बलात्कार के लिए दोषी कौन...पीड़िता, बलात्कारी या हम सब???

आज भी हम बड़े से बड़े रूह कंपा देने वाले बलात्कार की घटना के बाद पीड़िता को ही दोषी मानते हैं। लेकिन वास्तव में बलात्कार के लिए दोषी कौन...पीड़िता, बलात्कारी या हम सब???

बलात्कार के लिए दोषी कौन...पीड़िता, बलात्कारी या हम सब???
• "उसने बहुत ही छोटे कपड़े पहन रखे थे!"
  • "अच्छी लड़कियाँ रात के नौ बजे के बाद बाहर नहीं जाती!"
    • "उसका तो चरित्र ही ऐसा था!!"

ऐसी बाते क्या दर्शाती हैं? यहीं न कि बलात्कार के लिए दोषी बलात्कारी नहीं बल्कि बलात्कार पीड़िता ही हैं! उसी ने बलात्कारी को न्यौता दिया, “आ...और मेरा बलात्कार कर!!!” यह वाक्य पढ़ने में ज़रुर अतिशयोक्तिपुर्ण लग रहा होगा लेकिन यहीं कड़वी सच्चाई हैं। आज भी हम बड़े से बड़े रूह कंपा देने वाले बलात्कार की घटना के बाद पीड़िता को ही दोषी मानते हैं। उसे ही भला-बुरा कहते हैं। उसे ही तिरस्कृत निगाहों से देखते हैं। अफ़सोस की इस जहर ने रगो के रंग को ही काला कर दिया हैं। यदि उपरोक्त कारणों की वजह से पीड़िता ही बलात्कार के लिए दोषी हैं तो एक ‘मेड’ जो प्राय: पूरे कपड़ों में रहती हैं या एकदम छोटी-छोटी तीन-चार साल की लड़कियां…जिनके अभी दूध के दांत भी नहीं टूटे उन पर बलात्कार क्यों होता हैं? अत: बलात्कार के लिए पीड़िता को ही दोषी मानना इंसानियत का ही गला घोटना हैं।

बलात्कार के लिए बलात्कारी तो दोषी हैं ही लेकिन उससे ज्यादा दोषी हैं ‘हम सब’, हां... हम सब! कोई भी पुरुष बलात्कारी बनने के लिए पैदा नहीं होता। मुलत: एक पुरुष भी उतना ही मासुम होता हैं जितनी की एक स्त्री! फ़िर ऐसा क्या होता हैं कि कुछ पुरुष बलात्कार जैसा घिनौना कार्य करने तत्पर हो जाते हैं? वास्तव में हम सब मिल कर एक मासूम पुरूष को बलात्कारी बनाते हैं। हम पुरुषों की परवरिश ही कुछ इस तरह से करते हैं कि उनमें ''हम महिलाओं से श्रेष्ठ हैं और महिलाएं सिर्फ़ एक उपभोग की वस्तू हैं'' यह भावना पनपती हैैं।  

ऐश ट्रे 
हाल ही में अमेज़न पर सिगरेट बुझाने के लिए एक ऐश ट्रे बिक रहीं थी, जो एक छोटे टब के रूप में थी। जिसमें एक महिला निर्वस्त्र होकर खुलकर दिखाई गई थी। ऐश ट्रे में सिगरेट बुझाने का स्थान महिला की योनी को बनाया गया था। स्त्री के गुप्तांग में सिगरेट बुझाना...बाप रे...बनाने वाले की सोच इतनी निचले स्तर पर आ सकती है? क्या स्त्री महज एक देह...एक भोग्या...उपभोग करने की वस्तु भर हैं? क्या स्त्री एक इंसान नहीं है? बलात्कार जैसी समस्या इसी घिनौनी मानसिकता की देन हैं। बलात्कारी को फाँसी की सजा देने की गुहार लगाना तब तक व्यर्थ है, जब तक इस तरह की अश्लील सोच को हम खत्म नहीं कर पाते। मैं नहीं जानती की इस ऐश ट्रे के कितने ऑर्डर बुक हुए थे...मुझे नहीं लगता कि सिगरेट बुझाने के लिए राख झटकते वक्त उन लोगों के हाथ कांपे होंगे! क्योंकि हमने तो जिती-जागती स्त्री के गुप्तांग में भी विकृती की राख झटकी हैं!! (अब कड़े विरोध के बाद अमेजन ने वो ऐश ट्रे हटा ली हैं।) हैवानियत की हदे पार करनेवाली बलात्कार की घटनाएं होती हैं क्योंकि बलात्कारी के मन में किसी का भी भय नहीं हैं। न ही परिवार का, न ही समाज का और न ही कानून का। इसलिए ही तो वो शिकार को सिगरेट से दागता हैं, उसके अंदर रॉड घुसाने का साहस करता हैं!

