परवरिश- ऐसे दे बच्चों को सच बोलने की प्रेरणा

चाहे कैसी भी परिस्थितियां हो सच अपने आप में एक ऐसा अस्त्र हैं जो इंसान को बड़ी से बड़ी मुसीबत से लड़ने की ताकत देता हैं। अत: ऐसे दे बच्चों को सच बोलने की प्रेरणा...

परवरिश- ऐसे दे बच्चों को सच बोलने की प्रेरणा
चाहे कैसी भी परिस्थितियां हो सच अपने आप में एक ऐसा अस्त्र हैं जो इंसान को बड़ी से बड़ी मुसीबत से लड़ने की ताकत देता हैं। अत: ऐसे दे बच्चों को सच बोलने की प्रेरणा। माता-पिता बचपन से ही बच्चों को सच बोलना सिखाते हैं। परवरिश का एक बड़ा हिस्सा हैं कि चाहे कितनी भी बड़ी ग़लती हो जाए लेकिन हमेशा सच बोले। लेकिन इसके बावजूद बच्चे अपनी ग़लती छुपाने के लिए झूठ का सहारा लेते हैं। अपने नन्हें में सच बोलने की आदत का विकास कैसे करें, इसके लिए कुछ तरीके आपको ख़ुद आजमाने होंगे। जिन्हें बच्चे सीख सकेंगे।

खुलकर बात करें-
मैं नहीं चाहती कि मेरी नाराजगी या डांट के डर से मेरे बच्चे मुझसे झुठ बोले और किसी मुसीबत में फंस जाएं। कभी बच्चों से जाने-अनजाने कोई गलती हो जाती हैं, तो कभी बच्चों के अपेक्षा अनुसार मार्क्स नहीं आते, तो कभी बच्चे किसी और की साजिश का शिकार हो जाते हैं- इन सभी परिस्थितियों में बच्चों को लगता हैं कि यदि हमने घर में सच बतलाया तो मम्मी-पापा मारेंगे, डाटेंगे या नाराज होंगे। बचपन में मम्मी-पापा की नाराजगी से बचने के लिए बच्चे छोटे-छोटे झूठ बोलना शुरु करते हैं। धीरे-धीरे वे सच न बोलने के इतने आदी हो जाते हैं कि उन्हें ख़ुद ही पता नहीं होता कि एक दिन में वे कितनी बार झूठ बोलते हैं! इसी सच न बोलने की आदत के चलते बच्चों और माता-पिता के बीच एक तरह की संवादहीनता आ जाती हैं। और आगे चल कर इस का परिणाम इतना भयानक होता हैं कि छोटी-छोटी समस्या भी वे माता-पिता से शेयर नहीं कर पाते और अकेलेपन से जुझते हुए आत्महत्या तक कर बैठते हैं!! ग़लती होने पर उन्हें डरा कर नहीं बल्कि प्यार से पूछें। इससे वे आपसे बात करने में हिचकिचाएंगे नहीं।

ग़लती स्वीकारना सिखाया-
मैंने अपने दोनों बच्चों को बचपन से ही यह बात समझा कर रखी थी कि चाहे कितनी भी बड़ी गलती हो जाएं सच बोले। इसके लिए मैं स्वयं भी हमेशा सच बोलती थी। बच्चों को पूरा-पूरा विश्वास था कि मम्मी हमेशा सच बोलती हैं। यदि मुझसे कोई गलती हो जाती तो मैं बच्चों के सामने ही उस गलती को कबूल करती। मैंने यह बात बच्चों के मन में अच्छी तरह बैठा दी थी कि यदि कोई व्यक्ति ख़ुद होकर अपनी ग़लती स्विकार करता हैं तो सामनेवाले व्यक्ति का आधा क्रोध वैसे ही शांत हो जाता हैं। यदि जाने-अनजाने तुमसे कोई ग़लती हो जाएं तो मुझे जरुर बताना। उसे छिपाने के लिए झुठ मत बोलना क्योंकि एक झूठ को छिपाने के लिए और कई बार छूठ बोलने पड़ेंगे। इसके साथ ही किस वक्त किसको क्या-क्या बोला यह तुम्हें याद रखना पड़ेगा! मैं तुम्हारी माँ हूं...तुमसे कितनी भी बड़ी गलती हो जाएं, मैं उस गलती को सुधारने की पूरी-पूरी कोशिश करुंगी। अन्य व्यक्ति तुम्हारी गलती से तुम्हारा लाभ उठाने की कोशिश करेंगे।

सीख का असर-
इस बात का असर एक मजेदार वाकये के रुप में तब सामने आया जब मेरा बेटा दसवीं के बाद नागपुर पढ़ने गया। बेटे का पहली यूनिट टेस्ट का परिणाम आया। मैं पैरेंट्स-टीचर मीटिंग में गई। उसे अपेक्षा से कम नंबर मिले थे तो टीचर ने पुछा, ‘तुम क्लास में तो बहुत अच्छा करते हो फिर टेस्ट में इतने कम नंबर क्यों मिले?’ मुझे और मैडम दोनों को लगा था कि वो या तो चूप रहेगा या ज्यादा से ज्यादा कहेगा कि पता नहीं! लेकिन बेटे ने जो जबाब दिया उसकी हमें बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। उसने कहा, ‘मैडम, मैंने होस्टल में पढ़ाई ही नहीं की। सिर्फ़ क्लास में जो पढ़ाई होती थी उसी पढ़ाई पर मैंने परीक्षा दी!’ मैडम ने पुछा, ‘होस्टल में पढ़ाई क्यों नहीं की?” ‘मैं होस्टल में टी. वी. देखता रहता हूं।‘ उसका जबाब सुनकर एक बार तो मुझे बहुत बुरा लगा क्योंकि हमने उसे बाहर टी.वी. देखने नहीं भेजा था। लेकिन बेटे की स्पष्टवादिता और सच्चाई देखकर मैडम ने दांतों तले ऊंगली दबा दी! मैडम ने मुझ से कहा, ‘आपके बेटे के टेस्ट में नंबर तो कम आए हैं लेकिन फ़िर भी यह बच्चा पूरे क्लास में मेरा सबसे पसंदीदा बच्चा हैं। क्योंकि इसमें सच बोलने की हिम्मत हैं। मैंने आज तक इतनी बेबाकी से सच बोलने वाला बच्चा नहीं देखा।’ इस घटना को बताने का मेरा मतलब यह कदापि नहीं हैं कि पढ़ाई न करकर और टी.वी. देख कर बच्चे ने अच्छा काम किया लेकिन कम से कम उसने सच तो बोला! मेरे समझाने पर उसने आगे से पढ़ाई पर पूरा ध्यान देने का वादा किया।

सच बोलने से होने वाले लाभ-
• तनाव में कमी-
सच बोलने से हमने कब किसको कौनसी बात बोली थी यह याद रखने के लिए अपने दिमाग पर जोर नहीं डालना पड़ता। इससे हमारे मन में किसी भी प्रकार का कोई तनाव नहीं रहता।

• आत्मविश्वास में बढ़ोतरी-
सच बोलने का सबसे बड़ा लाभ यह होता हैं कि हमारे आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती हैं। क्योंकि हमें झूठ पकडे जाने का डर नहीं रहता।

• लोग हम पर विश्वास करते हैं-
जब लोगों को यह बात समझ में आती हैं कि हम सच बोलते हैं तो लोग हम पर विश्वास करते हैं। हमारी कही गई बातों पर किसी को शंका नहीं होती।

• हम अपने काम में अपना 100% दे सकते हैं-
सच बोलने से हम अपनी खुद की नजरों में उपर उठते हैं। हम अपने आप में खुश रहते हैं। जब हम अंदर से खुश रहते हैं तो अपने काम में अपना 100% दे सकते हैं!
मुलत: प्रकाशित- मधुरिमा, दैनिक भास्कर (दि. 31 जनवरी 2018)

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