सेनेटरी नेपकिन: संकोच छोड़ बात करना जरुरी हैं!!!

सेनेटरी नेपकिन पर बात करना समाज में आज भी प्रतिबंधित सा हैं। लेकिन सेनेटरी नेपकिन का संबंध करोड़ों महिलाओं के स्वास्थ से जुड़ा होने से बात करना बहुत ही जरुरी हैं।

सेनेटरी नेपकिन: संकोच छोड़ बात करना जरुरी हैं!!!
सॉरी...दोस्तों, आज मैं एक ऐसे विषय के बारे में बात कर रहीं हूं जिस बारे में बात करने में भी एक प्रकार का संकोच महसूस होता हैं क्योंकि सेनेटरी नेपकिन पर बात करना समाज में आज भी प्रतिबंधित सा हैं। लेकिन सेनेटरी नेपकिन का संबंध करोड़ों महिलाओं के स्वास्थ से जुड़ा होने से बात करना बहुत ही ज़रुरी हैं। एक बात आज तक मेरी समझ में नहीं आई हैं कि माहवारी आना यह एक नैसर्गिक प्रक्रिया हैं और ये हर लड़की/महिला के साथ होता हैं। फ़िर इतनी प्राकृतिक एवं सरल बात को हमारे समाज में इतना अप्राकृतिक और असहज क्यों बनाया जाता हैं? क्यों आज भी महिलाओं को सेनेटरी पैड खरीदते वक्त एक प्रकार का संकोच होता हैं? क्यों दुकानदार पैड को अखबार में या काली पॉलिथिन में लपेटकर देते हैं?

महिलाओं के लिए कितना ज़रुरी हैं सेनेटरी नेपकिन?
घर के कामों को करते वक्त कभी-कभी यदि दो-चार घंटे लगातार हाथ गिले रह जाते हैं तो उंगलियों में सनसनाहट होने लगती हैं। क्या कभी हमने सोचा हैं कि उन महिलाओं पर क्या बितती होगी जिनके गुप्तांग घंटों गंदगी में रहते हैं? यह एक भयानक सत्य हैं कि नारी को माँ बनने का सुख देने वाली इस प्रक्रिया से जूझने के लिए नारी को बहुत भारी किंमत चुकानी पड़ती हैं।

• रिपोर्टों के मुताबिक, भारत में 33 प्रतिशत लड़कियाँ माहवारी के दौरान स्कूल नहीं जाती हैं क्योंकि स्कूलों में उनके लिए अलग से शौचालय और पैड निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं रहती हैं। इस वजह से उनकी एक वर्ष में एक महीने से ज्यादा दिनों की पढ़ाई प्रभावित होती हैं।

• विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार गर्भाशय के मुंह के कैंसर के कुल मामलों में से 27 फ़ीसदी भारत में होते हैं। और डॉक्टरों के अनुसार इसकी बड़ी वजह माहवारी के दौरान साफ़-सफ़ाई की कमी हैं!

• भारत में पीरियड्स के दौरान करीब 80 फीसदी लड़कियाँ/महिलाएं अपनी सामान्य दिनचर्या का पालन नहीं कर पाती। वे ज्यादातर घर में ही रहती हैं क्योंकि वे महंगे सेनेटरी नेपकिन ख़रीद नहीं सकती।

• सेनेटरी नेपकिन के बाजार पर फिलहाल तीन-चार बड़े ब्राँड का कब्ज़ा हैं नतिजतन केवल 12 फ़ीसदी महिलाएं ही इनका इस्तेमाल कर सकती हैं।

दुनिया का पहला पुरुष जिसने सेनेटरी नेपकिन का उपयोग किया!
सेनेटरी नेपकिन की बात हो और ‘माहवारी पुरुष’ का उल्लेख न हो...यह तो हो ही नहीं सकता न! आइए, मिलते हैं अरुनाचलम मुरुगनांथम से जिसे ‘माहवारी पुरुष’ या ‘पैड्मैन’ के नाम से जाना जाने लगा हैं। जब इनको पता चला कि सेनेटरी नेपकिन के महंगे होने से उनकी पत्नी इनका इस्तेमाल नहीं कर सकती तब इन्होंने खुद सस्ते और अच्छे सेनेटरी नेपकीन बनाने की ठानी।

उन्होंने ये जानने का प्रयास किया कि इस दौरान महिलाओं को किन परेशानियों से गुजरना पड़ता हैं और उनकी आवश्यकताएं क्या हैं? उन्होंने सेकडौ महिलाओं से बात की। लोग उन्हें पागल समझने लगे। पत्नी घर छोड़ कर चली गई। फ़िर भी मुरुगा ने हार नहीं मानी। जब उनके बनाए नेपकिन का उपयोग करके देखने वाला कोई नहीं मिला तब मुरुगा ने फुटबॉल के ब्लैडर में जानवर का खून भरा और उसको एक पाइप से अपने अंतर्वस्त्र में जोड़ दिया इसके बाद ब्लैडर को कमीज़ के अंदर बांध दिया। अब मुरुगा चलते या साइकिल चलाते तो ब्लैडर पर थोड़ा-थोड़ा दबाव पड़ता जिससे ब्लैडर से खून निकल कर उनके अंतर्वस्त्र में लगे पैड पर जाता। इस प्रकार वो अपने बनाए पैड का निरीक्षण करते। अंत में वो ऐसी मशीन बनाने में सफल रहे जिसके माध्यम से कोई भी महिला एक बढ़िया, मजबूत एवं टिकाऊ पैड बना कर खुद इस्तेमाल कर सकती हैं या बेच सकती हैं। आज वो न केवल वर्ल्ड क्लास सेनेटरी नेपकिन बना रहे हैं बल्कि ये पैड, बाजार में बिकने वाले सेनेटरी पैड से कहीं ज्यादा सस्ते हैं! अब उनकी पत्नी भी पूरे पांच साल बाद वापस आ गई हैं।

सचमुच, जिद और प्यार की मिसाल देनी हो तो अरुणाचलम मुरुगनांथम जी की देनी पड़ेगी। पत्नी को सस्ते और अच्छे सेनेटरी पैड उपलब्ध हो सके इसके लिए उन्होंने मशीन ही बना डाली!!!

ख़बरों के मुताबिक, अरुणाचलम मुरुगनांथम के जीवन पर आधारित एक फिल्म ‘पैड्मैन’ बन रही हैं...जिसमें मुख्य भूमिका में अक्षय कुमार हैं और जो 13 April 2018 को रिलीज होगी।

सेनेटरी नेपकिन के नुकसान
आज हम सेनेटरी नेपकिन को बहुत सुरक्षित मानते हैं। लेकिन ऐसा हैं नहीं। रिसर्च के मुताबिक एक शहरी महिला पूरी जिंदगी में करीब 17 हजार पैड इस्तेमाल करती हैं जिससे लगभग 150 किलोग्राम डिस्पोजेबल कचरा उत्पन्न होता हैं जिसे विघटित होने में 500 से 800 साल तक लग जाते हैं! सेनेटरी पैड में समाहित रसायन से महिलाओं में मधुमेह, एलर्जी और त्वचा संबंधी रोग हो सकते हैं।

क्या हैं सुरक्षित उपाय?
• ऑर्गेनिक क्लॉथ पैड-
सेनेटरी नेपकिन: संकोच छोड़ बात करना जरुरी हैं!!!
ये पैड रुई और जूट या बांस से बने होते हैं। उपयोग किए गए पैड को धोकर फ़िर से इस्तेमाल किया जा सकता हैं। ये पैड पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाते।

• मेंस्ट्रुअल कप-

यह गम रबर से बना हुआ एक घंटी के आकार का कप होता हैं जो एक बार शरीर में फिट होने के बाद टेम्पोन के आकार में स्वयं को ढाल लेता हैं। यह कप प्रवाह के आधार पर खून को चार से छ: घंटे के लिए एकत्रित करता हैं। इसे अगले महीने प्रयोग से पहले सिर्फ़ किटाणुरहित करना होता हैं। अच्छी गुनवत्ता के कप की किंमत 700 रुपए हैं। लेकिन एक बार खरीदने के बाद लगभग दस साल तक की चिंता समाप्त! इस दृष्टिकोण से यह कप सस्ते ही पड़ते हैं। अभी मेंस्ट्रुअल कप को इस्तेमाल करने के बारे में बहुत कम महिलाओं को जानकारी हैं। जो महिलायें इन कप्स के बारे में जानना चाहती हैं वे इंटरनेट पर पढ़ सकती हैं।