असल में एक मासूम पुरुष बलात्कारी तब बनता हैं.........

• जब हमारे समाज में बेटे के पैदा होने पर जश्न मनाया जाता हैं और बेटी को पैदा होने के लिए भी किसी की इजाज़त लेनी पड़ती है!

• जब अपने खुद के ही घर में लड़की की एक इंसान के तौर पर परवरिश नहीं होती। उसे हमेशा किसी की आश्रिता होने का एहसास कराया जाता हैं। इससे उसके भाई की सोच में श्रेष्ठता का भाव आता हैं!

• जब लड़कों को पैदाइशी तौर पर हर तरह हक मिलता हैं। लड़के जैसा चाहे वैसा जी सकते हैं। उनके बोलने, चलने, उठने-बैठने, हंसने पर कोई बंदिशे नहीं होती। पर लड़कियों के बोलने, चलने, उठने-बैठने, हँसने पर हजारों बंदिशे लगी होती हैं। लड़कियों का जन्म अपना जीवन जीने के लिए नहीं होता!

• जब लड़कियों को हर चीज सिखाने की कोशिश की जाती हैं लेकिन लड़कों को महिला के साथ रहने की तमीज भी नहीं सिखाई जाती!

• जब घर के लोग बेटी को ‘तन ढकने’ और बेटे को ‘मर्द’ बनने की सीख देते हैं!

• जब हम हमारी लड़कियों को लड़की की तरह नहीं, लड़कों की तरह पालने का दंभ भरते हैं!

• जब कोई अकेली लड़की को देख कर सीटी बजाता हैं और उसे चुप रहने कहा जाता हैं!

• जब कोई बाप बेटे की पढ़ाई के लिए और बेटी की शादी के लिए कर्ज लेकर यह साबित करता हैं कि उसकी नजर में बेटी की पढ़ाई का महत्व कम हैं!

• जब लड़के वाले दहेज की मांग करते हैं और लड़की का पिता सर झुका कर उसे स्विकार करता हैं!

• जब लड़कीयों को सती सावित्री होने के पाठ पढ़ाए जाते हैं और लड़कों को ‘मर्द’ होने का एहसास कराया जाता हैं!

• जब 58% महिलाओं को आज भी पास की किराणा दुकान पर जाने के लिए इजाज़त लेनी पड़ती हैं! (सर्वेक्षण के अनुसार)

• जब पत्नी की 'प्रतिष्ठा' से 'पति के अहं' को ठेस पहुँचती हैं!

• जब महिलाएं उपयोग और उपभोग की वस्तुएँ मानी जाती हैं। हर छोटे-मोटे निर्णय में भी उनकी भागीदारी मान्य नहीं होती!

• जब न्याय की देवी को आंखों पर पट्टी बांधकर सबूतों के अभाव में मजबूर होकर... बलात्कारी को रिहा करना पड़ता हैं!

• जब अमेज़न जैसी कंपनियां नारी देह की नुमाइश ऐश ट्रे के रूप में करती हैं!

• जब देश के राजनेता संसद में बैठकर पोर्न देखते हैं!

• जब सरकार जीएसटी के तहत सिंदूर, चूडियां और बिंदी जैसे मेकअप के सामान को करमुक्त रख कर सैनिटरी नैपकीन व हायजीन की चीजों पर कर लगाती हैं। मतलब सरकार महिलाओं के स्वास्थ से ज्यादा उनकी सुंदरता को महत्व देती हैं!!!!!!!

