महिलाओं को इतनी तो आजादी दो कि वे अपनी इच्छा से कपड़े पहन सकें!!

क्या वास्तव में छेड़खानी, बलात्कार की सभी घटनाएं सिर्फ छोटे और आधुनिक कपड़े पहनने से ही होती है? क्यों महिलाओं के कपडों को लेकर जब-तब बयान जारी कर दिए जाते है?

महिलाओं को इतनी तो आजादी दो कि वे अपनी इच्छा से कपड़े पहन सकें!!
सोशल मीडिया पर, अखबारों में, टेलीविजन पर, जहां देखो वहां महिलाओं ने क्या पहनना चाहिए और क्या नहीं पहनना चाहिए इस पर ढेरों बयानबाजी हो रहीं है। जैसे,

“विदेशी महिला सैलानी भारत में स्कर्ट पहनकर न घुमें”

“पी वी सिंधु भी न...देखो मंदिर जाने के लिए साड़ी पहन ली”

“लड़के न बहके इसलिए रोहतक के स्कूल में स्कर्ट बैन”

ऐसी बयानबाजी देख-सुनकर दिमाग सुन्न हो जाता है! कहां तो हम चाँद और मंगल पर जाने की बातें करते है, नारी-पुरुष समानता की बातें करते है और कहां हमारी सोच, महिलाओं के कपड़े के इर्द-गिर्द ही भटकती रहती है! अरे...थोड़ा महिलाओं को भी सांस लेने दो...इतनी तो आज़ादी दो उन्हें कि वे अपनी इच्छा से कपड़े पहन सकें!! कुछ पुरुष तो इससे भी आगे जाकर कहते है कि लड़कियों ने जीन्स नाभी से नीचे नहीं पहननी चाहिए...साड़ी की ब्लाउज के गले ज्यादा डीप नहीं रखने चाहिए! इससे पुरुषों की भावनाएं उत्तेजित होती है। लड़कियों के पहनावे पर टिप्पणी करनेवाले कुछ बुजुर्ग ऐसे भी है, जिनकी खुद की बेटियां आधुनिक लिबास पहनती है, लेकिन दूसरी लड़कियों/ महिलाओं को वे शालीनता का पाठ पढ़ाते है। महिलाओं को शालीनता का पाठ पढ़ानेवाले ये बुजुर्ग ये नियम अपने घर की बहू-बेटी पर लागू नहीं करते! जैसे कश्मीर के अलगाववादी गरीब कश्मीरी बच्चों के हाथों में पत्थर थमाते है और खुद के बच्चों को कश्मीर से दूर सुरक्षित जगहों पर रखते है!

जब भी कहीं महिलाओं के साथ बर्बरता की कोई खबर सुर्खियों में आती है, तो बिना किसी शुरवाती जानकारी के लोगों की पहली प्रतिक्रिया यहीं होती है कि यह सब आधुनिकता का तकाजा है, महिलाएं भड़काऊ कपड़े पहनती है इसलिए...! क्या वास्तव में छेड़खानी, बलात्कार की सभी घटनाएँ सिर्फ छोटे और आधुनिक कपड़े पहनने से ही होती है? हाल ही में हुए बुलंदशहर गैंगरेप में क्या उन माँ-बेटी ने भडकाऊं कपड़े पहन रखें थे? सादे कपड़े में और परिवारवालों के साथ रहने पर भी क्यों हुआ उनके साथ गैंगरेप? दो-तीन साल की मासूम बच्चियों पर क्यों होते है बलात्कार? दरअसल नारी अपना कितना शरीर दिखाएं या कितना छिपाएं, यह महत्वपुर्ण नहीं है, क्योंकि कामभावना मस्तिक में जन्म लेती है और तरंगे सारे शरीर को झंकृत कराती है। बलात्कार या छेड़खानी की घटनाएँ कपड़ों की वजह से नहीं होती, वो होती है गंदी, बीमार और विकृत मानसिकता के कारण।

आजाद देश की आजाद महिलाओं को इतनी भी आजादी क्यों नहीं है कि वे अपनी मनमर्जी से कपड़े पहन सकें। क्यों महिलाओं के कपडों को लेकर जब-तब बयान जारी कर दिए जाते है? क्या महिलाओं ने कभी भी पुरुषों के कपड़ों को लेकर कोई टीका-टिप्पणी की? जब पुरुष अपनी मनमर्जी के कपड़े पहन सकते है तो महिलाएं क्यों नहीं? कुछ लोगों को महिलाओं के छोटे कपड़े से ही तकलीफ़ नहीं है, उन्हें तो पी वी सिंधु के साड़ी पहनने पर भी बयानबाजी करने का मौका मिल जाता है! भई... जब खेल के मैदान पर छोटे कपड़े पहनने से सहुलीयत होती है, तो छोटे कपड़े पहन लिए। मंदीर जाते वक्त साड़ी पहनने की इच्छा हुई, तो साड़ी पहन ली! आखिर क्या हो गया है हमारी सोच को? हम किसी महिला की प्रतिभा से ज्यादा उसके परिधान के तरफ ख्याल क्यों देते है? माना कि हमारा समाज पुरुषप्रधान समाज है, लेकिन ''जिसकी लाठी उसकी भैंस'' यह तो जंगल का नियम था। असल में लाठी से मुक्त होना ही सुसंस्कृत होना है। यह बात पुरुषों को समझनी होगी।

मेरा यह सब कहने का तात्पर्य यह कदापि नहीं है कि आज़ादी के नाम पर महिलाएं नग्नता परोसे। लेकिन पुरुषों से नम्र विनंती है कि कृपया महिलाएं क्या पहने और क्या न पहने, कम से कम इतना सा निर्णय लेने की आज़ादी लड़कियों/महिलाओं को अवश्य दें!!

Keywords: women freedom, women's clothing, freedom, article on women empowerment, mahila sashaktikaran, women rights in hindi

COMMENTS

BLOGGER: 26
  1. Bahut sahi kaha aapne.mahilayo ka kam se kam itni to aazadi milni hi chahiye ki wo apni pasand se kapde pehen sake.

    उत्तर देंहटाएं
  2. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 02/09/2016 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. कुलदीप जी, मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत-बह्त धन्यवाद।

      हटाएं
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (02-09-2016) को "शुभम् करोति कल्याणम्" (चर्चा अंक-2453) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय शास्त्री जी, मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

      हटाएं
  4. यदि पुरुष ये आज़ादी महिलाओं को दे देंगे तो उन पर शासन कैसे कर पाएंगे... क्या पहनना है कहाँ जाना है क्या कहना है कैसे उठना बैठना है सब कुछ निर्धारित किया गया है पुरुष प्रधान समाज ने हमारे

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. wah! kya apni marji ke kapde pehnakar purush mahilao par shashan kar rahe hain??? nahi.....vo jamana gaya jab purush pradhan samaj tha...aaj sabhi ko samaan sdhikaar hain....aur kaha jaye to purusho ki jagah mahilao ko jyada kanooni adhikaar hain....aaj mahilayen har jagah tarakki kar rahi hain....aur aap keh rahi hain ki purush shashan karna chahate hain....agar esa hota to kya mahilayen aaj itna aage bad pati....chalo choriye...mere ek prash ka uttar dijiye....aaj ke purush to itne positive hain ki karodo berojgaar mahilayon se aaj bhi shadi kar rahe hain....lekin aaj mujhe kisi ek ladki ka name bataiye jo job par ho aur usne kisi berojgar ladke se shadi ki ho????? apne galebaan me bhi jhakiye......

      हटाएं
    2. अमुल जी, शिक्षा से कुछ हद तक जागरुकता आई है, लेकिन आज भी ज्यादातर मामलों में पुरुषों के लिए नारी भोग्या ही है। यह एक कड़वी सच्चाई है। कानुन ने नारी को समान अधिकार दिए है, सही है। कानुन से तो कन्या भृण हत्या और दहेज पर भी पाबंदी है, तो क्या ये मसले खत्म हो गए? आप के मुताबिक पुरुष बेरोजगार महिलाओं से शादी करते है ये उनका बडप्पन है, तो काश हम उस दौर में कभी पहूंच पाएं ... क्योंकि वास्तव में पुरुषों का अहं ही उन्हें इजाजत नहीं देता कि वे उनसे ज्यादा कमानेवाली लड़की से शादी करें! हमारे समाज की संरचना ही कुछ ऐसी है कि पुरुष कमाएंगे और महिला घर संभालेंगी। यह हमें जन्मघुटी की तरह घोट घोट कर पिलाया गया है। इसलिए ही ... महिलाओं की भी अपेक्षा रहती है कि उनका पति उनके ज्यादा कमाएं, उनसे सुपर हो!

      हटाएं
    3. Jyoti ji maansikta to dono taraf se badalni hogi....vese dono ko kandha se kandha milakar chalna chaiye....lekin demand itni hai ki baat kandha todkar aage badne ki ho rahi hai....vese 100 baton ki ek baat kahu.....AAJ KA TIME MAHILAYON KE LIYE "GOLDEN AGE" KA HAI.....aaj se pehle mahilao ko na to itne adhikar mile aur na hi itni ajadi....aur do-char log is ajadi ka virodh karte hain to karne do....isse koi fark nahi padta.....

      हटाएं
  5. जाने मानसिकता कब बदलेगी ..

    उत्तर देंहटाएं
  6. Acchi post likhi hai aapne lekin mai kuch kehna chahunga.....dekhiye kapde kai type ke hote hain....ek veh jo ham sote time pehnte hain aur ek veh jo ham market me jate time pehente hain....ab socho yadi sote time vale kapde yadi ham market me pehne to logo ki kya pratkriya hogi??? hame sabhi ka dhyan rakhna hai....khud ka bhi, bhartiya culture ka bhi aur saleenta ka bhi...kapde vahi pehnne chaiye jo shaleen lage....ek baat aur mahilao ke hi nahi purusho ke kapdo par bhi comment bahut hote hain...salmaan khan iska example hai....aazadi sabko hai lekin kuch bhi pehnne ko azadi nahi kehte hain balki koi bhi saleen kapde pehnne ko aajadi kehte hain....

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. अमुल जी, मैंने यह नहीं कहा कि महिलाएं अपनी मर्यादा छोड़े... आजादी के नाम पर अंगप्रदर्शन करें। जीस तरह पुरुषों को अपनी मान-मर्यादा का ख्याल है उसी तरह महिलाओं को भी अपनी मानमर्यादा का ख्याल है। लेकिन महिलाओं के कपड़ों को लेकर जिस तरह से आए दिन फतवे जारी किए जाते है, वो गलत है न? कई बार महिलओं की योग्यता से भी ज्यादा उनके पहनावे को महत्व दिया जाता है। ब्रिटेन की नई पीएम टरीसा कहीं भी जाती हैं तो उनके हील्स की फोटो क्लिक करने के लिए होड़ मच जाती है। यूके के प्रमुख अखबारों ने फ्रंट पेज पर उनके जूतों की चर्चा की। मजे लेते हुए। विश्व स्तर पर भी महिला की काबिलियत नहीं जूते देखे गए!क्यो?

      हटाएं
    2. jo dikhega vahi to click hoga.....talent dikhna chaiye...to talent hi click hoga...for example Shiv kheda ji....kya unke koi kapde dekhta hai?....nahi....vahi deekhta hai jo jyada show ho raha hota hai....

      हटाएं
    3. आपको क्या लगता है कि ब्रिटेन की नई पीएम टरीसा में काबिलीयत नहीं है इसलिए उनसे ज्यादा उनके जूते की चर्चा हुई?

      हटाएं
  7. आप ठीक कह रही हैं । ऐसी मानसिकता के चलते स्वतन्त्रता भी एक भ्रम ही है ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. bahut hi acche shabadon main aapne samaj ko baat bata dee.

    उत्तर देंहटाएं
  9. जाने मानसिकता कब बदलेगी .. यह विचारणीय प्रश्न है ???

    उत्तर देंहटाएं
  10. आप ने बहुत बाड़िया जानकारी सेयर की इसके लिए धन्यवाद, लेकिन मैं यहा पे आपके बतो पे कुछ प्रशन पूछना चाहूँगा, जैसे की उपर अमूल जी ने कहा वो भी बिल्कुल सही सवाल किए थे. लेकिन आप कहते है की लड़कियों पे कुछ प्राब्लम होता है जैसे - छेड़खानी या और कुछ भी. तो लोग बिना कुछ जाने उसके पहनावा को दोष देते हैं इसके बाद आपने कहा की ये मानसिकता कब बदलेगी,,,,,तो मैं पूछना चाहूँगा आपसे - 1. क्या लड़कियाँ सिर्फ़ इसलिए आगे नही बढ़ पा रही है क्यूंकी इसको छोटे-छोटे कपड़े पहने मे बेन हैं.,,?? अगर लड़कियो को ये इजाज़त मिल जाए तो क्या वो बहुत प्रोग्रेस कर जाएँगे..?? और जो महिलाए बहुत प्रोग्रेस किए हैं जैसे - अरुन्धति भट्टाचार्य जो की भारतीय स्टेट बैंक की चेयरपर्सन हैं या और कोई भी इन लोगो को ये आज़ादी था इसलिए प्रोग्रेस की...??? नही ये मानसिकता लड़को को नही लड़कियों को बदलना चाहिए,,, और जहा तक छेड़खानी की बात हैं,, तो कुछ पार्सेंट ये भी कारण होता है,,,क्यूंकी ये कल्चर विदेशी है ये भारतीय कल्चर नही हैं, अगर आप कपड़ो मे विदेशी कल्चर का फॉलो कर रहे हैं तो आपको ये भी पता होना चाहिए की वहाँ का नियम क्या हैं - जैसा भारत मे पिता को महत्व दिया जाता हैं लेकिन फॉरेन कॉंट्री मे मा को दिया जाता हैं क्यूंकी पिता कोई भी हो सकता हैं,, और ऐसे बहुत चीज़े हैं जो फॉरेन कॉंट्री मे अफ़राध नही होते हैं पर भारत मे उसे अफ़राध माना जाता हैं ये बात मैं यहाँ खुल के नही बोल सकता.... ऐसा क्यूँ होता हैं हमलोग हमेशा फॉरेन कॉंट्री का फॉलो करना चाहते हैं अपनी कल्चर को नही बढ़ाते...

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. छोटे-बड़े कपड़े पहनने का और प्रोग्रेस का कहीं कोई संबंध है, ऐसी बात तो मैंने नहीं कहीं है। इंसान प्रोग्रेस करता है, अपनी काबिलीयत से।
      मैने तो सिर्फ उस मानसिकता की बात की है, जिसके तहत महिलाओं की काबिलीयत से ज्यादा उसके परिधानों पर ख्याल दिया जाता है। बलात्कार और छेड़खानी के लिए महिलाओं के कपडों को दोषी ठहराया जाता है। ऐसी कोई घटना होते ही कपडों को लेकर जो बयानबाजी की जाती है, वो गलत है। बलात्कार और छेड़खानी के लिए असल में कुत्सित और विकृत मानसिकता दोषी है।

      हटाएं
  11. पाबंदी की बातें सिर्फ़ पुरुष ही नहीं महिलाएँ भी करती हैं। कपड़े सलीक़े दार हों, सुविधाजनक भी और पहनने वाले की मर्ज़ी के हों बस फूहड़ ना हों।

    उत्तर देंहटाएं
  12. Salute krta hu apki post ko. Lekin hmare india me kayi tarah ke log hai unki manskita ajib hoti hai. Bt i like your article

    उत्तर देंहटाएं
  13. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  14. हालांकि पुरुषवादी समाज में लोगों को ऐसे विचार रास नही आते। लेकिन आवाज़ तो उठानी ही होगी। बहुत ही उम्दा लेख। प्रभावी प्रस्तुति। आपके लेख को मेरी कुछ पंक्तियाँ अर्पित हैं-


    अहद उठी है ताब सी, जिगर में एक आब सी
    हुमक उठी है गर्जना, प्रपंच हैं ये वर्जना।

    सदा नियम रिवाज़ में, ये वंश ये समाज में
    युगों से बात बात में ,कुलों में और ज़मात में।

    सदा ही नार तिक्त क्यों, है भीड़ मगर रिक्त क्यों
    हे रंजना हे संजना, करो तो कोई वंचना।

    सहो नहीं अज़ाब यूँ, रहो नहीं अवाक् सी
    भड़क उठो भभक उठो, उत्तंग चण्ड आग सी।

    उत्तर देंहटाएं
  15. वा....व, अमित जी क्या बढ़िया कविता लिखी है। इतनी सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं

नाम

'रेप प्रूफ पैंटी',1,#मीटू अभियान,1,#साड़ीट्विटर,1,15 अगस्त,3,26 जनवरी,1,8 मार्च,1,अंकुरित अनाज,1,अंगदान,1,अंगुठी,1,अंगूर,1,अंगूर की लौंजी,1,अंगूर की सब्जी,1,अंग्रेजी,2,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस,3,अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस,1,अंधविश्वास,10,अंधश्रद्धा,9,अंधश्रध्दा,2,अंश,1,अग्निपरीक्षा,1,अग्रवाल,1,अचार,7,अच्छी पत्नी,1,अच्छी पत्नी चाहिए तो...,1,अच्छे काम,1,अजब-गजब,2,अतित,1,अदरक,1,अदरक का चूर्ण,1,अदरक-लहसुन पेस्ट,1,अनमोल वचन,10,अनुदान,1,अनुप जलोटा,1,अन्न,1,अन्य,23,अन्याय,1,अपेक्षा,1,अप्पे,4,अमरुद,1,अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी,1,अमीरी,1,अमेजन,1,अरुणा शानबाग,1,अरुनाचलम मुरुगनांथम,1,अवार्ड,2,असली हीरो,15,अस्पतालों में बच्चों की मौत,1,आंवला,3,आंवला चटनी,1,आंवला लौंजी,1,आइसक्रीम,1,आईसीयू ग्रेंडपा,1,आग,1,आज के जमाने की अच्छाइयां,1,आजादी,2,आज़ादी,1,आतंकवादी,2,आत्महत्या,3,आत्मा,1,आदित्य तिवारी,1,आम,9,आम का अचार,1,आम का पना,2,आम का मुरब्बा,2,आम की बर्फी,1,आम पापड़,1,आरक्षण,1,आलू,1,आलू पोहा अप्पे,1,इंसान,2,इंस्टंट डोसा,1,इंस्टंट स्नैक्स,1,इंस्टट ढोकला,1,इंस्टेंट कुल्फी,1,इडली,3,इन्डियन टाइम,1,इमली,1,इरोम शर्मिला,1,ईद,1,ईश्वर,6,ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना,1,उटी,1,उपमा,2,उपवास,1,उपवास की इडली,1,उपहार,2,उमा शर्मा,1,ऋषि पंचमी,1,एक सवाल,1,ऐनी दिव्या,1,ऐश ट्रे,1,ऑनलाइन,1,और इज्जत बच गई,1,कंघा,1,कंसन्ट्रेट आम पना,1,कच्चे आम,1,कच्चे आम का चटपटा पापड़,1,कटलेट्स,1,कद्दु,1,कद्दु के गुलगुले,1,कद्दू,1,कद्दू का बेसन,1,कन्यादान,3,कबीर सिंह मूवी,1,करवा चौथ शायरी,1,करवा-चौथ,3,कल्याणी श्रीवास्तव,1,कहानी,16,कांजी,1,कानून,1,कामवाली बाई,4,कालीन,1,किचन टिप्स,14,किटी पार्टी,1,कियारा आडवानी,1,किराए पर बीवियां,1,कुंडली मिलान,1,कुरकुरे,1,कुल्फी,1,कुल्फी प्रीमिक्स,1,कूकर,1,केईएम् अस्पताल,1,कॉर्न,4,कॉर्न इडली,1,कौए,1,क्षमा,2,खजूर,1,खत,5,खबर,3,खरबूजा,2,खरबूजे का शरबत,1,खरेदी,1,खांडवी,1,खाद्य पदार्थ,1,खाना,1,खारक,1,खारी गरम,1,खुले में शौच,1,खुशी,2,खेल,1,गणतंत्र दिवस,1,गणेश चतुर्थी पर शायरी,1,गणेश चतुर्थी प्रसाद रेसिपी,1,गरम मसाला,1,गर्दन दर्द,1,गर्भावस्था,1,गर्भाशय,1,गलत व्यवहार,1,गलती,2,गाजर,4,गाजर अप्पे,1,गाजर के लड्डू,1,गाजर-मूली के दही बडे,1,गाय,1,गुजरात,1,गुजराती डिश,1,गुड टच और बैड टच,2,गुरु पूर्णिमा,1,गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं,1,गुलगुले,1,गुस्सा,1,गृहस्वामिनी,1,गैस बर्नर,1,गोरखपुर,1,गोरा रंग,1,गोल्फ,1,गौरी पराशर,1,घंटी,1,घिया,1,घी,1,घी की नदी,1,चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति,1,चकली,1,चटनी,7,चना दाल,1,चाँद पर जमीन,1,चाय,1,चाय मसाला,1,चावल,2,चावल के पापड़,1,चाशनी,1,चींटी,1,चीज,1,चीला,2,चूर्ण,4,छाछ,1,छींक,1,छोटी बाते,1,छोटे लेकिन काम के टिप्स,2,छोटे-छोटे काम के टिप्स,2,जज्बा,2,जनसंख्या,1,जन्मदिन,3,जन्मदिन की शुभकामनाएं,2,जन्माष्टमी,2,जमाना,1,जलेबी,1,जाट आंदोलन,1,जात-पात,1,जाति,1,जाम,1,जिंदगी,1,जीएसटी,1,जीरो ऑइल रेसिपी,5,जोक्स,5,जोयिता मंडल,1,ज्वार की रोटी,1,ज्वेलरी,1,झारखंड,1,झाले-वारणे,2,झूठ,1,टिप्स कॉर्नर,30,टी.व्ही. और सिनेमा,1,ठंडे पेय,6,ठेचा,1,डर,1,डैंड्रफ,1,डॉक्टर,2,डॉटर्स डे,2,ढाबा स्टाइल सब्जी,1,ढोकले,1,तरबूज,2,तरबूज के छिलके का हलवा,1,तलाक,1,ताजे नारियल की बर्फी,1,तिल,2,तिल की कुरकुरी चिक्की,1,तिल के लड्डू,1,तेलंगाना,1,तोहफ़ा,1,थंडा पानी,1,दक्षिणा,1,दवा,1,दही,5,दही सैंडविच,1,दहेज,3,दाग-धब्बे,1,दान,1,दासी,1,दिपावली बधाई संदेश,3,दिशा,1,दीपावली शुभकामना संदेश,1,दीवाली रेसिपी,1,दुध पावडर,1,दुर्गा माता,1,दुल्हा,1,दुश्मन,1,दूध,2,देशभक्ति,3,देशभक्ति शायरी,2,देहदान,1,दोस्त,2,धनिया,1,धर्म,2,धर्मग्रंध,1,धार्मिक,27,नजर,1,नजर कैसे उतारु,1,नदी में पैसे,1,नन्ही परी,1,नमक पारे,1,नमकीन,1,नवरात्र,1,नवरात्र स्पेशल,2,नवरात्रि,1,नवरात्री रेसिपी,5,नववर्ष,2,नववर्ष की शुभकामनाएं,2,नाइंसाफी,1,नानी,1,नारियल बर्फ़ी,1,नारी,47,नारी अत्याचार,10,नारी शिक्षा,1,नाश्ता,1,निंबु का अचार,1,निचली जाती,1,निर्णयक्षमता,1,निर्भया,2,निवाला,1,नींबू,1,नीडल थ्रेडर,1,नेत्रदान,1,नेपाल त्रासदी,1,नेल आर्ट,1,न्याकिम गैटवेच,1,पकोडे,2,पक्षी,1,पढ़ा-लिख़ा कौन?,1,पढ़ाई,1,पति,1,पति का अहं,1,पति-पत्नी,1,पत्ता गोभी,2,पत्ता गोभी और चना दाल के बडे,1,पत्ता गोभी की मुठिया,1,पत्नी,1,पत्र,1,पपीता,1,परंपरा,2,परवरिश,6,पराठे,1,परीक्षा,2,परेशानी,1,पल्ली उत्सव,1,पवित्र,1,पवित्रता,2,पसंदीदा शिक्षक को पत्र,1,पानी,1,पानी कैसे पीना चाहिए,1,पापड़,3,पालक,1,पालक के नमक पारे,1,पालक बडी,1,पाश्चात्य संस्कृति,1,पिता,2,पुण्य,1,पुरानी मान्यताएं,1,पुलवामा हमला,1,पूडी,1,पेढे,1,पैड्मैन,1,पैनकेक,1,पैरेंटीग,1,पोर्न मूवी,1,पोषण,1,पोहा,2,पोहे के कुरकुरे,1,प्याज,3,प्याज की चटनी,1,प्यार,1,प्यासा कौआ,1,प्रत्यूषा,1,प्रद्युम्न,1,प्रसन्न,1,प्राणियों से सीख,1,प्री वेडिंग फोटोशूट,1,फर्रुखाबाद,1,फल,1,फल और सब्जी खरीदने से पहले,1,फलाहार,1,फल्लिदाने,1,फादर्स डे,2,फूल गोभी के परांठे,1,फेसबुक,2,फैशन,1,फ्रिज,1,फ्रेंडशीप डे,1,फ्रेंडशीप डे शायरी,1,बकरीद,1,बची हुई सामग्री का उपयोग,1,बच्चे,8,बच्चे की ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर गैंगरेप,1,बेटा,1,बेटा पढाओ,1,बेटी,7,बेटी बचाओ अभियान,2,बेसन,2,बेसन के लड्डू,1,बैंगन,1,बोझ,1,ब्रेकअप,1,ब्रेड,4,ब्रेड की रसमलाई,1,ब्रेड पकोडा,1,ब्रेड पिस्ता पेढे,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,5,ब्ल्यू व्हेल गेम,1,भक्ति,1,भगर,3,भगर की इडली,1,भगर के उत्तपम,1,भगर के कटलेट,1,भगवान,3,भजिए,1,भरवां मिर्च,1,भरवां शिमला मिर्च,1,भाई दूज शायरी,1,भाकरवड़ी,1,भाभी,1,भारत,1,भारतीय नारी,1,भारतीय मसाले,1,भुट्टे के पकोड़े,1,भूकंप,1,भोजन,1,भ्रुण हत्या,1,मंदसौर गैंग रेप,1,मंदिर,2,मंदिरों में ड्रेस कोड़,1,मंदिरों में दक्षिणा,1,मकई,4,मकई उपमा,1,मकई चीला,1,मकई पकोडे,1,मकर संक्रांति,2,मकर संक्रांति की शुभकामनाएं,1,मकर संक्राति,1,मटर,3,मटर के अप्पे,1,मठ्ठा,1,मदर्स डे,3,मम्मी,1,मलाई,2,मलाई फ्रूट सलाद,1,मसाला छाछ,1,महात्मा गांधी जी,1,महानता,1,महाराजा अग्रसेन जी,1,महिला आजादी,1,महिला आरक्षण,1,महिला सशक्तिकरण,4,महिला सुरक्षा,1,महिलाओं का पहनावा,1,माँ,3,माता यशोदा,1,मातृभाषा,1,मायका,2,मारवाड़ी,1,मार्केट जैसे साबूदाना पापड़,1,माला,1,मावा कुल्फी,1,मासिक धर्म,2,माहवारी,3,मिठाई,18,मित्र,2,मिलावट,1,मिलावट पहचानने के घरेलू तरीके,1,मिस इंडिया 2019,1,मुक्ति,1,मुबारकपुर कला,1,मुरब्बा,1,मुस्लिम मंच,1,मुहूर्त,1,मूंग की सूखी दाल का हलवा,1,मूंगफली,1,मूंगफली की सूखी चटनी,1,मूली,3,मूली का अचार,1,मूली के पत्तों के कुरकुरे कटलेट्स,1,मेंस्ट्रुअल कप,1,मेंहदी,6,मेडिसिन बाबा,1,मेथी,1,मेथी दाना चुर्ण,1,मेथी मटर मलाई,1,मेनु,1,मेरा मंत्र,3,मेरा सपना,1,मेरी बात,15,मैंगो फ्रूटी,1,मैंगो श्रीखंड,1,मैनर्स,1,रंग,1,रंग पंचमी,1,रक्तदान,1,रक्तदान के फायदे,1,रक्षा बंधन,1,रक्षाबंधन,1,रक्षाबंधन शायरी,1,रजस्वला नारी,3,रवा इडली,1,रसोई,101,रांगोली,3,राखी,2,राजभाषा,1,राजस्थानी समाज,2,राम रहीम,1,राशी-भविष्य,1,राष्ट्रगान,1,राष्ट्रगीत,1,राष्ट्रभाषा,1,रिती-रिवाज,1,रीतिरिवाज,1,रुपया-पैसा,1,रेणुका मिश्रा,1,रोटी,2,रोस्टेड मूंगफली,1,लघुकथा,11,लड्डू,2,लहसुन,1,लाइटर,1,लाइफ स्किल्स,1,लाल मिर्च की सूखी चटनी,1,लीव इन रिलेशनशिप,1,लेसुए,1,लॉटरी,1,लोकल ट्रेन,1,लोकसभा चुनाव,1,लोग क्या कहेंगे?,1,लौंजी,1,लौकी,2,लौकी का हलवा,1,लौकी की बड़ी,1,वक्त,1,वटसावित्री व्रत,1,वर,1,वर्जिनिटी टेस्ट,1,वर्तमान,1,वारी के हनुमान,1,विधवा,1,विधवा ने किया कन्यादान,1,विधवा विवाह,1,विशाखापट्टनम रेप कांड,1,वृंदावन,1,वृद्धावस्था,1,वेजिटेबल डोसा,1,वेजिटेबल पैनकेक,1,वैलेंटाइन डे,1,वोट,1,वोट की किंमत,1,व्यंग,11,व्यायाम,1,व्रत,2,व्रत रेसिपी,15,व्रत स्पेशल,2,शकरकंद,2,शकरकंद की जलेबी,1,शकरकंद को कैसे भुने,1,शकुन-अपशकुन,1,शक्करपारे,1,शनि देव,1,शब्द,1,शरबत,4,शर्बत,1,शर्म,2,शादी,5,शादी की खरेदी,1,शादी की फ़िजूलखर्ची का बिल,1,शादी के सालगिरह की शुभकामनाएं,1,शादी-ब्याह,3,शायरी,9,शाहिद कपूर,1,शिक्षक दिन,1,शिक्षा,5,शिमला मिर्च,1,शिवपुरी,1,शुभ मुहूर्त,1,शुभ-अशुभ,3,शुभम जगलान,1,श्राद्ध,3,श्राद्ध का खाना,1,श्रीकृष्ण,2,श्रेष्ठता,1,संस्कार,1,संस्मरण,9,सकारात्मक पहल,2,सच बोलने की प्रेरणा,1,सतबीर ढिल्लो,1,सपना,1,सफेद बाल,1,सब्जियों का अचार,1,सब्जियों की कांजी,1,सब्जी,7,समय,1,समाजसेवा,2,समाजिक,1,समाधान,1,समावत चावल,2,सर के बाल,1,सलाद,1,ससुराल,2,सहशिक्षा,1,सांवला या काला रंग,1,साउथ इंडियन डिश,2,साक्षात्कार,3,सागर में ज्वार,1,साफ-सफाई,1,साबुदाना,2,साबुदाना के अप्पे,1,साबुदाना पापड़,2,साबुदाने लड्डू,1,साबूदाना,2,सामाजिक,64,सामाजिक कार्यकर्ता,1,सालगिरह,5,सास,2,साहित्य,80,सिंगल पैरेंट,1,सिंदूर,1,सीख-सुहानी,1,सीनू कुमारी,1,सुंदरता,1,सुई,1,सुखी,1,सुजी,1,सूजी,1,सूजी के लड्डू,1,सेनेटरी नेपकिन,1,सेब,1,सेलिब्रेटी,1,सेवई उपमा,1,सेहत,1,सैंडविच,1,सौंफ,1,सौंफ का शरबत,1,सौंफ प्रीमिक्स,1,सौतेली माता,1,स्कूल,1,स्त्री,2,स्नैक्स,32,स्वतंंत्रता दिन,1,स्वतंत्रता दिन,2,स्वर्ग और नर्क,1,स्वाभिमान,1,स्वास्थ,2,स्वास्थ्य,10,हंस,1,हनुमान जी,2,हरी मटर के पैनकेक,1,हरी मिर्च,3,हरी मिर्च का अचार,1,हलवा,3,हांडवो,1,हाउसवाइफ,1,हाथी,1,हिंदी उखाणे,1,हिंदी उखाने,1,हिंदी दिवस,1,हिंदी शायरी,23,हैंडल,1,होटल,1,होममेकर,1,होली की शुभकामनाएं,1,
ltr
item
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: महिलाओं को इतनी तो आजादी दो कि वे अपनी इच्छा से कपड़े पहन सकें!!
महिलाओं को इतनी तो आजादी दो कि वे अपनी इच्छा से कपड़े पहन सकें!!
क्या वास्तव में छेड़खानी, बलात्कार की सभी घटनाएं सिर्फ छोटे और आधुनिक कपड़े पहनने से ही होती है? क्यों महिलाओं के कपडों को लेकर जब-तब बयान जारी कर दिए जाते है?
https://1.bp.blogspot.com/-TSlVpQHFPTw/V8bCUH3uqdI/AAAAAAAABwM/3H73M2LwIVYfQNpoxRY-efTzr82JKUNngCLcB/s400/mahilao%2Bka%2Bpahanavaa.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-TSlVpQHFPTw/V8bCUH3uqdI/AAAAAAAABwM/3H73M2LwIVYfQNpoxRY-efTzr82JKUNngCLcB/s72-c/mahilao%2Bka%2Bpahanavaa.jpg
आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
https://www.jyotidehliwal.com/2016/09/mahilao-ko-itni-aajadi-to-do-ki.html
https://www.jyotidehliwal.com/
https://www.jyotidehliwal.com/
https://www.jyotidehliwal.com/2016/09/mahilao-ko-itni-aajadi-to-do-ki.html
true
7544976612941800155
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy