संस्मरण- ...उनकी सांसे बेसन में अटकी थी!

किसी व्यक्ति को अपने हाथ की बनी हुई चीज इतनी पसंद आए कि अपने अंतिम समय में उस व्यक्ति कि वह चीज खाने की इच्छा हो...यह एहसास ही कितनी तृप्ति देता है...

संस्मरण- ...उनकी सांसे बेसन में अटकी थी!
बात लगभग 35 साल पुरानी है। मैं तब 14-15 साल की थी। हमारे यहां खेती में कई मज़दूर काम करते थे। उनमें से एक बुजुर्ग मज़दूर पिछले दो महीने से बीमार था। दो दिन पहले ही पता चला था कि उन्हें डॉक्टर ने जबाब दे दिया है। कभी भी मृत्यु हो सकती है। ऐसे में उनकी पत्नी मेरी मम्मी के पास आई। बहुत ही दु:खी नजर आ रहीं थी। मम्मी को विस्तार से पति की बीमारी के बारे में बताने लगी। उसकी बातों से ऐसा महसूस हो रहा था कि वो और भी कुछ बताना चाहती है लेकिन संकोचवश बोल नहीं पा रहीं है। मम्मी ने सहायता हेतु कुछ रुपए भी दिए लेकिन रुपए लेते वक्त भी उसके चेहरे से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उसे कुछ और ही चाहिए। मम्मी के जोर देकर पूछने पर वह बोली, ''मेरे पति देव आपके हाथ का बना हुआ बेसन खाना चाहते है। मैंने उन्हें बहुत बार कहा कि बेसन बनाना मुझे भी आता है...मैं बिल्कुल मालकिन जैसा बेसन बनाती है, ठीक वैसा ही बेसन बना देती हूं.. लेकिन वो मानने को तैयार ही नहीं है। उन्हें आपके हाथ का बना हुआ बेसन ही खाना है। क्या आप उनके लिए बेसन बना कर देंगी?''

मम्मी ने कहा, ''हां...हां...अभी बना देती हूं।'' मम्मी ने बेसन के साथ ज्वारी की रोटीयां भी बनाई और खुद उस बाई के साथ उनके यहां गई। उस बुजुर्ग मज़दूर ने ज्वारी की रोटी के साथ बेसन खाया। जब मम्मी घर लौटी तो मम्मी के चेहरे पर एक तरह की गौरवान्वित खुशी थी। उस वक्त मम्मी के चेहरे पर जो भाव थे उसका वर्णन करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। बेसन, जो लगभग हर घर में बनता है वो भी किसी को इतना पसंद आएगा...ये मम्मी सोच भी नहीं सकती थी। सचमुच मेरी मम्मी के हाथ में जादू है। मेरी मम्मी हर चीज बहुत ही स्वादिष्ट बनाती है। दूसरे ही दिन उनकी मौत हो गई। सभी लोग कहने लगे कि उनके प्राण बेसन में अटके थे। बेसन खाते ही वो तृप्त हो गए।

सच में, किसी व्यक्ति को अपने हाथ की बनी हुई चीज इतनी पसंद आए कि अपने अंतिम समय में उस व्यक्ति कि वह चीज खाने की इच्छा हो...यह एहसास ही कितनी तृप्ति देता है इस बात का एहसास मुझे मम्मी की तरफ़ देख कर हुआ। उसी दिन से मैं ने यह मंत्र अपना लिया कि मैं किचन में ज्यादा से ज्यादा स्वादिष्ट भोजन बनाना सीखुंगी एवं जहां तक संभव हो सभी को अपने हाथ का बना हुआ भोजन ही खिलाउंगी। क्योंकि कहा जाता है कि इंसान स्वादिष्ट भोजन का स्वाद कभी नहीं भुलता।

सुचना- 
दोस्तो, मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि यह पोस्ट लिखे जाने तक "आपकी सहेली" के पृष्ठ्दृश्य 10,00,000 के उपर याने 10,07,000 हो गए है। यह सब आपके प्यार एवं विश्वास से ही संभव हो सका है। आशा है आगे भी आपका स्नेह ''आपकी सहेली'' को इसी तरह मिलता रहेगा।

Keywords: Meal, cooking, Memories, Mother's day, Mother, Gram flour, breath

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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: संस्मरण- ...उनकी सांसे बेसन में अटकी थी!
संस्मरण- ...उनकी सांसे बेसन में अटकी थी!
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
http://www.jyotidehliwal.com/2017/05/unaki-saanse-besan-me-ataki-thi.html
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