अत: दोष जितना उन बलात्कारी दरिंदो का हैं उतना ही हमारा भी हैं। हमारे हाथ उन कई अनगिनत लड़कियों के खून से रंगे हैं, जिनकी आवाज़ हमने अनसुनी कर दी हैं। जब तक हम सभी को यकीन नहीं दिला देते कि स्त्री को अपनी जिंदगी अपने ढंग से जीने का हक हैं। उसका अपना भी स्वतंत्र अस्तित्व हैं, दुनिया जितनी लड़कों की हैं, उतनी ही लड़कियों की भी हैं तब तक हम ही बलात्कारी हैं...! हमें और कितनी ‘निर्भयायों और दामिनियों’ का खून चाहिए? आखिरकार हम कब जागरुक होंगे?

ये मेरे अपने विचार हैं। ज़रुरी नहीं कि आप इससे सहमत ही हो। आपको क्या लगता हैं...बलात्कार के लिए दोषी कौन है...पीड़िता, बलात्कारी या हम सब???

Keywords: rape victim, rapist, amazon, nirbhaya, GST, ashtray, law, God of justice, dowry, porn movies, balatkar, samuhik balatkar, nari

COMMENTS

BLOGGER: 19
  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (07-07-2017) को "न दिमाग सोता है, न कलम" (चर्चा अंक-2659) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    जवाब देंहटाएं
  2. बलात्कार सिर्फ पीडिता से जोड़ कर देखा जाता समाज इसकी जिम्मेदारी लेने से डरता है,

    जवाब देंहटाएं
  3. आमतौर पर बालात्कार के लिए स्त्री को दोष दिया जाता है |जब कोई ऐसी घटना होती है तो कुछ लोग उस समय भले ही पूरुष को दोष दें पर अन्ततोगत्वा स्त्री को ही दोषी माना जाता है | आपने अपनी पोस्ट के माध्यम से इस अपराध को एक नए दृष्टिकोण से देखा है की बालात्कार को रोकना एक सामाजिक जिम्मेदारी है | जिसके बीज परवरिश में छिपे हैं | ... नए पहलू पर सोंचने को विवश करती सराहनीय पोस्ट

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सही कहा आपने कि बलात्कार को रोकना एक सामाजिक जिम्मेदारी हैं।

      हटाएं
  4. जी ज्योति बिल्कुल सहमत हूँ मैं आपके लेख से
    बलात्कार की दोषी अगर सिर्फ किसी महिला के छोटे कपड़े हैं तो तीन चार साल की नन्ही बच्चियों के साथ बलात्कार क्यो होता है ,वास्तव यह बात सत्य है ,की हमारा समाज आज भी पुरुष प्रधान समाज को महत्ता देता है ,एक लड़की को हमेशा यही सिखाया जाता है ,की तुझे इस समाज मे बच के रहना है यहाँ पुरुष रूपी भेड़िये अक्सर मिलते रहते है जिनसे एक लड़की को स्वयम को बचाना है ।
    दूसरी ओर एक पुरुष जो किसी का भाई ,पिता पति आदि है ,उसे समाज से कुछ ऐसे सीखने को मिलता है कि तू तो पुरुष है तुझे किस बात का डर वास्तव में एक घिनोनी मानसिकता जो पुरुष वर्ग के अंदर है ,उसे बदलना होगा ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सही कहा रितु, बलात्कार तभी रुकेंगे जब सोच बदलेंगी।

      हटाएं
  5. आपकी पोस्‍ट बयां करती है कि लोगो का कितना नैतिक पतन हो चुका है, मैंने भी अपने ब्‍लॉग में महिलाओं के साथ हुई हैवानियत का जिक्र किया था।

    जवाब देंहटाएं
  6. सही कहा ज्योति जी !ऐसी घटनाओं के लिए स्वयं हम जिम्मेदार है हमारा समाज जिम्मेदार है....
    सृजन की मूल नारी सबसे पहले पहल करे....अपने पुत्रों की परवरिश पर गौर करे...उन्हे उतनी ही मेहनत से वही संस्कार दे जो पुत्रियों को आज तक देती आयी....तभी पुरुषों में मानवता होगी...समानता का भाव होगा.....
    बहुत ही उत्तम उत्कृष्ट आलेख लिखा है आपने ....
    धन्यवाद...

    जवाब देंहटाएं
  7. किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता लेकिन हाँ समाज की निष्क्रियता को दोष प्राथमिक तौर पर दिया जा सकता है , जिसके लिए हम सब जिम्मेदार हैं !!

