नारी : अतीत से वर्तमान तक

आज भी नारी चाहे जीतनी पढ़ी-लिखी हो, कितने भी ऊँचे पद पर आसीन हो वह सिर्फ औरत है, जिस्म है शोषण के लिए!!

नारी : अतीत से वर्तमान तक
हजारों सालों पहले तक इंसान शिकार से जीता था। स्त्री की शारीरिक संरचना ऐसी नहीं थी कि वह शिकार कर सके। इसलिए जो भोजन जुटा रहा है वह मालिक बन बैठा। लेकिन अब स्त्री और पुरुष दोनों कमा सकते है। इसलिए दोनों मालिक बनना चाहते है। आज की नारी यह मानती है कि वास्तव में कोई मालिक नहीं और कोई ग़ुलाम नहीं।  खत के अंत में यह लिखने की जरुरत नहीं है कि "तुम्हारी दासी"! आज की नारी, प्रेमचंद की ऐसी पात्रा नहीं है जो अपनी इच्छाओं का दमन करती हुई, चुपचाप सारे अन्याय सहती रहे। 
घूँघट 
श्रीराम और श्रीकृष्ण के युग में नारी को घूंघट आवश्यक नहीं था। लेकिन कालांतर में न जाने कब और कैसे घूँघट प्रथा ने जोर पकड़ लिया। जनमानस के गुलाम पंगु विचारों ने नारी को भोग्या बना दिया। घूँघट और लज्जा ही नारी के आभूषण बन गए। क्या नारी को अपने नारी होने पर लज्जा आती है, जो वह अपना मुंह छिपाती फिरती है? इस पर एक चुटकुला याद आ रहा है। जो यहाँ पर बिलकुल फिट बैठता है। 
सास- "बहु, मैं 80 साल की उम्र में भी कभी सर पर का साडी का पल्लु नीचे नहीं गिरने देती और एक तुम हो, जो मुंह उघाड़े घूमती रहती हो...!"
बहु- "मम्मी जी, जब मैं भी आपके जैसी 80 साल की हो जाउंगी, मेरे चेहरे पर भी झुर्रियां पड़ेगी, तब मैं भी अपना चेहरा घूँघट से ढँक लुंगी!!"
सही है, लज्जा का संबंध तो आँख से है, आचार-विचार से है, शालीनता से है -घूँघट से नहीं। आज की नारी का आत्मविश्वास ही शायद उसकी लज्जा की भी रक्षा करता है। वरना सिर्फ लज्जा तो उसकी लज्जा भी न बचा सके!! अत: घूँघट या लज्जा नहीं, आत्मविश्वास ही नारी का सच्चा आभूषण है। 
वर चुनने की आज़ादी 
आदिकाल में राजा-महाराजाओं द्वारा कन्या के विवाह हेतु स्वयंवर रचाए जाते थे। यह इस बात का द्योतक है कि पहले की लड़कीयां ज्यादा स्वतंत्र थी। कम से कम उन्हें अपना वर चुनने की आजादी तो थी। कालांतर में, जहां घर के बुजुर्गों ने शादी पक्की कर दी वहां कर दी। लड़की की निजी पसंद-नापसंद कोई मायने नहीं रखती थी। लड़कियों के हालात तो ऐसे थे कि,"जहां बांधे वही बंध जाय गैया खुंटन की..." लेकिन अब हालात थोड़े बदल रहे है। कुछ लड़कियां खुद अपना जीवनसाथी चुन रही है। लेकिन अभी भी ऐसी लड़कियों की तादाद बहुत कम है। अब कम से कम एक बार औपचारिकता दिखाने हेतु ही सही, लड़कियों से उनकी पसंद ज़रूर पूछ ली जाती है। 

फ़िल्मी गीतों में बदलती नारी की तस्वीर
पहले 
"तुम गगन के चंद्रमा हो मैं धरा की धूल हूँ..."
"तुम्ही मेरे मंदिर तुम्ही मेरी पूजा... "
"आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे... "
"औरत ने जन्म दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाजार दिया..."
"इस दुनिया में औरत क्या है दो लफ्जों की एक कहानी, दिल में ममता आँखों में पानी..."
"धरती की तरह हर दू:ख सह ले, सूरज की तरह तू जलती जा... "
"हे राम तू ने नारी को जन्म से पहले क्यों नहीं मारा था, उत्तर दो, उत्तर दो..."  
अब -
"कोमल है कमजोर नहीं है..."
"ना कटूंगी, ना जलूँगी, ना मिटूँगी, ना मरूंगी, मैं थी मैं हूँ मैं रहूँगी..."
"नारी कुछ अइसन आगे निकल रही है, मर्दन के पांव तले धरती खिसक रही है...!!" 

घर के बाहर का कार्यक्षेत्र 
पहले महिलाओं का कार्यक्षेत्र घर की चारदीवारी तक ही सीमित था। लेकिन अब घर और बाहर दोनों क्षेत्र संभालने के चक्कर में आज की नारी बुरी तरह फंस गई है। सारा दिन उन्हें अपने बच्चों की चिंता सताती रहती है। कामकाजी महिलाएं एक मशीन के समान सुबह से देर रात तक काम में लगी रहती है और बदले में क्या पाती है? वहीं तनाव, चिड़चिड़ापन और थोड़ी सी आर्थिक आजादी। कामकाजी महिलाओं का चेहरा बाहर वालों की नज़र में रोबिला और गर्विला होता है किंतु घर की दहलीज में पांव रखते ही वही चेहरा पर्स के साथ अलमारी में बंद हो जाता है।  

संकीर्ण मानसिकता -  
अतीत में माता सीता की अग्निपरीक्षा और युधिष्ठिर व्दारा द्रोपदी को दांव पर लगाना, उसे सबकी साझी संपति बनाना, यह दर्शाता है कि उस वक्त नारी को इंसान नहीं समझा जाता था। नारी का अपना कोई मान-सम्मान नहीं होता था। आज के हालात क्या है? क्या इतने बड़े देश की मुट्ठी भर आज़ाद और आत्मनिर्भर महिलाएं यह ख़ुशी जगाने के लिए काफी है कि देश बदल रहा है और स्त्री के प्रति सोच बदल रही है? पता नहीं क्यों, लेकिन मैं उनकी ख़ुशी में शामिल नहीं हो पाती। इसका ताजा उदाहरण है संजय निरुपम का 'ठुमका' वाला बयान, लालू प्रसाद का 'चूड़ी' सबंधी बयान तो मंत्री गिरिराज सिंह का 'गोरी चमड़ी' वाला बयान। कभी कोई कहता है कि "लड़कों से गलती हो जाती है" तो कभी फतवा निकाला जाता है कि "लड़कियों ने जींस नहीं पहनना चाहिए।" ये सब बातें यही दर्शाती है कि आज भी नारी चाहे जीतनी पढ़ी-लिखी हो, कितने भी ऊँचे पद पर आसीन हो वह सिर्फ औरत है, जिस्म है शोषण के लिए!! 
नारी शोषण का भावी रूप - माँ का दूध 
अतीत में माताएं प्रेम और करुणा के लिए दूसरे के बच्चे को दूध पिलाती थी। लेकिन अभी हाल ही में अमेरिका के मियामी की ग्रेटा अमाया ने अपने बच्चे को पेटभर दूध पिलाने के बाद, सप्रयास अतिरिक्त दूध निकाला और उसे 6 माह तक बेच कर 52 हजार डॉलर की कमाई भी की। एक फार्मा फैक्ट्री अमाया की तरह अन्य माताओं से दूध खरीद कर उसे वैज्ञानिक प्रक्रिया से फ्रोज़न क्यूब में बदलकर बाजार में बेचती है। जिन माताओं को किसी शारीरिक कमतरी के कारण दूध नहीं आ पाता वे इसे खरीदकर अपने बच्चों को पिलाती है। माँ का दूध 'सफ़ेद प्लाज्मा' की तरह जीवन रक्षक है। माँ के दूध से  बनाया प्रोटीन सर्वश्रेष्ठ सिद्ध हुआ है।   
लेकिन अब लोभ नामक दैत्य इस पुरे खेल को बदल सकता है। भारत जैसे अजब देश में तो दूध माफिया उभर सकता है, जो बन्दुक की नोंक पर माँ के दूध का 'उत्पादन' करा सकता है। सबसे अहम बात जैसे आज अतिरिक्त दूध के लिए गाय के बछड़े को भूखा रखा जाता है ठीक उसी प्रकार यदि कालांतर में मानव जाती के बच्चें को 'अतिरिक्त दूध' के लिए भूखा रखा गया तो यह सम्पूर्ण मानव जाती के लिए कितना खतरनाक होगा इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती!!
keywords:Women,From the past, In the present

COMMENTS

BLOGGER: 21
Loading...
नाम

15 अगस्त अंकुरित अनाज अंग्रेजी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस अंधविश्वास अंधश्रद्धा अग्रवाल अचार अजब-गजब अतित अनुदान अन्न अन्य अपेक्षा अमीरी अरुणा शानबाग असली हीरो आंवला आंवला लौंजी आज के जमाने की अच्छाइयां आज़ादी आतंकवादी आत्महत्या आत्मा आदित्य तिवारी आरक्षण इंसान इंस्टंट डोसा इंस्टंट स्नैक्स इंस्टट ढोकला इडली इन्डियन टाइम इमली इरोम शर्मिला ईश्वर ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना उपमा एक सवाल कन्यादान करवा-चौथ कहानी किचन टिप्स कुंडली मिलान केईएम् अस्पताल कौए क्षमा खजूर खत खबर खांडवी खाना खारक खुशी खेल गर्भाशय गलती गाजर गोल्फ चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति चकली चटनी चाय मसाला चूर्ण छोटी बाते छोटे लेकिन काम के टिप्स जनसंख्या जन्माष्टमी जमाना जाट आंदोलन जोक्स झूठ टिप्स कॉर्नर टी.व्ही. और सिनेमा ठेचा डॉक्टर डॉटर्स डे ढोकले तिल के लड्डू दक्षिणा दहेज दिपावली बधाई संदेश दुल्हा दुश्मन धर्मग्रंध धार्मिक नदी में पैसे नवरात्र स्पेशल नारी नारी अत्याचार नारी शिक्षा निंबु का अचार निर्णयक्षमता निर्भया निवाला नेत्रदान नेपाल त्रासदी नेल आर्ट पक्षी पढ़ा-लिख़ा कौन? पति का अहं परंपरा पवित्रता पाश्चात्य संस्कृति पुण्य प्रत्यूषा प्राणियों से सीख फलाहार फूल गोभी के परांठे फैशन बची हुई सामग्री का उपयोग बच्चें बड़ा कौन? बढ़ती उम्र बरबादी बलात्कार बहू बुलंदशहर गैंगरेप बेटी बेटी बचाओ अभियान ब्रेड ब्रेड की रसमलाई ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी भगवान भजिए भारत भुट्टे के पकोड़े भूकंप भ्रुण हत्या मंत्र मंदिर मंदिरों में ड्रेस कोड़ मंदिरों में दक्षिणा मकई उपमा मकई पकोडे महानता महाराजा अग्रसेन जी महिला आजादी महिला आरक्षण महिलाओं का पहनावा माँ माता यशोदा मारवाड़ी मासिक धर्म मिठाई मुक्ति मूंगफली की सूखी चटनी मेंहदी मेथी दाना चुर्ण मेरा मंत्र मेरी बात मैनर्स रजस्वला नारी रवा इडली रसोई रांगोली राशी-भविष्य रिती-रिवाज रुपया-पैसा लघुकथा लेसुए लॉटरी लोकल ट्रेन लोग क्या कहेंगे? वक्त वटसावित्री व्रत वर वर्तमान विधवा विवाह वृंदावन वेजिटेबल डोसा व्यंग शनि देव शब्द शर्म शादी शादी की खरेदी शिक्षा शुभ-अशुभ शुभम जगलान श्राद्ध श्रीकृष्ण श्रेष्ठता संक्रात संस्कार संस्मरण सपना सफेद बाल सब्जियों का अचार समाजसेवा सर के बाल साउथ इंडियन डिश सागर में ज्वार साफ-सफाई साबुदाने और नारियल के लड्डू सामाजिक सालगिरह सास साहित्य सिंगल पैरेंट सीख-सुहानी सुखी सेलिब्रेटी सेवई उपमा सेहत सौतेली माता स्नैक्स स्वतंंत्रता दिन स्वर्ग और नर्क हंस हरी मिर्च हाथी हिंदी उखाणे हिंदी उखाने होममेकर
false
ltr
item
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: नारी : अतीत से वर्तमान तक
नारी : अतीत से वर्तमान तक
आज भी नारी चाहे जीतनी पढ़ी-लिखी हो, कितने भी ऊँचे पद पर आसीन हो वह सिर्फ औरत है, जिस्म है शोषण के लिए!!
https://3.bp.blogspot.com/-khZ-85pAUNk/VR4d2xylg9I/AAAAAAAAAqI/IJ_yAtCQKZw/s1600/nari%2Bati....jpg
https://3.bp.blogspot.com/-khZ-85pAUNk/VR4d2xylg9I/AAAAAAAAAqI/IJ_yAtCQKZw/s72-c/nari%2Bati....jpg
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
http://www.jyotidehliwal.com/2015/04/Nari-atit-se-vartman-tak.html
http://www.jyotidehliwal.com/
http://www.jyotidehliwal.com/
http://www.jyotidehliwal.com/2015/04/Nari-atit-se-vartman-tak.html
true
7544976612941800155
UTF-8
Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy