क्या भ्रुण-हत्या हत्या नही है??

भ्रुण, चाहे उसने इस संसार में कदम न रखा हो; लेकिन उसमें एक जीवात्मा तो रहती ही है न! फीर क्यों हम बहुत ही निर्दयता से भ्रुण-हत्या करते है?

                   
क्या भ्रुण-हत्या हत्या नही है??
आज मीडिया में, सोशल मीडिया में हर जगह बात होती है, चिल्लाहट मचती है तो सिर्फ और सिर्फ कन्या भ्रुण हत्या की। लेकिन भ्रुण-हत्या (जीसकी जांच ही न की गई हो, लडका है या लडकी) की कोई भी बात ही नहीं करता। भ्रुण, चाहे उसने इस संसार में कदम न रखा हो; लेकिन उसमें एक जीवात्मा तो रहती ही है न! फीर क्यों हम बहुत ही निर्दयता से भ्रुण-हत्या करते है? जिसका हमें कोई अफसोस भी नही होता। यह मैं निम्न सत्य घटनाओं से स्पष्ट करना चाहुंगी। दोनों घटनाओं में सिर्फ पात्रों के नाम बदल दिए गए है।

घटना 1-

"क्या बताऊ, शादी को दो साल हो गए लेकिन अभी तक खुशी ने कोई खुशखबर नहीं सुनाई"  "डॉक्टर क्या बोलते है?"  "डॉक्टरों के मुताबिक दोनों नॉर्मल है, फिर भी न जाने क्यों...मेरे तो कर्म ही फुटे है, जो बांझ बहू गले पडी!!" जब सरला चाची ने ऐसा कहा तो मैंने खुशी की तरफ देखा। उसके चेहरे पर दु:ख, अपमान की पिडा, बेबसी सब कुछ एक साथ नजर आए। ऐसे में मैं भी बस "देखिए चाची जी, जब सब नॉर्मल है, तो जल्द ही आपको खुशखबरी सुनने मिलेगी।" इतना कह कर चुप हो गई। ईश्वर की कृपा से साल भर बाद ही खुशी ने एक सुंदर से बेटे को जन्म दिया। पुरा परिवार खुशी से झूम उठा।


तीन साल बाद अचानक किसी कार्यवश उनके यहां जाना हुआ तो खुशी बहुत ही थकी-थकी सी लग रही थी। पुछने पर उसने बताया, ''अभी दस दिन पहले ही गर्भपात करवाया है इसलिए..."  "क्या?"  मैं हैरान रह गई। "क्या तुम्हें दुसरा बच्चा नहीं चाहिए?"  "नहीं, ऐसी बात नहीं है, लेकिन अमित भैया (देवर) की शादी पक्की हो गई है। शादी दो महिने बाद है। मम्मी जी का कहना है, "घर की बहू यदि गर्भवती रहेगी तो शादी के काम कौन करेगा? शादी तो जींदगी में सिर्फ एक बार होती है लेकिन बच्चें तो बाद में भी पैदा किए जा सकते है, इसलिए...!!" "क्या तुम्हारें पति ने भी विरोध नहीं किया?" "वे माँ के सामने कूछ नहीं बोलते है।" मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या प्रतिक्रिया दूं? मैं सोचने लगी कि क्या हो गया है सरला चाची की सोच को? अच्छी पढी-लिखी है। घर के सभी लोग पढे-लिखें है। फिर सभी ने कैसे गर्भपात के लिए हां कर दी? बच्चा माँ के गर्भ के अंदर होने पर भी उसमें एक आत्मा तो होती ही है न। फिर हम उसे हत्या क्यों नहीं मानते? जितना पाप एक जीवित व्यक्ति की हत्या पर होता है उससे कहीं अधिक पाप भ्रुण-हत्या पर होगा क्योंकि उस भ्रुण ने तो अभी इस दुनिया में कदम भी नहीं रखा है। वो यह दुनिया देखें-समझे इसके पहले ही निर्दयी लोग उसे मारना चाहते है! सरला चाची तो बहुत ही धार्मिक है। जब देखों तब भागवत, रामायण, सुंदरकांड, मंगल पाठ सभी जगह जाती रहती है। फिर वो एक जीव-हत्या करने (और वो भी सिर्फ काम की वजह से) कैसे तैयार हो गई? पहले बच्चा नहीं हुआ तो बहू को कोसा गया, जब एक बार बच्चा हो गया तो बहू को बच्चा पैदा करने की मशीन समझा जाने लगा! जब चाहे तब उत्पादन कर लो! मशिन को कोई भावनाएं थोडी ही होती है!!!


घटना 2-

नेहा ने दुसरी बार गर्भपात करवाया क्योंकि उसे पहले से दो बच्चे थे और उन्हें तिसरा बच्चा नहीं चाहिए था। परिवार नियोजन के इतने साधन होने के बावजुद, उसके पति को कोई भी साधन जंच नहीं रहा था। नेहा के परिवारवालों ने, नेहा की परिवार नियोजन वाली शल्यक्रिया इसलिए नहीं करवाई थी कि जब भी गांव में सरकारी शिबीर आयोजित होंगे तब शल्यक्रिया करवायेंगे ताकी बहुत ही कम रुपयों में शल्यक्रिया हो सके। और ऐसे शिबीर गांव में आने से पहले ही उसे गर्भ रह जाता!! उसके पति को किसी ने बता दिया था कि पुरुष नसबंदी करने से पुरुषत्व में कमी आती है इसलिए उसके पति ने नसबंदी नहीं करवाई। परिणामत: नेहा को दुसरी बार गर्भपात करवाना पड रहा था। असल में लोग छोटी-छोटी बिमारी के लिए भी (जिनका इलाज घर में भी संभव है) डॉक्टर के पास जाते है। लेकिन वास्तव में जिन बातों के लिए डॉक्टरी सलाह की जरुरत होती है, वे बातें अपने यार-दोस्तों को पुछ्ते फिरते है!! आखिर हम लोग गर्भपात को इतना सहज क्यों लेते है? गर्भपात न होकर जैसे कोई खेल हो गया! हम अपने ही अंश की हत्या इतनी आसानी से कैसे करते है?


खुशी और नेहा ये सिर्फ दो उदाहरण नहीं है। ऐसी कई खुशी और नेहा, हमारे आस-पास आज भी मौजूद है जो अपनी ममता का गला घोंटने मजबूर है। आखिर हम कब समझेंगे कि भ्रुण भी हमारी तरह ही सांस लेता है, इसलिए वह भी एक जीव ही है। अत: भ्रुण-हत्या भी एक जीव-हत्या है!!

गर्भपात से नारी का शरीर कमजोर होता है, वो अलग! एक अध्ययन के मुताबिक, हर साल देश में 67 लाख गर्भपात होते है और लगभग 20000 महिलाओं की गर्भपात संबंधी जटिलताओं के कारण मृत्यू हो जाती है!!

अमेरिका की घटना-


अमेरिका में कूछ साल पहले एक डॉक्टर ने एक विडिओ फिल्म "गूंगी चीख'' बनाई थी। जिसमें यह बताया गया था कि जब माँ-बाप बच्चे का गर्भपात करने की सिर्फ सोचते भर है, तभी से भ्रुण पर क्या असर होता है। माँ के गर्भ में भी वह नन्हीं सी जान कितनी डरती है। जैसे ही पहला औजार गर्भाशय की दिवार को छुता भर हैं, वो नन्हीं सी जान डर से कंपकंपाती है! उसके दिल की धडकने 200 की रफ़्तार को भी पार कर जाती हैं! उसके मस्तिक से जो डर वाली तरंगे निकलती है, वो देख कर पत्थर भी पिघलने लगे! किस तरह औजार से नन्हें से भृण के टुकडे किए जाते हैं...पहले कमर, फ़िर पैर सब ऐसे काटे जाते हैं जैसे जिंदा भृण न होकर गाजर-मुली हो! और वो भृण दर्द से छ्टपटाते हुए सिकुड़ कर घुम-घुमकर तडपते हुए इस खुनी औजार से बचने की कोशिश करता हैं!

वो दिल दहलाने वाला विडिओ यदि हम देख ले तो मैं विश्वास से कहती हूं कि हम सपने में भी भ्रुण-हत्या करने की ना सोचे!! इस ब्लॉग के माध्यम से मैं आप सभी से कहना चाहती हूं कि आजकल तो परिवार नियोजन के कई साधन उपलब्ध हैं। अत: किसी की हत्या का पाप अपने सिर पर न ले। क्योंकि भृण में भी एक आत्मा का निवास रहता ही हैं। 


Keywords: bhrunhatya, murder

COMMENTS

BLOGGER: 20
  1. भ्रूण हत्‍या हमारे समाज में बीमारी बन चुकी है। शासन सत्‍ता अपनी शक्ति के द्धारा समाज में व्‍याप्‍त इस बीमारी पर नकेल कस सकती है। पर सत्‍ता को ऐसा करने की सुध कहां है।

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    1. ब्लॉगर भाई जमशेद जी, हर काम हम सत्ता के भरोसे नही छोड सकते। वास्तव में इस मामले में जनजाग्रुती की आवश्यकता है जीससे लोगों को इस बात का एहसास हो कि भ्रुण में भी आत्मा होने की वजह से भ्रुण हत्या भी एक जीव हत्या ही है।

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  2. जय मां हाटेशवरी....
    आप ने लिखा...
    कुठ लोगों ने ही पढ़ा...
    हमारा प्रयास है कि इसे सभी पढ़े...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना....
    दिनांक 016/11/2015 को रचना के महत्वपूर्ण अंश के साथ....
    चर्चा मंच[कुलदीप ठाकुर द्वारा प्रस्तुत चर्चा] पर... लिंक की जा रही है...
    इस चर्चा में आप भी सादर आमंत्रित हैं...
    टिप्पणियों के माध्यम से आप के सुझावों का स्वागत है....
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    कुलदीप ठाकुर...


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    1. ब्लॉगर भाई कुलदीप जी, मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

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  3. Thanks for sharing.. :)
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  4. ज्योतिजी इस लेख के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद। भ्रूण हत्या केवल हत्या ही नहीं बल्कि माँ बाप द्वारा अपनी ही संतान की हत्या है।

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  5. दीदी भ्रूण हत्या तो हत्या से भी बड़ा पाप है इसमें तो माँ का जीवन भी खतरे में रहता है और कभी कभी तो माँ की मृत्यु भी हो जाती है।

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    1. अनुराग, यहीं बात तो लोगों को समझाना है...

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  6. Hi Jyoti I nominated you for Liebster Award...please check here http://athinkingthinker.blogspot.in/2015/11/an-award-that-inspires-us.html?m=1

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  7. मनिशा जी, Liebster Award...के लिए मुझे नामांकित करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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  8. घर की बहू यदि गर्भवती रहेगी तो शादी के काम कौन करेगा? शादी तो जींदगी में सिर्फ एक बार होती है लेकिन बच्चें तो बाद में भी पैदा किए जा सकते है, इसलिए...!!अगर हम बहुत ज्यादा समाज से परिचित नही हैं तो लगेगा कि क्या ऐसा भी होता है ? लेकिन समाज में विकृति आ ही चुकी है इससे इंकार नही हो सकता ज्योति जी ! आपका सवाल सर्वथा उचित है कि क्यों सिर्फ कन्या भ्रूण हत्या को ही अपराध माना जाए , हत्या तो हत्या है वो चाहे कन्या भ्रूण की हो या बालक भ्रूण की ! जो इस दुनिया में आना चाहता है उसका सदैव स्वागत होना चाहिए !!

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    1. योगी जी, सही कहा आपने... जो इस दुनिया में आना चाहता है उसका सदैव स्वागत होना चाहिए !!

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  9. Baapre..these figures are horrific! I hope some day there will be revolutionary changes in India on such fronts. Only then acchhe din aayenge.

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    1. लीना जी, अच्छे दिन लाने के लिए हम सभी को प्रयत्न करने होगे... हमें हमारी सोच को बदलना होगा...

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  10. बिलकुल भ्रूण हत्या भी हत्या ही है और बेहद जघन्य, महापाप :(

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  11. यदि बच्च नही चाहिये तो पहले से सावधानी रखें और फिर भी को चूक हो जाती है तो पालें बच्चे को। हत्या!!!!!!!!!!!!!

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  12. बहुत विचारणीय आलेख...

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  13. विचारणीय आलेख है ...
    बहुत कुछ समझने और करने के लिए ...

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नाम

'रेप प्रूफ पैंटी',1,#मीटू अभियान,1,15 अगस्त,3,26 जनवरी,1,8 मार्च,1,अंकुरित अनाज,1,अंगदान,1,अंगुठी,1,अंग्रेजी,2,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस,3,अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस,1,अंधविश्वास,10,अंधश्रद्धा,8,अंधश्रध्दा,2,अंश,1,अग्निपरीक्षा,1,अग्रवाल,1,अचार,7,अच्छी पत्नी,1,अच्छी पत्नी चाहिए तो...,1,अच्छे काम,1,अजब-गजब,2,अतित,1,अदरक,1,अदरक का चूर्ण,1,अदरक-लहसुन पेस्ट,1,अनमोल वचन,10,अनुदान,1,अनुप जलोटा,1,अन्न,1,अन्य,23,अन्याय,1,अपेक्षा,1,अप्पे,4,अमरुद,1,अमरूद की खट्टी-मीठी चटनी,1,अमीरी,1,अमेजन,1,अरुणा शानबाग,1,अरुनाचलम मुरुगनांथम,1,अवार्ड,2,असली हीरो,13,अस्पतालों में बच्चों की मौत,1,आंवला,3,आंवला चटनी,1,आंवला लौंजी,1,आइसक्रीम,1,आईसीयू ग्रेंडपा,1,आज के जमाने की अच्छाइयां,1,आजादी,2,आज़ादी,1,आतंकवादी,2,आत्महत्या,3,आत्मा,1,आदित्य तिवारी,1,आम,9,आम का अचार,1,आम का पना,2,आम का मुरब्बा,2,आम की बर्फी,1,आम पापड़,1,आरक्षण,1,आलू,1,आलू पोहा अप्पे,1,इंसान,2,इंस्टंट डोसा,1,इंस्टंट स्नैक्स,1,इंस्टट ढोकला,1,इंस्टेंट कुल्फी,1,इडली,3,इन्डियन टाइम,1,इमली,1,इरोम शर्मिला,1,ईद,1,ईश्वर,6,ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ 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जमीन,1,चाय,1,चाय मसाला,1,चावल,2,चावल के पापड़,1,चाशनी,1,चीज,1,चीला,2,चूर्ण,4,छींक,1,छोटी बाते,1,छोटे लेकिन काम के टिप्स,1,छोटे-छोटे काम के टिप्स,2,जज्बा,2,जनसंख्या,1,जन्मदिन,3,जन्मदिन की शुभकामनाएं,2,जन्माष्टमी,2,जमाना,1,जलेबी,1,जाट आंदोलन,1,जात-पात,1,जाति,1,जाम,1,जिंदगी,1,जीएसटी,1,जीरो ऑइल रेसिपी,5,जोक्स,5,जोयिता मंडल,1,ज्वार की रोटी,1,ज्वेलरी,1,झारखंड,1,झाले-वारणे,2,झूठ,1,टिप्स कॉर्नर,26,टी.व्ही. और सिनेमा,1,ठंडे पेय,5,ठेचा,1,डर,1,डॉक्टर,2,डॉटर्स डे,2,ढाबा स्टाइल सब्जी,1,ढोकले,1,तरबूज,1,तलाक,1,ताजे नारियल की बर्फी,1,तिल,2,तिल की कुरकुरी चिक्की,1,तिल के लड्डू,1,तेलंगाना,1,तोहफ़ा,1,थंडा पानी,1,दक्षिणा,1,दवा,1,दही,5,दही सैंडविच,1,दहेज,3,दाग-धब्बे,1,दान,1,दासी,1,दिपावली बधाई संदेश,3,दिशा,1,दीपावली शुभकामना संदेश,1,दीवाली रेसिपी,1,दुध पावडर,1,दुर्गा माता,1,दुल्हा,1,दुश्मन,1,दूध,2,देशभक्ति,3,देशभक्ति शायरी,2,देहदान,1,दोस्त,2,धनिया,1,धर्म,2,धर्मग्रंध,1,धार्मिक,26,नदी में पैसे,1,नन्ही परी,1,नमक पारे,1,नमकीन,1,नवरात्र,1,नवरात्र स्पेशल,2,नवरात्रि,1,नवरात्री रेसिपी,5,नववर्ष,2,नववर्ष की शुभकामनाएं,2,नाइंसाफी,1,नानी,1,नारियल बर्फ़ी,1,नारी,44,नारी अत्याचार,10,नारी शिक्षा,1,नाश्ता,1,निंबु का अचार,1,निचली जाती,1,निर्णयक्षमता,1,निर्भया,2,निवाला,1,नींबू,1,नेत्रदान,1,नेपाल त्रासदी,1,नेल आर्ट,1,पकोडे,2,पक्षी,1,पढ़ा-लिख़ा कौन?,1,पढ़ाई,1,पति,1,पति का अहं,1,पति-पत्नी,1,पत्ता गोभी,1,पत्ता गोभी की मुठिया,1,पत्नी,1,पत्र,1,पपीता,1,परंपरा,2,परवरिश,5,पराठे,1,परीक्षा,2,परेशानी,1,पल्ली उत्सव,1,पवित्र,1,पवित्रता,2,पसंदीदा शिक्षक को पत्र,1,पानी,1,पानी कैसे पीना चाहिए,1,पापड़,3,पालक,1,पालक के नमक पारे,1,पालक बडी,1,पाश्चात्य संस्कृति,1,पिता,1,पुण्य,1,पुरानी मान्यताएं,1,पुलवामा हमला,1,पूडी,1,पेढे,1,पैड्मैन,1,पैनकेक,1,पैरेंटीग,1,पोर्न मूवी,1,पोषण,1,पोहा,1,पोहे के कुरकुरे,1,प्याज,3,प्याज की चटनी,1,प्यार,1,प्यासा कौआ,1,प्रत्यूषा,1,प्रद्युम्न,1,प्रसन्न,1,प्राणियों से सीख,1,प्री वेडिंग फोटोशूट,1,फर्रुखाबाद,1,फलाहार,1,फल्लिदाने,1,फादर्स डे,1,फूल गोभी के परांठे,1,फेसबुक,2,फैशन,1,फ्रिज,1,फ्रेंडशीप डे,1,फ्रेंडशीप डे शायरी,1,बकरीद,1,बची हुई सामग्री का उपयोग,1,बच्चे,7,बच्चे की ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर गैंगरेप,1,बेटा,1,बेटा पढाओ,1,बेटी,7,बेटी बचाओ अभियान,2,बेसन,2,बैंगन,1,बोझ,1,ब्रेकअप,1,ब्रेड,4,ब्रेड की रसमलाई,1,ब्रेड पकोडा,1,ब्रेड पिस्ता पेढे,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,5,ब्ल्यू व्हेल गेम,1,भक्ति,1,भगर,3,भगर की इडली,1,भगर के उत्तपम,1,भगर के कटलेट,1,भगवान,3,भजिए,1,भरवां मिर्च,1,भाई दूज शायरी,1,भाकरवड़ी,1,भाभी,1,भारत,1,भारतीय मसाले,1,भुट्टे के पकोड़े,1,भूकंप,1,भोजन,1,भ्रुण हत्या,1,मंदसौर गैंग रेप,1,मंदिर,2,मंदिरों में ड्रेस कोड़,1,मंदिरों में दक्षिणा,1,मकई,4,मकई उपमा,1,मकई चीला,1,मकई पकोडे,1,मकर संक्रांति,2,मकर संक्रांति की शुभकामनाएं,1,मकर संक्राति,1,मटर,3,मटर के अप्पे,1,मदर्स डे,3,मम्मी,1,मलाई,2,मलाई फ्रूट सलाद,1,महानता,1,महाराजा अग्रसेन जी,1,महिला आजादी,1,महिला आरक्षण,1,महिला सशक्तिकरण,4,महिला सुरक्षा,1,महिलाओं का पहनावा,1,माँ,3,माता 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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: क्या भ्रुण-हत्या हत्या नही है??
क्या भ्रुण-हत्या हत्या नही है??
भ्रुण, चाहे उसने इस संसार में कदम न रखा हो; लेकिन उसमें एक जीवात्मा तो रहती ही है न! फीर क्यों हम बहुत ही निर्दयता से भ्रुण-हत्या करते है?
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
https://www.jyotidehliwal.com/2015/11/BhruN-hatya.html
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