शुभ मुहूर्त कितने शुभ होते हैं?

क्या आपको पूर्ण विश्वास हैं कि शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य हमेशा शुभ ही होते हैं? शुभ मुहूर्त में शुरु किए गए कार्यों से ही पूर्ण सफलता संभव हो सकती हैं?

शुभ मुहुर्त कितने शुभ होते हैं?
क्या आपको पूर्ण विश्वास हैं कि शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य हमेशा शुभ ही होते हैं? शुभ मुहूर्त में शुरु किए गए कार्यों से ही पूर्ण सफलता संभव हो सकती हैं? नई गाड़ी खरीदनी हो, भुमिपूजन करना हो, गृह प्रवेश करना हो या अन्य कोई मांगलिक कार्य हो...प्राय: ये सभी कार्य लोग शुभ मुहूर्त देख कर ही शुरु करते हैं। अब तो ज्यादातर बच्चे ऑपरेशन से ही पैदा होने से बच्चे को भी मनचाहे मुहूर्त में पैदा करने का प्रचलन हैं। मानो शुभ मुहूर्त में बच्चे को पैदा करा कर बच्चे का भाग्य हम खुद लिख रहे हैं! आप 12 दिसंबर, 2012 का बारह बजे का शुभ मुहूर्त भूले नहीं होंगे जब पूरी दुनिया में अपरिपक्व नवजात शिशुओं को निर्दयतापूर्वक इस संसार में लाने के प्रयास किए गए थे!
यदि किसी कार्य की सफलता मुलत: उसके शुभ मुहूर्त में शुरु होने पर ही निर्भर हैं तो कृपया नीचे दी हुई कुछ बातों पर गौर कीजिए...
• शुभ मुहूर्त में जन्म-
पिछले कई सालों से शुभ मुहूर्त देख कर ही बच्चे पैदा किए जा रहे हैं। ऐसे में तो ये सभी बच्चे सफ़ल खिलाड़ी, वैज्ञानिक, अभिनेता, उद्योगपति या प्रधानमंत्री ही बनने चाहिए थे। शुभ मुहूर्त में पैदा होने वाले बच्चे भी गलत राह पर क्यों जा रहे हैं? जीवन में फ़िस्सडी क्यों साबित होते हैं? मुकेश अंबानी के जन्म समय पर जन्म लेने वाले बच्चे मुकेश अंबानी जैसे अमीर क्यों नहीं बने? अमिताभ बच्चन के जन्म समय पर जन्म लेने वाले बच्चे सदी के महानायक क्यों नहीं बने?
• शुभ मुहूर्त में चुनाव की उमेदवारी-
चुनाव में खड़े होने वाले लगभग सभी उमेदवार शुभ मुहूर्त देख कर ही चुनाव में फॉर्म भरते हैं। लेकिन इतने सारे उमेदवार में से एक ही उमेदवार चून कर आता हैं। बाकी उमेदवारों के शुभ मुहूर्त का क्या होता हैं? क्या उन सभी के पंडितों से शुभ मुहूर्त देखने में गलती हो गई थी? मंत्री पद मिलने के बाद संबंधीत मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने से पहले लगभग हर मंत्री शुभ मुहूर्त देखते हैं फ़िर भी उनकी कई योजनायें असफल क्यों हो जाती हैं?
• शुभ मुहूर्त में शादी-
कुंडली मिलान करके शादी का शुभ मुहूर्त निकाला जाता हैं। फ़िर भी दिनोंदिन तलाक का प्रतिशत क्यों बढ़ रहा हैं? कई महिलाएं विधवा और कई पुरुष विधुर क्यों होते हैं? ज्यादातर शादियाँ तो निकाले गए शुभ मुहूर्त पर होती ही नहीं हैं फ़िर शुभ मुहूर्त के लिए इतनी हायतौबा क्यों?
• शुभ मुहूर्त में यात्रा-
लंबी यात्रा के लिए या तिर्थयात्रा के लिए जाते समय कई लोग शुभ मुहूर्त देखते हैं। फ़िर भी कई लोग दुर्घटना के शिकार क्यों होते हैं? 2013 में उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में जो त्रासदी हुई और हजारों लोगों की जाने गई क्या वे सब की सब अशुभ मुहूर्त में घर से निकले थे?
• शुभ मुहूर्त में भूमिपूजन-
बड़े-बड़े बिल्डर्स शुभ मुहूर्त देख कर ही किसी भी कार्यालय का, पुलों का, बांधों का और घरों इत्यादि का भुमीपूजन कर कार्य प्रारंभ करते हैं। फ़िर दुर्घटनाएँ क्यों होती हैं? घरों में परिवार के अंदर इतनी अशांती क्यों रहती हैं? बिहार के मुज्जफरपुर में उद्घाटन  के पहले ही जो बांध टूटा क्या उस बांध का काम शुभ मुहूर्त देख कर शुरु नहीं किया गया था?
• इतिहास गवाह हैं कि मुहूर्त देख कर काम करने वाली पेशवाई खत्म हो गई और कभी भी मुहूर्त न देखने वाले अंग्रेजों ने भारत पर राज किया! 
• इस संसार के सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति किसी शुभ मुहूर्त की कृपा से सर्वश्रेष्ठ नहीं बने बल्कि अपने अथक परिश्रम और सकारात्मक दृष्टिकोन से उन्होंने हर घड़ी को शुभ घड़ी में बदल दिया। 
इन सब बातों से यहीं सच्चाई साबित होती हैं कि कोई भी मुहूर्त कभी भी शुभ या अशुभ नहीं होते! शुभ-अशुभ होते हैं हमारे विचार एवं हमारे द्वारा किए गए कार्य!
दरअसल हमारी निर्णय लेने की क्षमता, हमारा समय प्रबंधन, हमारा विवेक, हमारी परिश्रम करने की इच्छा ये ही कुछ ऐसे तत्व हैं जो किसी भी क्षण को शुभ मुहूर्त बना सकते हैं।
अत: दोस्तो, कोई भी पंडित, ज्योतिषी, बाबा या साधु आपको शुभ मुहूर्त में काम करने से सफलता मिलेगी ऐसा कहते हैं तो उनसे स्टैम्प पेपर पर लिखके देने कहिए। और सफलता न मिलने पर नुकसान भरपाई का दावा करेंगे ऐसे बोलिए...मुझे पूरा-पूरा विश्वास हैं कि वे आपके पास आयेंगे ही नहीं! क्योंकि यह बात उन्हें बहुत अच्छे से पता हैं कि यदि कोई कार्य पूरी ईमानदारी और सच्ची लगन से किया जाएं तो हर मुहूर्त शुभ होता हैं!!!
सोचनेवाली बात यह हैं, जीवन में दो ही सच्चाई होती हैं, जन्म और मृत्यु। जब इनका कोई मुहूर्त नहीं होता हैं, तो बाकि चीजों के लिए क्यो??