    जवाब देंहटाएं
  8. THANKS FOR SHARE THIS ARTICLE
    http://www.nicedayindia.com/2017/06/blog-post_27.html

    जवाब देंहटाएं
  9. अति उच्च वर्ग के लोगों में, जहाँ पुत्र - पुत्री की परवरिश में कोई भेद नहीं किया जाता, वहाँ भी ऐसी मानसिकता वाले युवक दिखाई दे जाते हैं जो स्त्री को सिर्फ भोग की वस्तु समझते हैं । हम मीडिया और फिल्मों का असर मानें तो द्रोपदी चीरहरण और सीता माता का अपहरण जिस युग में हुआ था उसमें तो ये सब नहीं थे। कलुषित मनोवृत्ति वाले पुरूष हर युग में होते हैं, होते रहेंगे । स्त्री को अपनी अबला वाली छवि बदलनी होगी।

    जवाब देंहटाएं
  10. सही कहा मीना। कुछ पुरुष कलुषित मानसिकता के भी होते है। इनसे बचने के लिए स्त्री को ही उपाय खोजने होंगे और ऐसे लोगो से सतर्क रहना होगा।

    जवाब देंहटाएं
  11. पूर्णतः सहमत हूँ की हम, और हम (क्योंकि समाज भी हमसे बनता है) ही सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं इस घ्रणित अपराध के लिए ... हमारी मानसिक सोच, पुरुष सत्ता का दंभ और संवेदनहीनता ने ऐसे अपराध को बढ़ावा दिया है ...

    जवाब देंहटाएं
  12. ज्योंति जी आज आपके इस लेख की मैं जितनी भी तारीफ करू मेरी दृष्टि से वह बहुत कम होगा । आज मेरे पास कोई शब्द ही नही है । आज मै निशब्द हूं । आज मै आप के इस लेख को बस इसी वक्त शेयर करुंगी और कोशिश करूंगी कि इसे अधिक से अधिक लोग पढे । धन्यवाद ज्योंति इस बेहतरीन लेख को शेयर करने के लिए ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हौसला अफजाई के इतने सुंदर शब्दों के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, बबिता।

      हटाएं
  13. ज्योति जी, पूरा समाज ही इसके लिए दोषी है । हमने अपने आस पास की वातावरण इतना दूषित बना दिया है की । कई नेता और तथाकथित समाज के ठेकेदार स्त्री को ही दोषी मानते है । ऐसे व्यक्तियों को समाज से बहिष्कृत कर देना चाहिए और उन्हें भी सजा मिलनी चाहिए ।

    नीरज श्रीवास्तव
    www.janjagrannews.com

    जवाब देंहटाएं
  14. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं

नाम

'रेप प्रूफ पैंटी',1,#मीटू अभियान,1,#साड़ीट्विटर,1,15 अगस्त,3,26 जनवरी,1,8 मार्च,1,अंकुरित अनाज,1,अंगदान,1,अंगुठी,1,अंगूर,1,अंगूर की लौंजी,1,अंगूर की सब्जी,1,अंग्रेजी,2,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस,3,अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस,1,अंधविश्वास,10,अंधश्रद्धा,10,अंधश्रध्दा,2,अंश,1,अग्निपरीक्षा,1,अग्रवाल,1,अचार,7,अच्छी पत्नी,1,अच्छी पत्नी चाहिए तो...,1,अच्छे काम,1,अजब-गजब,2,अतित,1,अदरक,1,अदरक का चूर्ण,1,अदरक-लहसुन पेस्ट,1,अनमोल वचन,10,अनुदान,1,अनुप जलोटा,1,अन्न,1,अन्य,23,अन्याय,1,अपेक्षा,1,अप्पे,4,अमरुद,1,अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी,1,अमीरी,1,अमेजन,1,अरुणा शानबाग,1,अरुनाचलम मुरुगनांथम,1,अवार्ड,2,असली हीरो,15,अस्पतालों में बच्चों की मौत,1,आंवला,3,आंवला चटनी,1,आंवला लौंजी,1,आइसक्रीम,1,आईसीयू ग्रेंडपा,1,आग,1,आज के जमाने की अच्छाइयां,1,आजादी,2,आज़ादी,1,आतंकवादी,2,आत्महत्या,3,आत्मा,1,आदित्य तिवारी,1,आम,9,आम का अचार,1,आम का पना,2,आम का मुरब्बा,2,आम की बर्फी,1,आम पापड़,1,आरक्षण,3,आलू,1,आलू पोहा अप्पे,1,इंसान,2,इंस्टंट डोसा,1,इंस्टंट स्नैक्स,1,इंस्टट ढोकला,1,इंस्टेंट कुल्फी,1,इडली,3,इन्डियन टाइम,1,इमली,1,इरोम शर्मिला,1,ईद,1,ईश्वर,6,ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना,1,उटी,1,उपमा,2,उपवास,1,उपवास की इडली,1,उपहार,2,उमा शर्मा,1,ऋषि पंचमी,1,एक सवाल,1,ऐनी दिव्या,1,ऐश ट्रे,1,ऑनलाइन,1,और इज्जत बच गई,1,कंघा,1,कंसन्ट्रेट आम पना,1,कच्चे आम,1,कच्चे आम का चटपटा पापड़,1,कटलेट्स,1,कद्दु,1,कद्दु के गुलगुले,1,कद्दू,1,कद्दू का बेसन,1,कन्यादान,3,कबीर सिंह मूवी,1,करवा चौथ शायरी,1,करवा-चौथ,3,कल्याणी श्रीवास्तव,1,कहानी,17,कांजी,1,कानून,1,कामवाली बाई,4,कालीन,1,किचन टिप्स,14,किटी पार्टी,1,कियारा आडवानी,1,किराए पर बीवियां,1,कुंडली मिलान,1,कुरकुरे,1,कुल्फी,1,कुल्फी प्रीमिक्स,1,कूकर,1,केईएम् अस्पताल,1,कॉर्न,4,कॉर्न इडली,1,कौए,1,क्षमा,2,खजूर,1,खत,5,खबर,3,खरबूजा,2,खरबूजे का शरबत,1,खरेदी,1,खांडवी,1,खाद्य पदार्थ,1,खाना,1,खारक,1,खारी गरम,1,खुले में शौच,1,खुशी,2,खेल,1,गणतंत्र दिवस,1,गणेश चतुर्थी पर शायरी,1,गणेश चतुर्थी प्रसाद रेसिपी,1,गरम मसाला,1,गर्दन दर्द,1,गर्भावस्था,1,गर्भाशय,1,गलत व्यवहार,1,गलती,2,गाजर,4,गाजर अप्पे,1,गाजर के लड्डू,1,गाजर-मूली के दही बडे,1,गाय,1,गुजरात,1,गुजराती डिश,1,गुड टच और बैड टच,2,गुरु पूर्णिमा,1,गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं,1,गुलगुले,1,गुस्सा,1,गृहस्वामिनी,1,गैस बर्नर,1,गोरखपुर,1,गोरा रंग,1,गोल्फ,1,गौरी पराशर,1,घंटी,1,घिया,1,घी,1,घी की नदी,1,चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति,1,चकली,1,चटनी,7,चना दाल,1,चाँद पर जमीन,1,चाय,1,चाय मसाला,1,चावल,2,चावल के पापड़,1,चाशनी,1,चींटी,1,चीज,1,चीला,2,चूर्ण,4,छाछ,1,छींक,1,छोटी बाते,1,छोटे लेकिन काम के टिप्स,2,छोटे-छोटे काम के टिप्स,2,जज्बा,2,जनसंख्या,1,जन्मदिन,3,जन्मदिन की शुभकामनाएं,2,जन्माष्टमी,2,जमाना,1,जलेबी,1,जाट आंदोलन,1,जात-पात,1,जाति,1,जाम,1,जिंदगी,1,जीएसटी,1,जीरो ऑइल रेसिपी,5,जोक्स,5,जोयिता मंडल,1,ज्वार की रोटी,1,ज्वेलरी,1,झारखंड,1,झाले-वारणे,2,झूठ,1,टिप्स कॉर्नर,31,टी.व्ही. और सिनेमा,1,ठंडे पेय,6,ठेचा,1,डर,1,डैंड्रफ,1,डॉक्टर,2,डॉटर्स डे,2,ढाबा स्टाइल सब्जी,1,ढोकले,1,तरबूज,2,तरबूज के छिलके का हलवा,1,तलाक,1,ताजे नारियल की बर्फी,1,तिल,2,तिल की कुरकुरी चिक्की,1,तिल के लड्डू,1,तेलंगाना,1,तोहफ़ा,1,थंडा पानी,1,दक्षिणा,1,दवा,1,दही,5,दही सैंडविच,1,दहेज,3,दाग-धब्बे,1,दान,1,दासी,1,दिपावली बधाई संदेश,3,दिशा,1,दीपावली शुभकामना संदेश,1,दीवाली रेसिपी,1,दुध पावडर,1,दुर्गा माता,1,दुल्हा,1,दुश्मन,1,दूध,2,देशभक्ति,3,देशभक्ति शायरी,2,देहदान,1,दोस्त,2,धनिया,1,धर्म,2,धर्मग्रंध,1,धार्मिक,28,नजर,1,नजर कैसे उतारु,1,नदी में पैसे,1,नन्ही परी,1,नमक पारे,1,नमकीन,1,नवरात्र,1,नवरात्र स्पेशल,2,नवरात्रि,1,नवरात्री रेसिपी,5,नववर्ष,2,नववर्ष की शुभकामनाएं,2,नाइंसाफी,1,नानी,1,नारियल बर्फ़ी,1,नारी,48,नारी अत्याचार,10,नारी शिक्षा,1,नाश्ता,1,निंबु का अचार,1,निचली जाती,1,निर्णयक्षमता,1,निर्भया,2,निवाला,1,नींबू,1,नीडल थ्रेडर,1,नेत्रदान,1,नेपाल त्रासदी,1,नेल आर्ट,1,न्याकिम गैटवेच,1,न्यूजीलैंड,1,पकोडे,2,पक्षी,1,पढ़ा-लिख़ा कौन?,1,पढ़ाई,1,पति,1,पति का अहं,1,पति-पत्नी,1,पत्ता गोभी,2,पत्ता गोभी और चना दाल के बडे,1,पत्ता गोभी की मुठिया,1,पत्नी,1,पत्र,1,पपीता,1,परंपरा,2,परवरिश,6,पराठे,1,परीक्षा,2,परेशानी,1,पल्ली उत्सव,1,पवित्र,1,पवित्रता,2,पसंदीदा शिक्षक को पत्र,1,पानी,1,पानी कैसे पीना चाहिए,1,पापड़,3,पालक,1,पालक के नमक पारे,1,पालक बडी,1,पाश्चात्य संस्कृति,1,पिता,2,पुण्य,2,पुरानी मान्यताएं,1,पुलवामा हमला,1,पूडी,1,पेढे,1,पैड्मैन,1,पैनकेक,1,पैरेंटीग,1,पोर्न मूवी,1,पोषण,1,पोहा,2,पोहे के कुरकुरे,1,प्याज,3,प्याज की चटनी,1,प्यार,1,प्यासा कौआ,1,प्रत्यूषा,1,प्रद्युम्न,1,प्रसन्न,1,प्राणियों से सीख,1,प्री वेडिंग फोटोशूट,1,फर्रुखाबाद,1,फल,1,फल और सब्जी खरीदने से पहले,1,फलाहार,1,फल्लिदाने,1,फादर्स डे,2,फूल गोभी के परांठे,1,फेसबुक,2,फैशन,1,फ्रिज,1,फ्रिज में सब्जी,1,फ्रेंडशीप डे,1,फ्रेंडशीप डे शायरी,1,बकरीद,1,बची हुई सामग्री का उपयोग,1,बच्चे,8,बच्चे की ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर गैंगरेप,1,बेटा,1,बेटा पढाओ,1,बेटी,7,बेटी बचाओ अभियान,2,बेसन,2,बेसन के लड्डू,1,बैंगन,1,बोझ,1,ब्रेकअप,1,ब्रेड,4,ब्रेड की रसमलाई,1,ब्रेड पकोडा,1,ब्रेड पिस्ता पेढे,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,5,ब्ल्यू व्हेल गेम,1,भक्ति,1,भगर,3,भगर की इडली,1,भगर के उत्तपम,1,भगर के कटलेट,1,भगवान,3,भजिए,1,भरवां मिर्च,1,भरवां शिमला मिर्च,1,भाई दूज शायरी,1,भाकरवड़ी,1,भाभी,1,भारत,1,भारतीय नारी,1,भारतीय मसाले,1,भुट्टे के पकोड़े,1,भूकंप,1,भोजन,1,भ्रुण हत्या,1,मंदसौर गैंग रेप,1,मंदिर,2,मंदिरों में ड्रेस कोड़,1,मंदिरों में दक्षिणा,1,मकई,4,मकई उपमा,1,मकई चीला,1,मकई पकोडे,1,मकर संक्रांति,2,मकर संक्रांति की शुभकामनाएं,1,मकर संक्राति,1,मटर,3,मटर के अप्पे,1,मठरी,1,मठ्ठा,1,मदर्स डे,3,मम्मी,1,मलाई,2,मलाई फ्रूट सलाद,1,मसाला छाछ,1,मसाला मठरी,1,महात्मा गांधी जी,1,महानता,1,महाराजा अग्रसेन जी,1,महाराष्ट्र में आरक्षण,1,महिला आजादी,1,महिला आरक्षण,1,महिला सशक्तिकरण,4,महिला सुरक्षा,1,महिलाओं का पहनावा,1,माँ,3,माता यशोदा,1,मातृभाषा,1,मायका,2,मारवाड़ी,1,मार्केट जैसे साबूदाना पापड़,1,माला,1,मावा कुल्फी,1,मासिक धर्म,2,माहवारी,3,मिठाई,18,मित्र,2,मिलावट,1,मिलावट पहचानने के घरेलू तरीके,1,मिस इंडिया 2019,1,मुक्ति,1,मुबारकपुर कला,1,मुरब्बा,1,मुस्लिम मंच,1,मुहूर्त,1,मूंग की सूखी दाल का हलवा,1,मूंगफली,1,मूंगफली की सूखी चटनी,1,मूली,3,मूली का अचार,1,मूली के पत्तों के कुरकुरे कटलेट्स,1,मेंस्ट्रुअल कप,1,मेंहदी,6,मेडिसिन बाबा,1,मेथी,1,मेथी दाना चुर्ण,1,मेथी मटर मलाई,1,मेनु,1,मेरा मंत्र,3,मेरा सपना,1,मेरी बात,15,मैंगो फ्रूटी,1,मैंगो श्रीखंड,1,मैनर्स,1,रंग,1,रंग पंचमी,1,रक्तदान,1,रक्तदान के फायदे,1,रक्षा बंधन,1,रक्षाबंधन,1,रक्षाबंधन शायरी,1,रजस्वला नारी,3,रवा इडली,1,रसोई,102,रांगोली,3,राखी,2,राजभाषा,1,राजस्थानी समाज,2,राम रहीम,1,राशी-भविष्य,1,राष्ट्रगान,1,राष्ट्रगीत,1,राष्ट्रभाषा,1,रिती-रिवाज,1,रीतिरिवाज,1,रुपया-पैसा,1,रेणुका मिश्रा,1,रोटी,2,रोस्टेड मूंगफली,1,लघुकथा,12,लड्डू,2,लहसुन,1,लाइटर,1,लाइफ स्किल्स,1,लाल मिर्च की सूखी चटनी,1,लीव इन रिलेशनशिप,1,लेसुए,1,लैंगिक समानता,1,लॉटरी,1,लोकल ट्रेन,1,लोकसभा चुनाव,1,लोग क्या कहेंगे?,1,लौंजी,1,लौकी,2,लौकी का हलवा,1,लौकी की बड़ी,1,वक्त,1,वटसावित्री व्रत,1,वर,1,वर्जिनिटी टेस्ट,1,वर्तमान,1,वायरल फोटो,1,वारी के हनुमान,1,विधवा,1,विधवा ने किया कन्यादान,1,विधवा विवाह,1,विशाखापट्टनम रेप कांड,1,वृंदावन,1,वृद्धावस्था,1,वेजिटेबल डोसा,1,वेजिटेबल पैनकेक,1,वैलेंटाइन डे,1,वोट,1,वोट की किंमत,1,व्यंग,11,व्यायाम,1,व्रत,2,व्रत रेसिपी,15,व्रत स्पेशल,2,शकरकंद,2,शकरकंद की जलेबी,1,शकरकंद को कैसे भुने,1,शकुन-अपशकुन,1,शक्करपारे,1,शनि देव,1,शब्द,1,शरबत,4,शर्बत,1,शर्म,2,शादी,5,शादी की खरेदी,1,शादी की फ़िजूलखर्ची का बिल,1,शादी के सालगिरह की शुभकामनाएं,1,शादी-ब्याह,3,शायरी,9,शाहिद कपूर,1,शिक्षक दिन,1,शिक्षा,5,शिमला मिर्च,1,शिवपुरी,1,शुभ मुहूर्त,1,शुभ-अशुभ,3,शुभम जगलान,1,श्राद्ध,3,श्राद्ध का खाना,1,श्रीकृष्ण,2,श्रेष्ठता,1,संसद,1,संस्कार,1,संस्मरण,9,सकारात्मक पहल,2,सच बोलने की प्रेरणा,1,सतबीर ढिल्लो,1,सपना,1,सफेद बाल,1,सब्जियों का अचार,1,सब्जियों की कांजी,1,सब्जी,8,समय,1,समाजसेवा,2,समाजिक,1,समाधान,1,समावत चावल,2,सर के बाल,1,सलाद,1,ससुराल,2,सहशिक्षा,1,सांवला या काला रंग,1,साउथ इंडियन डिश,2,साक्षात्कार,3,सागर में ज्वार,1,साफ-सफाई,1,साबुदाना,2,साबुदाना के अप्पे,1,साबुदाना पापड़,2,साबुदाने लड्डू,1,साबूदाना,2,सामाजिक,64,सामाजिक कार्यकर्ता,1,सालगिरह,5,सास,2,साहित्य,82,सिंगल पैरेंट,1,सिंदूर,1,सीख-सुहानी,1,सीनू कुमारी,1,सुंदरता,1,सुई,1,सुखी,1,सुजी,1,सूजी,1,सूजी के लड्डू,1,सेनेटरी नेपकिन,1,सेब,1,सेलिब्रेटी,1,सेव मेरिट सेव नेशन,1,सेवई उपमा,1,सेहत,1,सैंडविच,1,सौंफ,1,सौंफ का शरबत,1,सौंफ प्रीमिक्स,1,सौतेली माता,1,स्कूल,1,स्त्री,2,स्नैक्स,33,स्वतंंत्रता दिन,1,स्वतंत्रता दिन,2,स्वर्ग और नर्क,1,स्वाभिमान,1,स्वास्थ,2,स्वास्थ्य,10,हंस,1,हनुमान जी,2,हरी मटर के पैनकेक,1,हरी मिर्च,3,हरी मिर्च का अचार,1,हलवा,3,हांडवो,1,हाउसवाइफ,1,हाथी,1,हिंदी उखाणे,1,हिंदी उखाने,1,हिंदी दिवस,1,हिंदी शायरी,23,हैंडल,1,हैसियत,1,होटल,1,होममेकर,1,होली की शुभकामनाएं,1,
ltr
item
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: बलात्कार के लिए दोषी कौन...पीड़िता, बलात्कारी या हम सब???
बलात्कार के लिए दोषी कौन...पीड़िता, बलात्कारी या हम सब???
आज भी हम बड़े से बड़े रूह कंपा देने वाले बलात्कार की घटना के बाद पीड़िता को ही दोषी मानते हैं। लेकिन वास्तव में बलात्कार के लिए दोषी कौन...पीड़िता, बलात्कारी या हम सब???
https://3.bp.blogspot.com/-lbiwuWFeShU/WVnMen7gmdI/AAAAAAAAET4/IxPckzaXth8eNtdBfMvQ8h2PTOywCvadACLcBGAs/s320/balatkar%2B1_Fotor.jpg
https://3.bp.blogspot.com/-lbiwuWFeShU/WVnMen7gmdI/AAAAAAAAET4/IxPckzaXth8eNtdBfMvQ8h2PTOywCvadACLcBGAs/s72-c/balatkar%2B1_Fotor.jpg
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
https://www.jyotidehliwal.com/2017/07/balatkar-ke-lie-doshi-kaun-pidita-balatkari-ya-ham-sab.html
https://www.jyotidehliwal.com/
https://www.jyotidehliwal.com/
https://www.jyotidehliwal.com/2017/07/balatkar-ke-lie-doshi-kaun-pidita-balatkari-ya-ham-sab.html
true
7544976612941800155
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy