धर्मग्रंधों में नारी

हमारे धर्मग्रंथों में 'अर्द्धनारीश्वर' का उल्लेख है। जिसका तात्पर्य आधा पुरुष और आधा नारी होने से है। अर्थात पुरुष और नारी को समान महत्व दिया गया है। फिर न जाने क्या हुआ कि...

      

हमारे धर्मग्रंथों में 'अर्द्धनारीश्वर' का उल्लेख है। जिसका तात्पर्य आधा 

पुरुष और आधा नारी होने से है। अर्थात पुरुष और नारी को समान महत्व दिया गया है।  फिर न जाने क्या हुआ कि ईश्वर का आधा हिस्सा मालिक बन गया और आधा हिस्सा ग़ुलाम बन गया। गुलामी की यह दास्तान इतनी बड़ी हो गई कि नारी अपना वजूद ही खो बैठी। हिन्दू धर्मग्रन्थ भी स्त्रियों को पुरुषों से कमतर, बुद्धिहीन, भोग्या और अपवित्र बताते है। 
मनु स्मृति में-
'पिता रक्षति कौमारे, भ्रता रक्षति यौवने,
रक्षित स्थविरे पुत्रा, न स्त्री स्वतंत्र महती'
अर्थात- कुंवारी स्त्री की रक्षा पिता, युवावस्था में पति और बुढ़ापे में पुत्र करता है। स्त्री स्वतंत्र नहीं है। 
रामायण में-
 वाल्मीकि जी ने कहा है, 'स्त्रियों के लिए तो पति ही देवता है, पति ही बंधु और पति ही गुरु है। इसीलिए उसे प्राणों की बाजी लगाकर भी विशेष रूप से पति का प्रिय बनना चाहिए।' ऐसा कह कर स्त्री को जो पत्नी धर्म की घुट्टी पिलाई उस का असर आज तक स्त्री के मनमस्तिक पर कायम है। 
महाभारत में - 
वेदव्यास जी ने कहा है, ''ये स्त्रियां लक्ष्मीं है ऐश्वर्य की कामना करने वालों को इन का सत्कार करना चाहिए। वश में रख कर पालनपोषण की गई स्त्री लक्ष्मी ही होती है।'' यानि वश में रहे तो लक्ष्मी, नहीं तो? पुरुषों के ऋषि-मुनि समझाते है कि स्त्री पुरुषों को परमात्मा माने! पुरुष खुद ही समझा रहा है कि मुझे परमात्मा मानों! स्त्री अगर दुसरे पुरुष की कल्पना भी कर ले तो वह पापिन है! और अगर पुरुष कुछ… भी करे तो भी वह पवित्र है!! 
हमारे धर्मग्रंथों में नारी के बारे में सिर्फ गलत कहा ही नहीं गया, इन कालखंडों में भी नारी के साथ इतना गलत व्यवहार हुआ कि नारी की दशा देख कर करुणा को भी करुणा आने लगे! यह बात मैं कुछ उदाहरणों से स्पष्ट करूंगी।

1) महाभारत में 5 भाइयों की एक ही स्त्री ( द्रोपदी ) से शादी होना। इस से यह सिद्ध होता है कि पांडव नारी को भोग्या मानते थे।

2) युधिष्ठिर द्वारा अपनी पत्नी को दांव पर लगाना। जैसे पत्नी एक इंसान न होते हुए कोई चीज वस्तु हो! फिर भी हम उन्हें धर्मराज कहते है। क्यों? स्त्री को कोई आत्मा-वात्मा नहीं है क्या?

३) ऋषि विश्वामित्र और अप्सरा मेनका की अवैध संतान शकुंतला को कण्व ऋषि पालते है। शकुंतला और दुष्यंत की अवैध संतान 'भरत' के नाम पर हमारे देश का नाम 'भारत' पड़ा! यदि यह कहानी वास्तव में ऐसी ही थी, तो स्पष्ट है कि इस देश की नींव में ही निहित है- नारी की घोर उपेक्षा, उस पर ढाए गए घोर अत्याचार, पुरुष की कामुकता! यह उस बेटी शकुंतला के प्रति क्रूर उपहास है जिसे उसके माँ-बाप ने पैदा होते ही फेंक दिया था! उस पत्नी शकुंतला की व्यथा-कथा है जिसे एक राजा आश्रम में विवाह से पूर्व ही गर्भवती बना कर त्याग देता है! उस माँ की करूण कहानी है जो पति द्वारा त्यागी जाने पर वन में अकेली रहती हुई बच्चे को जन्म देती है, पालती है और पता नहीं कैसे जीवन को ढोती है!!

4) श्रीराम जी की पत्नी सीता जी के साथ भी यही हुआ था! जन्मी तो अज्ञात माँ-बाप ने खेतों में फेंक दी। राजा जनक ने पाल ली। श्रीराम जी ने सीता जी की अग्निपरीक्षा ली! क्यों? क्या राम जी को सीता जी पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं था? वे तो 'भगवान', 'त्रिकालदर्शी' थे। फिर उन्होंने सीता जी की अग्निपरीक्षा क्यों ली?

जब भगवान खुद ही नारी पर विश्वास नहीं कर पाए, अपनी पत्नी का साथ नहीं दे पाए, तो हम आज के पुरुषों को क्या कहे? शकुंतला हो या सीता, भारतीय संस्कृति में नारी की यही करुण कहानी है। बाद में दुष्यंत ने भरत को इसलिए नहीं अपनाया था कि उस के अंदर का मर्द बदल गया था बल्कि उस की कोई और संतान नहीं थी। उसे ऐसा कोई चाहिए था जो उस का उत्तराधिकारी हो, जो उस की अन्तेष्टि करे! इसीलिए मज़बूरी में अपनाना पड़ा!

नारी का दुय्यम स्थान 
हर धर्म ने नारी को हमेशा ही दुय्यम स्थान ही दिया है। यदि ऐसा नहीं है तो-
1) आज विश्व में हिन्दू, मुसलमान, सिख, जैन, बौद्ध, सूफी, यहूदी आदि जितने भी धर्म प्रचलित हुए है या प्रचलित है, उनमे से एक भी धर्म की संस्थापिका नारी क्यों नहीं है?

2) क्या पतिव्रता धर्म पालने के अलावा नारी को और कुछ करने की कोई आवश्यकता नहीं है? चाहे इसकी ओट में ये पुरुष दिन-रात नारी को सताते रहे?

3) लड़की का बार-बार मायके में 'पराया धन'  और ससुराल में 'पराई बेटी' कहकर अपमान क्यों किया जाता है? यदि मायका और ससुराल दोनों जगह ही वह 'पराई' है तो 'अपनी' कहां है?

4) यदि लड़का और लड़की में कोई भेदभाव नहीं है तो मुखाग्नि सिर्फ लड़का ही क्यों देता है?

5) ऋषिपंचमी की व्रतकथा के अनुसार महिलाओं में होने वाला मासिक धर्म पाप है। उस पाप को धोने के लिए इस व्रत को करने का रिवाज है। ऐसे अन्धविश्वास को क्या कहेंगे? अगर मासिक धर्म नहीं हो तो कोई भी महिला पूर्ण औरत नहीं कहलाती। मासिक धर्म एक सामान्य प्रकिया है। अधूरी औरत से कौन शादी करेगा? किसी न किसी तरीके से महिलाओं में अपराध बोध रहे, वो स्वयं को हीन समझे यही धर्म का उद्देश रहा है।

विडंबना यह है कि अशिक्षा के कारण, थोपे गए रूढ़िवादी संस्कारों के कारण औरते ही सबसे ज्यादा अपना मन, धन और यहां तक की तन भी धर्म के नाम पर न्यौछावर करती है! उस धर्म पर जो औरतों के लिए अन्यायी है, अत्याचारी है, अनाचारी है, असहनशील है।  

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COMMENTS

BLOGGER: 12
  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (15-12-2014) को "कोहरे की खुशबू में उसकी भी खुशबू" (चर्चा-1828) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. It's a beautiful post. Wish every woman gets respect for what she does for others selflessly.