Keywords: Muhurat, auspicious, inauspicious, science and superstition, blind belief, superstitious beliefs, superstitious moutains

COMMENTS

BLOGGER: 36
  1. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  2. ज्योति जी आपकी बात से मैं पूरी तरह से सहमत हूँ | शुभ महूर्त की कल्पना ही अन्धविश्वास को जन्म देती हैं | जबकि जो काम इमानदारी व् लगन के साथ किया जाएगा वह सफल होगा | हमारे देश में महूर्त पर ज्यादा विचार करा जाता है फिर भी हर जगह सफलता मिलती हो ऐसा तो नहीं है |आपने बहुत अच्छे उदाहरणों से तार्किक दृष्टि से समझाया है की महूर्त पर विचार करने के स्थान पर मेहनत पर विश्वास करें | अन्धविश्वास पर प्रहार करता बहुत अच्छा लेख |साधुवाद ... वंदना बाजपेयी

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  3. दिनांक 24/10/2017 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी इस चर्चा में सादर आमंत्रित हैं...

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  4. बहुत खूब ज्योति जी.
    मेहनत करने वालों के लिए कोई मुहूर्त नहीं होता.
    ये कोरा अन्धविश्वास है.

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  5. बहुत बढ़िया लेख ज्योति जी।अंधविश्वास पर करारा.प्रहार करती हुई।ऐसी जागरूकता की आवश्यकता है आज समाज को।
    सादर आभार आपका बहुत ही सराहनीय और सार्थक प्रयास आपका।

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  6. शुभ मुहुर्त में लिख रही हूँ ये प्रतिक्रिया
    तीन पण्डितो नें कहा 3 बज कर 22 मिनट पर लिखिएगा
    सो अभी हो बज गए है..3.22
    सादर

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    1. यशोदा जी,मैं आपकी टिप्पणी में थोड़ी सी सुधारना कर देती हूं। वो यह कि तीन पंडितो और उनके 22 शिष्यों ने कहा था इस शुभ मुहूर्त के बारे में...हा हा हा!!!

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  7. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (24-10-2017) को
    "दो आँखों की रीत" (चर्चा अंक 2767)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  8. बहुत अच्छी जानकारी
    यही सत्य है कि यदि कोई कार्य पूरी ईमानदारी और सच्ची लगन से किया जाएं तो हर मुहूर्त शुभ होता हैं

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  9. ये सच में काम करते हैं लेकिन लोगों का भरोसा कम हो रहा है !!

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    1. योगी जी, भरोसे के होने और न होने का सवाल ही नहीं हैं। वास्तव में हर मुहूर्त शुभ ही हैं यदि कोई भी काम सही तरीके से और आत्मविश्वास से किया जाए।

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  10. मुझे काफी पहले से अंदाजा था कि इस तरह के लेख आगे जरूर आएंगे और आज देख भी लिया। इसमें आपका दोष नहीं है ज्योति जी। दरअसल यह ज्योतिष का मामला है और बहुत कम लोग जानते हैं कि ज्योतिष विज्ञान का ही एक भाग है। काफी पहले इस विज्ञान का सही उपयोग करना लोगो को आता था। विश्वविद्यालयों में यह एक विषय के रूप में पढ़ाया जाता था। इस बिषय पर रिसर्च भी होते थे और सब कुछ सही था लेकिन विदेशी आक्रांताओं के आने से यह बिषय बंद हो गया। रिसर्च बंद हो गए। इसीलिए अच्छे ज्योतिषी भी मिलना मुश्किल हो गया। समय के साथ इस विज्ञान में कुछ मूर्ख ज्योतिषियों के कारण बहुत से अन्धविश्वास जुड़ गए। रिसर्च बंद हो गए और नए विचारों का आना बंद हो गया। और आज ज्योतिष का विकृत रूप सभी से सामने है और इसका परिणाम भी सबके सामने है। दोष हम लोगों का ही है ज्योति जी कि हम इतने अच्छे विज्ञान को भूल गए। आपने लिखा है "शुभ महूर्त की कल्पना ही अन्धविश्वास को जन्म देती हैं | जबकि जो काम इमानदारी व् लगन के साथ किया जाएगा वह सफल होगा।" लेकिन मैं ऐसे बहुत से लोगों को जनता हूँ जो जिन्होंने इमानदारी व् लगन के साथ काम किया फिर भी असफल हैं। इसीलिए यह तर्क ठीक नहीं है।

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    1. अमूल जी, कई बार ऐसा होता हैं कि ईमानदारी और लगन से काम करने के बाद भी इच्छित सफलता नहीं मिलती है। लेकिन इसके कारण और कुछ भी हो सकते हैं। सिर्फ वो कार्य शुभ मुहूर्त में शुरू नही किया गया इसलिए असफलता मिली ऐसा हम नहीं कह सकते।

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  11. आदरणिया जी सबसे पहले तो दीपावली बाद पहली बार मिल रहे है इस लिये दीपावली की बहुत बहुत बधाईया ।।
    अब बात करते है ज्योतिष की तो ज्योतिष ऐक बहुत गहरी विधा है जिसकी चर्चा पर विस्तार भय से बहुत थोड़े मे लिखने का प्रयास है मेरा ।। आदरणिया जी राम और रावण और कृष्ण व कंस की ऐक ही राशी थी मगर ज्योतिष मे पंचाग अर्थात ज्योतिष के पाँच अंग (१) तिथी (२) योग (३) नक्षत्र (४) वार (५) करण इनमे प्रत्येक ऐक राशी के व्यक्तीयो मे अंतर आयेगा ये दावे के साथ मै कहता हूँ ।। अब जब इनमे अंतर आयेगा तो जातक के गुण धर्मो मे भी अंतर आयेगा ।। अगर ये बाते गलत हो तो लग्न कुण्डली के अनुसार ज्योतिषाचार्य कैसे जातक के परिवार जन से बिना पूछे ये फलित लिखते है कि जन्म के समय जातक की माता ने क्या खाया कौन से रंग का वस्त्र पहिना जातक का जन्म किस दिशा व स्थान पर ऊंची जगह पर या नीची जगह पर हुवा जातक का रंग व जन्म के समय किस प्रकार रोया या देरी से रोया ।। ये सब लग्न मुहर्त से ही बताया जाता है जो ऐक दम सही होता है ।। जब ये चीजे सही होती है तो शुभ मुहर्त का भी प्रभाव कुछ तो पड़ता ही है ।।
    आपका bhikamjangid11a@gmail.com
    blogvarta.com

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  12. अभ्यंकर जी, आपको भी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।
    मैं ने यह नहीं कहा हैं कि शुभ मुहूर्त का थोड़ा सा भी प्रभाव नहीं पड़ता है। मैं सिर्फ यह कहना चाहती हूं कि शुभ मुहूर्त किसी भी कार्य की सफलता के लिए अत्यावश्यक चीज़ नहीं है। कार्य की सफलता में मुहूर्त का प्रभाव बहुत ही नगण्य रहता हैं। जबकि हम अज्ञानता वश उसे ही ज्यादा महत्व देने लगते हैं।

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    उत्तर
    1. फौन मे बेटरी उर्जा कम रहती है और प्लग इन पर तो चलता रहता है मगर बिना प्लग इन के ऐक पेज भी टाईप नही होता आज आपकी पुरानी पोस्ट पर कुछ नई जानकारी देने के लिये बहुत कुछ लिखा था मगर सत्या नास होगया फौन बंद हो गया सब मिट गया तो बाद मे वापस लिखूंगा

      हटाएं
    2. सवेरे जैसा लिखा शायद पूरा याद ना हो मगर फिर भी जितना याद है उतना लिख रहा हूँ ।।
      "आदरणिया अनुजा" यहाँ से लिखना शुरु किया था ।। आपने जिस दिन ये बोला की आप मुझे आदरणिया जी ना बोला करे क्यु कि मुझे लगता है आपकी उम्र मेरे से ज्यादा ही होगी तो मैने मेरी उम्र बताई तब वाकई आप मुझसे आठ वर्ष छोटी है तब से मैने आपको जी लगाना बंद कर दिया हैै ।। तो आदरणिया अनुजा पहले तो मेरी ओर से आपको सपरिवार दीपावली की अग्रिम शुभकामनाये ।। अब चर्चा करते है शुभ मुहर्त की , तो आदरणिया अनुजा ये लेख पुराना है पिछली दीपावली का जिसपर मै अपने विचार पिछले वर्ष ही दे चुका हूँ ।। शुभ मुहर्त मे संतान जन्म ये विषय इसमे नया है , इस पर आदरणिया अनुजा मेरा ये कहना है कि शुभ मुहर्त के लिये शल्य क्रिया से संतान को जन्म देना निश्चित ही घोर पाप है और आई पी सी की धारा किसी को प्राणघातक पीड़ा देने वाला अपराध है ,प्रसूता के साथ घोर अन्याय है मै ये कहना चाहूंगा कि इस अपराध के दोषी डॉक्टर और प्रसूता के ससुराल वाले दोनो उक्त धारा के तहत दण्ड के पात्र है ।। संतान का शुभ मुहर्त मे जन्मना और शुभ कर्मी होना ये तो शुभ मुहर्त मे गर्भाधान प्रक्रिया पर निर्भर है वे शुभ मुहर्त कौन से है विस्तार भय से मेरी लेखनी मुझे लिखने से रोक रही है ।। मगर फिर भी कुछ प्रमाण देने की कोशिश करुंगा कि मुहर्त कैसे होते है , इससे पहले मै गर्भाधान के विषय मे पुरुष और जानवर की वृती का तुलनात्मक अध्यन करने का सुझाव दुंगा ऐक अपवाद रूप मे सूअर को छोड़कर करीब करीब सारे जानवर अपनी स्तिथी और मौसम का पालन करते है ,मगर मनुष्य ? ये हम सब जानते है तो फिर कैसे संतान जन्म का शुभ मुहर्त और शुभ कर्मी संतान होगी ।। इसी लिये हमारे ऋषीयो ने शुभ मुहर्त मे ऋतुदान देना बताया है हम सब ये भूल चुके है , किसी की कोई वस्तु वाहन गाय भेंस यदी चोरी हो जाती है तो वह भी मुहर्त के अनुसार बताई जाती है पंचाग मे इसे चोरी गई वस्तु का अभिज्ञान कहते है ।। भारती ज्योतिष विज्ञन ने इस विषय पर आकाश के सत्ताईस नक्षत्रो को तीन खण्डो मे विभक्त किया है १-- अंधलोचन २--मंदलोचन ३--सुलोचन , प्रत्येक खण्ड मे नौ नक्षत्र है ।। अंध लोचन मे गई वस्तु तीन दिन मे मिलने की पक्की सम्भावना होती है और मंद लोचन मे गई वस्तु साठ दिन मे मिलने की सम्भावना होती है और सुलोचन मे खोयी चीज मिलना मुश्किल ही नही नामुमकिन है ।। इस विज्ञान के द्वारा मैने छः सात भविष्य वाणिया करी जो सटीक फली भूत हुयी सिर्फ ऐक फेल गयी ।। इसमे ऐक तो मेरी खुद की साईकिल खोयी उसके सम्बंध मे थी साईकिल मेरे घर से करीब आधे कीलो मीटर दूर और आयी बिलकुल मेेरे द्वार पर कैसे आयी ये विषय भी रोचक और लम्बा है इसलिये यही विराम देता हूँ ।। बहरहाल इतना ही कहुंगा कि जब नक्षत्र विशेष मे खोयी वस्तु का मिलना या ना मिलना तय है तो नक्षत्र विशेष के मुहर्त मे दिये गये ऋतुदान पर भी शुभ मुहर्त मे संतान का जन्म और शुभ कर्मी संतान का होना निश्चित रूप से तय है ।।
      सादर वन्दे जय श्रीराम
      आपका कवि भयंकर

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    3. आपको एवं आपके पूरे परिवार को दिपावली की अग्रिम शुभ्कामनाएं, भैया! इतनी सविस्तर और सटिक टिप्पणी देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, भैया।
      ज्योतिष एक विज्ञान हैं यह मैं मानती हूं। लेकिन हमारे कार्य की सफलता-असफलता उसी पर निर्भर हैं ऐसा हम नहीं कह सकते।

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    4. आदरणिया अनुजा ये तो मैने बताया ना कि सही जन्म समय मालुम हो तो ही जीवन की सफलता और असफलता की गणना की जा सकती है ।। आप विश्वास नही करोगी वास्तु ज्योतिष मे तो भवन की उम्र भी बताई जाती है ।।और स्वर विज्ञान इन सबसे हटकर कार्य की सफलता असफलता की सटीक भविष्य वाणी करता है ।। आप झाँसी के पास पण्डुखर गाँव मे जाओगी तो वहाँ हनुमान जी के पुजारी है , वे ऐक बार मे ऐक प्रश्न का उत्तर देते है और भेँट कुछ भी नही लेते है आप अपनी मर्जी से जो देओगे वो लेने के बाद आपको पहले से लिखी पर्ची बताते है कि आप इतनी राशी भेँट करने वाले है ।। है ना ये आश्चर्य वाली बात , भारतीये ज्योतिष कि विभिन्न विधाये है मगर झूठे लुटेरो ने इसे बदनाम कर दिया ।।

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  13. अब ज्योतिजी, थोड़ा मैं भी लिख दूँ! कलाम साहब राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार घोषित हो चुके थे। प्रमोद महाजन उनके पोलिंग एजेंट थे। पर्चा भरा जाना था। कलाम साहब के पास वे गए। पूछा । सर, पर्चा भरने का कोई आपका पसंदीदा शुभ मुहूर्त। कलाम साहब बोले, इस पृथ्वी पर हमारे और मुहूर्तों के आस्तित्व का कारण पृथ्वी का सूर्य की परिक्रमा करना है। इसलिए जबतक पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती रहेगी, तबतक उसके कारण स्वरूप उत्पन्न निशा दिवा का हर क्षण शुभ मुहूर्त है।

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    1. बिल्कुल सटीक उदाहरण दिया है आपने विश्वमोहन जी। कलाम साहब को अपने कर्तुत्व पर पूरा पूरा विश्वास था। इसलिये उनके लिए हर क्षण शुभ मुहूर्त ही था।

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  14. अंधविश्वास पर करारी चोट मारती आपकी बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति...... क्या शुभ क्या अशुभ ....यह कल्पना से परे है.....नियत समय पर पूरी निष्ठा से किया काम अवश्य सफल होता है....।
    शुभ मुहूर्त के बजाय शुभ कर्म का महत्व जानना जरूरी है...लाजवाब प्रस्तुति....

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  15. ज्योति जी, आपके इस लेख के कारण अच्छी चर्चा padhne को मिली. अच्छा लेख. विमर्श होते रहना चाहिये.
    सादर

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  16. बहुत खूब ,ज्योति जी ,शुभ मुहूर्त, माना कि शुभ मुहूर्त की अपनी विशेषता होती है ,शुभ मुहूर्त तभी शुभ होते हैं जब उसमें सच्ची लगन,ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठता और कर्मनिष्ठता का समावेश होता है ।

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  17. ना बुरा होगा, ना बढ़िया होगा | होगा वैसा ही, जैसा नजरिया होगा |शुभ मुहूर्त तो हर वह समय होता है जिस समय कार्य में सच्ची लगन,ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठता का समावेश होता है । लाजबाब प्रस्तुति ज्योंति जी धन्यवाद |

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  18. ठोस कारणों और उदाहरणों के साथ आपने अपनी बात रखी है ज्योति दीदी । आपका नजरिया वैज्ञानिक सोच को परिपुष्ट करता है । मेरा मत थोड़ा भिन्न है । मैं समझती हूँ कि ज्योतिष भी विज्ञान ही है और मैं इसमें विश्वास भी करती हूँ । किंतु यह भी मानती हूँ कि कार्य एकदम ही जरूरी हो और रुकना संभव ना हो तो ईश्वर पर आस्था रखते हुए,स्वच्छ निःशंक चित्त और पूर्ण लगन एवं मेहनत से कार्य कर लेना चाहिए ।

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  19. बहुत दिन बाद आप आपके ब्लॉग पर आया, बहुत अच्छा पढ़ने को मिला

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  20. किसी को ओफेंड नहीं करना चाहता पर जो मन को भाये वाही सब से अच्छा महूरत होता है ...

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  21. Very nice post....शुभ मुहूर्त या अशुभ मुहूर्त ये लोगों के मन की भ्रांति है । इस विषय को लोग खुद के मन से उत्पन्न करते है । आप के विचार अगर शुद्ध है तो सारे काम सही होंगे ।और बहुत से ज्योतिष आचार्य बहुत प्रखर होते है पर हम उनकी बातों का गलत अर्थ निकाल लेते है । एक दिन एक सज्जन मेरे घर आये थे । उनसे ये ही सब विषय पर चर्चा हो रही थी । तब उन्होंने कहा था । कि बोलने वाला तो सही बोलता है परंतु हम स्वीकार उतना ही करते है जो हमे सही लगता है ।

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  22. बेनामी6/1/18, 10:26 pm

    क्या बात कही है आपने बिलकुल दिल को छु लिया इसने यही हमारे समाज की रीत है शुभ अशुभ के नाम पर ठगो की दूकान चलती है भगवन के लिए सभी बराबर है पर अगर इस बात को ये दूकान चलने वाले लोग समझे तो इनकी आये कहा से आएगी यह बेहद ही दुःख का विषय है किन्तु यही इस कलिकाल का कटु सत्य है यहाँ पप्पी आदर पाते है और भगत लोग पागल की उपाधि से अलंकृत होते है हमें इनसब के साथ जीना सीखना होगा एअक दिन ये सभी पाखंड खोरो के दुकानों पे ताला लगे गए क्यों की सत्य का नया सवेरा आये गए आज मैंने अपने ब्लॉग पर दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिर "श्री कपालीश्वरर महादेव मंदिर" के बारे में यात्रा पोस्ट लिखी है यह मंदिर चेन्नई में स्थापित है. हमारे गौरव शाली देश भारत का यह पुराणिक मंदिर भगवान् रूद्र को समर्पित है आशा करता हु आप को पोस्ट पसंद आएगी जय महादेव. Post link:- http://www.indiatourfood.com/2018/01/chennaitraveling-kapaleeswarar-mahadev-temple.html

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  23. ज्योति हर बार की तरह इस बार भी बहुत ही सुंदर लेख लिखा है....निसन्देह किसी भी कार्य कि सफलता किसी मुहूर्त कि मोहताज कभी नही होती।

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  24. बहुत सुंदर लेख लिखा ज्योती जी

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जी,2,महानता,1,महाराजा अग्रसेन जी,1,महाराष्ट्र में आरक्षण,1,महिला आजादी,1,महिला आरक्षण,1,महिला दिवस,4,महिला सशक्तिकरण,4,महिला सुरक्षा,1,महिलाओं का पहनावा,1,माँ,7,माँ का दर्द,1,माँ की हिम्मत,1,माउथ फ्रेशनर,1,माता यशोदा,1,माता लक्ष्मी,1,मातृभाषा,1,माफी,1,मायका,2,मारवाड़ी,1,मारवाडी रेसिपी,1,मार्केटिंग स्ट्रेटेजी,1,माला,1,मावा,1,मावा कुल्फी,1,मासिक धर्म,3,माहवारी,8,मिठाई,46,मिठाई मेट,1,मित्र,2,मिलावट,1,मिलावट पहचानने के घरेलू तरीके,1,मिलिबग्स,1,मिल्क पाउडर,1,मिल्कमेड,1,मिस इंडिया 2019,1,मीठे चावल,1,मीठे जर्दा चावल,1,मुक्ति,1,मुखवास,1,मुनगा,1,मुबारकपुर कला,1,मुरब्बा,1,मुरमुरा,1,मुरमुरा लड्डू,1,मुर्गा,1,मुर्गे की बांग,1,मुलेठी,1,मुस्लिम,1,मुस्लिम मंच,1,मुहूर्त,1,मूंग की सूखी दाल का हलवा,1,मूंग दाल,1,मूंग दाल डोसा,1,मूंगदाल और आटे की कुरकुरी मठरी,1,मूंगफली,1,मूंगफली काजू बर्फी,1,मूंगफली की सूखी चटनी,1,मूंगफली बर्फी,1,मूली,4,मूली का अचार,1,मूली के पत्तों के कुरकुरे कटलेट्स,1,मेंढक,1,मेंस्ट्रुअल कप,2,मेंहदी,9,मेडिसिन बाबा,1,मेथी,1,मेथी के पराठे,1,मेथी दाना चुर्ण,1,मेथी मटर मलाई,1,मेनु,1,मेरा बेटा,1,मेरा मंत्र,3,मेरा श्राद्ध कर,1,मेरा सपना,1,मेरी अग्नि परीक्षा,1,मेरी बात,16,मैंगो फ्रूटी,1,मैंगो श्रीखंड,1,मैदा के मीठे पेठे,1,मैनर्स,1,मोदक,4,मोबाइल,1,मोबाइल की लत,1,