ओ माय गॉड...इस इक्किसवी सदी में भी किराए पर मिलती हैं बीवियां!!!

क्या आप जानते हैं कि नारी समानता के इस इक्किसवी सदी में भी किराए पर मिलती हैं बीवियां....

ओ माय गॉड...इस इक्किसवी सदी में भी किराए पर मिलती हैं बीवियां!!!
शीर्षक पढ़ कर चौंक गए न? भई मकान, गाड़ी, कपड़े किराए पर मिलते हैं। आजकल तो गहने भी किराए पर मिलते हैं। यहां तक तो ठीक हैं। लेकिन बीवियां किराए पर? क्या गाड़ी, मकान और कपड़ों की तरह बीवियां कोई चीज हैं जो देनेवाला किराए से देता हैं और लेने वाला लेता हैं? बीबी एक इंसान नहीं हैं? उसे भावनाएं नहीं हैं? हम कहते हैं कि आज नारी-पुरुष समानता का युग हैं? नारी सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी डिंगे हम हांकते हैं...इंसान मंगल पर जाने की तैयारी कर रहा हैं...ऐसे दौर में भी बीवियां किराए पर मिलती हैं और वो भी हमारे अपने देश में...सच में बात कुछ हजम नहीं होती हैं। लेकिन यह एक कड़वी सच्चाई हैं कि आज भी हमारे ‘शायनिंग़ इंडिया’ में बीवियां किराए पर मिलती हैं!!!

मध्यप्रदेश के शिवपुरी में ‘धड़ीचा प्रथा’ प्रचलित हैं‌। इस प्रथा अनुसार यहां हर साल एक मंडी लगाई जाती हैं जिसमे भेड़-बकरियां, गधे-घोडे नहीं लड़कियों को खड़ा किया जाता हैं। यहां हर साल पुरुष आते हैं और अपनी मनपसंद की लड़की को चुनकर उसकी किमत तय करते हैं। इन लड़कियों और महिलाओं की बोली 12,000 रुपए से लेकर 25,000 रुपए तक लगाई जाती हैं। किराए की राशी इस बात पर निर्भर करती हैं कि युवा महिला का परिवार कितना गरीब हैं और उसे पैसों की कितनी जरुरत हैं। इतना ही नहीं सौदेबाजी होने के बाद बाक़ायदा 10 रुपए से लेकर 100 रुपए के स्टाम्प पेपर पर लिखा पढ़ी करके शादी की मंज़ूरी दी जाती हैं। सौदे का समय पूरा होने के बाद महिला को दूसरे व्यक्ति को बेचा जाता हैं। मासिक आधार से लेकर सालाना के हिसाब से गरीब घरों की लड़कियों और महिलाओं की शादी उन अमीरजादों से कराई जाती हैं, जो अपने लिए पत्नियाँ नहीं ला सकते।

खराब लिंगानुपात के कारण इस कुप्रथा को बढ़ावा मिल रहा हैं। लड़कियों की कमी ने दलालों और बिचौलियों को प्रेरित किया हैं कि वे गरीब परिवारों की लड़कियों को इस काम में लगाएं। ये कुप्रथा कई सालों से हमारी संस्कृति में घुल गई हैं। चौंकाने वाली बात यह हैं कि आज तक इसके खिलाफ़ कोई कारवाई नहीं की गई हैं। सर्कस में, सिनेमा में जानवरों के इस्तेमाल पर रोक लगानेवाले मानवाधिकार आयोग का इस ओर आज तक ख्याल ही नहीं गया! ऐसा प्रतीत होता हैं कि गरीब परिवारों की महिलाएं और लड़कियों की किंमत इन जानवरों से भी गई बिती हैं! ''बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं'' की केंद्र सरकार की योजना के बाद भी हमारे अपने देश में बेटियों को भेड़-बकरियों की तरह बेचा जा रहा हैं! ताज्जुब की बात तो यह भी हैं कि आज तक बड़ी-बड़ी नारी सशक्तिकरण की संस्थाओं ने भी इनकी सुध नहीं ली!

इस कुप्रथा के बढ़ने के लिए महिलाएं भी समान रूप से जिम्मेदार हैं। जब तक महिलाएं खुद इस अन्याय के खिलाफ़ आवाज़े नहीं उठाएगी तब तक कोई क्यों उनकी मदद करेगा? यह मामला सिर्फ़ मध्यप्रदेश तक ही सीमित नहीं हैं तो अन्य राज्य भी इसमें शामिल हैं।

निवेदन-
दोस्तों, क्या आपको लगता हैं कि महिलाओं/लड़कियों की ऐसी ख़रीद-फरोख्त नहीं होना चाहिए? इन महिलाओं को भी एक इंसान की तरह जीने का मौका मिलना चाहिए? यदि हां तो सभी पाठकों से नम्र निवेदन हैं कि इस पोस्ट को जितना ज्यादा हो सके शेयर करें ताकि सरकार, मानवाधिकार आयोग एवं विभिन्न नारी संगठनों तक इन महिलाओं पर होने वाले अन्याय की दास्तान पहुचे और कोई तो आगे आकर इस कुप्रथा को बंद करने की पहल करें!!!

इमेज गुगल से साभार

Keywords: Wife on rent, Shivpuri, crime against women, India shining, Beti bachao-Beti padhao, Human Rights commission, women empowerment, mahila 

COMMENTS

BLOGGER: 36
  1. हम तो पढ़ कल आश्चर्य में पड़ गये,आज के इस दौर में ही ऐसा होता है,नारी के अधिकारों पर बड़ी बड़ी बातें करने वाले नेताओं और संस्थाओं के मुँह भी आश्चर्य जनक रूप से बंद है इस मुद्दे पर।
    ज्योति जी आपके इस लेख ने मन झकझोर दिया।
    हम जरुर शेयर करना चाहेगे।
    और एक बात कहना था कृपया मुझे श्वेता ही कहे 'जी' न लगाने की औपचारिकता न करें,प्लीज मुझे अच्छा लगेगा।
    समाजोपयोगी जागरूक लेख पर आपको बधाइयाँ जी।

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    1. स्वेता, मैं तुम्हारे नाम के आगे जी नहीं लगाउंगी लेकिन एक शर्त पर...तुम भी मेरे नाम के आगे जी नहीं लगाओगी। दोस्ती में औपचारिक ता कैसी?

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  2. उफफफफफफफफफफफ..
    दर्दनाक प्रथा...
    बेटियों की दुर्दशा
    नही लिखा जा रहा है आगे
    सादर

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  3. अजीब और विचित्र तो है ही , अमानवीय है ! लेकिन अब तक इस पर कुछ सोचा क्यों नहीं गया ?

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    1. योगी जी, अब तक इस कुप्रथा पर सोचा क्यों नहीं गया यह तो मुझे भी नही मालूम। लेकिन अब पता चलने पर हम सभी का कर्तव्य है की हम इस मामले में जागरूकता फैलाकर इस कुप्रथा को बंद करवाए।

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  4. Omg..... Unbelievable....Hum bade शहरों में रहते है , इस वजह से हमे कोई बात पता नही चलती पर ये बहुत शर्म नाक बात है, अभी मेने थोड़े दिन पहले सुना कि बच्चा गिरवी रखते है,मेरे कान सुन हो गए ।

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  5. दिनांक 31/10/2017 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी इस चर्चा में सादर आमंत्रित हैं...

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  6. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (28-10-2017) को
    "ज़िन्दगी इक खूबसूरत ख़्वाब है" (चर्चा अंक 2771)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  7. Shocking to see this practice still continuing in India. As you have rightly said poverty and skewed gender ratio are the reasons behind such arrangements.

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  8. हे प्रभु! आज भी ऐसा होता है जानकर बहुत दुख हुआ। समाज के कथित सुधारक प्रणेता नेता निश्चित रूप से अपनी मूक सहमति प्रदान करते होंगे तभी ऐसी कुप्रथायें कायम हैं। आपने एक बहुत संवेदनशील विषय पर कलम चलाई है। आपका यह लेख एक आवाज़ बने-मुहिम बने। और इस कलंकित करने वाली प्रथा पर रोक लगे। ऐसी कामना है।

    बहुत बहुत साधुवाद आपको

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    1. अमित जी,यह पोस्ट लिखने का मेरा उद्देश्य भी यहीं हैं कि इस मामले की लोगों को जानकारी हो और किसी न किसी माध्यम से यह बात देश के हुक्मरानों तक पहुंचे और इस कुप्रथा पर रोक लगे। ताकि सैकड़ो महिलाओं को इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिले।

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  9. संवेदनशील विषय..
    हैरान हूँ यह प्रथा आज भी है
    समाजिक कुप्रथा को उजागर करने के लिए धन्यवाद।

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  10. यह प्रथा नही कुप्रथा है । जहाँ एक तरफ यह कहा जाता है कि आज महिलाओ को ज्यादा आजादी और महत्व दिया जाता है । उस मै यह सब क्या है?
    महिला आयोग कभी ऐसे मामलो पर संज्ञान क्यो नही लेता?

    सोचने वाली बात यह है कि आखिर इतनी क्या मजबूरी है कि लोग अपनी-अपनी बेटी को बेच रहे है सरकार इस पर ध्यान जरूरी नही समझती क्या?
    जिस देश मे नारी को देवी का रूप माना जाता है उस देश मे यह सब?

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  11. Pata nahi is desh me kya kya hota hai....bada dukh hota hai esi bate sunkar....Hamari sarkar ko kuch na kuch action jarur lena chaiye....

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  12. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, देश के सब से बड़े अनशन सत्याग्रही को ब्लॉग बुलेटिन का नमन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  13. Never heard about it, its shocking...
    will share for sure.

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  14. आश्चर्य है कि ऐसा भी होता है.

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  15. अफ़सोस! गरीबी क्या-क्या नहीं करा लेती है इंसान से !
    बड़ी शर्मनाक बात है!

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  16. बहुत अमानवीय प्रथा है और शर्मनाक भी। इसी तरह की एक चौकाने वाली बात ये भी है कि आज इक्कीसवीं सदी में में भी लोग भूख से मर रहे है।सारी शिक्षा, सभ्यता,मानवतावादी बातें सब बेकार हो जाती है जब हम ज़मीनी हक़ीक़त देखते है कि आज भी हमारे समाज मे इंसान की जान और इज़्ज़त दोनों ही महफूज़ नही है।

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  17. उफ़ कितनी दर्दनाक प्रथा है ये | एक तरफ विकास के नए आयाम रचे जा रहे हैं दूसरी तरफ सभ्यता के विनाश का यह अमानवीय रूप | आपकी पोस्ट पढ़कर रोंगटे खड़े हो गए | शुक्रिया इस बारे में जागरूकता फैलाने के लिए

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  18. आदरणीय ज्योति जी ------ बहुत व्यथित कर देने वाली जानकारी दी आपने | इन शोषित नारी वर्ग की सुनने कोई आज तक आया क्यों नहीं या फिर किसी को इस कुप्रथा का घिनौना सच नजर क्यों नहीं आया ? यदि कोई सचमुच घर बसना चाहता है तो विधिवत विवाह क्यों नहीं कर लेता इन गरीब कन्याओं से ? खरीद फरोख्त की भावना क्यों ? ये दर्दनाक सच इक्कसवी सड़ी के प्रशासन कोक्यों नजर नहीं आता ? आपने बहुत अच्छा लेख लिख इस जानकारी से लोगों को अवगत कराया -------- आप साधुवाद की हकदार हैं | शायद इसी रस्ते उन अकिंचन शोषित नारी वर्ग की आवाज सही कानों तक पंहुच जाए |

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  19. ऐसी कुप्रथा आज भी मौजूद हैं........, शर्म से सिर झुक जाता है यह जानकर .

