अंंधविश्वास छोडिए...अंगदान या देहदान कीजिए...!!

यदि आप जिंदगी में कुछ अच्छा करना चाहते है...आपकी सोच अच्छी है...और इरादे नेक है...तो अंधश्रद्धा छोडिए...अंगदान या देहदान कीजिए...!!

अंंधविश्वास छोडिए...अंगदान या देहदान कीजिए...!!
हम ज़िंदगी भर अपने-आप को कोसते रहते हैं कि ज़िंदग़ी में कुछ अच्छा करना चाहते थे लेकिन कर नहीं पाएं! काश, हम भी कुछ अच्छा कर पाते...काश, हम भी दान धर्म कर कर पुण्य कमा पाते...! क्या आपके मन में भी कभी-कभी ऐसे विचार आते है? यदि हां, तो अंधविश्वास छोडिए...अंगदान या देहदान कीजिए...!

अंगदान एवं देहदान में अंतर
शरीर के उपयोगी अंग जैसे आंखों की कॉर्निया, लीवर, हड्डी, त्वचा, फेफड़े, गुर्दे, दिल, टिश्यू इत्यादि का दान करना अंगदान कहलाता है। जबकि अपना संपूर्ण शरीर मेडिकल प्रयोग या अध्ययन हेतु दान देने को देहदान कहते है। एक शोध के अनुसार एक व्यक्ति द्वारा किए गए अंगदान से 50 जरुरतमंद लोगों कि मदद हो सकती है, तो देहदान से चिकित्सा में विकास से पूरी मानव जाती लाभान्वित हो सकती है। 

अंगदान या देहदान सर्वश्रेष्ठ दान है
अंगदान से जीवन मिलता है। सिर्फ़ भगवान ही नहीं, हम भी किसी को जीवन दे सकते है! यह सभी दानों में सर्वश्रेष्ठ है। अंगदान के बिना देश में हर वर्ष 5 लाख मौते होती है। भारत में हर वर्ष जितने अंगो की आवश्यकता होती है उनमें से केवल 4% ही उपलब्ध हो पाते है। विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार पश्चिमी देशों में 70-80% अंगदान होता है जबकि भारत में यह आंकड़ा सिर्फ़ 0.01% का है। आप ही सोचिए...जिस देश में एक कबुतर की जान बचाने के लिए राजा शिबि ने अपने जीवित शरीर को गिद्ध के लिए परोस दिया था, असुरो से रक्षार्थ महर्षि दधीचि ने अपनी अस्थियां दान कर दी थी, राजा ययाति के पुत्र पुरु ने अपना यौवन पिता को दान में दिया था, दानवीर कर्ण ने जीते जी अपने कवच-कुंडल दान में दिए थे, उसी भारत देश के लोग अंगदान या देहदान के मामले में इतने उदासीन कैसे हो सकते है? यदि महर्षि दधीचि जैसे धर्मज्ञ अपनी अस्थियां दान कर सकते है तो हमें डरने का कोई कारण नहीं है।

क्या हम इतने स्वार्थी है?
जरा सोचिए, यदि हमने अंगदान नहीं किया तो हमारा शरीर, क्या तो जलाया जाएगा या फ़िर दफ़नाया जाएगा। दोनों ही परिस्थिति में हमारे शरीर को तो नष्ट होना ही है। वो शरीर हमारे या हमारे परिवार वालों के कुछ भी काम नहीं आएगा। साथ ही किसी और के भी कुछ भी काम नहीं आएगा। ये तो यहीं बात हुई कि यदि कोई चीज हमारे काम की नहीं है तो हम उसे जलायेंंगे, दफनायेंगे या कुछ भी करेंगे लेकिन किसी को भी उसका उपयोग नहीं करने देंगे! क्या आज का पढ़ा-लिखा इंसान इतना स्वार्थी है?

