रीति-रिवाज बनाम अंधश्रद्धा

घंटा-घड़ियाल बजाने, तंत्र-मंत्र का पाठ करने और धार्मिक दुकानें खुलवाने में हमारा समाज सैकड़ों वर्षों से आगे रहा है। पर आख़िरकार उससे हमे हासिल क्या हुआ? हमे भी आगे बढ़ना है तो रीति-रिवाज़ों से ज्यादा काम को प्राधान्य देना होगा।

रीति-रिवाज बनाम अंधश्रद्धा

अमिता  इंटरव्यू देने जाने के लिए घर से निकली ही थी की एक बिल्ली और वह भी काली बिल्ली ने रास्ता काट दिया। हो गया अपशकुन! थोड़ी और दूर गई ही थी कि एक सहेली ने टोक दिया, 'अमिता कहां जा रही हो?' और एक अपशकुन! अमिता कुछ जबाब देती इसके पहले ही सहेली को ज़ोरदार छींक आ गई। अमिता एक मिनट के लिए रुकी, शायद सहेली को दूसरी छींक आ जाए क्योंकि सम संख्या में छींक आना शुभ माना जाता है। किंतु हाय री किस्मत! सहेली को दूसरी छींक आई ही नही। अब अमिता का ओल्ड माइंड बोलने लगा कि इतने अपशकुनों के होते उसे इंटरव्यू देने के लिए नही जाना चाहिए। लेकिन समय का मूल्य समझते हुए वह इंटरव्यू देने गई और नौकरी के लिए चुन भी ली गई। अमिता वर्तमान समय की पढ़ी-लिखी युवती होने से वो पुरानी मान्यताओं, रीति-रिवाजों को नजरअंदाज कर पाई।    

रीति-रिवाज़ और नियम दोनों में फर्क है। समाज बिना रीति-रिवाजों के चल सकता है लेकिन बिना नियमों के नही चल सकता। जिन नियमों को हम भावावेश में पकड़े रहते है वे रिवाज़ बन जाते है। जैसे की रास्ते का नियम है कि आप बाएं चलिए। किसी देश में रास्ते का नियम हो सकता है कि आप दाएं चलिए। यह कोई रिवाज नही है। हम अपनी सुविधा के लिए नियम बनाते है। जीवन जीने के लिए नियमों का पालन करना ज़रूरी है लेकिन जब हम इन नियमों को रीति-रिवाज़ बना लेते है और नई पीढ़ी से आशा करते है कि वह बिना किसी तर्क-वितर्क के इन पुराने रीति-रिवाजों को माने तो यह संभव नही है।  
जनरेशन गैप  
बुजुर्गों के साथ, माता-पिता होने के साथ यह अहंकार जुड़ा रहता है कि हम सब जानते है। आज के ये बच्चें राजी नहीं होंगे कि आप सब जानते है। पढ़ी-लिखी युवा पीढ़ी चाहती है कि जो रीति-रिवाज अच्छे है उनका तो पालन किया जाए लेकिन जो गलत है उन्हें बदला जाए। बदलाव संसार का नियम है। जिसे आगे बढ़ना है उसे समय के साथ चलना ही होगा। यह जरूरी नही कि हम बड़ों को नज़रअंदाज़ कर के ही आगे बढ़े। आज भी हम उन्हीं के अनुभवों से बहुत कुछ सीख सकते है। वास्तव में बुजुर्गों का अनुभव और नई सोच का संगम ही एक आदर्श समाज की स्थापना कर सकेगा।  

वैज्ञानिक सोच 
हम जब भी सोचते है तो पहले यह पूछते है कि गीता क्या कहती है? पुराणों में क्या है? समस्या आज की, शास्त्र कल का! उनका  मेल क्या है? गैलिलिओ के सामने सवाल पैदा हुआ कि जमीन चपटी है कि गोल? बाइबल खोल कर देख सकता था। उसमे जीसस ने लिखा है कि जमीन चपटी है। बात खत्म हो जाती। लेकिन उसने खोजा तो पाया कि जमीन गोल है। पुरानी किताबे कहती है कि चांद सूरज से बड़ा है लेकिन चांद सूरज से छोटा निकला! जब तक हिंदुस्तान की प्रतिभा शास्त्र के विपरीत नहीं है, पुराने रीति-रिवाजों से दीमक की तरह चिपकी हुई है तब तक डार्विन, एडिसन, न्यूटन, डॉ. एपिजे अब्दुल कलाम पैदा नही होंगे। हमें पुराने रीति-रिवाजों से मुक्त होना होगा। नई वैज्ञानिक सोच पैदा करनी होगी। असल में हमारे दिल में ईश्वर और दिमाग में विज्ञानं रहना चाहिए। 

समस्या के डर से उत्पन्न धार्मिकता 
इंसान ढेरों समस्याओं से घिरा हुआ है। जब इंसान अपनी समस्याओं से निजात पाने में खुद को असमर्थ महसूस करता है तब वह सोचता है कि 'मनौती मांगने' या 'कबुला करने' में क्या हर्ज है? 'हे भगवान, मेरे बेटे को नौकरी लगवा दे, ये टेंडर मुझे ही मिले, मैं बस ये स्पर्धा जीत लूं, 101 रु. का प्रसाद बाटूंगी, पांच सोमवार करूंगी आदि। आख़िरकार ईश्वर को हम क्या समझते है जो हम ईश्वर को रिश्वत देकर उससे ढेर सारे काम करवाना चाहते है? ईश्वर के सामने अपने किसी भी काम के लिए नारियल फोड़ना रिश्वत का ही एक रूप है। ईश्वर रिश्वत से नहीं,प्यार से, श्रद्धा से अपने भक्तों की सुध लेते है। हम ईश्वर के आगे नारियल फोड़ सकते है लेकिन बिना किसी स्वार्थ के! एक बात मेरी आज तक समझ में नहीं आई कि जब हम कहते है कि हम सब उस परमपिता ईश्वर की संतान है तब हम उससे डरते क्यों है? क्या बच्चों को अपने ही पिता से डरना चाहिए?
सहज कृत्य 
जीवन के सहज कार्य जो पुराने समय के हिसाब से उचित हो सकते थे उन्हीं कार्यों को नई पीढ़ी पागलों की भांति पकड़कर बैठ जाती है। जैसे हमारी बुजुर्ग महिलाएं कहती है की गुंथा हुआ आटा (भीगा हुआ आटा ) रात को बचाकर नहीं रखना चाहिए अपशगुन होता है। अब शगुन अपशगुन का तो मुझे नहीं पता। लेकिन मेरे विचार से पुराने समय में फ्रिज न होने के कारण रात का गुंथा हुआ आटा दूसरे दिन सुबह तक खराब हो जाता था और पहले के लोग ठंडी रोटी खा लेते थे। अत: गुंथा हुआ आटा रात को बचाकर रखने का सवाल ही नहीं होता था। अब फ्रिज होने से आटा खराब होने का डर नही है और वर्तमान समय में कोई भी बासी रोटी खाना नही चाहता। यदि ऐसे हालात में बचा हुआ आटा फ्रिज में रखा जाता है तो क्या हम गलत है?
काम को प्राधान्यता 
घंटा-घड़ियाल बजाने, तंत्र-मंत्र का पाठ करने और धार्मिक दुकानें खुलवाने में हमारा समाज सैकड़ों वर्षों से आगे रहा है। पर आख़िरकार उससे हमे हासिल क्या हुआ? दुनिया में वहीं कौम कायम रह सकती है जिसके पास जीने का सलीका, काम करने का हुनर और साफ मजबूत इरादा हो। पाकिस्तान तो कट्टर मज़हबी रीति-रिवाज़ों वाला देश है, पर क्या वह चर्च और उपर वाले को नकारने वाले रूस से आगे है? ख़ुदा के बन्दों वाली हुक़ूमत वाला तालिबानी शासन क्या अफ़ग़ानियों को अमेरिकी कहर से बचा पाया? हमे भी आगे बढ़ना है तो रीति-रिवाज़ों से ज्यादा काम को प्राधान्य देना होगा। किसी ने ठीक ही कहा है,
"मत समझना ये रीति-रिवाज तुम्हारा पथ रोक लेगी,
तुम चले तो दीप क्या सूरज हजारों चल पड़ेंगे!"
keywords:customs and traditions, Superstition, Blind faith

COMMENTS

BLOGGER: 13
  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (03-11-2014) को "अपनी मूर्खता पर भी होता है फख्र" (चर्चा मंच-1786) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  2. सार्थक एवं प्रेरक प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --

    उत्तर देंहटाएं
  4. True Samay ke anusaar dadalne me samajhdari he

    उत्तर देंहटाएं
  5. यथार्थ चित्रण के लिए धन्यवाद ज्योतिजी।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत ही तर्क पूर्ण प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  7. कट्टरपंथियों के कारण गलत रिवाजों को शह मिलता है क्योकि इनकी रोजो-रोटी इससे चलती है। ऐसे रीती-रिवाजों का अपना मनोविज्ञान भी है इससे पार पाना प्रगतिशील सोच से ही संभव है। सूंदर आलेख ज्योति जी।
    मेरी पोस्ट का लिंक :
    http://rakeshkirachanay.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  8. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  9. सत्य बात है ज्योति जी कुछ नियम समय ,देश और काल के अनुरूप बनते है उस समय उन नियम परंपराओं। की आव्यशकता भी होती है पर वही नियम कायदे सब पर लागू हो आवयशक नहीं परम्पराओ का समय अनुसार बदलाव आवयशक है और जो प्रगर्ति में सहायक हो ।

    उत्तर देंहटाएं

नाम

'रेप प्रूफ पैंटी',1,#मीटू अभियान,1,15 अगस्त,3,26 जनवरी,1,8 मार्च,1,अंकुरित अनाज,1,अंगदान,1,अंगुठी,1,अंग्रेजी,2,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस,3,अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस,1,अंधविश्वास,10,अंधश्रद्धा,8,अंधश्रध्दा,2,अंश,1,अग्निपरीक्षा,1,अग्रवाल,1,अचार,6,अच्छी पत्नी,1,अच्छी पत्नी चाहिए तो...,1,अच्छे काम,1,अजब-गजब,2,अतित,1,अदरक,1,अदरक का चूर्ण,1,अदरक-लहसुन पेस्ट,1,अनमोल वचन,10,अनुदान,1,अनुप जलोटा,1,अन्न,1,अन्य,23,अन्याय,1,अपेक्षा,1,अप्पे,4,अमरुद,1,अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी,1,अमीरी,1,अमेजन,1,अरुणा शानबाग,1,अरुनाचलम मुरुगनांथम,1,अवार्ड,2,असली हीरो,12,अस्पतालों में बच्चों की मौत,1,आंवला,3,आंवला चटनी,1,आंवला लौंजी,1,आइसक्रीम,1,आईसीयू ग्रेंडपा,1,आज के जमाने की अच्छाइयां,1,आजादी,2,आज़ादी,1,आतंकवादी,2,आत्महत्या,2,आत्मा,1,आदित्य तिवारी,1,आम,6,आम का अचार,1,आम का पना,1,आम का मुरब्बा,1,आम की बर्फी,1,आम पापड़,1,आरक्षण,1,आलू,1,आलू पोहा अप्पे,1,इंसान,2,इंस्टंट डोसा,1,इंस्टंट स्नैक्स,1,इंस्टट ढोकला,1,इंस्टेंट कुल्फी,1,इडली,3,इन्डियन टाइम,1,इमली,1,इरोम शर्मिला,1,ईद,1,ईश्वर,6,ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना,1,उटी,1,उपमा,1,उपवास,1,उपवास की इडली,1,उपहार,2,उमा शर्मा,1,ऋषि पंचमी,1,एक सवाल,1,ऐनी दिव्या,1,ऐश ट्रे,1,ऑनलाइन,1,और इज्जत बच गई,1,कंघा,1,कच्चे आम,1,कच्चे आम का चटपटा पापड़,1,कटलेट्स,1,कद्दु,1,कद्दु के गुलगुले,1,कन्यादान,3,करवा चौथ शायरी,1,करवा-चौथ,3,कल्याणी श्रीवास्तव,1,कहानी,14,कांजी,1,कानून,1,कामवाली बाई,4,कालीन,1,किचन टिप्स,13,किटी पार्टी,1,किराए पर बीवियां,1,कुंडली मिलान,1,कुरकुरे,1,कुल्फी,1,कुल्फी प्रीमिक्स,1,कूकर,1,केईएम् अस्पताल,1,कॉर्न,4,कॉर्न इडली,1,कौए,1,क्षमा,2,खजूर,1,खत,3,खबर,3,खरबूजा,1,खांडवी,1,खाद्य पदार्थ,1,खाना,1,खारक,1,खारी गरम,1,खुले में शौच,1,खुशी,2,खेल,1,गणतंत्र दिवस,1,गणेश चतुर्थी पर शायरी,1,गणेश चतुर्थी प्रसाद रेसिपी,1,गरम मसाला,1,गर्दन दर्द,1,गर्भाशय,1,गलत व्यवहार,1,गलती,2,गाजर,4,गाजर अप्पे,1,गाजर के लड्डू,1,गाजर-मूली के दही बडे,1,गाय,1,गुजरात,1,गुड टच और बैड टच,2,गुलगुले,1,गुस्सा,1,गृहस्वामिनी,1,गोरखपुर,1,गोल्फ,1,गौरी पराशर,1,घंटी,1,घिया,1,घी,1,घी की नदी,1,चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति,1,चकली,1,चटनी,7,चाँद पर जमीन,1,चाय,1,चाय मसाला,1,चावल,2,चावल के पापड़,1,चाशनी,1,चीज,1,चीला,2,चूर्ण,4,छींक,1,छोटी बाते,1,छोटे लेकिन काम के टिप्स,1,छोटे-छोटे काम के टिप्स,2,जज्बा,1,जनसंख्या,1,जन्मदिन,3,जन्मदिन की शुभकामनाएं,2,जन्माष्टमी,2,जमाना,1,जलेबी,1,जाट आंदोलन,1,जात-पात,1,जाति,1,जाम,1,जिंदगी,1,जीएसटी,1,जीरो ऑइल रेसिपी,5,जोक्स,5,जोयिता मंडल,1,ज्वार की रोटी,1,ज्वेलरी,1,झारखंड,1,झाले-वारणे,2,झूठ,1,टिप्स कॉर्नर,25,टी.व्ही. और सिनेमा,1,ठंडे पेय,2,ठेचा,1,डॉक्टर,2,डॉटर्स डे,2,ढाबा स्टाइल सब्जी,1,ढोकले,1,तरबूज,1,तलाक,1,ताजे नारियल की बर्फी,1,तिल,2,तिल की कुरकुरी चिक्की,1,तिल के लड्डू,1,तेलंगाना,1,तोहफ़ा,1,थंडा पानी,1,दक्षिणा,1,दवा,1,दही,5,दही सैंडविच,1,दहेज,3,दाग-धब्बे,1,दान,1,दासी,1,दिपावली बधाई संदेश,3,दिशा,1,दीपावली शुभकामना संदेश,1,दीवाली रेसिपी,1,दुध पावडर,1,दुर्गा माता,1,दुल्हा,1,दुश्मन,1,दूध,2,देशभक्ति,3,देशभक्ति शायरी,2,देहदान,1,दोस्त,2,धनिया,1,धर्म,2,धर्मग्रंध,1,धार्मिक,26,नदी में पैसे,1,नन्ही परी,1,नमक पारे,1,नमकीन,1,नवरात्र,1,नवरात्र स्पेशल,2,नवरात्रि,1,नवरात्री रेसिपी,5,नववर्ष,2,नववर्ष की शुभकामनाएं,2,नाइंसाफी,1,नानी,1,नारियल बर्फ़ी,1,नारी,44,नारी अत्याचार,10,नारी शिक्षा,1,नाश्ता,1,निंबु का अचार,1,निचली जाती,1,निर्णयक्षमता,1,निर्भया,2,निवाला,1,नींबू,1,नेत्रदान,1,नेपाल त्रासदी,1,नेल आर्ट,1,पकोडे,2,पक्षी,1,पढ़ा-लिख़ा कौन?,1,पढ़ाई,1,पति,1,पति का अहं,1,पति-पत्नी,1,पत्ता गोभी,1,पत्ता गोभी की मुठिया,1,पत्नी,1,पत्र,1,पपीता,1,परंपरा,2,परवरिश,4,पराठे,1,परीक्षा,1,परेशानी,1,पल्ली उत्सव,1,पवित्र,1,पवित्रता,2,पसंदीदा शिक्षक को पत्र,1,पापड़,3,पालक,1,पालक के नमक पारे,1,पालक बडी,1,पाश्चात्य संस्कृति,1,पिता,1,पुण्य,1,पुरानी मान्यताएं,1,पुलवामा हमला,1,पूडी,1,पेढे,1,पैड्मैन,1,पैनकेक,1,पैरेंटीग,1,पोर्न मूवी,1,पोषण,1,पोहा,1,पोहे के कुरकुरे,1,प्याज,3,प्याज की चटनी,1,प्यार,1,प्यासा कौआ,1,प्रत्यूषा,1,प्रद्युम्न,1,प्रसन्न,1,प्राणियों से सीख,1,प्री वेडिंग फोटोशूट,1,फर्रुखाबाद,1,फलाहार,1,फल्लिदाने,1,फादर्स डे,1,फूल गोभी के परांठे,1,फेसबुक,2,फैशन,1,फ्रिज,1,फ्रेंडशीप डे,1,फ्रेंडशीप डे शायरी,1,बकरीद,1,बची हुई सामग्री का उपयोग,1,बच्चे,5,बच्चे की ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर गैंगरेप,1,बेटा,1,बेटा पढाओ,1,बेटी,6,बेटी बचाओ अभियान,2,बेसन,2,बैंगन,1,ब्रेकअप,1,ब्रेड,4,ब्रेड की रसमलाई,1,ब्रेड पकोडा,1,ब्रेड पिस्ता पेढे,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,5,ब्ल्यू व्हेल गेम,1,भक्ति,1,भगर,3,भगर की इडली,1,भगर के उत्तपम,1,भगर के कटलेट,1,भगवान,3,भजिए,1,भरवां मिर्च,1,भाई दूज शायरी,1,भाकरवड़ी,1,भाभी,1,भारत,1,भारतीय मसाले,1,भुट्टे के पकोड़े,1,भूकंप,1,भोजन,1,भ्रुण हत्या,1,मंदसौर गैंग रेप,1,मंदिर,2,मंदिरों में ड्रेस कोड़,1,मंदिरों में दक्षिणा,1,मकई,4,मकई उपमा,1,मकई चीला,1,मकई पकोडे,1,मकर संक्रांति,2,मकर संक्रांति की शुभकामनाएं,1,मकर संक्राति,1,मटर,3,मटर के अप्पे,1,मदर्स डे,3,मम्मी,1,मलाई,2,मलाई फ्रूट सलाद,1,महानता,1,महाराजा अग्रसेन जी,1,महिला आजादी,1,महिला आरक्षण,1,महिला सशक्तिकरण,4,महिला सुरक्षा,1,महिलाओं का पहनावा,1,माँ,3,माता यशोदा,1,मातृभाषा,1,मायका,2,मारवाड़ी,1,मार्केट जैसे साबूदाना पापड़,1,माला,1,मावा कुल्फी,1,मासिक धर्म,2,माहवारी,3,मिठाई,17,मित्र,2,मिलावट,1,मिलावट पहचानने के घरेलू तरीके,1,मुक्ति,1,मुबारकपुर कला,1,मुस्लिम मंच,1,मुहूर्त,1,मूंग की सूखी दाल का हलवा,1,मूंगफली,1,मूंगफली की सूखी चटनी,1,मूली,3,मूली का अचार,1,मूली के पत्तों के कुरकुरे कटलेट्स,1,मेंस्ट्रुअल कप,1,मेंहदी,6,मेडिसिन बाबा,1,मेथी,1,मेथी दाना चुर्ण,1,मेथी मटर मलाई,1,मेनु,1,मेरा मंत्र,3,मेरी बात,15,मैंगो श्रीखंड,1,मैनर्स,1,रंग,1,रंग पंचमी,1,रक्तदान,1,रक्तदान के फायदे,1,रक्षाबंधन,1,रक्षाबंधन शायरी,1,रजस्वला नारी,3,रवा इडली,1,रसोई,90,रांगोली,3,राखी,1,राजभाषा,1,राजस्थानी समाज,2,राम रहीम,1,राशी-भविष्य,1,राष्ट्रगान,1,राष्ट्रगीत,1,राष्ट्रभाषा,1,रिती-रिवाज,1,रीतिरिवाज,1,रुपया-पैसा,1,रोटी,2,रोस्टेड मूंगफली,1,लघुकथा,9,लड्डू,2,लहसुन,1,लाइटर,1,लाल मिर्च की सूखी चटनी,1,लीव इन रिलेशनशिप,1,लेसुए,1,लॉटरी,1,लोकल ट्रेन,1,लोग क्या कहेंगे?,1,लौकी,2,लौकी का हलवा,1,लौकी की बड़ी,1,वक्त,1,वटसावित्री व्रत,1,वर,1,वर्जिनिटी टेस्ट,1,वर्तमान,1,वारी के हनुमान,1,विधवा,1,विधवा ने किया कन्यादान,1,विधवा विवाह,1,विशाखापट्टनम रेप कांड,1,वृंदावन,1,वृद्धावस्था,1,वेजिटेबल डोसा,1,वेजिटेबल पैनकेक,1,वैलेंटाइन डे,1,व्यंग,11,व्यायाम,1,व्रत,2,व्रत रेसिपी,15,व्रत स्पेशल,2,शकरकंद,1,शकरकंद की जलेबी,1,शकुन-अपशकुन,1,शक्करपारे,1,शनि देव,1,शब्द,1,शरबत,1,शर्बत,1,शर्म,2,शादी,5,शादी की खरेदी,1,शादी की फ़िजूलखर्ची का बिल,1,शादी के सालगिरह की शुभकामनाएं,1,शादी-ब्याह,3,शायरी,9,शिक्षक दिन,1,शिक्षा,4,शिवपुरी,1,शुभ मुहूर्त,1,शुभ-अशुभ,3,शुभम जगलान,1,श्राद्ध,3,श्राद्ध का खाना,1,श्रीकृष्ण,2,श्रेष्ठता,1,संस्कार,1,संस्मरण,9,सकारात्मक पहल,2,सच बोलने की प्रेरणा,1,सतबीर ढिल्लो,1,सपना,1,सफेद बाल,1,सब्जियों का अचार,1,सब्जियों की कांजी,1,सब्जी,2,समय,1,समाजसेवा,2,समाजिक,1,समाधान,1,समावत चावल,2,सर के बाल,1,सलाद,1,ससुराल,2,सहशिक्षा,1,सांवला या काला रंग,1,साउथ इंडियन डिश,2,साक्षात्कार,3,सागर में ज्वार,1,साफ-सफाई,1,साबुदाना,2,साबुदाना के अप्पे,1,साबुदाना पापड़,2,साबुदाने लड्डू,1,साबूदाना,2,सामाजिक,58,सामाजिक कार्यकर्ता,1,सालगिरह,5,सास,2,साहित्य,77,सिंगल पैरेंट,1,सिंदूर,1,सीख-सुहानी,1,सीनू कुमारी,1,सुखी,1,सुजी,1,सूजी,1,सूजी के लड्डू,1,सेनेटरी नेपकिन,1,सेब,1,सेलिब्रेटी,1,सेवई उपमा,1,सेहत,1,सैंडविच,1,सौंफ,1,सौंफ का शरबत,1,सौंफ प्रीमिक्स,1,सौतेली माता,1,स्कूल,1,स्त्री,2,स्नैक्स,30,स्वतंंत्रता दिन,1,स्वतंत्रता दिन,2,स्वर्ग और नर्क,1,स्वाभिमान,1,स्वास्थ,2,स्वास्थ्य,9,हंस,1,हनुमान जी,2,हरी मटर के पैनकेक,1,हरी मिर्च,3,हरी मिर्च का अचार,1,हलवा,2,हाउसवाइफ,1,हाथी,1,हिंदी उखाणे,1,हिंदी उखाने,1,हिंदी दिवस,1,हिंदी शायरी,22,हैंडल,1,होटल,1,होममेकर,1,होली की शुभकामनाएं,1,
ltr
item
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: रीति-रिवाज बनाम अंधश्रद्धा
रीति-रिवाज बनाम अंधश्रद्धा
घंटा-घड़ियाल बजाने, तंत्र-मंत्र का पाठ करने और धार्मिक दुकानें खुलवाने में हमारा समाज सैकड़ों वर्षों से आगे रहा है। पर आख़िरकार उससे हमे हासिल क्या हुआ? हमे भी आगे बढ़ना है तो रीति-रिवाज़ों से ज्यादा काम को प्राधान्य देना होगा।
https://1.bp.blogspot.com/-hV3ebFrcDtQ/VKJ-56lM7yI/AAAAAAAAAcs/rjzfPQsLjM8/s400/cat.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-hV3ebFrcDtQ/VKJ-56lM7yI/AAAAAAAAAcs/rjzfPQsLjM8/s72-c/cat.jpg
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
https://www.jyotidehliwal.com/2014/11/blog-post.html
https://www.jyotidehliwal.com/
https://www.jyotidehliwal.com/
https://www.jyotidehliwal.com/2014/11/blog-post.html
true
7544976612941800155
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy