क्यों बनती है नारी ही नारी की दुश्मन?

क्यों और कैसे बनती है नारी ही नारी की दुश्मन? इस दुश्मनी की असलियत क्या है? क्या दो भाइयों के बीच होने वाले संपत्ति विवाद के लिए कभी यह कहा जाता है कि पुरुष ही पुरुष का दुश्मन होता है?

              
क्यों बनती है नारी ही नारी की दुश्मन?
हम कहते है, नारी शोषित है, नारी पर बहुत अत्याचार होते है! लेकिन
क्या नारी अत्याचार के लिए सिर्फ पुरुष वर्ग ही जिम्मेदार है? क्या नारी स्वयं नारी की दुश्मन नही बनती है? वास्तव में स्त्री-पुरुष का रिश्ता परस्पर पूरकता पर आधारित है| उसमें कोई छोटा या कोई बडा नही है| स्त्री की आज़ादी, सम्मान या समानता का प्रश्न पुरुष का पैदा किया हुआ नही है| नारी के अस्तित्व का प्रश्न तो जीवन जीने के लिए है|
नारी का स्वयं का जाल
जिस प्रकार मकड़ी अपना जाल स्वयं बुनती है और स्वयं उसमें फंस जाती
है, उसी प्रकार नारी द्वारा समाज के सब बंधन बनाए गए है और नारी 
ही समाज में उन बंधनों का पालन करवाती है| वह स्त्री ही होती है, जो सास के रुप में अपनी बहू को लड़की के जन्म देने पर कोसती रहती है! वह स्त्री ही होती है, जो लड़कों को वंश का चिराग मान कर लड़कियों की उपेक्षा करती रहती है! वह सास-नणंद स्त्री ही होती है, जो दहेज़ जैसी भौतिक चीज के लिए अपनी ही बहू पर अत्याचार करती है! लड़कियों के लिए इतने सारे अंधे नियम बनाए जाते है कि वह हीन भावना से ग्रस्त हो जाती है. भले ही महिलाएं आधुनिकता का दंभ भरती हो पर जब अचानक जमादारन उन्हें छू जाती है तो वे नाक-भौ सिकोडने लगती है। अशिक्षित बुजुर्ग महिलाएं तो तुरंत नहा भी लेती है।
...तो दूसरी कर लेगी!
नारी ने स्वयं अपने सुखद और सुनिश्चित भविष्य के लिए अपने वर्तमान को नष्ट कर दिया है। वह हर मोड पर समझौते किए चली जा रही है। वरना वह फिल्मों में अशालिन, भद्दों दृश्यों के लिए तैयार नही होती तो कोई क्या करता? उत्तेजक नृत्य और अश्लील विज्ञापनों को करने की क्या मजबूरी है? अगर मैं नही करुंगी तो दूसरी कोई कर लेगी! इस तरह का जाल किसने बुना है? "कहानी की मांग" के अनुसार दृश्य करुंगी... इस मांग को कौन तय करता है? ऐसा लगता है नारी केवल देह बन कर रह गई है। इस देह का अर्थशास्त्र और भुगोल भी बन गया है और ये दोनों विषय बाजार में खूब बिक रहे है।
एक शेर है,
       "जिस्म पहराओं में छिप जाते थे,
             पहरावों में जिस्म नंगे नजर आने लगे है,
                 ये तो हद है!!"

सिक्के का दूसरा पहलू
वास्तव में "नारी ही नारी की दुश्मन" यह वाक्य ही हास्यास्पद लगता है। 
एक ही जेंडर के दो या दो से अधिक शख्स आखिर एक दूसरे के दुश्मन हो कैसे सकते हैं! उनकी शारीरिक बनावट एक जैसी है। उनके डर एक से हैं.. कभी रेप का, कभी छेड़छाड़ का, कभी गंदी नजरों का, कभी नौकरी जाने का, कभी जीवन साथी से अलग होने का, कभी छल लिए जाने का..जब सारे दु:ख, सारी तकलीफें एक जैसी है, तो दुश्मनी कैसी? दरअसल दुश्मनी एक ऐसी चीज है जो जेंडर, वर्ग, जाति, रंग भेद से ऊपर है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप नारी हैं या पुरुष और आपको जिससे दुश्मनी निभानी है, वह नारी है या पुरुष। हमारे हितों के रास्ते में आने वाला हरेक शख्स हमारा दुश्मन है। जैसे जब घर में ननद और भाभी रह रही हैं तो जो टकराव और खींचातानी होगी, वह घर में ज्यादातर समय साथ रहने वाले दो या दो से अधिक शख्सों के बीच ही होगी। न कि नारी और नारी के बीच की!
क्या दो भाइयों के बीच होने वाले संपत्ति विवाद के लिए कभी यह कहा जाता है कि पुरुष ही पुरुष का दुश्मन होता है? क्यों? सच्चाई यह है कि विवाद और झगड़ा किसी वस्तु, भाव, संबंध या परिस्थितियों के चलते होता है, फिर वह चाहे दो औरतों के बीच हो या फिर दो पुरुषों के बीच।

इसलिए बनती है नारी ही नारी की दुश्मन
दरअसल अपना जीवन विभिन्न बंदिशों में रह कर बिताने के कारण बुजुर्ग महिलाएं बदलते परिवेश में अपने-आप को ढाल नही पाती। उन्हें लगता है, बचपन में उनके माता-पिता ने जो बंदिशे उन पर लगाई थी, वे ही बंदिशे वे भी स्वयं की बेटियों पर लगायेंगी तो उनकी बेटियां सही राह पर चल सकेंगी! वे चाहती है कि जिन अंधविश्वास की बेडियों में उन की सास ने उन्हें जकडा था, उन्हीं में उनकी बहू भी घूटती रहें। इसी तरह बेटा जब बहू के साथ बदसलूकी से व्यवहार करता है, तो माँ बेटे को समझाने के बजाय बहू की सहनशक्ति को ललकारते हुए उसे पति को परमेश्वर मानने की हिदायतें देकर उसका हर ज़ुल्म सहने पर बाध्य कर देती है|

बदलता परिदृश्य
आज परिदृश्य थोड़ा बदल रहा है। ज्यादातर माताएं अपनी बेटियों को थोड़ी छूट दे रही है तो सासुएं भी अपनी बहूओं से प्रेम भाव के साथ रह रही है।
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COMMENTS

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  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 14 सितम्बर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. हर सास कभी बहूँ थी, हर बहूँ कभी बेटी थी,हर बेटी कभी बहूँ बनेगी।
    मुस्किल तब आती हैं जब बहूँ अपनी बेटी नहीं लगती, जब ननद अपनी बहन नहीं लगती।

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  3. शायद कई बार नारी नारी की दुश्मन भी पुरुष सत्ता के प्रभाव में बनने लगती है ... पर इस परिस्थिति को बदलना जरूरी है और नारी को ही आगे आना होगा इसके लिए ...

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (14-09-2015) को "हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक-2098) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. नारी ने स्वयं अपने सुखद और सुनिश्चित भविष्य के लिए अपने वर्तमान को नष्ट कर दिया है। वह हर मोड पर समझौते किए चली जा रही है। वरना वह फिल्मों में अशालिन, भद्दों दृश्यों के लिए तैयार नही होती तो कोई क्या करता? उत्तेजक नृत्य और अश्लील विज्ञापनों को करने की क्या मजबूरी है? अगर मैं नही करुंगी तो दूसरी कोई कर लेगी! इस तरह का जाल किसने बुना है? "कहानी की मांग" के अनुसार दृश्य करुंगी... इस मांग को कौन तय करता है? ऐसा लगता है नारी केवल देह बन कर रह गई है। इस देह का अर्थशास्त्र और भुगोल भी बन गया है और ये दोनों विषय बाजार में खूब बिक रहे है। बहुत सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय ज्योति जी !!

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  6. संवेदनशील विषय पर आपने अपनी बेबाक राय रखी है इस सम्बन्ध में जितना पुरुषों को सोचना है उससे कहीं ज्यादा महिलाओं को विचार करना है. सशक्त प्रस्तुति.

    हिंदी दिवस पर आपको शुभकामनायें.

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  7. Thought-provoking post, Jyoti Ji. You talked about very fundamental issues. The notion of fear & competition is the real culprit.

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  8. Nice Article Mam!!!

    Please visit my new blog

    Comments and Suggestions are welcome!!!

    http://jivanmantra4u.blogspot.in

    Thanks!!!

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  9. Now its time to think.A very nice presentation.

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  10. Now its time to think.A very nice presentation.

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  11. ये सच ही है । नारी ही नारी की दुश्मन है ।

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  12. Jyoti ji , you have well analysed this complicated social issue. A section of women who have been raised in a particular way and have been taught not to question authority think that is the best way and want to impose it on the others, without reasoning the merit of it. Partly due to ego and partly due to their inability to adapt.

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  13. बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है ज्योति जी आज नारी हाई नारी के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दुश्मन है ,सही बात है
    जिस्म पहराओं में छिप जाते थे
    पहराओं में जिस्म नंगे नज़र आने लगे हैं ये तो हद है

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  14. आपकी लिखी रचना आज एक बार फिर "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 07 जनवरी 2018 को साझा की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  15. वाह!!ज्योति ,विषय तो बहुत अच्छा है ....सही है नारी ही नारी की उपेक्षा करती ,किसी न किसी रूप में कष्ट देती नजर आती है ....वैसे आज समय के साथ कुछ अच्छे बदलाव आए हैंं....सोच बदली है ......पर अभी मंजिल इतनी भी करीब नहीं है ...

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  16. समय में बदलाव आया है आगे भी आएगा पर ये सच है नारी को नारी का मान रखना ज़रूरी है ...

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  17. बहुत ही सटीक .....
    नारी ही नारी की दुश्मन हो जाती है
    अपनी ही उपेक्षा करती है विचारणीय लेख.....
    बहुत सुन्दर...

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  18. समय बदल रहा है परिभाषायें भी।

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  19. जी हाँ ज्योति दीदी ! बेटियों और बहुओं में फर्क किया जाता है अब भी। सटीक रचना।
    नववर्ष की शुभकामना ।

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  20. खूबसूरत अभिव्यक्ति , मंगलकामनाएं आपको !

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  21. .
    कहाँ गया भाई से लड़ना
    अपने उन , सम्मानों को !
    कहाँ गया अम्मा से भिड़ना
    अपने उन अधिकारों को !
    कुछ तो डर ने समझाया था
    कुछ पढ़ लिया रिवाजों में !
    कुछ भाभी ने हंसकर बोला, कुछ कह दिया इशारों ने !

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नाम

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पारे,1,नमकीन,1,नवरात्र,1,नवरात्र स्पेशल,2,नवरात्रि,1,नवरात्री रेसिपी,5,नववर्ष,2,नववर्ष की शुभकामनाएं,2,नाइंसाफी,1,नानी,1,नारियल बर्फ़ी,1,नारी,44,नारी अत्याचार,10,नारी शिक्षा,1,नाश्ता,1,निंबु का अचार,1,निचली जाती,1,निर्णयक्षमता,1,निर्भया,2,निवाला,1,नींबू,1,नीडल थ्रेडर,1,नेत्रदान,1,नेपाल त्रासदी,1,नेल आर्ट,1,न्याकिम गैटवेच,1,पकोडे,2,पक्षी,1,पढ़ा-लिख़ा कौन?,1,पढ़ाई,1,पति,1,पति का अहं,1,पति-पत्नी,1,पत्ता गोभी,1,पत्ता गोभी की मुठिया,1,पत्नी,1,पत्र,1,पपीता,1,परंपरा,2,परवरिश,5,पराठे,1,परीक्षा,2,परेशानी,1,पल्ली उत्सव,1,पवित्र,1,पवित्रता,2,पसंदीदा शिक्षक को पत्र,1,पानी,1,पानी कैसे पीना चाहिए,1,पापड़,3,पालक,1,पालक के नमक पारे,1,पालक बडी,1,पाश्चात्य संस्कृति,1,पिता,2,पुण्य,1,पुरानी मान्यताएं,1,पुलवामा हमला,1,पूडी,1,पेढे,1,पैड्मैन,1,पैनकेक,1,पैरेंटीग,1,पोर्न मूवी,1,पोषण,1,पोहा,1,पोहे के कुरकुरे,1,प्याज,3,प्याज की चटनी,1,प्यार,1,प्यासा कौआ,1,प्रत्यूषा,1,प्रद्युम्न,1,प्रसन्न,1,प्राणियों से सीख,1,प्री वेडिंग फोटोशूट,1,फर्रुखाबाद,1,फलाहार,1,फल्लिदाने,1,फादर्स डे,2,फूल गोभी के परांठे,1,फेसबुक,2,फैशन,1,फ्रिज,1,फ्रेंडशीप डे,1,फ्रेंडशीप डे शायरी,1,बकरीद,1,बची हुई सामग्री का उपयोग,1,बच्चे,7,बच्चे की ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर गैंगरेप,1,बेटा,1,बेटा पढाओ,1,बेटी,7,बेटी बचाओ अभियान,2,बेसन,2,बैंगन,1,बोझ,1,ब्रेकअप,1,ब्रेड,4,ब्रेड की रसमलाई,1,ब्रेड पकोडा,1,ब्रेड पिस्ता पेढे,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,5,ब्ल्यू व्हेल गेम,1,भक्ति,1,भगर,3,भगर की इडली,1,भगर के उत्तपम,1,भगर के कटलेट,1,भगवान,3,भजिए,1,भरवां मिर्च,1,भाई दूज शायरी,1,भाकरवड़ी,1,भाभी,1,भारत,1,भारतीय मसाले,1,भुट्टे के पकोड़े,1,भूकंप,1,भोजन,1,भ्रुण हत्या,1,मंदसौर गैंग रेप,1,मंदिर,2,मंदिरों में ड्रेस कोड़,1,मंदिरों में दक्षिणा,1,मकई,4,मकई उपमा,1,मकई चीला,1,मकई पकोडे,1,मकर संक्रांति,2,मकर संक्रांति की शुभकामनाएं,1,मकर संक्राति,1,मटर,3,मटर के अप्पे,1,मठ्ठा,1,मदर्स डे,3,मम्मी,1,मलाई,2,मलाई फ्रूट 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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: क्यों बनती है नारी ही नारी की दुश्मन?
क्यों बनती है नारी ही नारी की दुश्मन?
क्यों और कैसे बनती है नारी ही नारी की दुश्मन? इस दुश्मनी की असलियत क्या है? क्या दो भाइयों के बीच होने वाले संपत्ति विवाद के लिए कभी यह कहा जाता है कि पुरुष ही पुरुष का दुश्मन होता है?
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
https://www.jyotidehliwal.com/2015/09/kyon-banati-hai-nari-hi-nari-ki-dushman.html
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