शांति से मरना चाहते है तो अंगदान या देहदान करें
कहा जाता है कि मरते वक्त इंसान के आंखों के सामने उसकी जिंदगी के अत्यधिक सु:ख और दु:ख के पल किसी चल चित्र की भांती आते है। ऐसे में यदि हमने अंगदान या देहदान का संकल्प लेकर इसकी जानकारी अपने परिवार को दी है तो अंतिम समय में हम एक अजीब सी शांति महसूस करेंगे कि मरते-मरते भी हम पुण्य कमा रहें है! हम मरने के बाद भी किसी के काम आयेंगे! अत: यदि शांति से मरना चाहते है, तो अंगदान कीजिए।

अंगदान या देहदान के प्रति हमारी भ्रांतियां
• अंगदान या देहदान करने से मुक्ति नही मिलेगी
सभी धर्म यह बात मानते है कि अच्छे कर्मों का फल अच्छा ही मिलता है। भगवान के घर में भ्रष्टाचार नहीं होता! स्वर्ग में हमारे साथ सिर्फ़ हमारे अच्छे कर्म ही जायेंगे! अंगो की आवश्यकता स्वर्ग में नहीं है! अत: यहां पृथ्वी पर अंगो को जलाने के बजाय उन्हें दान दीजिए। कहा जाता है कि पुण्य कर्मों की लिस्ट बड़ी होने पर ही हमें मुक्ति मिलती है। अंगदान या देहदान से पुण्यकर्मों की लिस्ट बढ़ने से हमें अवश्य ही मुक्ति मिलेगी।
• जिस अंग का हम दान कर रहे है अगले जन्म में हम उस अंग से वंचित रह जायेंगे
सभी धर्मो के अनुसार आत्मा अमर है। आत्मा एक पुराने शरीर को छोड कर दूसरे नए शरीर को धारण करती है, जैसे हम पुराने कपड़े छोड़ कर नए कपड़े पहनते है। यदि यह सच है तो शरीर का कोई भी अंग आत्मा के चोले की एक इकाई मात्र है, जैसे कपड़े का कॉलर या बटन! यदि हमारे शरीर को हम इस दृष्टिकोन से देखे तो जैसे आजकल महिलाओं द्वारा अपनी पुरानी साडियों की लेस या कसीदाकारी के फुल काट कर नए साडियों में लगाने से पुरानी साडियों का कुछ नहीं बिगडता है (क्योंकि वो तो वैसे भी किसी काम की नहीं थी) लेकिन नए साड़ी की सुंदरता में चार चाँद लग जाते हैं। ठीक वैसे ही हमारे द्वारा किए गए अंगदान से हमारा कुछ भी नुकसान नहीं होगा लेकिन किसी और के जिंदगी में चार चाँद लग जाएंगे। अत: यदि कोई इंसान इस जन्म में अपना दिल और किडनी दान में देता है तो भी अगले जन्म में उसकी आत्मा जो भी शरीर धारण करेगी उसके शरीर में भी दिल और किडनी ज़रूर रहेगी।
• अंगदान से पूरा शरीर विकृत हो जाता है
अंगदान में किसी मृत शरीर के उपयोगी अंगों को निकालकर शरीर को सही रूप में परिजनों को वापस दे दिया जाता है। अत: इससे शरीर विकृत नहीं होता।
• हम हमारे अपनों की लाश की चिरफ़ाड होते कैसे देख सकते है
मुझे एक बात बताइए...मरनेवाला व्यक्ति चाहे हमारा कितना भी निकट संबंधी हो...हमें हमारी जान से भी ज्यादा प्यारा हो...एक बार प्राण निकलने के बाद हम उसे जल्द से जल्द जलाना या दफ़नाना चाहते है की नहीं? यदि जलते वक्त हमारे अपनों के शरीर को दर्द नहीं होता तो अंगदान की शल्यक्रिया से उसे दर्द कैसे हो सकता है? हम इतनी नादानी भरी सोच कैसे रख सकते है कि शल्यक्रिया से एक मृत शरीर को दर्द हो सकता है!

अंगदान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी
• कोई भी व्यक्ति अपने जीवनकाल के दौरान अपने अंग दान करने की प्रतिज्ञा ले सकता है। इन अंगदाताओं को डोनर कार्ड प्राप्त होगा, जिसके माध्यम से वह अंगदान कर सकते हैं।
• आमतौर पर व्यक्ति की मौत के बाद ही अंगदान किया जाता है, लेकिन कुछ अंगदान जीवित व्यक्ति के भी किए जा सकते है। जैसे किडनी और लीवर का कुछ हिस्सा।
• अंगदान बहुत कम लोग कर पाते है क्योंकि यह ‘ब्रेन डेड’ होने पर ही किया जा सकता है। 
• किसी भी व्यक्ति कि नैसर्गिक मृत्यु होने पर वह टिश्यु दान कर सकता है। 
• किसी भी अंग को डोनर के शरीर से निकालने के बाद 6 से 12 घंटे के अंदर ट्रांसप्लांट कर देना चाहिए। कोई भी अंग जितना जल्दी प्रत्यारोपित होगा, उस अंग के काम करने की संभावना उतनी ही ज्यादा होती है।
• कोई भी व्यक्ति चाहे, वह किसी भी उम्र, जाति, धर्म और समुदाय का हों, वह अंगदान कर सकता है।
• कैंसर, हेपेटाइटीस बी, एड्स, एच.आई.वी. पॉजिटिव जैसे बीमारी में अंगदान नहीं किया जा सकता।
• अंगदान करते वक्त परिजनों का कोई खर्च नहीं होता।

ऐसे कर सकते है अंगदान
• कई एनजीओ और अस्पतालों में अंगदान से संबंधित काम होता है। इनमें से कही भी जाकर हमें एक ऑर्गन डोनेशन का रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरना होगा। हम निम्न वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भर सकते है एवं मन में कुछ भी शंकाएं होने पर इन वेबसाइट पर जाकर उन्हें पुछ भी सकते है। (जैसे कि www.notto.nic.in का टोल  फ्री नम्बर है 1800 11 4770)
1) www.mohanfoundation.org
• अपने परिवार को इसकी जानकारी ज़रूर दीजिए। क्योंकि हमारे मरने के बाद यह काम हमारे परिवार वालों को ही करना है। यदि हम फॉर्म नहीं भी भरते है तो भी यदि हमने हमारी अंगदान की इच्छा परिजनों को बता दी है तो वो अस्पताल में फोन कर सकते है।

ऐसे कर सकते है देहदान
• देहदान नैसर्गिक मौत होने पर ही संभव है। क्योंकि अपघात में मृत्यु होने पर या लावारिस शव का पोस्टमार्टम करना ज़रुरी होता है। पोस्टमार्टम के बाद शव एक माह भी सुरक्षित नहीं रखा जा सकता जबकि बिना पोस्टमार्टम के मृतदेह को वर्षों तक सुरक्षित रख सकते है।
• देहदान की इच्छा हम वसीयत में भी कर सकते है। यह कानून द्वारा मान्य है।
• देहदान करने का फॉर्म किसी भी मान्यता प्राप्त कॉलेज के एनाटॉमी विभाग से ही प्राप्त किया जा सकता है। ये फॉर्म अन्य जगहों पर नहीं मिलता।
• मृत्यु के बाद, देहदान जल्द से जल्द कर देना चाहिए ताकि बॉडी ख़राब न हो।
• यदि अपघात के कारण शरीर क्षत-विक्षत हो गया हो, शरीर किसी बडी शल्यक्रिया के कारण ख़राब हो गया हो तब ऐसी स्थिती में अस्पताल मृत शरीर लेने से इंकार कर सकते है।
• वास्तव में, अंगदान या देहदान करने से हमें दोबारा जिंदगी जीने का मौका मिलता है! इसलिए, अंत में सिर्फ़ इतना ही कहना चाहती हूं कि यदि आप चाहते है कि मरने के बाद भी आप किसी न किसी रूप में इस दुनिया में जीवित रहे…तो अंधविश्वास छोडिए...अंगदान या देहदान कीजिए...।

विशेष सुचना 
• नैसर्गिक मौत होने की स्थिती में हम टिश्युदान या देहदान में से सिर्फ़ एक ही कर सकते है। टिश्यु में दोनों कॉर्निया, हड्डी, त्वचा, हृदय वाल्व, रक्त वाहिकाएं, नस और कण्डरा आते है। 

जज्बे को सलाम-
एक ब्रिटिश लेखक रॉयस यंग को 19 वे हफ्ते में पता चल गया था कि बच्चा बिना ब्रेन का है, कुछ दिन ही जिंदा रहेगा। फिर भी उनकी पत्नी केरी ने उस बच्चे को जन्म दिया, ताकि उसके अंग डोनेट किए जा सके। सचमुच ऐसा कोई सुपर वुमन ही कर सकती है। उनके जज्बे को सलाम।


Keywords: organ donation in hindi, donate, body donation, blindfaith, superstition, donation, donate your body

COMMENTS

BLOGGER: 20
  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (27-04-2017) को पाँच लिंकों का आनन्द "अतिथि चर्चा-अंक-650" पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना चर्चाकार का नैतिक कर्तव्य होता है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  2. सही कहा ज्योति जी शरीर तो वैसे भी नश्वर है ,शरीर से आत्मा निकल जाने के बाद हमारे शरीर को या तो जल दिया जाता है दफ़न कर दिया जाता है, तो फिर क्यों न इस नश्वर शरीर के अंग दान करके किसी अन्य के जीवन का कारण बने ।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. सही कहा रितु जी। लेकिन हम लोग अन्धविश्वास के शिकार होकर अंगदान या देहदान करने में हिचकिचाते है।

      हटाएं
  3. Very informative post covering all the aspects related to these types of donations.

    उत्तर देंहटाएं
  4. सहमत आपकी बात से ... असंख्य इंसानों का जीवन बच सकता है और आप भी इसी बहाने अपने चाहने वालों के दिल में रह सकते हैं ... अंगदान महादान ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. मैं आपकी इस आर्टिकल से 100% सहमत हूँ। हमें अंगदान का अनुसरण करना चाहिए। :)
    We should follow this. Thanks for sharing this awesome article.

    उत्तर देंहटाएं
  6. अंगदान वाकई महादान हे। सभी जरुरी जानकारीयुक्त बेहतरीन पोस्ट। शुक्रिया।

    उत्तर देंहटाएं
  7. ye ek bhut hi mahaan kaam ha shi likha h aap ne

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’समानान्तर सत्ता स्थापित करते नक्सली : ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, सेंगर जी।

      हटाएं
  9. वाह आपने कितना अच्छी जानकारी को शेयर किया थैंक्स ज्योति जी

    उत्तर देंहटाएं
  10. ज्योंति जी आपने बिल्कुल सही कहा कि अंगदान इस जहां का सर्वश्रेष्ठ दान है और अंगदान से हम भी किसी को जीवन दान दे सकता है । आपके लेख से अंगदान से जुडी कई महत्वपूर्ण जानकारी भी मिली । धन्यवाद ज्योंति जी इस बेहतरीन लेख को हमारे साथ शेयर करने के लिए ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. अंगदान से बढ़ कर कोई दान नहीं क्योकि अंग दान ज़िन्दगी दान देना है जिससे दुनिया में इंसानियत का परिचय देती है और डोनर अगर दुनिया में न भी हो पर उसका वजूद ज़िन्दा रहता है

    उत्तर देंहटाएं
  12. सृजनात्मक सोच व लेखनी आभार। "एकलव्य"

    उत्तर देंहटाएं
  13. अंगदान सर्वश्रेष्ठ दान है | जनता को सन्देश देने व् एक नेक काम के प्रति उनकी रूचि जगाने वाली आपकी यह पोस्ट बेहद सार्थक व्है लोकोपयोगी है

    उत्तर देंहटाएं
  14. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं

नाम

'रेप प्रूफ पैंटी',1,#मीटू अभियान,1,15 अगस्त,3,26 जनवरी,1,8 मार्च,1,अंकुरित अनाज,1,अंगदान,1,अंगुठी,1,अंग्रेजी,2,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस,3,अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस,1,अंधविश्वास,10,अंधश्रद्धा,8,अंधश्रध्दा,2,अंश,1,अग्रवाल,1,अचार,6,अच्छी पत्नी चाहिए तो...,1,अच्छे काम,1,अजब-गजब,2,अतित,1,अदरक,1,अदरक का चूर्ण,1,अदरक-लहसुन पेस्ट,1,अनमोल वचन,10,अनुदान,1,अनुप जलोटा,1,अन्न,1,अन्य,23,अन्याय,1,अपेक्षा,1,अप्पे,4,अमरुद,1,अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी,1,अमीरी,1,अमेजन,1,अरुणा शानबाग,1,अरुनाचलम मुरुगनांथम,1,अवार्ड,2,असली हीरो,12,अस्पतालों में बच्चों की मौत,1,आंवला,3,आंवला चटनी,1,आंवला लौंजी,1,आइसक्रीम,1,आईसीयू ग्रेंडपा,1,आज के जमाने की अच्छाइयां,1,आजादी,2,आज़ादी,1,आतंकवादी,2,आत्महत्या,2,आत्मा,1,आदित्य तिवारी,1,आम,6,आम का अचार,1,आम का पना,1,आम का मुरब्बा,1,आम की बर्फी,1,आम पापड़,1,आरक्षण,1,आलू,1,आलू पोहा अप्पे,1,इंसान,2,इंस्टंट डोसा,1,इंस्टंट स्नैक्स,1,इंस्टट ढोकला,1,इंस्टेंट कुल्फी,1,इडली,2,इन्डियन टाइम,1,इमली,1,इरोम शर्मिला,1,ईद,1,ईश्वर,6,ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना,1,उटी,1,उपमा,1,उपवास,1,उपहार,2,उमा शर्मा,1,ऋषि पंचमी,1,एक सवाल,1,ऐनी दिव्या,1,ऐश ट्रे,1,ऑनलाइन,1,और इज्जत बच गई,1,कंघा,1,कच्चे आम,1,कच्चे आम का चटपटा पापड़,1,कटलेट्स,1,कद्दु,1,कद्दु के गुलगुले,1,कन्यादान,3,करवा चौथ शायरी,1,करवा-चौथ,3,कल्याणी श्रीवास्तव,1,कहानी,14,कांजी,1,कानून,1,कामवाली बाई,4,कालीन,1,किचन टिप्स,13,किटी पार्टी,1,किराए पर बीवियां,1,कुंडली मिलान,1,कुरकुरे,1,कुल्फी,1,कुल्फी प्रीमिक्स,1,कूकर,1,केईएम् अस्पताल,1,कॉर्न,4,कॉर्न इडली,1,कौए,1,क्षमा,2,खजूर,1,खत,3,खबर,3,खरबूजा,1,खांडवी,1,खाद्य पदार्थ,1,खाना,1,खारक,1,खारी गरम,1,खुले में शौच,1,खुशी,2,खेल,1,गणतंत्र दिवस,1,गणेश चतुर्थी पर शायरी,1,गणेश चतुर्थी प्रसाद रेसिपी,1,गरम मसाला,1,गर्दन दर्द,1,गर्भाशय,1,गलत व्यवहार,1,गलती,2,गाजर,4,गाजर अप्पे,1,गाजर के लड्डू,1,गाजर-मूली के दही बडे,1,गाय,1,गुजरात,1,गुड टच और बैड टच,2,गुलगुले,1,गुस्सा,1,गृहस्वामिनी,1,गोरखपुर,1,गोल्फ,1,गौरी पराशर,1,घंटी,1,घिया,1,घी,1,घी की नदी,1,चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति,1,चकली,1,चटनी,6,चाँद पर जमीन,1,चाय,1,चाय मसाला,1,चावल,2,चावल के पापड़,1,चाशनी,1,चीज,1,चीला,2,चूर्ण,4,छींक,1,छोटी बाते,1,छोटे लेकिन काम के टिप्स,1,छोटे-छोटे काम के टिप्स,2,जज्बा,1,जनसंख्या,1,जन्मदिन,3,जन्मदिन की शुभकामनाएं,2,जन्माष्टमी,2,जमाना,1,जाट आंदोलन,1,जात-पात,1,जाति,1,जाम,1,जिंदगी,1,जीएसटी,1,जीरो ऑइल रेसिपी,5,जोक्स,5,जोयिता मंडल,1,ज्वार की रोटी,1,ज्वेलरी,1,झारखंड,1,झाले-वारणे,2,झूठ,1,टिप्स कॉर्नर,25,टी.व्ही. और सिनेमा,1,ठंडे पेय,1,ठेचा,1,डॉक्टर,2,डॉटर्स डे,2,ढाबा स्टाइल सब्जी,1,ढोकले,1,तरबूज,1,तलाक,1,ताजे नारियल की बर्फी,1,तिल,2,तिल की कुरकुरी चिक्की,1,तिल के लड्डू,1,तेलंगाना,1,तोहफ़ा,1,थंडा पानी,1,दक्षिणा,1,दवा,1,दही,5,दही सैंडविच,1,दहेज,3,दाग-धब्बे,1,दान,1,दासी,1,दिपावली बधाई संदेश,3,दिशा,1,दीपावली शुभकामना संदेश,1,दीवाली रेसिपी,1,दुध पावडर,1,दुर्गा माता,1,दुल्हा,1,दुश्मन,1,दूध,2,देशभक्ति,3,देशभक्ति शायरी,2,देहदान,1,दोस्त,2,धनिया,1,धर्म,2,धर्मग्रंध,1,धार्मिक,26,नदी में पैसे,1,नन्ही परी,1,नमक पारे,1,नमकीन,1,नवरात्र,1,नवरात्र स्पेशल,2,नवरात्री रेसिपी,4,नववर्ष,2,नववर्ष की शुभकामनाएं,2,नाइंसाफी,1,नानी,1,नारियल बर्फ़ी,1,नारी,42,नारी अत्याचार,9,नारी शिक्षा,1,नाश्ता,1,निंबु का अचार,1,निचली जाती,1,निर्णयक्षमता,1,निर्भया,2,निवाला,1,नींबू,1,नेत्रदान,1,नेपाल त्रासदी,1,नेल आर्ट,1,पकोडे,2,पक्षी,1,पढ़ा-लिख़ा कौन?,1,पढ़ाई,1,पति,1,पति का अहं,1,पति-पत्नी,1,पत्ता गोभी,1,पत्ता गोभी की मुठिया,1,पत्नी,1,पत्र,1,पपीता,1,परंपरा,2,परवरिश,4,पराठे,1,परीक्षा,1,परेशानी,1,पल्ली उत्सव,1,पवित्र,1,पवित्रता,1,पसंदीदा शिक्षक को पत्र,1,पापड़,3,पालक,1,पालक के नमक पारे,1,पालक बडी,1,पाश्चात्य संस्कृति,1,पिता,1,पुण्य,1,पुरानी मान्यताएं,1,पुलवामा हमला,1,पूडी,1,पेढे,1,पैड्मैन,1,पैनकेक,1,पैरेंटीग,1,पोर्न मूवी,1,पोषण,1,पोहा,1,पोहे के कुरकुरे,1,प्याज,2,प्यार,1,प्यासा कौआ,1,प्रत्यूषा,1,प्रद्युम्न,1,प्रसन्न,1,प्राणियों से सीख,1,प्री वेडिंग फोटोशूट,1,फर्रुखाबाद,1,फलाहार,1,फल्लिदाने,1,फादर्स डे,1,फूल गोभी के परांठे,1,फेसबुक,2,फैशन,1,फ्रिज,1,फ्रेंडशीप डे,1,फ्रेंडशीप डे शायरी,1,बकरीद,1,बची हुई सामग्री का उपयोग,1,बच्चे,5,बच्चे की ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर गैंगरेप,1,बेटा,1,बेटा पढाओ,1,बेटी,6,बेटी बचाओ अभियान,2,बेसन,2,बैंगन,1,ब्रेकअप,1,ब्रेड,4,ब्रेड की रसमलाई,1,ब्रेड पकोडा,1,ब्रेड पिस्ता पेढे,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,5,ब्ल्यू व्हेल गेम,1,भक्ति,1,भगर,2,भगर के उत्तपम,1,भगर के कटलेट,1,भगवान,3,भजिए,1,भरवां मिर्च,1,भाई दूज शायरी,1,भाकरवड़ी,1,भाभी,1,भारत,1,भारतीय मसाले,1,भुट्टे के पकोड़े,1,भूकंप,1,भोजन,1,भ्रुण हत्या,1,मंदसौर गैंग रेप,1,मंदिर,2,मंदिरों में ड्रेस कोड़,1,मंदिरों में दक्षिणा,1,मकई,4,मकई उपमा,1,मकई चीला,1,मकई पकोडे,1,मकर संक्रांति,2,मकर संक्रांति की शुभकामनाएं,1,मकर संक्राति,1,मटर,3,मटर के अप्पे,1,मदर्स डे,3,मम्मी,1,मलाई,2,मलाई फ्रूट सलाद,1,महानता,1,महाराजा अग्रसेन जी,1,महिला आजादी,1,महिला आरक्षण,1,महिला सशक्तिकरण,4,महिला सुरक्षा,1,महिलाओं का पहनावा,1,माँ,3,माता यशोदा,1,मातृभाषा,1,मायका,2,मारवाड़ी,1,मार्केट जैसे साबूदाना पापड़,1,माला,1,मावा कुल्फी,1,मासिक धर्म,2,माहवारी,3,मिठाई,16,मित्र,2,मिलावट,1,मिलावट पहचानने के घरेलू तरीके,1,मुक्ति,1,मुबारकपुर कला,1,मुस्लिम मंच,1,मुहूर्त,1,मूंग की सूखी दाल का हलवा,1,मूंगफली,1,मूंगफली की सूखी चटनी,1,मूली,3,मूली का अचार,1,मूली के पत्तों के कुरकुरे कटलेट्स,1,मेंस्ट्रुअल कप,1,मेंहदी,6,मेडिसिन बाबा,1,मेथी,1,मेथी दाना चुर्ण,1,मेथी मटर मलाई,1,मेनु,1,मेरा मंत्र,3,मेरी बात,15,मैंगो श्रीखंड,1,मैनर्स,1,रंग,1,रंग पंचमी,1,रक्तदान,1,रक्तदान के फायदे,1,रक्षाबंधन,1,रक्षाबंधन शायरी,1,रजस्वला नारी,3,रवा इडली,1,रसोई,86,रांगोली,3,राखी,1,राजभाषा,1,राजस्थानी समाज,2,राम रहीम,1,राशी-भविष्य,1,राष्ट्रगान,1,राष्ट्रगीत,1,राष्ट्रभाषा,1,रिती-रिवाज,1,रीतिरिवाज,1,रुपया-पैसा,1,रोटी,2,रोस्टेड मूंगफली,1,लघुकथा,9,लड्डू,2,लहसुन,1,लाइटर,1,लाल मिर्च की सूखी चटनी,1,लीव इन रिलेशनशिप,1,लेसुए,1,लॉटरी,1,लोकल ट्रेन,1,लोग क्या कहेंगे?,1,लौकी,2,लौकी का हलवा,1,लौकी की बड़ी,1,वक्त,1,वटसावित्री व्रत,1,वर,1,वर्तमान,1,वारी के हनुमान,1,विधवा,1,विधवा ने किया कन्यादान,1,विधवा विवाह,1,विशाखापट्टनम रेप कांड,1,वृंदावन,1,वृद्धावस्था,1,वेजिटेबल डोसा,1,वैलेंटाइन डे,1,व्यंग,11,व्यायाम,1,व्रत,3,व्रत रेसिपी,12,व्रत स्पेशल,2,व्हेजिटेबल पैनकेक,1,शकुन-अपशकुन,1,शक्करपारे,1,शनि देव,1,शब्द,1,शर्बत,1,शर्म,2,शादी,4,शादी की खरेदी,1,शादी की फ़िजूलखर्ची का बिल,1,शादी-ब्याह,3,शायरी,9,शिक्षक दिन,1,शिक्षा,4,शिवपुरी,1,शुभ मुहूर्त,1,शुभ-अशुभ,3,शुभम जगलान,1,श्राद्ध,3,श्राद्ध का खाना,1,श्रीकृष्ण,2,श्रेष्ठता,1,संस्कार,1,संस्मरण,9,सकारात्मक पहल,2,सच बोलने की प्रेरणा,1,सतबीर ढिल्लो,1,सपना,1,सफेद बाल,1,सब्जियों का अचार,1,सब्जियों की कांजी,1,सब्जी,2,समय,1,समाजसेवा,2,समाजिक,1,समाधान,1,समावत चावल,2,सर के बाल,1,सलाद,1,ससुराल,2,सहशिक्षा,1,सांवला या काला रंग,1,साउथ इंडियन डिश,2,साक्षात्कार,3,सागर में ज्वार,1,साफ-सफाई,1,साबुदाना,2,साबुदाना के अप्पे,1,साबुदाना पापड़,2,साबुदाने लड्डू,1,साबूदाना,2,सामाजिक,58,सामाजिक कार्यकर्ता,1,सालगिरह,5,सास,2,साहित्य,76,सिंगल पैरेंट,1,सिंदूर,1,सीख-सुहानी,1,सीनू कुमारी,1,सुखी,1,सुजी,1,सूजी,1,सूजी के लड्डू,1,सेनेटरी नेपकिन,1,सेब,1,सेलिब्रेटी,1,सेवई उपमा,1,सेहत,1,सैंडविच,1,सौतेली माता,1,स्कूल,1,स्त्री,2,स्नैक्स,29,स्वतंंत्रता दिन,1,स्वतंत्रता दिन,2,स्वर्ग और नर्क,1,स्वाभिमान,1,स्वास्थ,2,स्वास्थ्य,8,हंस,1,हनुमान जी,2,हरी मटर के पैनकेक,1,हरी मिर्च,3,हरी मिर्च का अचार,1,हलवा,2,हाथी,1,हिंदी उखाणे,1,हिंदी उखाने,1,हिंदी दिवस,1,हिंदी शायरी,21,हैंडल,1,होटल,1,होममेकर,1,होली की शुभकामनाएं,1,
ltr
item
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: अंंधविश्वास छोडिए...अंगदान या देहदान कीजिए...!!
अंंधविश्वास छोडिए...अंगदान या देहदान कीजिए...!!
यदि आप जिंदगी में कुछ अच्छा करना चाहते है...आपकी सोच अच्छी है...और इरादे नेक है...तो अंधश्रद्धा छोडिए...अंगदान या देहदान कीजिए...!!
https://2.bp.blogspot.com/-PmIn2VmuQGo/WPs95MbAopI/AAAAAAAADgw/ghk99Q1Lu2I1iEoCQd2i52dZ3HBaNZx_ACLcB/s320/angdan_Fotor.jpg
https://2.bp.blogspot.com/-PmIn2VmuQGo/WPs95MbAopI/AAAAAAAADgw/ghk99Q1Lu2I1iEoCQd2i52dZ3HBaNZx_ACLcB/s72-c/angdan_Fotor.jpg
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
https://www.jyotidehliwal.com/2017/04/Andhshraddha-chhodie-angdan-ya-dehdan-kijie.html
https://www.jyotidehliwal.com/
https://www.jyotidehliwal.com/
https://www.jyotidehliwal.com/2017/04/Andhshraddha-chhodie-angdan-ya-dehdan-kijie.html
true
7544976612941800155
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy