।अच्छा है आपका ध्यान गया इस ओर ।

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  7. बेनामी14/4/18, 3:06 pm

    Ati Sunder Post Jyoti Ji. God Pream ke aadhin hai. Uski pooja ke liye kisi bhi aadamber ki koi jarurat nahi. Aasha Kerta hu aap mere blog pe visit kere gi. My blog is about India Traveling & vegetarian food. Here is the link of my latest update about " Shri Siddhi Vinayaka Temple". I hope you will give me some comments. Keep sharing more inspiring posts. I add your blog to my reading list.Thanks agaian.

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  8. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  9. बहुत ही सार्थक और जागरूक करने वाला लेख है
    कम से कम भगवान की भक्ति तो मन से हो
    ये ऑनलाइन भक्ति.... इस पर करारा कटाक्ष....समसामयिक ...बहुत लाजवाब


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  10. A very important contemporary issue you have discussed here, such activities are really very illogical and does not have any connection with spirituality, i have also heard that in some social media, specially in fb such msgs can be seen in huge numbers.
    The logic you have discussed here behind the "likes" and 'comments" on these types are msgs...i am totally agree with you.
    A much needed topic discussed here, liked it a lot.

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  11. आदरणिया ज्योती देहलीवाल जी आपकी जानकारीया ऐक से बढ़ कर ऐक होती है तो कुछ जानकारीया ब्लॉग मे ना डालकर सार्वजनिक भी डाले तो अच्छा रहेगा मै फैसबुक पर भी आपके पेज से जुड़ा हुवा हूँ मगर वहाँ भी आपकी पोस्टे नही दिखती ।। कृपया सुझाव पर ध्यान देने की कृपा करे आपका "भयंकर"

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    1. भयंकर जी,उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद। आपने पोस्ट्स को सार्वजनिक प्रकाशित करने का सुझाव दिया हैं। लेकिन सार्वजनिक प्रकाशित करना मतलब कहा प्रकाशित करना यह मुझे नहीं पता। कृपया बताइएगा।

      हटाएं
  12. सही कहा ज्योति आपने ....बहुत करारा कटाक्ष किया है ...।

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  13. चिन्तनपरक लेख ज्योति जी !!

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  14. इन सब से कुछ नहि होने वाला ... ईश्वर सच्चे मन से ही प्रसन्न हो सकते हैं ... ऐसा लिखने वाले ख़ुद को और सूरों को पागल बना रहे हैं ... सार्थक लेख है .... सही विषय को उठाया है आपने ...

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नाम

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क्या ऑनलाइन भक्ति से ईश्वर प्रसन्न हो सकते हैं?
क्या सोशल मीडिया पर देवी-देवताओं की फोटो डालने से, उन पोस्ट्स पर लाइक और कॉमेंट करने से ईश्वर प्रसन्न हो सकते हैं?
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
https://www.jyotidehliwal.com/2018/04/kya-online-bhakti-se-ishvar-prasanna-ho-sakate-hai.html
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