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  3. ज्योति जी ,आपके दृष्टिकोण से मैं पूर्णत: सहमत हूँ !वल्कि मैं यह कहूँगा कि हिन्दू धर्मग्रन्थ के सहारा लेकर न केवल स्त्रियों को प्रताड़ित किया है ,पुरे समाज को अलग अलग वर्ग/जात-पात में बाँट कर समाज को पतानोंमुख कर दिया है !
    जैसे आपने उल्लेख किया है ,मनुस्मृति शायद इसका आगाज़ है !मर्यादा पुरुसोत्तम राम कहना उचित नहीं होगा उन्होंने कई मर्यादाओं का उलंघन किया है |रामचरित मानस में तुलसीदास ने भी नारी को शुद्र और ढोर को, एक वर्ग में रखा है | इसके बावजूद महिलाए इसे सुबह शाम भक्ति से पढ़ती है |क्या ऐसे ग्रंथो को बहिष्कार नहीं करना चाहिए ? महाभारत का जो उदाहरन आपने दिया है उससे यही साबित होता है कि नारियों के प्रति उस समय कोई आदर नहीं था और न युधिष्ठिर को धर्मराज कहा जा सकता है !सत्यवती ने ऋषि व्यास को पुत्र प्राप्ति के लिए अम्बिका और अम्बालिका के पास भेजा था !राम नियोग से उत्पन्न थे ,सीता नाजायज़ ,भारत नाजायज़ !पुरे धर्मग्रन्थ के नायक नायिकाए सब नाजायज़ थे !फिर समाज के ठेकेदार कौन सी आदर्श की ,कौन सी संस्कृति की बात करते हैं ?एक तरफ कहते है नारी पूजनीय है दूसरी तरफ उसे पैर की जुटी
    समझते है ,बुद्धिहीन, भोग्या और अपवित्र बताते है। बेटी को बेटों से कम ना समझे इस पर मैंने एक कविता भी लिखी है .मैं ब्लॉग का लिंक दे रहा हूँ ,पढियेगा जरुर l
    : पेशावर का काण्ड

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  4. सही कहा इसलिए धर्म ग्रंथों का पालन छोड़ दें

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  5. स्त्री के बारे में समाज की यह धारणा तभी बदल सकती है,जब वह स्वयं की स्थिति पर अमल करे,परन्तु आज भी स्त्रियां अपने पति-परमेश्वर की लम्बी उम्र जैसे उपवास से स्वयं को कष्ट देती है, तब...उन्हे सोचना होगा कि उनकी फिक्र भी किसी को है?

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  6. Jyoti ji , aapne ekdum sahi kaha ,aadha hissa abhi bhi gulam hi hai ,chahe jitni nari ,purush samanta ke dhol bajaye jaye per sab khokhla hai . Mere khayal se sabse pehle nari ko nari ka sath nibhana seekhna padega .

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  7. ज्योति जी बहुत ही सुन्दर अर्धनारीश्वर ,सत्य अगर पुरुष समाज का हिस्सा है तो नारी भी है । दोनों में से एक बिना भी संसार की कल्पना संभव नहीं है ,फिर नारी को किसी भी तरह कमतर समझना पुरुषत्व का झूठा अभिमान मात्र है ,नारी की कोमलता को उसकी कमजोरी समझना अपराध है। कोई भी स्त्री किसी न किसी की माँ बहन और बेटी और होती है। नारी की कोमलता उसका श्रृंगार है उसकी कमजोरी नहीं नारी ही दुर्गा ,काली है । हमारे धर्म ग्रन्थ उदहारण है ,की जब -जब पुरुत्व का अभिमान अपनी सीमायें लाघा है , तब -तब नारी को अपनी शक्ति से उस अभिमान का सिर काटना पड़ा ।

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  8. ज्योति जी आपकी लेखन शैली वास्तव में लाजबाब है. आपके द्वारा लिखे नारी विषयक काफी लेखो का मैंने पड़ा है और आपकी पीएचडी कार्य में उपयोग भी किया है. जिसके लिए आपका साभार धन्यवाद.....

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    1. उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

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  9. बहुत सुंदर लेख लिखा ज्योती जी बहुत सही लिखा आपने में आपसे पूर्णतः सहमत हूं

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  10. अत्यंत प्रभावशाली लेखन है आपका ज्योति दीदी

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नाम

'रेप प्रूफ पैंटी',1,#मीटू अभियान,1,15 अगस्त,3,26 जनवरी,1,8 मार्च,1,अंकुरित अनाज,1,अंगदान,1,अंगुठी,1,अंगूर,1,अंगूर की लौंजी,1,अंगूर की सब्जी,1,अंग्रेजी,2,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस,3,अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस,1,अंधविश्वास,10,अंधश्रद्धा,8,अंधश्रध्दा,2,अंश,1,अग्निपरीक्षा,1,अग्रवाल,1,अचार,7,अच्छी पत्नी,1,अच्छी पत्नी चाहिए तो...,1,अच्छे काम,1,अजब-गजब,2,अतित,1,अदरक,1,अदरक का चूर्ण,1,अदरक-लहसुन पेस्ट,1,अनमोल वचन,10,अनुदान,1,अनुप जलोटा,1,अन्न,1,अन्य,23,अन्याय,1,अपेक्षा,1,अप्पे,4,अमरुद,1,अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी,1,अमीरी,1,अमेजन,1,अरुणा शानबाग,1,अरुनाचलम मुरुगनांथम,1,अवार्ड,2,असली हीरो,13,अस्पतालों में बच्चों की मौत,1,आंवला,3,आंवला चटनी,1,आंवला लौंजी,1,आइसक्रीम,1,आईसीयू ग्रेंडपा,1,आज के जमाने की अच्छाइयां,1,आजादी,2,आज़ादी,1,आतंकवादी,2,आत्महत्या,3,आत्मा,1,आदित्य तिवारी,1,आम,9,आम का अचार,1,आम का पना,2,आम का मुरब्बा,2,आम की बर्फी,1,आम पापड़,1,आरक्षण,1,आलू,1,आलू पोहा अप्पे,1,इंसान,2,इंस्टंट डोसा,1,इंस्टंट स्नैक्स,1,इंस्टट ढोकला,1,इंस्टेंट कुल्फी,1,इडली,3,इन्डियन टाइम,1,इमली,1,इरोम 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पारे,1,नमकीन,1,नवरात्र,1,नवरात्र स्पेशल,2,नवरात्रि,1,नवरात्री रेसिपी,5,नववर्ष,2,नववर्ष की शुभकामनाएं,2,नाइंसाफी,1,नानी,1,नारियल बर्फ़ी,1,नारी,44,नारी अत्याचार,10,नारी शिक्षा,1,नाश्ता,1,निंबु का अचार,1,निचली जाती,1,निर्णयक्षमता,1,निर्भया,2,निवाला,1,नींबू,1,नीडल थ्रेडर,1,नेत्रदान,1,नेपाल त्रासदी,1,नेल आर्ट,1,न्याकिम गैटवेच,1,पकोडे,2,पक्षी,1,पढ़ा-लिख़ा कौन?,1,पढ़ाई,1,पति,1,पति का अहं,1,पति-पत्नी,1,पत्ता गोभी,1,पत्ता गोभी की मुठिया,1,पत्नी,1,पत्र,1,पपीता,1,परंपरा,2,परवरिश,5,पराठे,1,परीक्षा,2,परेशानी,1,पल्ली उत्सव,1,पवित्र,1,पवित्रता,2,पसंदीदा शिक्षक को पत्र,1,पानी,1,पानी कैसे पीना चाहिए,1,पापड़,3,पालक,1,पालक के नमक पारे,1,पालक बडी,1,पाश्चात्य संस्कृति,1,पिता,2,पुण्य,1,पुरानी मान्यताएं,1,पुलवामा हमला,1,पूडी,1,पेढे,1,पैड्मैन,1,पैनकेक,1,पैरेंटीग,1,पोर्न मूवी,1,पोषण,1,पोहा,1,पोहे के कुरकुरे,1,प्याज,3,प्याज की चटनी,1,प्यार,1,प्यासा कौआ,1,प्रत्यूषा,1,प्रद्युम्न,1,प्रसन्न,1,प्राणियों से सीख,1,प्री वेडिंग फोटोशूट,1,फर्रुखाबाद,1,फलाहार,1,फल्लिदाने,1,फादर्स डे,2,फूल गोभी के परांठे,1,फेसबुक,2,फैशन,1,फ्रिज,1,फ्रेंडशीप डे,1,फ्रेंडशीप डे शायरी,1,बकरीद,1,बची हुई सामग्री का उपयोग,1,बच्चे,7,बच्चे की ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर गैंगरेप,1,बेटा,1,बेटा पढाओ,1,बेटी,7,बेटी बचाओ अभियान,2,बेसन,2,बैंगन,1,बोझ,1,ब्रेकअप,1,ब्रेड,4,ब्रेड की रसमलाई,1,ब्रेड पकोडा,1,ब्रेड पिस्ता पेढे,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,5,ब्ल्यू व्हेल गेम,1,भक्ति,1,भगर,3,भगर की इडली,1,भगर के उत्तपम,1,भगर के कटलेट,1,भगवान,3,भजिए,1,भरवां मिर्च,1,भाई दूज शायरी,1,भाकरवड़ी,1,भाभी,1,भारत,1,भारतीय मसाले,1,भुट्टे के पकोड़े,1,भूकंप,1,भोजन,1,भ्रुण हत्या,1,मंदसौर गैंग रेप,1,मंदिर,2,मंदिरों में ड्रेस कोड़,1,मंदिरों में दक्षिणा,1,मकई,4,मकई उपमा,1,मकई चीला,1,मकई पकोडे,1,मकर संक्रांति,2,मकर संक्रांति की शुभकामनाएं,1,मकर संक्राति,1,मटर,3,मटर के अप्पे,1,मठ्ठा,1,मदर्स डे,3,मम्मी,1,मलाई,2,मलाई फ्रूट सलाद,1,मसाला छाछ,1,महानता,1,महाराजा अग्रसेन जी,1,महिला आजादी,1,महिला आरक्षण,1,महिला सशक्तिकरण,4,महिला सुरक्षा,1,महिलाओं का पहनावा,1,माँ,3,माता यशोदा,1,मातृभाषा,1,मायका,2,मारवाड़ी,1,मार्केट जैसे साबूदाना पापड़,1,माला,1,मावा कुल्फी,1,मासिक धर्म,2,माहवारी,3,मिठाई,17,मित्र,2,मिलावट,1,मिलावट पहचानने के घरेलू तरीके,1,मिस इंडिया 2019,1,मुक्ति,1,मुबारकपुर कला,1,मुरब्बा,1,मुस्लिम मंच,1,मुहूर्त,1,मूंग की सूखी दाल का हलवा,1,मूंगफली,1,मूंगफली की सूखी चटनी,1,मूली,3,मूली का अचार,1,मूली के पत्तों के कुरकुरे कटलेट्स,1,मेंस्ट्रुअल कप,1,मेंहदी,6,मेडिसिन बाबा,1,मेथी,1,मेथी दाना चुर्ण,1,मेथी मटर मलाई,1,मेनु,1,मेरा मंत्र,3,मेरी बात,15,मैंगो फ्रूटी,1,मैंगो श्रीखंड,1,मैनर्स,1,रंग,1,रंग पंचमी,1,रक्तदान,1,रक्तदान के फायदे,1,रक्षाबंधन,1,रक्षाबंधन शायरी,1,रजस्वला नारी,3,रवा इडली,1,रसोई,95,रांगोली,3,राखी,1,राजभाषा,1,राजस्थानी समाज,2,राम रहीम,1,राशी-भविष्य,1,राष्ट्रगान,1,राष्ट्रगीत,1,राष्ट्रभाषा,1,रिती-रिवाज,1,रीतिरिवाज,1,रुपया-पैसा,1,रेणुका मिश्रा,1,रोटी,2,रोस्टेड मूंगफली,1,लघुकथा,9,लड्डू,2,लहसुन,1,लाइटर,1,लाल मिर्च की सूखी चटनी,1,लीव इन रिलेशनशिप,1,लेसुए,1,लॉटरी,1,लोकल ट्रेन,1,लोकसभा चुनाव,1,लोग क्या कहेंगे?,1,लौंजी,1,लौकी,2,लौकी का हलवा,1,लौकी की बड़ी,1,वक्त,1,वटसावित्री व्रत,1,वर,1,वर्जिनिटी टेस्ट,1,वर्तमान,1,वारी के हनुमान,1,विधवा,1,विधवा ने किया कन्यादान,1,विधवा विवाह,1,विशाखापट्टनम रेप कांड,1,वृंदावन,1,वृद्धावस्था,1,वेजिटेबल डोसा,1,वेजिटेबल पैनकेक,1,वैलेंटाइन डे,1,वोट,1,वोट की किंमत,1,व्यंग,11,व्यायाम,1,व्रत,2,व्रत रेसिपी,15,व्रत स्पेशल,2,शकरकंद,1,शकरकंद की जलेबी,1,शकुन-अपशकुन,1,शक्करपारे,1,शनि देव,1,शब्द,1,शरबत,4,शर्बत,1,शर्म,2,शादी,5,शादी की खरेदी,1,शादी की फ़िजूलखर्ची का बिल,1,शादी के सालगिरह की शुभकामनाएं,1,शादी-ब्याह,3,शायरी,9,शिक्षक दिन,1,शिक्षा,5,शिवपुरी,1,शुभ मुहूर्त,1,शुभ-अशुभ,3,शुभम जगलान,1,श्राद्ध,3,श्राद्ध का खाना,1,श्रीकृष्ण,2,श्रेष्ठता,1,संस्कार,1,संस्मरण,9,सकारात्मक पहल,2,सच बोलने की प्रेरणा,1,सतबीर ढिल्लो,1,सपना,1,सफेद बाल,1,सब्जियों का अचार,1,सब्जियों की कांजी,1,सब्जी,4,समय,1,समाजसेवा,2,समाजिक,1,समाधान,1,समावत चावल,2,सर के बाल,1,सलाद,1,ससुराल,2,सहशिक्षा,1,सांवला या काला रंग,1,साउथ इंडियन डिश,2,साक्षात्कार,3,सागर में ज्वार,1,साफ-सफाई,1,साबुदाना,2,साबुदाना के अप्पे,1,साबुदाना पापड़,2,साबुदाने लड्डू,1,साबूदाना,2,सामाजिक,63,सामाजिक कार्यकर्ता,1,सालगिरह,5,सास,2,साहित्य,78,सिंगल पैरेंट,1,सिंदूर,1,सीख-सुहानी,1,सीनू कुमारी,1,सुंदरता,1,सुई,1,सुखी,1,सुजी,1,सूजी,1,सूजी के लड्डू,1,सेनेटरी नेपकिन,1,सेब,1,सेलिब्रेटी,1,सेवई उपमा,1,सेहत,1,सैंडविच,1,सौंफ,1,सौंफ का शरबत,1,सौंफ प्रीमिक्स,1,सौतेली माता,1,स्कूल,1,स्त्री,2,स्नैक्स,30,स्वतंंत्रता दिन,1,स्वतंत्रता दिन,2,स्वर्ग और नर्क,1,स्वाभिमान,1,स्वास्थ,2,स्वास्थ्य,10,हंस,1,हनुमान जी,2,हरी मटर के पैनकेक,1,हरी मिर्च,3,हरी मिर्च का अचार,1,हलवा,2,हाउसवाइफ,1,हाथी,1,हिंदी उखाणे,1,हिंदी उखाने,1,हिंदी दिवस,1,हिंदी शायरी,22,हैंडल,1,होटल,1,होममेकर,1,होली की शुभकामनाएं,1,
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: धर्मग्रंधों में नारी
धर्मग्रंधों में नारी
हमारे धर्मग्रंथों में 'अर्द्धनारीश्वर' का उल्लेख है। जिसका तात्पर्य आधा पुरुष और आधा नारी होने से है। अर्थात पुरुष और नारी को समान महत्व दिया गया है। फिर न जाने क्या हुआ कि...
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
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