करबद्ध निवेदन-
सहेलियों, हम महंगे पैड उपयोग में लाते हैं...हमारी दादी-मम्मी सुती कपड़ा काम में लेती थी। लेकिन क्या हमने कभी सोचा हैं कि जिन्हें तन ढकने के लिए भी कपड़े नसीब नहीं होते वे महिलाएं महावारी के समय क्या इस्तेमाल करती होगी? आपको जानकर हैरानी होगी कि आज भी कई महिलाएं माहवारी के दौरान कपड़े की जगह राख, घास, मिट्टी, भुसी या जो तरलता सोख ले ऐसी किसी भी वस्तु का प्रयोग करती हैं! कुछ महिलाएं पैंटी के अंदर प्लास्टिक की थैलियों का इस्तेमाल करती हैं और ये थैलियां भी वे हमारे द्वारा फेंके गए कचरे से बिन कर लाती हैं! जिसके कारण ये महिलाएं संक्रमण की चपेट में आती हैं!! आज भी ज्यादातर घरों में जुने कपड़ों से बर्तन ख़रीदे जाते हैं। यह पोस्ट पढ़ने वाले हर व्यक्ति से मेरा करबद्ध निवेदन हैं कि अब इन कपड़ों से बर्तन न ख़रीद कर ये कपड़े अपने यहां काम करने वाली बाइयां और गरीब तबके में बांट दीजिए। ताकि इन गरीब महिलाओं को माहवारी के समय ये कपड़े काम में आ सके! हमारे फटे-पुराने कपड़े गरीब के तन को ढकने और माहवारी के समय गरीब महिलाओं के काम में आने से उनके चेहरों पर जो चमक आयेगी वो हमने ख़रीदे गए बर्तनों की किंमत से कहीं ज्यादा होंगी! और उनके चेहरों पर खुशी देख कर हमें जो सुकून मिलेगा वो खरीदे गए बर्तनों से कई गुना ज्यादा होगा। हमारी ऐसी छोटी-छोटी सहायता नारी सशक्तिकरण के साथ देश का स्वास्थ सुधारने में बहुत बड़ा योगदान देगी।

फ़िर से करबद्ध निवेदन हैं कि अपने घर का एक भी फटा-पुराना कपड़ा फ़ालतू समझकर न फेकें...यहीं फ़ालतू कपड़ा किसी महिला के लिए स्वस्थ रहने की संजीवनी बूटी हैं!!!

Keywords: Sanitary Napkin, Menstruation, Menstrual cup, Arunachalam Murugantham, Organic cloth pads, Women,  Padman 

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15 अगस्त अंकुरित अनाज अंगदान अंगुठी अंग्रेजी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस अंधविश्वास अंधश्रद्धा अंधश्रध्दा अंश अग्रवाल अचार अच्छे काम अजब-गजब अतित अनमोल वचन अनुदान अनुप जलोटा अन्न अन्य अन्याय अपेक्षा अमीरी अमेजन अरुणा शानबाग अरुनाचलम मुरुगनांथम अवार्ड असली हीरो आंवला आंवला लौंजी आइसक्रीम आज के जमाने की अच्छाइयां आजादी आज़ादी आतंकवादी आत्महत्या आत्मा आदित्य तिवारी आम आम का मुरब्बा आरक्षण आलू इंसान इंस्टंट डोसा इंस्टंट स्नैक्स इंस्टट ढोकला इडली इन्डियन टाइम इमली इरोम शर्मिला ईद ईश्वर ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना उपमा उपवास ऋषि पंचमी एक सवाल ऐनी दिव्या ऐश ट्रे कंघा कद्दु कद्दु के गुलगुले कन्यादान करवा-चौथ कल्याणी श्रीवास्तव कहानी कांजी कानून कामवाली बाई कालीन किचन टिप्स कुंडली मिलान कुरकुरे केईएम् अस्पताल कॉर्न इडली कौए क्षमा खजूर खत खबर खरबूजा खांडवी खाना खारक खुले में शौच खुशी खेल गर्भाशय गलती गाजर गाजर-मूली के दही बडे गाय गुजरात गुलगुले गोल्फ गौरी पराशर घंटी घी की नदी चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति चकली चटनी चाय चाय मसाला चूर्ण छोटी बाते छोटे लेकिन काम के टिप्स छोटे-छोटे काम के टिप्स जनसंख्या जन्माष्टमी जमाना जाट आंदोलन जात-पात जीएसटी जीरो ऑइल रेसिपी जोक्स जोयिता मंडल ज्वेलरी झाले-वारणे झूठ टिप्स कॉर्नर टी.व्ही. और सिनेमा ठेचा डॉक्टर डॉटर्स डे ढोकले तरबूज तिल के लड्डू दक्षिणा दवा दही दहेज दिपावली बधाई संदेश दिशा दीपावली शुभकामना संदेश दुध पावडर दुल्हा दुश्मन दूध देहदान दोस्त धर्म धर्मग्रंध धार्मिक नदी में पैसे नन्ही परी नवरात्र स्पेशल नववर्ष नववर्ष की शुभकामनाएं नाइंसाफी नानी नारी नारी अत्याचार नारी शिक्षा नाश्ता निंबु का अचार निचली जाती निर्णयक्षमता निर्भया निवाला नेत्रदान नेपाल त्रासदी नेल आर्ट पक्षी पढ़ा-लिख़ा कौन? पढ़ाई पति का अहं पत्र पपीता परंपरा पल्ली उत्सव पवित्र पवित्रता पसंदीदा शिक्षक को पत्र पाश्चात्य संस्कृति पिता पुण्य पैड्मैन पैरेंटीग पोर्न मूवी पोषण पोहा पोहे के कुरकुरे प्याज प्यार प्यासा कौआ प्रत्यूषा प्रद्युम्न प्राणियों से सीख फलाहार फादर्स डे फूल गोभी के परांठे फैशन फ्रेंडशीप डे बकरीद बची हुई सामग्री का उपयोग बच्चे बच्चें बछबारस बड़ा कौन? बढ़ती उम्र बदला बधाई संदेश बरबादी बलात्कार बहू बिल्ली के गले में घंटी बुलंदशहर गैंगरेप बेटी बेटी बचाओ अभियान बेसन ब्रेड ब्रेड की रसमलाई ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड ब्लॉगिंग ब्ल्यू व्हेल गेम भगवान भजिए भरवां मिर्च भाई दूज शायरी भाभी भारत भुट्टे के पकोड़े भूकंप भोजन भ्रुण हत्या मंत्र मंदिर मंदिरों में ड्रेस कोड़ मंदिरों में दक्षिणा मकई उपमा मकई पकोडे मदर्स डे महानता महाराजा अग्रसेन जी महिला आजादी महिला आरक्षण महिलाओं का पहनावा माँ माता यशोदा मारवाड़ी माला मासिक धर्म माहवारी मिठाई मित्र मुक्ति मुबारकपुर कला मुस्लिम मंच मूंगफली की सूखी चटनी मूली मेंस्ट्रुअल कप मेंहदी मेथी दाना चुर्ण मेनु मेरा मंत्र मेरी बात मैनर्स रंग रजस्वला नारी रवा इडली रसोई रांगोली राजस्थानी समाज राशी-भविष्य रिती-रिवाज रुपया-पैसा रोटी लघुकथा लाइटर लीव इन रिलेशनशिप लेसुए लॉटरी लोकल ट्रेन लोग क्या कहेंगे? लौकी वक्त वटसावित्री व्रत वर वर्तमान वारी के हनुमान विधवा विवाह वृंदावन वेजिटेबल डोसा वैलेंटाइन डे व्यंग व्रत व्हेजिटेबल पैनकेक शनि देव शब्द शर्बत शर्म शादी शादी की खरेदी शादी की फ़िजूलखर्ची का बिल शादी-ब्याह शिक्षक दिन शिक्षा शुभ-अशुभ शुभम जगलान श्राद्ध श्रीकृष्ण श्रेष्ठता संक्रात संस्कार संस्मरण सपना सफेद बाल सब्जियों का अचार सब्जियों की कांजी समाजसेवा सर के बाल सलाद सहित्य सांवला या काला रंग साउथ इंडियन डिश सागर में ज्वार साफ-सफाई साबुदाने और नारियल के लड्डू सामाजिक सालगिरह सास साहित्य सिंगल पैरेंट सिंदूर सीख-सुहानी सुखी सुजी सेनेटरी नेपकिन सेब सेलिब्रेटी सेवई उपमा सेहत सौतेली माता स्त्री स्नैक्स स्वतंंत्रता दिन स्वतंत्रता दिन स्वर्ग और नर्क स्वाभिमान हंस हनुमान जी हरी मटर के पैनकेक हरी मिर्च हरी मिर्च का अचार हाथी हिंदी उखाणे हिंदी उखाने हिंदी शायरी हैंडल होममेकर
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: सेनेटरी नेपकिन: संकोच छोड़ बात करना जरुरी हैं!!!
सेनेटरी नेपकिन: संकोच छोड़ बात करना जरुरी हैं!!!
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