व्यंग- सात जन्मों तक यहीं पति मिलें!!

अपने पति की खुशी को सर्वोपरी मानने वाली हम महिलाएं ईश्वर से सात जन्मों तक वहीं पति मांग कर, क्या उन पर जुर्म नहीं करती?

                                       
व्यंग- सात जन्मों तक यहीं पति मिलें!!

एक मान्यता के अनुसार वटसावित्री व्रत के दिन महिलाएं शिव-पार्वती जी से प्रार्थना करती है कि “हे प्रभु, सात जन्मों तक हमें यहीं पति मिलें!” लेकिन अपने पति की खुशी को सर्वोपरी मानने वाली हम महिलाएं इस बात कि ओर ध्यान क्यों नहीं देती कि हमारे पति महोदय क्या चाहते है? पति महोदय की खुशी किस बात में है? ईश्वर से सात जन्मों तक वहीं पति मांग कर, क्या हम महिलाएं उन पर जुर्म नहीं करती? क्योंकि ज्यादातर (सभी नहीं) पुरुषों की इच्छा यहीं रहती है कि उन्हें हर जन्म में अलग-अलग पत्नियाँ मिले! वटसावित्री व्रत के दिनों में पिछले वर्ष सोशल मीडिया पर एक कार्टून बहुत चला। जिसमें पुरुषों को भी वटवृक्ष के तने को कच्चा सूत लपेटकर कहते हुए दिखाया जाता है कि “अगले सात जन्म तक अलग-अलग पत्नियाँ मिलने दे रे बाबा!”
               
व्हाट्स एप से ...

कई पुरुषों कि सोच तो यहां तक कलुषित रहती है कि वे कहते है, “बच्चे अपने अच्छे लगते है और पत्नी पड़ोसी की अच्छी लगती है!!” जब इस जन्म में ही ज्यादातर पुरुष मजबूरी में अपनी पत्नी का साथ निभा रहे है तो ऐसे में हम महिलाएं उन्हें सात जन्मों तक साथ निभाने को क्यों मजबूर करना चाहती है? चाहे वह कोई भी रिश्ता हो, साथ रहने का आनंद तो तभी आता है, जब दोनों दिल से साथ हो। उस साथ का क्या मतलब, जो दिल से साथ न हो! ऐसे में यह बात आज तक मेरी समझ में नहीं आई कि हम महिलाएं ईश्वर से सात जन्मों तक या इससे भी आगे जाकर जन्म-जन्म तक यहीं पति मिलें, यह प्रार्थना क्यों करती है? हम खुद पति से प्रेम करती है न? हम चाहती है न कि हमारे पति हर वक्त और हर जन्म में खुश रहें, तो हम इस सत्य को जानते समझते हुए भी क्यों नज़रअंदाज़ करती है कि हमारे पति की खुशी, सात जन्म तक हमारा साथ निभाने में नहीं है! 
अपने पति की खुशी के लिए हमें इस कटू सत्य को स्वीकार करना ही होगा। मुझे लगता है कि इस दिन हमें ईश्वर से यहीं प्रार्थना करनी चाहिए कि “हे ईश्वर, सात जन्मों का तो मुझे पता नहीं है। लेकिन इस जन्म में हम दोनों पति-पत्नी की अच्छे से नीभ जाएं। हम दोनों में किसी भी प्रकार का मन-मुटाव न हो। हम दोनों का प्यार दिन दुनी-रात चौगुनी की गती से बढ़ता रहें। मेरा हम सफर हमेशा खुश रहें और उसकी हर मनोकामना पुरी हो!!"

Keywords: vat savitri vrat, sat janm, relationship of husband and wife, vat purnima,

COMMENTS

BLOGGER: 30
  1. सच जो जन्म मिला वही अच्छे से निभे तो बाद में अपने आप साथ जन्म सुधर जाएँ ..
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  2. हाँ जी सही कहा आपने !

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  3. जय मां हाटेशवरी....
    आप की रचना का लिंक होगा....
    दिनांक 05/06/2016 को...
    चर्चा मंच पर...
    आप भी चर्चा में सादर आमंत्रित हैं।

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  4. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 5 जून 2016 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  5. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " बिछड़े सभी बारी बारी ... " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. शिवम् जी, मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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  6. बेनामी5/6/16, 8:24 am

    इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. बेनामी5/6/16, 8:25 am

    bahut badhiya kisi ne to patiyon ki peeda samjhi.

    http://anoopsuriji.blogspot.in

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  8. saat janmo ki to pata nahi....lekin jis janm me bhi aur jis roop me bhi mile...hamesha sath sath rahen.....

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  9. saat janmo ki to pata nahi....lekin jis janm me bhi aur jis roop me bhi mile...hamesha sath sath rahen.....

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  10. "हम दोनों में किसी भी प्रकार का मन-मुटाव न हो। हम दोनों का प्यार दिन दुनी-रात चौगुनी की गती से बढ़ता रहें। मेरा हम सफर हमेशा खुश रहें और उसकी हर मनोकामना पुरी हो"

    http://hradaypushp.blogspot.com/2010/05/ganja.html

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  11. शत-प्रतिशत सहमत हूँ आपके विचारों से सटीक आलेख

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  12. दीदी आपका लेख बहुत ही रुचिकर है। वैसे मैं पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करता अतः सात जन्मों जितना प्रेम इसी जनम में खर्च करके आदर्श जीवन जीने की कोशीश सर्वेश्रेष्ठ विकल्प होगा।

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  13. बेहद शानदार व्‍यंग्‍य की प्रस्‍तुति। बहुत ही सटीक व्‍यंग्‍य लिखा है आपने। बहुत अच्‍छा लगा।

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  14. एक ही जनम अचचे से निभ जाये सात जन्मों की किसने देखी। पर ऐसा भी कहते हैं कि १२ वर्षों में हमारे शरीर की सारी पेशियाँ बदल जाती है तो इसे एक नया जन्म ही माने। तो विवाह अगर १६ वर्ष में हुआ तो पति के दीर्घायु की कामना( जीवेन शरदः शतम्) यही है सात जनमों का रहस्य। ये वॉटस्एप के सौजन्य से।

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  15. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  16. बहुत अच्छा लेख है आदरणीय ज्योति जी । आपने इसे व्यंग्य का नाम दिया है किन्तु यह व्यंग्य न होकर जीवन का यथार्थ है । लेख के अंत में आपके द्वारा दिया गया संदेश सदा स्मरणीय है, पूर्णतः अनुकरणीय है ।

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  17. हे ईश्वर, सात जन्मों का तो मुझे पता नहीं है। लेकिन इस जन्म में हम दोनों पति-पत्नी की अच्छे से नीभ जाएं। हम दोनों में किसी भी प्रकार का मन-मुटाव न हो। हम दोनों का प्यार दिन दुनी-रात चौगुनी की गती से बढ़ता रहें। मेरा हम सफर हमेशा खुश रहें और उसकी हर मनोकामना पुरी हो!!"ज्यादातर की यही कामना रहती है !! बढ़िया लिखा है ज्योति जी

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  18. Very good jyoti ji. Keep it up. Jeevan jeene ka aanand tab hai jab riste majburi nahi dil se nibhaya jay. www.topeshkatongue.com

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  19. आपकी लिखी रचना फिर से एक बार और "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 26 मई 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  20. ये भी पत्नियों का अपना तरीका हे पतियों से मोहब्बत जताने का। ये अलग बात हे की ज्यादा मोहब्बत पतियों पर भारी पड़ जाती हे।

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  21. हमें ईश्वर से यहीं प्रार्थना करनी चाहिए कि “हे ईश्वर, सात जन्मों का तो मुझे पता नहीं है। लेकिन इस जन्म में हम दोनों पति-पत्नी की अच्छे से नीभ जाएं। हम दोनों में किसी भी प्रकार का मन-मुटाव न हो। हम दोनों का प्यार दिन दुनी-रात चौगुनी की गती से बढ़ता रहें। मेरा हम सफर हमेशा खुश रहें और उसकी हर मनोकामना पुरी हो!!"
    सुन्दर ,उत्तम विचार ,आभार। "एकलव्य"

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  22. जो जन्म मिला है उसे हंसी ख़ुशी काट ले यही कम है क्या ! गैरतगंज के कल ही खबर पढ़ी की बाहर बीबी पति की लम्बी उम्र के लिए वट की पूजा कर रही थी इसी दौरान पति ने अपने को गोली मार दी, वह दौड़ के गयी तो पतिदेव सदा के लिए जा चुके थे। यदि आंतरिक रूप से एक दूजे की समझ न हो तो सब व्यर्थ का प्रपंच है

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  23. बहुत दमदार बात कही है आपने।

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  24. बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति ज्योती बहन

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'रेप प्रूफ पैंटी',1,#मीटू अभियान,1,15 अगस्त,3,26 जनवरी,1,8 मार्च,1,अंकुरित अनाज,1,अंगदान,1,अंगुठी,1,अंगूर,1,अंगूर की लौंजी,1,अंगूर की सब्जी,1,अंग्रेजी,2,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस,3,अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस,1,अंधविश्वास,10,अंधश्रद्धा,8,अंधश्रध्दा,2,अंश,1,अग्निपरीक्षा,1,अग्रवाल,1,अचार,7,अच्छी पत्नी,1,अच्छी पत्नी चाहिए तो...,1,अच्छे काम,1,अजब-गजब,2,अतित,1,अदरक,1,अदरक का चूर्ण,1,अदरक-लहसुन पेस्ट,1,अनमोल वचन,10,अनुदान,1,अनुप जलोटा,1,अन्न,1,अन्य,23,अन्याय,1,अपेक्षा,1,अप्पे,4,अमरुद,1,अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी,1,अमीरी,1,अमेजन,1,अरुणा शानबाग,1,अरुनाचलम मुरुगनांथम,1,अवार्ड,2,असली हीरो,13,अस्पतालों में बच्चों की मौत,1,आंवला,3,आंवला चटनी,1,आंवला लौंजी,1,आइसक्रीम,1,आईसीयू ग्रेंडपा,1,आज के जमाने की अच्छाइयां,1,आजादी,2,आज़ादी,1,आतंकवादी,2,आत्महत्या,3,आत्मा,1,आदित्य तिवारी,1,आम,9,आम का अचार,1,आम का पना,2,आम का मुरब्बा,2,आम की बर्फी,1,आम पापड़,1,आरक्षण,1,आलू,1,आलू पोहा अप्पे,1,इंसान,2,इंस्टंट डोसा,1,इंस्टंट स्नैक्स,1,इंस्टट ढोकला,1,इंस्टेंट कुल्फी,1,इडली,3,इन्डियन टाइम,1,इमली,1,इरोम 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परांठे,1,फेसबुक,2,फैशन,1,फ्रिज,1,फ्रेंडशीप डे,1,फ्रेंडशीप डे शायरी,1,बकरीद,1,बची हुई सामग्री का उपयोग,1,बच्चे,7,बच्चे की ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर गैंगरेप,1,बेटा,1,बेटा पढाओ,1,बेटी,7,बेटी बचाओ अभियान,2,बेसन,2,बैंगन,1,बोझ,1,ब्रेकअप,1,ब्रेड,4,ब्रेड की रसमलाई,1,ब्रेड पकोडा,1,ब्रेड पिस्ता पेढे,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,5,ब्ल्यू व्हेल गेम,1,भक्ति,1,भगर,3,भगर की इडली,1,भगर के उत्तपम,1,भगर के कटलेट,1,भगवान,3,भजिए,1,भरवां मिर्च,1,भाई दूज शायरी,1,भाकरवड़ी,1,भाभी,1,भारत,1,भारतीय मसाले,1,भुट्टे के पकोड़े,1,भूकंप,1,भोजन,1,भ्रुण हत्या,1,मंदसौर गैंग रेप,1,मंदिर,2,मंदिरों में ड्रेस कोड़,1,मंदिरों में दक्षिणा,1,मकई,4,मकई उपमा,1,मकई चीला,1,मकई पकोडे,1,मकर संक्रांति,2,मकर संक्रांति की शुभकामनाएं,1,मकर संक्राति,1,मटर,3,मटर के अप्पे,1,मठ्ठा,1,मदर्स डे,3,मम्मी,1,मलाई,2,मलाई फ्रूट सलाद,1,मसाला छाछ,1,महानता,1,महाराजा अग्रसेन जी,1,महिला आजादी,1,महिला आरक्षण,1,महिला सशक्तिकरण,4,महिला सुरक्षा,1,महिलाओं का पहनावा,1,माँ,3,माता यशोदा,1,मातृभाषा,1,मायका,2,मारवाड़ी,1,मार्केट जैसे साबूदाना पापड़,1,माला,1,मावा कुल्फी,1,मासिक धर्म,2,माहवारी,3,मिठाई,17,मित्र,2,मिलावट,1,मिलावट पहचानने के घरेलू तरीके,1,मिस इंडिया 2019,1,मुक्ति,1,मुबारकपुर कला,1,मुरब्बा,1,मुस्लिम मंच,1,मुहूर्त,1,मूंग की सूखी दाल का हलवा,1,मूंगफली,1,मूंगफली की सूखी चटनी,1,मूली,3,मूली का अचार,1,मूली के पत्तों के कुरकुरे कटलेट्स,1,मेंस्ट्रुअल कप,1,मेंहदी,6,मेडिसिन बाबा,1,मेथी,1,मेथी दाना चुर्ण,1,मेथी मटर मलाई,1,मेनु,1,मेरा मंत्र,3,मेरी बात,15,मैंगो फ्रूटी,1,मैंगो श्रीखंड,1,मैनर्स,1,रंग,1,रंग पंचमी,1,रक्तदान,1,रक्तदान के फायदे,1,रक्षाबंधन,1,रक्षाबंधन शायरी,1,रजस्वला नारी,3,रवा इडली,1,रसोई,95,रांगोली,3,राखी,1,राजभाषा,1,राजस्थानी समाज,2,राम रहीम,1,राशी-भविष्य,1,राष्ट्रगान,1,राष्ट्रगीत,1,राष्ट्रभाषा,1,रिती-रिवाज,1,रीतिरिवाज,1,रुपया-पैसा,1,रेणुका मिश्रा,1,रोटी,2,रोस्टेड मूंगफली,1,लघुकथा,9,लड्डू,2,लहसुन,1,लाइटर,1,लाल 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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: व्यंग- सात जन्मों तक यहीं पति मिलें!!
व्यंग- सात जन्मों तक यहीं पति मिलें!!
अपने पति की खुशी को सर्वोपरी मानने वाली हम महिलाएं ईश्वर से सात जन्मों तक वहीं पति मांग कर, क्या उन पर जुर्म नहीं करती?
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
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