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  20. बहुत ही दर्दनीय ,नारी उत्थान की बातें सब खोखली है अगर आज भी ऐसी प्रथायें समाज मे हैं ।
    सही मे ज्योति आपने लेख द्वारा बहुत बड़े यथार्थ रहस्य से पर्दा उठाया है हम सब का कर्तव्य है कि हम सब और सरकार मिलकर इस कुप्रथा को खत्म करें ।

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  21. ज्योति ,ये जानकारी तो मन को बड़ा व्यथित कर गई ।
    नारी को नारायणी कहना ,केवल एक ढोंग ही है शायद ।
    कब तक नारी को एक सामान समझा जाएगा?

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  22. ऐसी कुप्रथा हमारे देश में.....!!!!
    भूख से बिलबिलाये पेट की कारस्तानी होगी.....
    प्रथा के नाम पर पाप....पूरे देशवासियों के लिए शर्मनाक स्थिति..... देश की मीडिया गड़े मुर्दे खोदने में व्यस्त है....नेता अपने मस्त हैं सुधार की उम्मीद कहाँ से करे....??

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  23. कोई भी माँ बाप अपने बेटियों को बेचने की कल्पना भी करता है तो उनके रूह तक काँप जाती है , फिर इन लड़कियों के माँ बाप जाने किस मज़बूरी मे ऐसा करने को विवश है, इसको समझना ज्यादा जरुरी है, बाज़ये इसके के उनकी मज़बूरियो का हीनता से विवेचना करना |आज भी देश के २२% जनता गरीबी रेखा से कोसो दूर रहती है (वैसे ये सिर्फ एक सरकारी आंकड़ा है सच्चाई इस से बहुत ज्यादा है ) , जब बाकि देश राहुल और मोदी के बीच के चयन में उलझे है ये गरीब एक वक़्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे है, कोई आत्महत्या कर रहा है , कोई बच्चे बचे रहा है , कोई अपनी बहन और बीवी बेच रहा है , कोई अपनी किडनी बेच रहा है; गरीब रोज़ और गरीब हुआ जा रहा है|

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  24. बड़ी शर्मनाक बात है कि आजादी के इतने साल बाद भी हमारे यहाँ औरतों की ऐसी दुर्दशा है | आज भले ही नारी सशक्तिकरण बात की जाती है लेकिन असल में मानवता पशुता में ढलती जा रही है |

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  25. एक शर्मनाक सत्य ! हमारी अंधी प्रगति का आदरणीया , ज्योति जी आपका यह लेख समाज को उनकी करतूतों का आईना दिखा रहा है। सादर

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  26. Ismai purush ki 1% bhi galti nhi anyay sahne wala anyay karne wala se jyada doshi hai sarkar se mdad lai aur apni stithi sudharai , waise sarkar ne mahilao ke liye bahut sare kanoon banaye uska fayda uthayai ab is par bhi koi purush ko doshi dai to dhikkar hai aise inshan ko , alshi byakti hi apni galti ka dosh dushro par dalta hai

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  27. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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नाम

'रेप प्रूफ पैंटी',1,#मीटू अभियान,1,15 अगस्त,3,26 जनवरी,1,8 मार्च,1,अंकुरित अनाज,1,अंगदान,1,अंगुठी,1,अंग्रेजी,2,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस,3,अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस,1,अंधविश्वास,10,अंधश्रद्धा,8,अंधश्रध्दा,2,अंश,1,अग्निपरीक्षा,1,अग्रवाल,1,अचार,6,अच्छी पत्नी,1,अच्छी पत्नी चाहिए तो...,1,अच्छे काम,1,अजब-गजब,2,अतित,1,अदरक,1,अदरक का चूर्ण,1,अदरक-लहसुन पेस्ट,1,अनमोल वचन,10,अनुदान,1,अनुप जलोटा,1,अन्न,1,अन्य,23,अन्याय,1,अपेक्षा,1,अप्पे,4,अमरुद,1,अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी,1,अमीरी,1,अमेजन,1,अरुणा शानबाग,1,अरुनाचलम मुरुगनांथम,1,अवार्ड,2,असली हीरो,12,अस्पतालों में बच्चों की मौत,1,आंवला,3,आंवला चटनी,1,आंवला लौंजी,1,आइसक्रीम,1,आईसीयू ग्रेंडपा,1,आज के जमाने की अच्छाइयां,1,आजादी,2,आज़ादी,1,आतंकवादी,2,आत्महत्या,2,आत्मा,1,आदित्य तिवारी,1,आम,6,आम का अचार,1,आम का पना,1,आम का मुरब्बा,1,आम की बर्फी,1,आम पापड़,1,आरक्षण,1,आलू,1,आलू पोहा अप्पे,1,इंसान,2,इंस्टंट डोसा,1,इंस्टंट स्नैक्स,1,इंस्टट ढोकला,1,इंस्टेंट कुल्फी,1,इडली,3,इन्डियन टाइम,1,इमली,1,इरोम शर्मिला,1,ईद,1,ईश्वर,6,ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना,1,उटी,1,उपमा,1,उपवास,1,उपवास की इडली,1,उपहार,2,उमा शर्मा,1,ऋषि पंचमी,1,एक सवाल,1,ऐनी दिव्या,1,ऐश ट्रे,1,ऑनलाइन,1,और इज्जत बच गई,1,कंघा,1,कच्चे आम,1,कच्चे आम का चटपटा पापड़,1,कटलेट्स,1,कद्दु,1,कद्दु के गुलगुले,1,कन्यादान,3,करवा चौथ शायरी,1,करवा-चौथ,3,कल्याणी श्रीवास्तव,1,कहानी,14,कांजी,1,कानून,1,कामवाली बाई,4,कालीन,1,किचन टिप्स,13,किटी पार्टी,1,किराए पर बीवियां,1,कुंडली मिलान,1,कुरकुरे,1,कुल्फी,1,कुल्फी प्रीमिक्स,1,कूकर,1,केईएम् अस्पताल,1,कॉर्न,4,कॉर्न इडली,1,कौए,1,क्षमा,2,खजूर,1,खत,3,खबर,3,खरबूजा,1,खांडवी,1,खाद्य पदार्थ,1,खाना,1,खारक,1,खारी गरम,1,खुले में शौच,1,खुशी,2,खेल,1,गणतंत्र दिवस,1,गणेश चतुर्थी पर शायरी,1,गणेश चतुर्थी प्रसाद रेसिपी,1,गरम मसाला,1,गर्दन दर्द,1,गर्भाशय,1,गलत व्यवहार,1,गलती,2,गाजर,4,गाजर अप्पे,1,गाजर के लड्डू,1,गाजर-मूली के दही बडे,1,गाय,1,गुजरात,1,गुड टच और बैड टच,2,गुलगुले,1,गुस्सा,1,गृहस्वामिनी,1,गोरखपुर,1,गोल्फ,1,गौरी पराशर,1,घंटी,1,घिया,1,घी,1,घी की नदी,1,चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति,1,चकली,1,चटनी,7,चाँद पर जमीन,1,चाय,1,चाय मसाला,1,चावल,2,चावल के पापड़,1,चाशनी,1,चीज,1,चीला,2,चूर्ण,4,छींक,1,छोटी बाते,1,छोटे लेकिन काम के टिप्स,1,छोटे-छोटे काम के टिप्स,2,जज्बा,1,जनसंख्या,1,जन्मदिन,3,जन्मदिन की शुभकामनाएं,2,जन्माष्टमी,2,जमाना,1,जलेबी,1,जाट आंदोलन,1,जात-पात,1,जाति,1,जाम,1,जिंदगी,1,जीएसटी,1,जीरो ऑइल रेसिपी,5,जोक्स,5,जोयिता मंडल,1,ज्वार की रोटी,1,ज्वेलरी,1,झारखंड,1,झाले-वारणे,2,झूठ,1,टिप्स कॉर्नर,25,टी.व्ही. और सिनेमा,1,ठंडे पेय,2,ठेचा,1,डॉक्टर,2,डॉटर्स डे,2,ढाबा स्टाइल सब्जी,1,ढोकले,1,तरबूज,1,तलाक,1,ताजे नारियल की बर्फी,1,तिल,2,तिल की कुरकुरी चिक्की,1,तिल के लड्डू,1,तेलंगाना,1,तोहफ़ा,1,थंडा पानी,1,दक्षिणा,1,दवा,1,दही,5,दही सैंडविच,1,दहेज,3,दाग-धब्बे,1,दान,1,दासी,1,दिपावली बधाई संदेश,3,दिशा,1,दीपावली शुभकामना संदेश,1,दीवाली रेसिपी,1,दुध पावडर,1,दुर्गा माता,1,दुल्हा,1,दुश्मन,1,दूध,2,देशभक्ति,3,देशभक्ति शायरी,2,देहदान,1,दोस्त,2,धनिया,1,धर्म,2,धर्मग्रंध,1,धार्मिक,26,नदी में पैसे,1,नन्ही परी,1,नमक पारे,1,नमकीन,1,नवरात्र,1,नवरात्र स्पेशल,2,नवरात्रि,1,नवरात्री रेसिपी,5,नववर्ष,2,नववर्ष की शुभकामनाएं,2,नाइंसाफी,1,नानी,1,नारियल बर्फ़ी,1,नारी,44,नारी अत्याचार,10,नारी शिक्षा,1,नाश्ता,1,निंबु का अचार,1,निचली जाती,1,निर्णयक्षमता,1,निर्भया,2,निवाला,1,नींबू,1,नेत्रदान,1,नेपाल त्रासदी,1,नेल आर्ट,1,पकोडे,2,पक्षी,1,पढ़ा-लिख़ा कौन?,1,पढ़ाई,1,पति,1,पति का अहं,1,पति-पत्नी,1,पत्ता गोभी,1,पत्ता गोभी की मुठिया,1,पत्नी,1,पत्र,1,पपीता,1,परंपरा,2,परवरिश,4,पराठे,1,परीक्षा,1,परेशानी,1,पल्ली उत्सव,1,पवित्र,1,पवित्रता,2,पसंदीदा शिक्षक को पत्र,1,पापड़,3,पालक,1,पालक के नमक पारे,1,पालक बडी,1,पाश्चात्य संस्कृति,1,पिता,1,पुण्य,1,पुरानी मान्यताएं,1,पुलवामा हमला,1,पूडी,1,पेढे,1,पैड्मैन,1,पैनकेक,1,पैरेंटीग,1,पोर्न मूवी,1,पोषण,1,पोहा,1,पोहे के कुरकुरे,1,प्याज,3,प्याज की चटनी,1,प्यार,1,प्यासा कौआ,1,प्रत्यूषा,1,प्रद्युम्न,1,प्रसन्न,1,प्राणियों से सीख,1,प्री वेडिंग फोटोशूट,1,फर्रुखाबाद,1,फलाहार,1,फल्लिदाने,1,फादर्स डे,1,फूल गोभी के परांठे,1,फेसबुक,2,फैशन,1,फ्रिज,1,फ्रेंडशीप डे,1,फ्रेंडशीप डे शायरी,1,बकरीद,1,बची हुई सामग्री का उपयोग,1,बच्चे,5,बच्चे की ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई 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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: ओ माय गॉड...इस इक्किसवी सदी में भी किराए पर मिलती हैं बीवियां!!!
ओ माय गॉड...इस इक्किसवी सदी में भी किराए पर मिलती हैं बीवियां!!!
क्या आप जानते हैं कि नारी समानता के इस इक्किसवी सदी में भी किराए पर मिलती हैं बीवियां....
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
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