बढ़ती उम्र की शर्म क्यों?

हम उम्र छुपाने के लिए क्या-क्या पापड नही बेलते...! चाहे उसके दुष्परिणाम कुछ भी हो!! आखिर क्यों छुपाना चाहते है हम उम्र?

बढ़ती उम्र की शर्म क्यों?
"मेरी त्वचा से मेरी उम्र का पता ही नहीं चलता…!" 
        "बढ़ती उम्र मानों थम सी जाए…!" 
           "बढ़ती उम्र को दे खूबसूरत ठहराव!"
               "50 में भी दिखें 30 से जवां…!"
ऐसे जुमले हम कई बार, कई जगह पढ़ते है, सुनते है। क्या निहितार्थ है इन जुमलों का? क्या दुनिया में आज तक ऐसी कोई क्रीम या ऐसी कोई दवाई ईजाद हो पाई है, जो बढती उम्र को रोक दे? हां, इन क्रीमों से, दवाइयों से हम उम्र को थोड़ा बहुत छिपा ज़रूर सकते है लेकिन उम्र को बढ़ने से रोक नहीं सकते! जन्म, बाल्यावस्था, किशोरावस्था, प्रौढ़ावस्था, बुढ़ापा और अंत में मृत्यु यह तो निसर्ग का नियम है। इस नियम को बदलना क्या इंसान के हाथ में है? फिर इन घोष-वाक्यों के माध्यम से बड़ी-बड़ी नामी कंपनियां क्या सिद्ध करना चाहती है? वास्तव में ये कंपनियां इन जुमलों के माध्यम से हमारी भावनाओं का दोहन कर, अपना उल्लू साधती है। इन कंपनियों को अच्छी तरह पता है कि हर इंसान जवां दिखना चाहता है। यहां हर कोई अपनी उम्र छुपाने में लगा है। कहा जाता है कि महिलाएं कभी भी अपनी असली उम्र नहीं बताती। आज तक यह बात मेरी समझ में नहीं आई कि हमें अपनी बढ़ती उम्र की शर्म क्यों आती है? वास्तव में हमें शर्म आनी चाहिए, चोरी करने की, बड़े-बुजुर्गों का अनादर करने की, झूठ बोलने की और कोई भी अनैतिक काम करने की। लेकिन अफ़सोस हमें इन बातों की ज्यादा शर्म नहीं आती! शर्म आती है तो बढ़ती उम्र की! 

एक बार एक लड़के की रिश्ते की बहन उससे कई वर्षों बाद मिलती है और प्यार से कहती है-"अरे! तू तो काफी बड़ा हो गया!" लड़का जबाब देता है -"हां! मेरे पास और कोई ऑप्शन नहीं था।"

यही जिंदगी की वास्तविकता है। उम्र को अपने हिसाब से बढ़ते देने के अलावा हमारे पास दूसरा कोई विकल्प ही नहीं है। बढती उम्र के बाद भी हम तंदुरुस्त रहे, हमारा जोश, उत्साह, काम करने का ज़ज़्बा बरक़रार रहे यह ज़रुरी है। 

क्या अंकल, आंटी एक प्रकार की गाली है? 
दूर दर्शन पर एक विज्ञापन आ रहा है। जिसमें बस के सफर में एक लड़की द्वारा एक पुरुष को 'अंकल' कहने पर पुरुष अपमानित महसूस करता है। दूसरे दिन बालों को डाय कर के, काले कर के आता है। क्यों? अंकल शब्द में क्या बुराई है? सिर्फ बाल काले करने से क्या वास्तव में हमारी उम्र कम हो जाती है? हम किसको धोका देना चाहते है, दुनिया को या अपनेआप को? बाल काले करने से उम्र कुछ कम ज़रूर लगती है लेकिन सिर्फ उम्र कम लगती है, वास्तव में कम नहीं होती। 
जो चीज वास्तव में संभव नहीं है हम उस चीज के पीछे भी कितने हाथ धोकर पड जाते है? यहां तक कि अपना खुद का उससे कितना नुकसान हो रहा है इसकी भी परवाह नहीं करते। 

मेरी एक क़रीबी रिश्तेदार ने एक ब्रांडेड कपनी की काली मेहंदी बालों में लगाई। उनके चहरे पर, पुरे सर पर इतने फोड़े हो गए कि सुबह जब वो सोकर उठी तो फोड़ों में से मवाद निकलकर उनके बाल बहुत बुरी तरह से तकिए से चिपक गए! बड़ी मशक्क़त के बाद रुई को गीला कर कर धीरे-धीरे मवाद पोंछकर तकिए को अलग किया गया। पूरा चेहरा फोड़ों से सूज गया था। आँखे अंदर धंस गई थी। उनके चेहरे की भयानकता, मैं शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकती! डॉक्टर्स भी कहते है कि डाय आदि से आंखों पर बुरा असर पड़ता है। लेकिन फिर भी हम उम्र छुपाने के लिए...! मुझे लगता है कि हम अपने मन और शरीर को तंदुरस्त रख कर सही मायने में उम्र छुपा सकते है न की बालों को काला कर कर! 
हमारे प्रधानमंत्री जी के बाल सफ़ेद है फिर भी जनता ने उन्हें चुना की नहीं? वास्तव में बढती उम्र के कारण उनमें शिथिलता नहीं आई। आज भी वे देशवासियों को विश्वास दिलाते है कि वे उनसे ज्यादा वक्त तक काम कर सकते है। यही है असली तरीका, बढ़ती उम्र को मात देने का! 

उम्र का बढ़ना तो दस्तूर ए जहाँ है,
महसूस ना करो तो बढ़ती कहाँ है?

keywords:Growing age,effect of growing age,shame

COMMENTS

BLOGGER: 17
Loading...
नाम

15 अगस्त अंकुरित अनाज अंगदान अंग्रेजी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस अंधविश्वास अंधश्रद्धा अंधश्रध्दा अंश अग्रवाल अचार अच्छे काम अजब-गजब अतित अनमोल वचन अनुदान अन्न अन्य अन्याय अपेक्षा अमीरी अमेजन अरुणा शानबाग अवार्ड असली हीरो आंवला आंवला लौंजी आज के जमाने की अच्छाइयां आज़ादी आतंकवादी आत्महत्या आत्मा आदित्य तिवारी आम आम का मुरब्बा आरक्षण आलू इंसान इंस्टंट डोसा इंस्टंट स्नैक्स इंस्टट ढोकला इडली इन्डियन टाइम इमली इरोम शर्मिला ईश्वर ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना उपमा एक सवाल ऐश ट्रे कन्यादान करवा-चौथ कहानी कांजी कानून कामवाली बाई किचन टिप्स कुंडली मिलान कुरकुरे केईएम् अस्पताल कौए क्षमा खजूर खत खबर खरबूजा खांडवी खाना खारक खुले में शौच खुशी खेल गर्भाशय गलती गाजर गाजर-मूली के दही बडे गाय गोल्फ घंटी चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति चकली चटनी चाय चाय मसाला चूर्ण छोटी बाते छोटे लेकिन काम के टिप्स जनसंख्या जन्माष्टमी जमाना जाट आंदोलन जात-पात जीएसटी जोक्स झाले-वारणे झूठ टिप्स कॉर्नर टी.व्ही. और सिनेमा ठेचा डॉक्टर डॉटर्स डे ढोकले तरबूज तिल के लड्डू दक्षिणा दही दहेज दिपावली बधाई संदेश दिशा दुल्हा दुश्मन देहदान धर्म धर्मग्रंध धार्मिक नदी में पैसे नन्ही परी नवरात्र स्पेशल नववर्ष नववर्ष की शुभकामनाएं नाइंसाफी नानी नारी नारी अत्याचार नारी शिक्षा नाश्ता निंबु का अचार निचली जाती निर्णयक्षमता निर्भया निवाला नेत्रदान नेपाल त्रासदी नेल आर्ट पक्षी पढ़ा-लिख़ा कौन? पढ़ाई पति का अहं पपीता परंपरा पवित्र पवित्रता पाश्चात्य संस्कृति पिता पुण्य पोर्न मूवी पोषण पोहा पोहे के कुरकुरे प्याज प्यार प्यासा कौआ प्रत्यूषा प्राणियों से सीख फलाहार फादर्स डे फूल गोभी के परांठे फैशन बची हुई सामग्री का उपयोग बच्चें बड़ा कौन? बढ़ती उम्र बदला बधाई संदेश बरबादी बलात्कार बहू बिल्ली के गले में घंटी बुलंदशहर गैंगरेप बेटी बेटी बचाओ अभियान बेसन ब्रेड ब्रेड की रसमलाई ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड ब्लॉगिंग भगवान भजिए भरवां मिर्च भाभी भारत भुट्टे के पकोड़े भूकंप भोजन भ्रुण हत्या मंत्र मंदिर मंदिरों में ड्रेस कोड़ मंदिरों में दक्षिणा मकई उपमा मकई पकोडे मदर्स डे महानता महाराजा अग्रसेन जी महिला आजादी महिला आरक्षण महिलाओं का पहनावा माँ माता यशोदा मारवाड़ी माला मासिक धर्म मिठाई मुक्ति मुबारकपुर कला मूंगफली की सूखी चटनी मूली मेंहदी मेथी दाना चुर्ण मेरा मंत्र मेरी बात मैनर्स रजस्वला नारी रवा इडली रसोई रांगोली राजस्थानी समाज राशी-भविष्य रिती-रिवाज रुपया-पैसा रोटी लघुकथा लीव इन रिलेशनशिप लेसुए लॉटरी लोकल ट्रेन लोग क्या कहेंगे? लौकी वक्त वटसावित्री व्रत वर वर्तमान विधवा विवाह वृंदावन वेजिटेबल डोसा वैलेंटाइन डे व्यंग शनि देव शब्द शर्बत शर्म शादी शादी की खरेदी शादी की फ़िजूलखर्ची का बिल शादी-ब्याह शिक्षा शुभ-अशुभ शुभम जगलान श्राद्ध श्रीकृष्ण श्रेष्ठता संक्रात संस्कार संस्मरण सपना सफेद बाल सब्जियों का अचार सब्जियों की कांजी समाजसेवा सर के बाल सलाद सांवला या काला रंग साउथ इंडियन डिश सागर में ज्वार साफ-सफाई साबुदाने और नारियल के लड्डू सामाजिक सालगिरह सास साहित्य सिंगल पैरेंट सिंदूर सीख-सुहानी सुखी सेलिब्रेटी सेवई उपमा सेहत सौतेली माता स्त्री स्नैक्स स्वतंंत्रता दिन स्वर्ग और नर्क स्वाभिमान हंस हरी मटर के पैनकेक हरी मिर्च हरी मिर्च का अचार हाथी हिंदी उखाणे हिंदी उखाने होममेकर
false
ltr
item
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: बढ़ती उम्र की शर्म क्यों?
बढ़ती उम्र की शर्म क्यों?
हम उम्र छुपाने के लिए क्या-क्या पापड नही बेलते...! चाहे उसके दुष्परिणाम कुछ भी हो!! आखिर क्यों छुपाना चाहते है हम उम्र?
https://2.bp.blogspot.com/-cqupT68E93M/VMMwE5HJUrI/AAAAAAAAAgA/f1M9iDVbYq0/s640/umra.jpg
https://2.bp.blogspot.com/-cqupT68E93M/VMMwE5HJUrI/AAAAAAAAAgA/f1M9iDVbYq0/s72-c/umra.jpg
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
http://www.jyotidehliwal.com/2015/01/blog-post_25.html
http://www.jyotidehliwal.com/
http://www.jyotidehliwal.com/
http://www.jyotidehliwal.com/2015/01/blog-post_25.html
true
7544976612941800155
UTF-8
Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy