कहानी- ऐसी भी एक बहू!!

सदियों से सास-बहू का रिश्ता बदनाम है। एक बहू सास के लिए क्या करती है पढ़िए...!

                     
कहानी- ऐसी भी एक बहू!!

सुबह का लगभग 10 बजे का समय था। पोस्ट ऑफ़िस में ज्यादा चहल-पहल नहीं थी। पोस्ट ऑफ़िस के मेरे केबीन से पूरा की पूरा पोस्ट ऑफ़िस मुझे साफ दिखाई देता था। मेरी नजर एक 40-42 साल की महिला पर गई। दिखने में सीधी-सादी, मेकअप रहित प्रभावशाली व्यक्तित्व वाली। पहनावे से मध्यमवर्गीय लग रही थी। जिस तरीके से वह ऑफ़िस के कर्मचारियों से बातचीत कर रही थी (यद्यपि मुझे उनकी बातचीत सुनाई नहीं दे रही थी) उसके स्वभाव की नम्रता साफ झलक रही थी। थोड़ी देर बाद मैने देखा तो वो बेचैन सी बेंच पर बैठी थी। शायद उसे किसी का इंतजार था। इतने में पोस्ट ऑफ़िस की एक एजेंट आई। उस महिला ने एजेंट से कुछ बात की और एजेंट ने अंदर आकर मुझसे पूछा, “सर, इनकी आर. डी. मॅच्युअर हो गई है। लगभग 9000 की रकम है। लेकिन शर्मा जी कह रहे है कि अभी कैश नहीं है। 11 बजे बैंक खुलने पर ही पेमेंट हो सकता है। सर, मैने पार्टी को बताया था कि मैं उनका पेमेंट जल्द ही करवा दुंगी। क्या कही से कैश का बंदोबस्त हो सकता है?” हालांकि इतनी रकम तो पोस्ट ऑफ़िस में रहती है लेकिन पहले दिन बैंक की छुट्टी होने से आज कैश नहीं थी। मैने शर्मा जी को बुलाकर उनसे बात की लेकिन उन्होंने कैश उपलब्ध न होने की बात ही दोहरा दी। एजेंट से उस महिला को 11.30 बजे तक इंतजार करने को कहकर मैं अपने काम में व्यस्त हो गया। क्योंकि बैंक खुलने के बाद कैश लाने में भी आधी घंटा तो लगेगा ही। थोड़ी देर बाद मैने देखा कि एजेंट तो जा चुकी है और वो महिला बड़ी बेसब्री से कैश लाने वाले लड़के का इंतजार कर रही है।

11.35 को वो महिला लगभग रुंआसी होकर मेरे केबीन में आकर कहने लगी, “सर, मेरी बुजुर्ग सास जो कि 85 साल की है, उनके खाने का समय हो रहा है। मुझे उन्हें समय पर खाना खिलाना है। कैश आने में और कितना समय लगेगा?” “अब लड़का आता ही होगा!” उसे देखकर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता था कि उसके लिए एक-एक मिनट कितना महत्वपूर्ण है। मैने किसी बहू को, सास को वक्त पर खाना खिलाने के लिए इतना व्यग्र होते पहली बार देखा था! मेरा काम करने मे मन ही नहीं लग रहा था। पूरा ध्यान उस महिला पर ही केंद्रित था। उसकी बेचैनी मुझसे देखी नहीं जा रही थी। सच बताउं, यदि उस वक्त मेरे पास पैसे होते तो मैं खुद उसे अपने पैसे देकर वक्त पर रवाना कर देता। कैश आने पर मैं अपने पैसे ले लेता। लेकिन हाय री किस्मत, मेरे पास भी इतने पैसे न थे! मैने उसे बुलाकर कहा “आप यहां पर हस्ताक्षर कर दीजिए। ताकि कैश आने पर, आपका उतना वक्त भी बचे!” उसने हस्ताक्षर कर दिए और बेंच पर जाकर बैठ गई। 11.45 हो गई लेकिन लड़का नहीं आया। अब उसका धैर्य जबाब देने लगा। वो मेरे पास आकर कहने लगी, “सर, मैं अब और इंतजार नहीं कर सकती। मेरा घर भी दूर है। खाना बनाने में भी वक्त लगेगा। मैं कल आकर कैश ले जाऊंगी।“ “देखिए, आपने फॉर्म पर हस्ताक्षर कर दिए है। इसका मतलब है कि आपको कैश मिल गई है। अत: कैश तो आपको अभी ही ले जानी होगी!”

अब वो कुछ ज्यादा ही परेशान हो गई। 11.55 को वो फिर मेरे पास आई। “माफ कीजिएगा, मैं और इंतजार नहीं कर सकती। मैं जा रही हूं। मुझे मेरी सास को वक्त पर खाना खिलाना है, चाहे इसके लिए मेरा इतने रुपयों का नुकसान ही क्यों न हो जाए!” और वो सचमुच में चली गई! मैं और मेरा पूरा स्टाफ भौचंका होकर उसे जाते हुए देखता रह गया। मेरी पोस्ट मास्टर की नौकरी में यह पहला केस था जिसमें ग्राहक को पैसे से ज्यादा अपनी सास को खाना खिलाने की पड़ी थी। एक मध्यमवर्गीय बहू जिसके लिए 9000 रुपए बहुत मायने रखते है, पूरे 12 महीने थोड़े-थोड़े पैसे जमा कर कर उसने यह राशि जुटाई थी, इतनी सहजता से पैसे छोड़कर कैसे जा सकती है? हम सभी को यह बात हजम ही नहीं हो रही थी। आजकल ही नहीं तो प्राचिनकाल से ही सास-बहू का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता कहलाता है जिसे जैसे न चाहते हुए दोनों ही निभाती है! आए दिन हम सास-बहू के अन बन के क़िस्से पढ़ते-सुनते रहते है। थोड़े दिन पहले ही मैने न्युज में एक वीडिओ देखा था जिसमें एक बहू अपनी बिमार और बुजुर्ग सास को पति की गैरमौजुदगी में खूब मारती है! ऐसे में मुझे अपने कानों पर, अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ऐसी भी कोई बहू हो सकती है जो सिर्फ सास को वक्त पर खाना खिलाने के लिए ...! मैं यह सब सोच ही रहा था कि उतने में वह महिला और कैश लाने वाला लड़का दोनों ने एक साथ प्रवेश किया। हुआ ये कि जैसे ही वो महिला बाहर गई वैसे ही उसे लड़का आते हुए दिख गया। हमने जल्दी से उसे कैश देकर रवाना किया। मुझे और मेरे पूरे स्टाफ को ऐसे लग रहा था कि जैसे हमने उस महिला को कैश सौंप कर बहुत बड़ा काम किया हो!
अभी भी जब भी वो घटना याद आती है तब आंखों देखी घटना होने के बावज़ूद भी विश्वास कर पाना कठिन होता है कि क्या ऐसी भी कोई बहू हो सकती है???

Keywords: story, mother-in-law, daughter-in-law, kahani

COMMENTS

BLOGGER: 31
  1. दरअसल हम भारतीयों पर असल जीवन से ज्यादा फिल्मी कहानियों का असर ज्यादा दिखता है और ज्योति जी फिल्मी सास-बहूँ की आपस में अच्छी बनती हो ऐसा कम ही दिखाया जाता है। वास्तविक जीवन में सच मानिए अच्छी सास भी बहुत होती हैं और बेटियों से ज्यादा प्यार करने वाली बहूँ भी होती हैं :)

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  2. मनीषा जी, बिलकुल सही कहा आपने।

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  3. Acchhi saas-bahu ki jodiya bhi hoti hai but humare samaj ne is jodi ko itna badnam kar rakha hai ki hum ise saaf dil se dekh hi ni pate.

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  4. प्रेरक प्रस्तुति हेतु धन्यवाद!

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  5. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (02-05-2016) को "हक़ मांग मजूरा" (चर्चा अंक-2330) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    श्रमिक दिवस की
    शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आदरणीय शास्त्री जी, मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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  6. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " मजदूर दिवस, बाल श्रम, आप और हम " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. शिवम् जी, मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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  7. बिल्कुल सही हमारे हिन्दुस्तान में तो आज भी बहू अपने फर्ज को भूली नहीं है। पर कुछ चंद लोगों की गलती की वजह से ये रिश्ता बदनाम है ।जबकि इससे सुंदर कोई रिश्ता नहीं ।

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    1. रितु जी, बिलकुल सही कहा आपने।आज भी बहुए अपना फर्ज निभाती है। लव्किं कुछ बहुओ के गलत कार्य की वजह से बदनामी सभी की होती है।

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  8. ज्यादा तर बहुएं संवेदन शील और कर्तव्य परायण होती हैं। सुंदर कथा आपकी ।

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  9. प्रेरक रचना है.... बधाई है आपको....

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  10. बहुत ही सुंदर आैर प्रेरणादायी कहानी। इस देश की खासियत ही यही है कि यहां हर रिश्ते का अपना मान है। हम सभी गाहे बगाहे ही सही, पर इन रिश्तों का मान रखने का भरसक प्रयत्न तो करते हैं।

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  11. Mujhe hamesha aap ki post ka intezaar raheta hai, kuch na kuch bahot hi sundar aur bahot hi achchhi thoughts ke ssath aap hazir hote hain.
    Manishaji ne jo kaha uske saath mei bilkul sahmat hoon.

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    1. हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, ज्योतिर्मय जी!

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  12. बहुत ही अच्छी कहानी ... दरअसल बहुत से उधारण हैं समाज में हर पहलू के पर हम शायद गलत उदहारण का प्रचार ज्यादा करते हैं देश में ...

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  13. Ma'm Yah kahani mere man ko bahut bhaa gayi hai. Main bhi dusre logo ko pareshan nahi kar pata. Mujhe khud me hi guilty feel hone lagti hai.

    Ma'm yah kahani kisi real post office ki hai. Main yah nahi samjh paya hu ki yah kahani kisne batayi hai kyunki Aap ek female ho or iss kahani me har jagah "Sir" shabd ka istemal kiya gya hai. Aisa lag raha hai jaise kisi male ne apni story share ki hai. But uss male ka naam kahi nahi dikh raha hai.

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  14. Bahut hi acchi saas bahu ki kahani.....dono ka rista accha hi hota hai lekin saas bahu par bani films, serial aur jokes ne faltu me is riste ko badnaam kar diya hai.....

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  15. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  16. ज्योतिजी केवल बहुओं को ही दोष नहीं देना चाहिए। सास को भी बहु के मन में एक सख्त मिजाज सास के स्थान पर एक वत्सल माँ के रूप में जगह बनानी पड़ेगी।

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  18. बहुत ही सही पोस्ट हैं कोई-कोई महिलाए ऐसी होती हैं जो सास important देती हैं |
    Visit - www.achhipost.com

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  19. hamesha saas bahu mein kadwahat hi ho aisa zaroori nahi. Par kuch rishton mein yeh maan hi liya jata hai ki dono aapas mein mil julkar kabhi rah nahi sakte..time par khana dene ke liye paise choddna toh door ki baat hai.

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  20. बहुत सुन्दर कहानी है ज्योति जी . बहू हो तो ऐसी. शायद सास भी बहू को अपनी बेटी समान समझती हो तभी तो बहू भी अपनी सास के लिए इतनी फिक्रमंद थी.

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    1. सुधा, यह कहानी महज एक कल्पना नहीं हैं। यह एक सत्य घटना हैं। सिर्फ़ पात्रों के नाम बदल दिए गए हैं।

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नाम

'रेप प्रूफ पैंटी',1,#मीटू अभियान,1,#साड़ीट्विटर,1,15 अगस्त,3,26 जनवरी,1,8 मार्च,1,अंकुरित अनाज,1,अंगदान,1,अंगुठी,1,अंगूर,1,अंगूर की लौंजी,1,अंगूर की सब्जी,1,अंग्रेजी,2,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस,3,अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस,1,अंधविश्वास,10,अंधश्रद्धा,10,अंधश्रध्दा,2,अंश,1,अग्निपरीक्षा,1,अग्रवाल,1,अचार,7,अच्छी पत्नी,1,अच्छी पत्नी चाहिए तो...,1,अच्छे काम,1,अजब-गजब,2,अतित,1,अदरक,1,अदरक का चूर्ण,1,अदरक-लहसुन पेस्ट,1,अनमोल वचन,10,अनुदान,1,अनुप जलोटा,1,अन्न,1,अन्य,25,अन्याय,1,अपेक्षा,1,अप्पे,4,अमरुद,1,अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी,1,अमीरी,1,अमेजन,1,अरुणा शानबाग,1,अरुनाचलम मुरुगनांथम,1,अवार्ड,2,असली हीरो,15,अस्पतालों में बच्चों की मौत,1,आंवला,3,आंवला चटनी,1,आंवला लौंजी,1,आइसक्रीम,1,आईसीयू ग्रेंडपा,1,आग,1,आज के जमाने की अच्छाइयां,1,आजादी,2,आज़ादी,1,आतंकवादी,2,आत्महत्या,3,आत्मा,1,आदित्य तिवारी,1,आम,9,आम का अचार,1,आम का पना,2,आम का मुरब्बा,2,आम की बर्फी,1,आम पापड़,1,आरक्षण,3,आलू,1,आलू पोहा अप्पे,1,इंसान,2,इंस्टंट डोसा,1,इंस्टंट स्नैक्स,1,इंस्टट ढोकला,1,इंस्टेंट कुल्फी,1,इडली,3,इन्डियन टाइम,1,इमली,1,इरोम शर्मिला,1,ईद,1,ईश्वर,6,ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना,1,उटी,1,उपमा,2,उपवास,1,उपवास की इडली,1,उपहार,2,उमा शर्मा,1,ऋषि पंचमी,1,एक सवाल,1,ऐनी दिव्या,1,ऐश ट्रे,1,ऑनलाइन,1,और इज्जत बच गई,1,कंघा,1,कंसन्ट्रेट आम पना,1,कच्चे आम,1,कच्चे आम का चटपटा पापड़,1,कटलेट्स,1,कद्दु,1,कद्दु के गुलगुले,1,कद्दू,1,कद्दू का बेसन,1,कन्यादान,3,कबीर सिंह मूवी,1,करवा चौथ,1,करवा चौथ शायरी,1,करवा-चौथ,4,कल्याणी श्रीवास्तव,1,कहानी,19,कांजी,1,कानून,1,कामवाली बाई,4,कालीन,1,किचन टिप्स,14,किटी पार्टी,1,कियारा आडवानी,1,किराए पर बीवियां,1,कुंडली मिलान,1,कुरकुरे,1,कुल्फी,1,कुल्फी प्रीमिक्स,1,कूकर,1,केईएम् अस्पताल,1,कॉर्न,4,कॉर्न इडली,1,कौए,1,क्षमा,2,खजूर,1,खत,5,खबर,3,खरबूजा,2,खरबूजे का शरबत,1,खरेदी,1,खांडवी,1,खाद्य पदार्थ,1,खाना,1,खारक,1,खारी गरम,1,खुले में शौच,1,खुशी,2,खेल,1,गणतंत्र दिवस,1,गणेश चतुर्थी पर शायरी,1,गणेश चतुर्थी प्रसाद रेसिपी,1,गरम मसाला,1,गर्दन दर्द,1,गर्भावस्था,1,गर्भाशय,1,गलत व्यवहार,1,गलती,2,गाजर,4,गाजर अप्पे,1,गाजर के लड्डू,1,गाजर-मूली के दही बडे,1,गाय,1,गुजरात,1,गुजराती डिश,1,गुड टच और बैड टच,2,गुरु पूर्णिमा,1,गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं,1,गुलगुले,1,गुस्सा,1,गृहस्वामिनी,1,गैस बर्नर,1,गोरखपुर,1,गोरा रंग,1,गोल्फ,1,गौरी पराशर,1,घंटी,1,घिया,1,घी,1,घी की नदी,1,चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति,1,चकली,1,चटनी,7,चना दाल,1,चाँद पर जमीन,1,चाय,1,चाय मसाला,1,चावल,2,चावल के पापड़,1,चाशनी,1,चींटी,1,चीज,1,चीला,2,चूर्ण,4,छाछ,1,छींक,1,छोटी बाते,1,छोटे लेकिन काम के टिप्स,2,छोटे-छोटे काम के टिप्स,2,जज्बा,2,जनसंख्या,1,जन्मदिन,3,जन्मदिन की शुभकामनाएं,2,जन्माष्टमी,2,जमाना,1,जलेबी,1,जाट आंदोलन,1,जात-पात,1,जाति,1,जाम,1,जिंदगी,1,जीएसटी,1,जीरो ऑइल रेसिपी,5,जोक्स,5,जोयिता मंडल,1,ज्वार की रोटी,1,ज्वेलरी,1,झारखंड,1,झाले-वारणे,2,झूठ,1,टिप्स कॉर्नर,31,टी.व्ही. और सिनेमा,1,ठंडे पेय,6,ठेचा,1,डर,1,डैंड्रफ,1,डॉक्टर,2,डॉटर्स डे,2,ढाबा स्टाइल सब्जी,1,ढोकले,1,तरबूज,2,तरबूज के छिलके का हलवा,1,तलाक,1,ताजे नारियल की बर्फी,1,तिल,2,तिल की कुरकुरी चिक्की,1,तिल के लड्डू,1,तेलंगाना,1,तोहफ़ा,1,थंडा पानी,1,दक्षिणा,1,दर्द का रिश्ता,1,दवा,1,दशहरा,1,दशहरा की शुभकामनाएं,1,दशहरा शायरी फोटो,1,दही,5,दही सैंडविच,1,दहेज,3,दाग-धब्बे,1,दान,1,दासी,1,दिपावली बधाई संदेश,3,दिशा,1,दीपावली शुभकामना संदेश,1,दीवाली रेसिपी,1,दुध पावडर,1,दुर्गा माता,1,दुल्हा,1,दुश्मन,1,दूध,2,देशभक्ति,3,देशभक्ति शायरी,2,देहदान,1,दोस्त,2,धनिया,1,धर्म,2,धर्मग्रंध,1,धार्मिक,28,नजर,1,नजर कैसे उतारु,1,नदी में पैसे,1,नन्ही परी,1,नमक पारे,1,नमकीन,1,नवरात्र,1,नवरात्र स्पेशल,2,नवरात्रि,2,नवरात्रि की शुभकामनाएं,1,नवरात्रि शायरी फोटो,1,नवरात्री रेसिपी,6,नववर्ष,2,नववर्ष की शुभकामनाएं,2,नाइंसाफी,1,नानी,1,नारियल बर्फ़ी,1,नारी,48,नारी अत्याचार,10,नारी शिक्षा,1,नाश्ता,1,निंबु का अचार,1,निचली जाती,1,निर्णयक्षमता,1,निर्भया,2,निवाला,1,नींबू,1,नीडल थ्रेडर,1,नेत्रदान,1,नेपाल त्रासदी,1,नेल आर्ट,1,न्याकिम गैटवेच,1,न्यूजीलैंड,1,पकोडे,2,पक्षी,1,पढ़ा-लिख़ा कौन?,1,पढ़ाई,1,पति,1,पति का अहं,1,पति-पत्नी,1,पत्ता गोभी,2,पत्ता गोभी और चना दाल के बडे,1,पत्ता गोभी की मुठिया,1,पत्नी,1,पत्र,1,पपीता,1,परंपरा,2,परवरिश,6,पराठे,1,परीक्षा,2,परेशानी,1,पल्ली उत्सव,1,पवित्र,1,पवित्रता,2,पसंदीदा शिक्षक को पत्र,1,पानी,1,पानी कैसे पीना चाहिए,1,पापड़,3,पालक,1,पालक के नमक पारे,1,पालक बडी,1,पाश्चात्य संस्कृति,1,पिता,2,पुण्य,2,पुरानी मान्यताएं,1,पुलवामा हमला,1,पूडी,1,पूरी,1,पेढे,1,पैड्मैन,1,पैनकेक,1,पैरेंटीग,1,पोर्न मूवी,1,पोषण,1,पोहा,2,पोहे के कुरकुरे,1,प्याज,3,प्याज की चटनी,1,प्यार,1,प्यासा कौआ,1,प्रत्यूषा,1,प्रद्युम्न,1,प्रसन्न,1,प्राणियों से सीख,1,प्री वेडिंग फोटोशूट,1,फर्रुखाबाद,1,फल,1,फल और सब्जी खरीदने से पहले,1,फलाहार,1,फल्लिदाने,1,फादर्स डे,2,फूल गोभी के परांठे,1,फेसबुक,2,फैशन,1,फ्रिज,1,फ्रिज में सब्जी,1,फ्रेंडशीप डे,1,फ्रेंडशीप डे शायरी,1,बकरीद,1,बची हुई सामग्री का उपयोग,1,बच्चे,8,बच्चे की ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर गैंगरेप,1,बेटा,1,बेटा पढाओ,1,बेटी,7,बेटी बचाओ अभियान,2,बेसन,2,बेसन के लड्डू,1,बैंगन,1,बोझ,1,ब्रेकअप,1,ब्रेड,4,ब्रेड की रसमलाई,1,ब्रेड पकोडा,1,ब्रेड पिस्ता पेढे,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,5,ब्ल्यू व्हेल 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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: कहानी- ऐसी भी एक बहू!!
कहानी- ऐसी भी एक बहू!!
सदियों से सास-बहू का रिश्ता बदनाम है। एक बहू सास के लिए क्या करती है पढ़िए...!
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
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