सिर्फ़ कानुन से नहीं... इन तरीकों से लग सकती है शादी की फ़िजुलखर्ची पर रोक!

सिर्फ़ कानुन बनाने से शादियों की फ़िजूलखर्ची पर रोक नहीं लग सकती! हमें युवाओ को कुछ हट कर, अलग तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करना होगा।

सिर्फ़ कानुन से नहीं... इन तरीकों से लग सकती है शादी की फ़िजुलखर्ची पर रोक!
शादी...हर इंसान का सुनहरा ख़्वाब! हर इंसान चाहता है कि उसकी या उसके बच्चों की शादी बड़ी धूमधाम से हो...इतनी धूमधाम से कि लोग सालों तक याद रखें! अरे, शादी तो फ़लाने के यहां की थी...क्या निमंत्रण पत्रिका छपवाई थी...क्या डेकोरेशन था...मेहमानों को रुकने के लिए बहुत ही बड़ी होटल बुक की थी...बाजेवाले पंजाब से आएं थे...कैटरर्स दिल्ली के थे... मिठाई तो इतने तरह की थी कि बस पूछो ही मत...मानना पड़ेगा दिल खोल कर ख़र्चा किया शादी में...भई, शादी हो तो ऐसी...वा...ऊ...मजा आ गया था!!!
यह सब बातें हम रोज़मर्रा के जीवन में आए दिन सुनते रहते है। यह सुन-सुन कर हर किसी की स्वाभाविक इच्छा होती है कि उसकी या उसके बच्चों की शादी वह बड़ी धूमधाम से करें। लेकिन हम भारतीयों के इस सपने पर सरकार डंड़ा चलाने की सोच रही हैं। अभी तो हम नोट बंदी की कड़वी दवाई भी ठीक से गीटक नहीं पाए कि एक और कड़वी दवाई पिलाने की तैयारी हो रही हैं।

क्या है शादी की फ़िज़ूलखर्ची का बिल
बिहार के बाहुबली नेता पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन ने लोकसभा में यह बिल पेश किया है। इस बिल में शादियों में होनेवाली फ़िज़ूलखर्ची पर नकेल कसने की बात की गई है। बिल के मुताबिक 5 लाख से ज्यादा खर्च करने पर उसका 10% ग़रीबों को दान करना होगा। इतना ही नहीं, शादी में कितने मेहमान बुला सकते है एवं खाने के मेन्यु में कितने व्यंजन होंगे ये भी इस बिल में होगा। जम्मू-कश्मीर की सरकार ने तो इस कानून को लागू भी कर दिया है। जिसके मुताबिक लड़के की शादी में 400 मेहमान और लड़की की शादी में 500 मेहमानों की संख्या निर्धारित की है। खाने के मेन्यू में 2 स्वीट डिश के साथ 7 शाकाहारी और 7 मांसाहारी व्यंजन ही परोसे जा सकते है।

क्या कानून से शादी की फ़िज़ूलखर्ची पर रोक लग सकती है?
हमारे देश में कानून की हालत यह है कि वहां पर संसद में एक कानून पास भी नहीं होता उसके पहले ही उस कानून से बच निकलने के दस रास्ते हमारे होनहार वकील ढूंढ निकालते है। क्या हमारे यहां कन्या-भ्रूण हत्या, बाल विवाह, दहेज़, भ्रष्टाचार इन पर कानून नहीं बने है? क्या कानून बनने से इन पर रोक लग सकी है? नहीं न? आज किसी भी कानून की असलीयत यह हो गई है कि जितना हम कानून को कठोर बनायेंगे, उतना ही उसे तोड़ने के लिए हम लोगों को प्रोत्साहित करेंगे। लेकिन यह बात सच है की कानून बनने से अपराधो पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकती, पर अपराधों में कमी जरुर आती है। ठीक उसी प्रकार कानून बनने से शादी की फ़िजूलखर्ची पर भी सिर्फ़ कुछ प्रमाण में रोक लग सकती है।

इन वजहों से किया जाता है शादियों में ज्यादा खर्च
शादी की फ़िजूलखर्ची पर रोक लगाने के रास्ते ढूंढने से पहले हमें यह देखना चाहिए कि आखिर ऐसी कौन सी वजहे है जिस कारण इंसान अपने खुन-पसीने की कमाई को शादी में फ़िजूलखर्ची कर उडाता है।
• परंपरावादी सोच
हम भारतीय ग़जब के परंपरावादी लोग है। परंपरा निभाने के लिए हम कुछ भी कर सकते है...कुछ भी...!!! हमारे मन में बहुत गहरे में कहीं यह बात घर बना कर बैठी है कि मेरी शादी किसी राजकुमार या राजकुमारी से बड़ी धूमधाम से होगी। हमारी ऐसी परंपरावादी सोच को दुनिया का कोई भी कानून बदल नहीं सकता। ऐसी कई परंपरावादी रीति-रीवाजे है जिसके आगे हमारे कानून ने घुटने टेके है। जैसे कि मध्यप्रदेश के छिंदवाडा का गोटमार मेला जिसमें पांढुरना और सांवरगांव के लोग एक दूसरे के उपर पत्थर बरसाते है। जिससे सैकड़ो लोग घायल होते है लेकिन कानून अभी तक इसे नहीं रोक पाया है। वैसे ही तामिलनाडु का जल्लीकट्टू का खेल जिसमें बैलों को काबू में किया जाता है, जिसके कारण कुछ लोगों की जान जाती है, तो कई लोग घायल होते है। लेकिन कानून ऐसे भयानक खेलों के आयोजनों पर रोक लगाने में असफल रहा है। ऐसी ही एक परंपरावादी सोच कि शादी धूमधाम से ही होनी चाहिए के वशीभुत होकर इंसान शादी में फ़िज़ूलखर्ची करता है।
• अपने अरमान पूरे करने के लिए
भई, शादी हमारी...पैसा हमारा...हमने बड़ी मेहनत से पाई-पाई जोड़ कर जमा किया कि बच्चों की शादी धूमधाम से करेंगे... तो फ़िर लोकतांत्रिक देश में भी ये कैसी हिटलरशाही कि हम हमारा ही पैसा अपनी मनमर्जी से खर्च न कर सके! हमारे अरमान हम बच्चों की शादी में ही पूरे नहीं करेंगे तो भला कब करेंगे? हर इंसान धुमधाम से शादी कर अपने अरमान पुरे करना चाहता है।
• अपना स्टेट्स दिखाने के लिए
अब आप ही बताइए...इंसान जी तोड मेहनत कर कर, पाई-पाई जोड कर पैसा क्यों बचाता है? इसलिए ही न कि अपने बच्चों की शादी में खूब खर्च कर अपने वैभव का प्रदर्शन करें! अरे...लोगों को भी तो पता चले कि आखिर हमारे पास कितना पैसा है! यदि हम बच्चों की शादी सादगी से करेंगे तो लोगों को हमारा स्टेट्स कैसे पता चलेगा? कहा जाता है कि अमीरों का ज्यादातर समय और पैसा यहीं बात बताने में खर्च होता है कि वे कितने अमीर है!!

इन तरीकों से लग सकती है शादी की फ़िजूलखर्ची पर रोक
हम किसी की खुशी पर क़ानूनन रोक नहीं लगा सकते। जिसका जितना बजट है वो उतना खर्च करेगा। आखिरकार भारत में लोकतंत्र है और हर इंसान को इतनी तो स्वतंत्रता होनी ही चाहिए कि वो अपना खुद का पैसा अपने मन मुताबिक खर्च कर सकें। लेकिन हम कुछ तरीके अपना कर शादी की फ़िज़ूलखर्ची पर रोक लगा सकते है।
• कुछ अलग हटकर करने के लिए प्रेरित कर
आज का युवा कुछ अलग हट कर करना चाहता है, जिससे उसकी शादी एक यादगार बनी रहे। ये अलग हट कर कुछ भी हो सकता है। कुछ अलग करने के चक्कर में कभी-कभी ये लोग अजीब सी हरकते करने को भी तैयार रहते है। जैसे कि अभी हाल ही में एक युवक द्वारा काटे गए जन्मदिन के केक का किस्सा बताती हूं। होस्टल में रह रहे इस युवक के मुताबिक वो और उसके दोस्त हर बार जन्मदिन का केक कुछ अलग अंदाज में काटते है। कभी बाइक की सीट पर तो कभी कार के सामने के बाज़ू में या कार की छत पर...। लेकिन इस बार कुछ और अलग करना था। ये लोग घुमते-घुमते एक दोस्त के फार्म हाउस पर पहुंच गए। वहां पर केक काटने की जगह ढुंढने लगे...और अंत में जिस जगह पर इन लोगों ने केक काटा, वो जगह मुझे बताने में भी संकोच हो रहा है...इन लोगों ने गाय के गोबर पर केक रख कर काटा! जिस गोबर के नाम से ही आज की पीढ़ी तुनकती है, उस गोबर पर केक काटा! मेरे यह पूछने पर कि तुम लोगों को घिन नहीं आई? तो उसने कहा गोबर के उपर तो केक के निचे का खड्डा था न! हमें तो सिर्फ़ कुछ अलग करना था ताकि एक याद बनी रहें। ये है आज के कुछ युवा कि सोच! इस वाक़ये से मुझे लगता है कि यदि हम युवाओं के सामने कुछ अलग हट कर करने का उदाहरण पेश कर सके तो शायद ये लोग तैयार हो सकते है...! जैसे महाराष्ट्र के अजय मुनोत ने अपनी बेटी की शादी मे 90 बेघर लोगों को घर दिया। साथ ही HIV ग्रस्त और अनाथालयों के बच्चों को शादी में VIP बना कर बुलाया। यदि उन्होनें यहीं पैसा धुमधाम से शादी करने में लगाया होता तो लोग सिर्फ़ चर्चा कर कर रह जाते कि बाप रे...कितनी भव्य शादी की! लेकिन जिन 90 बेघर लोगों को उन्होनें घर बना कर दिया सिर्फ़ वे ही लोग नहीं तो उनकी आने वाली पीढ़ी भी दिल से उनका शुक्रिया अदा करेगी एवं दुआएं देगी। साथ ही जिन HIV ग्रस्त और अनाथालयों के बच्चों को उन्होनें शादी में VIP बना कर बुलाया वे भी ताउम्र इन यादों को दिल में संजो कर रखेंगे। क्योंकि जिन लोगों को सारी उम्र सिर्फ़ तिरस्कार का सामना करना पडता है, उन लोगों के लिए ये शादी स्वर्ग मिलने की खुशी से कम नहीं होगी! इसी प्रकार कुछ लोगों ने शादी से पहले समाज के गरीब घरों में जाकर टॉयलेट बनवायें।

• अमीरों द्वारा सादगी और कम खर्चों में हुई शादियों का बड़े पैमाने पर प्रचार कर कर
यदि हम अमीर लोगों द्वारा सादगी से हुई शादियों का सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर प्रचार करेंगे, तो सोशल मीडिया पर हुए नाम से युवा प्रभावित होंगे। क्योंकि नाम के लिए ही तो इंसान सब कुछ करता है! जैसे कि जब मैने अखबार में पढ़ा कि सलमान खान के पिता सलीम खान ने अपनी बेटी अर्पिता की शादी सादगी से करने का निर्णय किया तो इस ख़बर पर मैने एक ब्लॉग पोस्ट लिख कर इसे प्रसारित करने का प्रयत्न किया। हालांकि बाद में यह शादी धूमधाम से ही हुई थी। आप कह सकते है कि तुम्हारा ब्लॉग आखिर पढ़ते ही कितने लोग है? लेकिन मुझे लगता है कि सिर्फ़ एक व्यक्ति ने भी मेरा ब्लॉग पढ़ कर सादगी से शादी कि तो मेरा उद्देश सफल हो गया! इस बारे में मेरी ब्लॉग पोस्ट "काश, ऐसी खबरे बार-बार पढने मिले---!! - ( भाग - 2 )"  पढ़िए।

• समाजसेवा के लिए प्रेरित कर
आज के पीढ़ी के मन में समाजसेवा का ज़ज़्बा है। लेकिन वास्तव में यह हमारी कमजोरी ही है कि हम उनके इस जज़्बे को सही दिशा नहीं दे पा रहे है। यदि हम युवाओं को यह बताने में कामयाब रहें कि शादी के माध्यम से भी समाजसेवा की जा सकती है तो शायद इन फ़िजूलखर्ची पर रोक लग सकती है। इसका बेहतरीन उदाहरण पेश किया है मध्यप्रदेश के इंदौर में रहने वाले आदित्य तिवारी ने। इनके बारे में और अधिक जानकारी के लिए पढ़िए "इसे कहते है सच्ची समाजसेवा!"

• सादगी से भी शादी में मौज़-मस्ती की जा सकती है यह समझाकर 
जब हम किसी अमीर की शादी में जाते है तो मुंह से निकलता है...वा...ऊ...! लेकिन जब हम किसी ग़रीब की शादी में जाते है तो वहां दिल को छुने वाला मंजर होता है। दिल को एक तरह का सुकून मिलता है। वास्तव में मौज़-मस्ती दिल से की जाती है न कि पैसों से...! यहीं बात हमें सभी को समझानी होगी।

• यह कानून जनता की बेहतरी के लिए है यह समझाकर
मोदी जी ने अपने लगभग तीन वर्षों के कार्यकाल में सबसे महत्वपुर्ण बात यहीं की है कि भारत की जनता को विश्वास दिलाया है कि वे जो कुछ कर रहें है वो हमारी बेहतरी के लिए है। इसलिए ही नोटबंदी के बाद लाखों लोग अपने ही खुन-पसीने की कमाई का पैसा बैंक से निकालने के लिए घंटों लाइन में लगे रहे। लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन लोगों ने इतनी तकलीफे सिर्फ़ इसलिए सहीं कि उन्हें भरोसा हो गया था की ये उनकी बेहतरी के लिए है। ठीक उसी प्रकार यदि हम लोगों को यह बताने में कामयाब रहें कि सादगी से शादी करने में उनका स्वयं का क्या-क्या फ़ायदा है तब ही लोग सादगी से शादी करने के लिए प्रेरित हो सकते है!

निवेदन-
यदि आप के पास सादगी से शादी करने के लिए एवं कुछ अलग हट कर करने के लिए नए आइडिया है तो कृपया टिप्पणी द्वारा बताइएगा। 

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COMMENTS

BLOGGER: 26
  1. दिनांक 30/03/2017 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंदhttps://www.halchalwith5links.blogspot.com पर...
    आप भी इस चर्चा में सादर आमंत्रित हैं...
    आप की प्रतीक्षा रहेगी...

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  2. बहुत ही सुन्दर विषय चुना है आपने...शादी के नाम पर फिजूलखर्ची पर रोक होनी ही चाहिए हाँ ऐसे लोगों को गरीबों की मदद के लिए प्रोत्साहित किया जाए तो ...पैसा नेकी करने में लगे साथ ही यह कुप्रथा भी कम हो और जो ऐसा नहीं कर पाते वह हीन भावना से निकलने के लिए कर्जाजा लेने से भी बचे...

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  3. Wah ,jyoti ji ,ek acche vishay ko leker bahut khoob likha hai aapne .ab aavashyak ho gaya hai in rivajon main badlav lana .

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (30-03-2017) को

    "स्वागत नवसम्वत्सर" (चर्चा अंक-2611)

    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. दुनिया दिखाबे पे चलती हैं , अब बस ये चलन तोड़ना होगा

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  6. I totally appreciate the step to stop unnecessary expenditure in marriages those are happening now a days, you have covered all the necessary points, in most of the cases the show is the reason.
    India garobo ka desh hai...aisa sunne ko milta hai phir bhi ajeeb lagta hai jab koi middle class family shadi me 5-6lakh bas yun hi uda deta hai ya phir jayala deta hai(Patake phorke).

    waise toh garibo ko khilne pilane ki baate sabhi karte hai par shadi ek bhi gareeb ko newta nahi milta.
    I will alwyas support such bil.
    You are really very courageous that's why you have made this post.

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    1. सच कहा ज्योतिर्मोय...हर कोई अपने पैसों का दिखावा करना चाहता है और इस समस्या की असली वजह यहीं है।

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  7. ये एक व्यक्ति विशेष की सोच पर निर्भर करता है , जहाँ तक मैं समझता हूँ कि वो कितना औरों के बारे में सोचता है !

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  8. बहुत ही सही विषय पर चर्चा ज्योति जी फिजूल खरची पर आवयशक

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  9. सबसे पहले तो आपको धन्यवाद ज्योंति जी इतने अच्छे विषय पर लेख लिखने और हम लोगो के साथ शेयर करने के लिए। शादी में फिजूलखर्ची पर रोक होनी ही चाहिए और इसके लिए कानून बने तो बहुत अच्छी बात हैं और उससे भी अच्छी बात कि कुछ प्रतिशत गरीबो को भी दिया जाएं ।

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  10. Bhut hi acchi jankari di h aap ne jyoti ji samaj me wo hi vakti upar aata hu jo nyi soch rakhta h thankyou for sharing keep posting keep visiting

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  11. V inspiring post Jyotiji! Society would be much better if each one takes such progressive initiatives.

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  12. jyoti ji apke vichar social life me logo ko motivate karne vale h. apne jo prbhav logo par chhoda h uska result milne me jyada din nahi h jab sabhi fijulkharchi ko avoid karna shuru krne lagenge

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    1. कुमार जी, मैं तो सिर्फ़ इतना ही कहूंगी कि काश... ऐसा हो! सिर्फ़ एक व्यक्ति को भी मैं प्रेरणा दे पाई तो मेरा ब्लॉगपोस्ट लिखने का मकसद पूरा हो जाएगा।

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  13. ज्योति जी, लेख का विषय और विस्तार दोनों में दम है. और यह भी कि फिजूलखर्ची करने वालों को भी इसका भान है. पर इसका गुमान भी है. समझते हुए भी सामाजिक मर्यादाओं में बहजाते हैंलोग. कानून नहीं मानसिकता बदलनी होगी इनको. वह पैसा समाज कल्याण में बखूबी लग सकता है. अनाथालयों में, वृधाश्रमों में सेवाकार्य हो सकता है. एक बात और यदि धार्मिक पद्धति से हटकर कोर्ट मेरेज कीतरफ बढ़ा जाएतोगरीब तबका मजबूरन कर्जदार होने से बच सकेगा.

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  14. ज्वलंत विषय पर बहुत हाई अच्छी पोस्ट ... आज ये समस्या इतनी गहरी है की कई लोग हमेशा के लिए करजे में डूबना मंज़ूर करते हैं पर शादियों में ख़र्चे काम करना नहीं ... बहुत अच्छे सुझाव हैं आपके सभी ...

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  15. बहुत ही सुंदर और उपयोगी जानकारी। बहुत ही काम की जानकारी है। सही कहा है आपने कानून से कुछ नहीं होने वाला। कानून तो अपने देश में ठीक से इंप्लीमेंट होता ही नहीं है। सामाजिक अवेयरनेस से ही इस समस्या का कुछ हल निकल सकता है।

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  16. ज्योति जी, बहुत ही जरूरी जानकारी आपने शेयर की। आजकल लोग शादी पर बहुत पैसा खर्च कर रहे है। जैसे कि आपने लिखा ही है, यह उनका निजी मामला है,इसलिए अधिक तो कुछ नही कह सकते ,लेकिन अगर जब किसी की शादी हो तो वह गरीबों को भी दावत दे दे तो कितना बढ़िया। या फिर उनके लिए कुछ दिनों तक लंगर चलता ही रहे,तो सभी दूआ देंगे, या उनके खाने-पीने का लंबे समय तक इंतजाम। क्योंकि लंगर में खर्चा ज्यादा अधिक नही होता। जितना खर्च शहर के एक विवाह में लगभग 500 से 700 लोगो के लिए हो जाता है, उतने में 500 से अधिक लोग 2महीनों से अधिक खाना खा सकते है वो भी बिल्कुल बढ़िया quality का। ऐसा करने से उसके विवाह की दावत कितने ही अधिक दिनों तक चलती रहेगी और लोगो की दुआए भी मिलेंगी।


    लेकिन जैसे आपने bill पास होने वाला बात कही, उससे सहमत नही हूँ, 7 मांसाहारी व्यंजन, हमारे समाज मे विवाह को सबसे मांगलिक कार्य माना जाता है और सब कुछ शुभ किया जाता है, लेकिन क्या कोई किसी को मारकर खुशी प्राप्त कर सकता है? क्या कोई किसी को नशे में करके खुद मांगलिक कार्य मे सफल हो सकता है?


    हम अधिक पुरानी बात न भी करे लेकिन महाराज विक्रमादित्य से लेकर महाराज हर्षवर्धन तक हमारा हिंदुस्तान अपनी परंपरा में था और सामाजिक और आर्थिक दशा भी बढ़िया थी, और अधिकतर शाकाहार का प्रचार था और मांसाहारी को धर्म के विरुद्ध माना जाता था।

    कहने का मतलब की वैसे तो हम परंपरा ,रीति-रिवाज की बाते करते है तो फिर यह मांसाहार कहा से आ जाता है? वैसे मंत्रो का ख्याल रखना, सभी मंगल कार्यों का ख्याल रखना तो फिर अमंगल कार्य कहा से कर जाते है।

    बस सिर्फ इतना कहूंगा, विवाह बहुत ही शुद्ध कार्य है और इसमें अमंगल करके इसे खराब न करे।

    एक और बात कोई भी देख ले,हिंदुस्तान में जितने भी विवाह मांगलिक कार्यो के अनुसार होते है और जो लोग 100% शुद्ध होते है, उनमे रिश्ता बिगड़ने के बहुत कम chances होते है।


    लोग विवाह पर खर्च जैसा भी करे, उसी प्रकार आए गरीबो की सेवा भी करे, तो मज़ा ही आ जाए और इस हिंदुस्तान में कोई भी गरीब भूखा न सो पायेगा।

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    1. निखिल जी,ये जो मांसाहारी व्यंजनों की बात है वो सिर्फ जम्मु कश्मीर सरकार ने ये बिल पास किया। हो सकता है वहां पर इसका ज्यादा प्रमाण में सेवन होता हो। मुझे इस मामले में कुछ भी जानकारी नही है।
      आपने जो लंगर की बात है वो जरूर काबिले तारीफ है। काश ऐसा हो...

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  17. Ek behtareen post.....Mere hisab se Shadi me hone vala kharcha bahut jyada hota hai....use km kiya jana chaiye.....bahut se log to apne baccho ki shadi ke liye jeevan bhar kamate hain....ladki paida hote hi shadi ke kharche ki chinta....kyo hai yeh sab....keval ek hi karan hai....ADHIK KHARCHA....padosh ke Sharma ji ne apni beti ki 5000000 ki shadi ki, hame bhi karni chaiye....wah! kya soch hai....Hame soch badalni hogi....taki kamaya gaya pesa sahi kaam aa sake.........

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  18. अति सुंदर विचार, मै अपने बेटे की शादी साधारण ही कर रहा हुं, कोई दिखावा नही

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  19. एकदम सही है शादी में ज्यादा खर्च न करना ममेने भी अपने बेटे की शादी सिम्पल करी ओर जो बचत हुई उससे बेटे को घर का सामान खरीद के दिया क्यों कि वो विदेश में रहता है

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नाम

'रेप प्रूफ पैंटी',1,#मीटू अभियान,1,15 अगस्त,3,26 जनवरी,1,8 मार्च,1,अंकुरित अनाज,1,अंगदान,1,अंगुठी,1,अंग्रेजी,2,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस,3,अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस,1,अंधविश्वास,10,अंधश्रद्धा,8,अंधश्रध्दा,2,अंश,1,अग्रवाल,1,अचार,6,अच्छी पत्नी चाहिए तो...,1,अच्छे काम,1,अजब-गजब,2,अतित,1,अदरक,1,अदरक का चूर्ण,1,अदरक-लहसुन पेस्ट,1,अनमोल वचन,10,अनुदान,1,अनुप जलोटा,1,अन्न,1,अन्य,23,अन्याय,1,अपेक्षा,1,अप्पे,4,अमरुद,1,अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी,1,अमीरी,1,अमेजन,1,अरुणा शानबाग,1,अरुनाचलम मुरुगनांथम,1,अवार्ड,2,असली हीरो,12,अस्पतालों में बच्चों की मौत,1,आंवला,3,आंवला चटनी,1,आंवला लौंजी,1,आइसक्रीम,1,आईसीयू ग्रेंडपा,1,आज के जमाने की अच्छाइयां,1,आजादी,2,आज़ादी,1,आतंकवादी,2,आत्महत्या,2,आत्मा,1,आदित्य तिवारी,1,आम,6,आम का अचार,1,आम का पना,1,आम का मुरब्बा,1,आम की बर्फी,1,आम पापड़,1,आरक्षण,1,आलू,1,आलू पोहा अप्पे,1,इंसान,2,इंस्टंट डोसा,1,इंस्टंट स्नैक्स,1,इंस्टट ढोकला,1,इंस्टेंट कुल्फी,1,इडली,2,इन्डियन टाइम,1,इमली,1,इरोम शर्मिला,1,ईद,1,ईश्वर,6,ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना,1,उटी,1,उपमा,1,उपवास,1,उपहार,2,उमा शर्मा,1,ऋषि पंचमी,1,एक सवाल,1,ऐनी दिव्या,1,ऐश ट्रे,1,ऑनलाइन,1,और इज्जत बच गई,1,कंघा,1,कच्चे आम,1,कच्चे आम का चटपटा पापड़,1,कटलेट्स,1,कद्दु,1,कद्दु के गुलगुले,1,कन्यादान,3,करवा चौथ शायरी,1,करवा-चौथ,3,कल्याणी श्रीवास्तव,1,कहानी,14,कांजी,1,कानून,1,कामवाली बाई,4,कालीन,1,किचन टिप्स,13,किटी पार्टी,1,किराए पर बीवियां,1,कुंडली मिलान,1,कुरकुरे,1,कुल्फी,1,कुल्फी प्रीमिक्स,1,कूकर,1,केईएम् अस्पताल,1,कॉर्न,4,कॉर्न इडली,1,कौए,1,क्षमा,2,खजूर,1,खत,3,खबर,3,खरबूजा,1,खांडवी,1,खाद्य पदार्थ,1,खाना,1,खारक,1,खारी गरम,1,खुले में शौच,1,खुशी,2,खेल,1,गणतंत्र दिवस,1,गणेश चतुर्थी पर शायरी,1,गणेश चतुर्थी प्रसाद रेसिपी,1,गरम मसाला,1,गर्दन दर्द,1,गर्भाशय,1,गलत व्यवहार,1,गलती,2,गाजर,4,गाजर अप्पे,1,गाजर के लड्डू,1,गाजर-मूली के दही बडे,1,गाय,1,गुजरात,1,गुड टच और बैड टच,2,गुलगुले,1,गुस्सा,1,गृहस्वामिनी,1,गोरखपुर,1,गोल्फ,1,गौरी पराशर,1,घंटी,1,घिया,1,घी,1,घी की नदी,1,चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति,1,चकली,1,चटनी,6,चाँद पर जमीन,1,चाय,1,चाय मसाला,1,चावल,2,चावल के पापड़,1,चाशनी,1,चीज,1,चीला,2,चूर्ण,4,छींक,1,छोटी बाते,1,छोटे लेकिन काम के टिप्स,1,छोटे-छोटे काम के टिप्स,2,जज्बा,1,जनसंख्या,1,जन्मदिन,3,जन्मदिन की शुभकामनाएं,2,जन्माष्टमी,2,जमाना,1,जाट आंदोलन,1,जात-पात,1,जाति,1,जाम,1,जिंदगी,1,जीएसटी,1,जीरो ऑइल रेसिपी,5,जोक्स,5,जोयिता मंडल,1,ज्वार की रोटी,1,ज्वेलरी,1,झारखंड,1,झाले-वारणे,2,झूठ,1,टिप्स कॉर्नर,25,टी.व्ही. और सिनेमा,1,ठंडे पेय,1,ठेचा,1,डॉक्टर,2,डॉटर्स डे,2,ढाबा स्टाइल सब्जी,1,ढोकले,1,तरबूज,1,तलाक,1,ताजे नारियल की बर्फी,1,तिल,2,तिल की कुरकुरी चिक्की,1,तिल के लड्डू,1,तेलंगाना,1,तोहफ़ा,1,थंडा पानी,1,दक्षिणा,1,दवा,1,दही,5,दही सैंडविच,1,दहेज,3,दाग-धब्बे,1,दान,1,दासी,1,दिपावली बधाई संदेश,3,दिशा,1,दीपावली शुभकामना संदेश,1,दीवाली रेसिपी,1,दुध पावडर,1,दुर्गा माता,1,दुल्हा,1,दुश्मन,1,दूध,2,देशभक्ति,3,देशभक्ति शायरी,2,देहदान,1,दोस्त,2,धनिया,1,धर्म,2,धर्मग्रंध,1,धार्मिक,26,नदी में पैसे,1,नन्ही परी,1,नमक पारे,1,नमकीन,1,नवरात्र,1,नवरात्र स्पेशल,2,नवरात्री रेसिपी,4,नववर्ष,2,नववर्ष की शुभकामनाएं,2,नाइंसाफी,1,नानी,1,नारियल बर्फ़ी,1,नारी,42,नारी अत्याचार,9,नारी शिक्षा,1,नाश्ता,1,निंबु का अचार,1,निचली 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पैनकेक,1,शकुन-अपशकुन,1,शक्करपारे,1,शनि देव,1,शब्द,1,शर्बत,1,शर्म,2,शादी,4,शादी की खरेदी,1,शादी की फ़िजूलखर्ची का बिल,1,शादी-ब्याह,3,शायरी,9,शिक्षक दिन,1,शिक्षा,4,शिवपुरी,1,शुभ मुहूर्त,1,शुभ-अशुभ,3,शुभम जगलान,1,श्राद्ध,3,श्राद्ध का खाना,1,श्रीकृष्ण,2,श्रेष्ठता,1,संस्कार,1,संस्मरण,9,सकारात्मक पहल,2,सच बोलने की प्रेरणा,1,सतबीर ढिल्लो,1,सपना,1,सफेद बाल,1,सब्जियों का अचार,1,सब्जियों की कांजी,1,सब्जी,2,समय,1,समाजसेवा,2,समाजिक,1,समाधान,1,समावत चावल,2,सर के बाल,1,सलाद,1,ससुराल,2,सहशिक्षा,1,सांवला या काला रंग,1,साउथ इंडियन डिश,2,साक्षात्कार,3,सागर में ज्वार,1,साफ-सफाई,1,साबुदाना,2,साबुदाना के अप्पे,1,साबुदाना पापड़,2,साबुदाने लड्डू,1,साबूदाना,2,सामाजिक,58,सामाजिक कार्यकर्ता,1,सालगिरह,5,सास,2,साहित्य,76,सिंगल पैरेंट,1,सिंदूर,1,सीख-सुहानी,1,सीनू कुमारी,1,सुखी,1,सुजी,1,सूजी,1,सूजी के लड्डू,1,सेनेटरी नेपकिन,1,सेब,1,सेलिब्रेटी,1,सेवई उपमा,1,सेहत,1,सैंडविच,1,सौतेली माता,1,स्कूल,1,स्त्री,2,स्नैक्स,29,स्वतंंत्रता दिन,1,स्वतंत्रता दिन,2,स्वर्ग और नर्क,1,स्वाभिमान,1,स्वास्थ,2,स्वास्थ्य,8,हंस,1,हनुमान जी,2,हरी मटर के पैनकेक,1,हरी मिर्च,3,हरी मिर्च का अचार,1,हलवा,2,हाथी,1,हिंदी उखाणे,1,हिंदी उखाने,1,हिंदी दिवस,1,हिंदी शायरी,21,हैंडल,1,होटल,1,होममेकर,1,होली की शुभकामनाएं,1,
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: सिर्फ़ कानुन से नहीं... इन तरीकों से लग सकती है शादी की फ़िजुलखर्ची पर रोक!
सिर्फ़ कानुन से नहीं... इन तरीकों से लग सकती है शादी की फ़िजुलखर्ची पर रोक!
सिर्फ़ कानुन बनाने से शादियों की फ़िजूलखर्ची पर रोक नहीं लग सकती! हमें युवाओ को कुछ हट कर, अलग तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करना होगा।
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
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