बेटी बचाओ अभियान

कितनी विचित्र बात है कि कन्या भ्रूण हत्या कर माता-पिता अत्यंत निर्दयता से अपने ही अंश की जान ले लेते है। जो ब्रम्ह-हत्या से भी बड़ा पाप है। जिसका कोई प्रायश्चित नहीं है। जीवन लेने का हक़ तो केवल उसी को है जो जीवन देता है। फिर हम किस अधिकार से जन्म लेने से पहले ही कन्याओं को मार देते है?


Beti bachao abhiyan
"दोनों आंखें एक समान, बेटों जैसे बेटी महान !'
"करनी है जीवन की रक्षा, कन्याओं की करो सुरक्षा !"
"बेटी को मरवाओगे, तो बहु कहां से लोगे?"

ये है बेटी बचाओ अभियान के चुनिंदा घोषवाक्य। कितने दुःख की बात है कि बेटी को देवी मानकर पूजने वाले देश में बेटी बचाओ अभियान चलाना पड़ रहा है। आजादी के बाद देश में करीब 5 करोड़ कन्या भ्रूण हत्याएं हो चुकी है। 2011 की जनगणना के अनुसार प्रति एक हजार लड़कों पर सिर्फ 914 लड़कियां थी। देश के सबसे समृद्ध राज्यों पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात में यह लिंगानुपात सबसे कम है। कन्या भ्रूण हत्या सिर्फ गरीब और अशिक्षित लोग ही करते है, ऐसा नहीं है। अमीर और पढ़े-लिखे लोग भी इस अपराध में बराबरी के भागीदार है। कितनी विचित्र बात है कि कन्या भ्रूण हत्या कर माता-पिता अत्यंत निर्दयता से अपने ही अंश की जान ले लेते है। जो ब्रम्ह-हत्या से भी बड़ा पाप है। जिसका कोई प्रायश्चित नहीं है। जीवन लेने का हक़ तो केवल उसी को है जो जीवन देता है। फिर हम किस अधिकार से जन्म लेने से पहले ही कन्याओं को मार देते है? वो भी बिना किसी शर्म के ? बिना किसी अपराधबोध के?

बेटी बचाओ अभियान में सबसे बड़ी बाधा हमारी धार्मिक मान्यताएं है। कन्या भ्रूण हत्या का अहम कारण है, एक डर कि बेटा ही नहीं हुआ तो वंश कैसे चलेगा? हमारा नाम कौन रोशन करेगा? क्या आपको लालबहादुर शास्त्री, भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद इन लोगों के पिता का नाम याद है ? नहीं न? फिर हम किस वंश की बात करते है? हम यह बात क्यों नहीं समझते कि हमारा नाम हमारे बच्चें रोशन नहीं करेंगे ! हममें खुद में इतना दम होना चाहिए कि हम खुद अपना नाम रोशन कर सके ! यदि बच्चें अच्छे निकले तो वे खुद का नाम रोशन करेंगे, हमारा नहीं ! सचिन ने क्रिकेट में, लता मंगेशकर ने गाने में खुद का नाम रोशन किया। ( क्योंकि पिता का नाम तो एक प्रतिशत भारतीयों को भी नहीं पता.) वैसे भी आजकल पिता का नाम लिखने का फैशन ही नहीं है।  सिर्फ सरकारी दस्तावेजों में ही पिता का नाम लिखा जाता है। 

कन्या भ्रूण हत्या का दूसरा कारण है कि यदि बेटी हुई तो हमारे बुढ़ापे का सहारा कौन बनेगा? जरा सोचिए, इस बात की क्या ग्यारंटी है कि बेटा आपके पास ही रहेगा? बहुत संभावना है कि यदि बेटा लायक निकला तो किसी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने हेतु शहर चला जाएगा और नालायक निकला तो---! क्या सभी बेटे अपने माता-पिता को बुढ़ापे में सहारा देते है? यदि ऐसा है, तो फिर वृध्दाश्रमों की संख्या दिन दूनी रात चौगुनी गति से क्यों बढ़ रही है?

कन्या भ्रूण हत्या का तीसरा कारण है, मुखाग्नि कौन देगा? आज हमारी धार्मिक मान्यता ऐसी है कि जिस बेटे ने जीते जी एक ग्लास पानी के लिए न पूछा हो, लेकिन मरने के बाद मुखाग्नि वही नालायक बेटा देगा! क्या बेटियों के अग्नि देने से हमारा शरीर जलेगा नहीं?

चौथा कारण है दहेज़। यदि बेटी को शादी में दहेज़ देते वक्त हम पर पहाड़ टूटता है तो हम बेटे की शादी में दहेज़ क्यों लेते है? न दहेज़ लीजिए, न दहेज़ दीजिए! हिसाब बराबर!    ( क्रमशः)

आगे का पढने के लिए देखिए ''बेटी बचाओं अभियान - भाग 2''
(मूलत: प्रकाशित - 'अग्रचिंतन' नागपुर, 2013...)
नोट - कन्या जन्म पर मेरी ब्लॉग पोस्ट "दूधो नहाओ पुतो फलों" भी शायद आपको पसंद आएँगी!

keywords:Beti bachao abhiyan, save girl child

COMMENTS

BLOGGER: 22
  1. ब्लॉग बुलेटिन आज की बुलेटिन, थम गया हुल्लड़ का हुल्लड़ - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. ब्लॉग-बुलेटिन मे मेरी पोस्ट शामिल
    करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

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  3. बहुत अच्छा लगा आपकी पोस्ट पढ़कर. चूँकि हम विगत १४-१५ वर्षों से कन्या भ्रूण हत्या निवारण कार्यक्रम (बिटोली www.bitoly.org) संचालित कर रहे हैं. अब बेटियों को बचाने की नहीं, उन्हें प्यार करने की जरूरत है.
    बचाई गई बेटियों की इज्जत-जान की रक्षा नहीं हो पा रही है, उनका शोषण हो रहा है, भेदभाव हो रहा है. इस कारण बेटी बचाओ से ज्यादा बेटी को प्यार पर जोर देने की आवश्यकता है.
    सादर धन्यवाद

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  4. इस सम्बंद्ध में प्रधानमंत्री Narendra Modi जी PMO India और भारत सरकार को भी कुछ सुझावों पर ध्यान देने की जरूरत है मध्यमवर्गीय और गरीब लड़कियों के लिए शिक्षा निशुल्क कर देनी चाहिए। क्योंकि महंगी हो चुकी शिक्षा भी कन्या भ्रूण हत्या का एक कारण बन चुकी है 1975 से पहले शिक्षा सस्ती थी। सरकारी स्कूलों में से डॉक्टर, इंजनियर,वकील और वैज्ञानिक तक निकल आते थे लेकिन आज डॉक्टर, इंजनियर तो दूर की बात है ज्यादातर क्लर्क तक मॉडल स्कूलों और माडर्न कालेजों में से आ रहे है प्राइवेट स्कूलों और कालेजों पर कोई अंकुश न होने के कारण इनके संचालकों ने शिक्षा को बेहद महंगी बना दिया है. सरकार को कुछ ऐसे नियम बनाने चाहिए कि किसी भी तरह हर लड़की को सस्ती या निशुल्क शिक्षा की प्राप्ति होने लगे कोई जमाना था कि लड़की अनपढ़ होने पर भी सुंदरता के बल पर अमीर घर की बहु बन जाती थी या दहेज़ के बल पर अनपढ़ अमीर लड़की भी अपने से योग्य वर प्राप्त कर लेती थी ,लेकिन आज स्थिति अलग है लड़की अमीर हो या गरीब उसके लिए पढाई लिखाई भी जरूरी हो चुकी है पढाई लिखाई पर लाखों रूपए खर्च करने पर भी लड़की पराये घर की अमानत होती है ,साथ ही दहेज़ का खर्चा अलग । अगर प्रधानमंत्री Narendra Modi जी और भारत सरकार लड़कियों की पढाई लिखाई पर होने वाले खर्च को नाममात्र बनादें तो मायके वालों पर बोझ कम होगा ,लोग कन्या भ्रूण हत्या की और काम प्रेरित होंगे। इसके अलावा बचपन से ही लड़कियों को जुडो कराटे आदि सिखाने के लिए सरकार को योजना बनानी चाहिए। इसके लिए स्कूलों में प्रबन्द्ध किये जाने चाहिए। ताकि आपात स्थिति में लड़कियां अपनी रक्षा आप कर सकें साथ ही बीमार होने पर लड़कियों के मुफ्त इलाज़ का भी प्रबन्द्ध भी सरकारी तौर पर होना चाहिए

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  5. सम्भावना है कि आने वाले समय में कन्या भ्रूण हत्या के कारण लड़कियों की तादाद घटने से महिलाये परुषों से ऊपर उठ कर वूमेन ऑन टॉप का तमगा हासिल कर लेंगी। पुरुष महिलाओं के पैर की जूती बन जायेंगे क्योंकि लड़कियां या औरतें काम होंगी तो समाज को उनकी कदर मालूम होगी। भविष्य में जिस घर में बहु या बेटी होगी वो घर किस्मतवाला होगा क्योंकि बेटियां कम होगी तो बहुएं भी कम होगी। आज कल शादी के लिए लड़के लड़कियों को पसंद करते हैं भविष्य में लड़कियां लड़कों को पसंद करेंगी। एक सम्भावना यह भी है कि लड़कियां ससुराल वालों से दहेज़ मांगेगी, सास ससुर को दरबान बनाके रखेंगी और पति को हुकुम का इक्का स्थिति चाहे कुछ भी हो कन्या भ्रूण हत्या के नतीजे बुरे ही निकलेंगे इसलिए अब तो कुछ सोचो

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  6. टिप्पणी के लिए धन्यवाद, दीपक जी। वास्तव में इस दिशा में सरकार और जनता दोनों को ही मिलकर काम करना होगा।

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  7. ज्योति जी उत्तर के लिए धन्यवाद आप मेरी भेजी हुई रचनाओं को भी सम्पादित करके ब्लॉग में शामिल करें

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  10. बहुत सही आलेख
    मैं इन बातों को मानता हूँ ।
    एक पुत्री का गर्वित पिता हूँ

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  11. बहुत सही आलेख
    मैं इन बातों को मानता हूँ ।
    एक पुत्री का गर्वित पिता हूँ

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  13. बहुत खूब ज्योति जी !
    बहुत ही उम्दा लेख लिखा है आपने....
    बेटियां बेटों से कम नहीं बेटियों को जीने का अधिकार दीजिए शिक्षा का अधिकार दें ....फिर ऐसा कुछनहीं जो बेटी न क सके.....
    लाजवाब प्रस्तुति....

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  15. बहुत सुंदर लेख लिखा बेटियां बोझ नहीं हमारा गौरव है

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  16. भूर्णहत्या पर मेरा सोया दर्द जाग उठा समझ मे नही आता मेरी पुत्रवधु मे साढ़े चार महिने का अपना गर्भ क्यु गिराया जब कि वे अपने पीहर मे रह रही थी ।। हमे बिना बताये ये सब सुप्रीम कोर्ट के कानून का का परिणाम है ।। मै निंदा करता हूँ इस कानून की जो ये कहता है कि सास ससुर को ये बताना जरूरी नही की स्त्री अपना गर्भ क्यू गिरा रही है ।। अगर आप और जितने भी पाठक ये ब्लॉग पढ रहे है वे सब सुप्रीम कोर्ट तक मेरी पीड़ा पहुचाये ।।

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    1. भयंकर भैया,आपका दर्द मैं समझ सकती हूं। भ्रूण हत्या किसी भी मायने में सही नहीं हैं।आपकी पुत्र वधू ने ऐसा क्यों किया ये तो वो ही जाने लेकिन यह गलत हैं।

      हटाएं
    2. आभार आदरणिया अनुजा आपका कि आपने मेरी पीड़ा को समझा ।। और मै आपसे नौ वर्ष बड़ा हूँ फिर भी आपको "आदरणिया अनुजा आप" इतना सम्मान तो दूंगा ही क्यु कि आपको इतने समय से "आदरणिया" सम्बोधित करता आया हुँ तो अब नही छूट सकता हाँ इसमे "अनुजा" जरूर जुड़ गया है आपकी उम्र बताने के बाद से ।।
      सादर वन्दे आपका शुभेच्छु भ्राता
      कवि भयंकर

      हटाएं
  17. बेटी हो या बेटा दोनों ही प्यारी संतान है फिर भी लोग न जाने क्यों भेद बनाये हुए हैं | जरूरत है इन सामाजिक कुप्रथाओं के विरुद्ध आवाज़ उठाने की ... इस दिशा में साथक कदम है ये आलेख

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नाम

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ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर गैंगरेप,1,बेटा,1,बेटा पढाओ,1,बेटी,7,बेटी बचाओ अभियान,2,बेसन,2,बैंगन,1,बोझ,1,ब्रेकअप,1,ब्रेड,4,ब्रेड की रसमलाई,1,ब्रेड पकोडा,1,ब्रेड पिस्ता पेढे,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,5,ब्ल्यू व्हेल गेम,1,भक्ति,1,भगर,3,भगर की इडली,1,भगर के उत्तपम,1,भगर के कटलेट,1,भगवान,3,भजिए,1,भरवां मिर्च,1,भाई दूज शायरी,1,भाकरवड़ी,1,भाभी,1,भारत,1,भारतीय मसाले,1,भुट्टे के पकोड़े,1,भूकंप,1,भोजन,1,भ्रुण हत्या,1,मंदसौर गैंग रेप,1,मंदिर,2,मंदिरों में ड्रेस कोड़,1,मंदिरों में दक्षिणा,1,मकई,4,मकई उपमा,1,मकई चीला,1,मकई पकोडे,1,मकर संक्रांति,2,मकर संक्रांति की शुभकामनाएं,1,मकर संक्राति,1,मटर,3,मटर के अप्पे,1,मदर्स डे,3,मम्मी,1,मलाई,2,मलाई फ्रूट सलाद,1,महानता,1,महाराजा अग्रसेन जी,1,महिला आजादी,1,महिला आरक्षण,1,महिला सशक्तिकरण,4,महिला सुरक्षा,1,महिलाओं का पहनावा,1,माँ,3,माता 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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: बेटी बचाओ अभियान
बेटी बचाओ अभियान
कितनी विचित्र बात है कि कन्या भ्रूण हत्या कर माता-पिता अत्यंत निर्दयता से अपने ही अंश की जान ले लेते है। जो ब्रम्ह-हत्या से भी बड़ा पाप है। जिसका कोई प्रायश्चित नहीं है। जीवन लेने का हक़ तो केवल उसी को है जो जीवन देता है। फिर हम किस अधिकार से जन्म लेने से पहले ही कन्याओं को मार देते है?
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
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