क्या बच्चों पर पारिवारिक संस्कारों का असर होता है?

एक ही परिवार में जन्में, एक ही वातावरण में पले-बढ़े दो सगे भाइयों के स्वभाव में जमीन-आसमान का फ़र्क़ क्यों होता है? रावण और विभीषण एक ही परिवार में पैदा हुए, एकसाथ पले-बढ़े फिर एक राक्षसी प्रवृति का तो दूसरा धार्मिक प्रवृति का कैसे?

क्या बच्चों पर पारिवारिक संस्कारों का असर होता है?

'बच्चें जैसा देखेंगे वैसा सीखेंगे' 
'देखेगी बाप घर तो करेगी आप घर ' 
ऐसे वाक्य हम कई बार सुनते है। सही भी है। बच्चा जो देखेगा, वही सीखेगा। यह पारिवारिक संस्कारों का ही नतीजा है कि सामान्यत: डॉक्टर का बेटा डॉक्टर, राजनीतिज्ञ का बेटा राजनीतिज्ञ, किसान का बेटा किसान बनता है। हम अक्सर कहते है कि अमुक कला तो उसके खून में है। लेकिन यदि अच्छे पारिवारिक संस्कारों से बच्चा अच्छा ही बनेगा इसकी ग्यारंटी होती तो आज तक जितने भी महापुरुष हुए उन सबके बच्चे भी महापुरुष ही बनते। महापुरुष नहीं तो कम से कम कुछ तो महान काम करते ताकि आज की पीढ़ी उनको याद रखती! क्या आपको महात्मा गांधी, लालबहादुर शास्त्री, डॉ.आंबेडकर इनके बच्चों के नाम पता है? क्या आपने कभी गौर किया कि एक ही परिवार में जन्में, एक ही वातावरण में पले-बढ़े दो सगे भाइयों के स्वभाव में जमीन-आसमान का फ़र्क़ क्यों होता है? रावण और विभीषण एक ही परिवार में पैदा हुए, एक साथ पले-बढ़े फिर एक राक्षसी प्रवृति का तो दूसरा धार्मिक प्रवृति का कैसे? 
यह स्पष्ट करने के लिए मैं एक परिवार की मिसाल देना चाहूंगी। उस परिवार में दो भाई थे। एक भाई अव्वल दर्जे का नशेबाज था, अपनी पत्नी और बच्चों को मारता पीटता था, जो कमाता वो नशे में उडा देता था। उसी का दूसरा भाई बच्चों पर जान छिड़कता, पत्नी को बड़े नाजो से रखता, उसके घर में किसी प्रकार की कमी नहीं थी, समाज में खूब मान-सम्मान था। आखिर एक माँ की कोख से जन्म लेने वाली उन संतानो में इतना अंतर कैसे? शराबी भाई के मुताबिक, ''अगर मैं अपने बच्चों को मारता-पीटता हूं तो इसमे नई बात कौनसी है? मेरा बाप भी ऐसा ही करता था। वह भी मेरी माँ को जलील करता, हम बच्चों को खूब मारता-पीटता था, सारे पैसे शराब में फूंक डालता। मैं जो कुछ भी हूं, मेरे बाप के कारण हूं। मैंने बचपन से ऐसा ही वातावरण देखा है।'' 
दूसरे भाई के मुताबिक, ''बचपन में मैं देखा करता था कि मेरे पिता अव्वल दर्जे के नशेबाज थे। वे नशे में मेरी माँ को, हम बच्चों को बड़ी बेरहमी से मारते-पीटते थे। उसी वक्त मैंने संकल्प ले लिया कि मैं कभी भी अपनी पत्नी पर हाथ नहीं उठाऊंगा, मैं अपने बच्चों को नहीं सताऊंगा। मैं समाज में इज्जत की जिंदगी जिऊंगा। मेरे जीवन में जो कुछ भी अच्छाइयां है, वे इसी संकल्प की बदौलत है।'' 
आप को क्या लग रहा है? मुझे ऐसा लगता है कि पारिवारिक संस्कारों का बच्चों पर असर होता है, लेकिन कुछ हद तक! बच्चें अपने घर के वातावरण से क्या शिक्षा ग्रहण करते है यह बच्चों की खुद की समझ और दृष्टी पर निर्भर है। कहावत है न, 'हम घोड़े को तालाब तक ले जा सकते है लेकिन जबरदस्ती पानी नहीं पिला सकते!' 

सुचना- मेरा कहने का कतई ये मतलब नहीं है कि हमें अपने बच्चों को अच्छे संस्कार नहीं देने चाहिए। हमें अपनी ओर से पूरी कोशिश करनी चाहिए। लेकिन अंतिम फैसला बच्चों का खुद का ही होता है।

Keywords: sanskar, Effect on child, upbringing, education,  children's 

COMMENTS

BLOGGER: 18
  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज रविवार’ २७ जुलाई २०१४ की बुलेटिन -- कहाँ खो गया सुकून– ब्लॉग बुलेटिन -- में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार!

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  2. सेंगर जी,ब्लॉग बुलेटिन मे मेरी
    पोस्ट शामिल करने के लिए
    बहुत-बहुत धन्यवाद.

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  3. संस्कारों का असर निश्चित रूप से होता है | पर बच्चे बाहर क्या रहे हैं इसकी जानकारी रखना और मार्गदर्शन देना भी ज़रूरी है, आपने विचारणीय बात कही

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  4. धन्यवाद मोनिका जी !

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  5. हम घोड़े को तालाब तक ले जा सकते है लेकिन जबरदस्ती पानी नहीं पिला सकते!'सही कहा आपने

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  6. इंसान बस संस्कार दे सकता है और देने भी चाहियें ... पर आज बच्चे इतना ज्यादा एक्सपोज़ हैं की अपनी समझ से काम करना चाहते हैं ... इसमें कोई बुराई भी नहीं है ...

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  7. सही कहा आपने, क्‍योंकि बच्‍चे उपदेश से ज्‍यादा अपने माहौल से सीखते हैं।

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  8. इस सम्बन्ध मे एक और कहावत प्रचलित है जो पूर्णतया सत्य है, माता पिता जन्म मे सहयोगी है कर्म मे नहीं, इन्सान का जीवन उसके अपने विचारों और कर्मों की श्रृंखला है।

    अतः हर मनुष्य अपने भाग्य का विधाता स्वयं है हम सभी को जीवन के सभी अच्छे और बुरे अनुभव एक जैसे मिलते है लेकिन उनका हम क्या प्रभाव अपने मन और कर्म पर पड़ने देते है यह पूरी तरह हमारा निर्णय और कर्म होता है।

    इसलिए एक ही बात के दो विपरीत प्रभाव एक ही वातावरण मे पलने वाले लोगो पर पड़ सकता है, किसने किस बात से क्या ग्रहण किया और किस बात को अपने जीवन मे शामिल करना चाहा और किससे दूर रहने का निश्चय किया।

    यह ही हमारे जीवन और हमारे कर्मों और उससे मिलने वाले परिणामो की दिशा और दशा तय करता है, धन्यवाद्, बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न और समुचित जवाब आपने दिया है।

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  9. माँ बाप बच्चों को सदैव अच्छे संस्कार अच्छा माहौल और उचित मार्गदर्शन देते हैं परन्तु बच्चे बड़े होकर उन संस्कारों को कितना निभाते हैं यह कोई नहीं जान सकता आपने बहुत अच्छा लेख लिखा ज्योती जी

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  10. ज्ञानवर्धक लेख ज्योति जी ।

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  11. Such a great line we are Online publisher India invite all author to publish book with us

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  12. आपने बिल्कुल सही कहा, माता पिता अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने की पूरी कोशिश करते हैं, परंतु बच्चे घर के अतिरिक्त, बाहर के वातावरण में भी रहते हैं और उनके पिछले कर्म पर ही निर्भर करता है कि बच्चे माता पिता के दिये हुए संस्कारों को कितना ग्रहण कर पाते हैं

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  13. आपकी लिखी रचना "साप्ताहिक मुखरित मौन में" शनिवार 25 अगस्त 2018 को साझा की गई है......... https://mannkepaankhi.blogspot.com/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  14. विचारणीय लेख है दी।
    प्रत्येक माता-पिता यही चाहते हैं कि उनके बच्चे गुणों में श्रेष्ठ हों और इसके लिए सदा प्रयत्नशील भी होते है..इसके बावजूद बच्चों में अगर गुणों का अभाव हो तो इसका अर्थ उसपर बाह्य वातारवरण का प्रभाव ही माना जायेगा।

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  15. बहुत अच्छा लेख लिखा ज्योती जी

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  16. विचारणीय सार्थक आलेख ज्योति जी

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  17. बहुत ही सारगर्भित लेख है ज्योति जी आज के भौतिकवादी युग में तो इन बातों का महत्व और भी बढ़ जाता है आप का बहुत बहुत धन्यवाद जी राधे-राधे बहिन

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नाम

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पावडर,1,दुर्गा माता,1,दुल्हा,1,दुश्मन,1,दूध,2,देशभक्ति,3,देशभक्ति शायरी,2,देहदान,1,दोस्त,2,धनिया,1,धर्म,2,धर्मग्रंध,1,धार्मिक,27,नजर,1,नजर कैसे उतारु,1,नदी में पैसे,1,नन्ही परी,1,नमक पारे,1,नमकीन,1,नवरात्र,1,नवरात्र स्पेशल,2,नवरात्रि,1,नवरात्री रेसिपी,5,नववर्ष,2,नववर्ष की शुभकामनाएं,2,नाइंसाफी,1,नानी,1,नारियल बर्फ़ी,1,नारी,47,नारी अत्याचार,10,नारी शिक्षा,1,नाश्ता,1,निंबु का अचार,1,निचली जाती,1,निर्णयक्षमता,1,निर्भया,2,निवाला,1,नींबू,1,नीडल थ्रेडर,1,नेत्रदान,1,नेपाल त्रासदी,1,नेल आर्ट,1,न्याकिम गैटवेच,1,पकोडे,2,पक्षी,1,पढ़ा-लिख़ा कौन?,1,पढ़ाई,1,पति,1,पति का अहं,1,पति-पत्नी,1,पत्ता गोभी,2,पत्ता गोभी और चना दाल के बडे,1,पत्ता गोभी की मुठिया,1,पत्नी,1,पत्र,1,पपीता,1,परंपरा,2,परवरिश,6,पराठे,1,परीक्षा,2,परेशानी,1,पल्ली उत्सव,1,पवित्र,1,पवित्रता,2,पसंदीदा शिक्षक को पत्र,1,पानी,1,पानी कैसे पीना चाहिए,1,पापड़,3,पालक,1,पालक के नमक पारे,1,पालक बडी,1,पाश्चात्य संस्कृति,1,पिता,2,पुण्य,1,पुरानी मान्यताएं,1,पुलवामा हमला,1,पूडी,1,पेढे,1,पैड्मैन,1,पैनकेक,1,पैरेंटीग,1,पोर्न मूवी,1,पोषण,1,पोहा,2,पोहे के 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पंचमी,1,रक्तदान,1,रक्तदान के फायदे,1,रक्षा बंधन,1,रक्षाबंधन,1,रक्षाबंधन शायरी,1,रजस्वला नारी,3,रवा इडली,1,रसोई,101,रांगोली,3,राखी,2,राजभाषा,1,राजस्थानी समाज,2,राम रहीम,1,राशी-भविष्य,1,राष्ट्रगान,1,राष्ट्रगीत,1,राष्ट्रभाषा,1,रिती-रिवाज,1,रीतिरिवाज,1,रुपया-पैसा,1,रेणुका मिश्रा,1,रोटी,2,रोस्टेड मूंगफली,1,लघुकथा,11,लड्डू,2,लहसुन,1,लाइटर,1,लाइफ स्किल्स,1,लाल मिर्च की सूखी चटनी,1,लीव इन रिलेशनशिप,1,लेसुए,1,लॉटरी,1,लोकल ट्रेन,1,लोकसभा चुनाव,1,लोग क्या कहेंगे?,1,लौंजी,1,लौकी,2,लौकी का हलवा,1,लौकी की बड़ी,1,वक्त,1,वटसावित्री व्रत,1,वर,1,वर्जिनिटी टेस्ट,1,वर्तमान,1,वारी के हनुमान,1,विधवा,1,विधवा ने किया कन्यादान,1,विधवा विवाह,1,विशाखापट्टनम रेप कांड,1,वृंदावन,1,वृद्धावस्था,1,वेजिटेबल डोसा,1,वेजिटेबल पैनकेक,1,वैलेंटाइन डे,1,वोट,1,वोट की किंमत,1,व्यंग,11,व्यायाम,1,व्रत,2,व्रत रेसिपी,15,व्रत स्पेशल,2,शकरकंद,2,शकरकंद की जलेबी,1,शकरकंद को कैसे भुने,1,शकुन-अपशकुन,1,शक्करपारे,1,शनि देव,1,शब्द,1,शरबत,4,शर्बत,1,शर्म,2,शादी,5,शादी की खरेदी,1,शादी की फ़िजूलखर्ची का बिल,1,शादी के सालगिरह की शुभकामनाएं,1,शादी-ब्याह,3,शायरी,9,शाहिद कपूर,1,शिक्षक दिन,1,शिक्षा,5,शिमला मिर्च,1,शिवपुरी,1,शुभ मुहूर्त,1,शुभ-अशुभ,3,शुभम जगलान,1,श्राद्ध,3,श्राद्ध का खाना,1,श्रीकृष्ण,2,श्रेष्ठता,1,संस्कार,1,संस्मरण,9,सकारात्मक पहल,2,सच बोलने की प्रेरणा,1,सतबीर ढिल्लो,1,सपना,1,सफेद बाल,1,सब्जियों का अचार,1,सब्जियों की कांजी,1,सब्जी,7,समय,1,समाजसेवा,2,समाजिक,1,समाधान,1,समावत चावल,2,सर के बाल,1,सलाद,1,ससुराल,2,सहशिक्षा,1,सांवला या काला रंग,1,साउथ इंडियन डिश,2,साक्षात्कार,3,सागर में ज्वार,1,साफ-सफाई,1,साबुदाना,2,साबुदाना के अप्पे,1,साबुदाना पापड़,2,साबुदाने लड्डू,1,साबूदाना,2,सामाजिक,64,सामाजिक कार्यकर्ता,1,सालगिरह,5,सास,2,साहित्य,80,सिंगल पैरेंट,1,सिंदूर,1,सीख-सुहानी,1,सीनू कुमारी,1,सुंदरता,1,सुई,1,सुखी,1,सुजी,1,सूजी,1,सूजी के लड्डू,1,सेनेटरी नेपकिन,1,सेब,1,सेलिब्रेटी,1,सेवई उपमा,1,सेहत,1,सैंडविच,1,सौंफ,1,सौंफ का शरबत,1,सौंफ प्रीमिक्स,1,सौतेली माता,1,स्कूल,1,स्त्री,2,स्नैक्स,32,स्वतंंत्रता दिन,1,स्वतंत्रता दिन,2,स्वर्ग और नर्क,1,स्वाभिमान,1,स्वास्थ,2,स्वास्थ्य,10,हंस,1,हनुमान जी,2,हरी मटर के 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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: क्या बच्चों पर पारिवारिक संस्कारों का असर होता है?
क्या बच्चों पर पारिवारिक संस्कारों का असर होता है?
एक ही परिवार में जन्में, एक ही वातावरण में पले-बढ़े दो सगे भाइयों के स्वभाव में जमीन-आसमान का फ़र्क़ क्यों होता है? रावण और विभीषण एक ही परिवार में पैदा हुए, एकसाथ पले-बढ़े फिर एक राक्षसी प्रवृति का तो दूसरा धार्मिक प्रवृति का कैसे?
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
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