सिर्फ़ कानुन से नहीं... इन तरीकों से लग सकती है शादी की फ़िजुलखर्ची पर रोक!

सिर्फ़ कानुन बनाने से शादियों की फ़िजूलखर्ची पर रोक नहीं लग सकती! हमें युवाओ को कुछ हट कर, अलग तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करना होगा।

सिर्फ़ कानुन से नहीं... इन तरीकों से लग सकती है शादी की फ़िजुलखर्ची पर रोक!
शादी...हर इंसान का सुनहरा ख़्वाब! हर इंसान चाहता है कि उसकी या उसके बच्चों की शादी बड़ी धूमधाम से हो...इतनी धूमधाम से कि लोग सालों तक याद रखें! अरे, शादी तो फ़लाने के यहां की थी...क्या निमंत्रण पत्रिका छपवाई थी...क्या डेकोरेशन था...मेहमानों को रुकने के लिए बहुत ही बड़ी होटल बुक की थी...बाजेवाले पंजाब से आएं थे...कैटरर्स दिल्ली के थे... मिठाई तो इतने तरह की थी कि बस पूछो ही मत...मानना पड़ेगा दिल खोल कर ख़र्चा किया शादी में...भई, शादी हो तो ऐसी...वा...ऊ...मजा आ गया था!!!
यह सब बातें हम रोज़मर्रा के जीवन में आए दिन सुनते रहते है। यह सुन-सुन कर हर किसी की स्वाभाविक इच्छा होती है कि उसकी या उसके बच्चों की शादी वह बड़ी धूमधाम से करें। लेकिन हम भारतीयों के इस सपने पर सरकार डंड़ा चलाने की सोच रही हैं। अभी तो हम नोट बंदी की कड़वी दवाई भी ठीक से गीटक नहीं पाए कि एक और कड़वी दवाई पिलाने की तैयारी हो रही हैं।

क्या है शादी की फ़िज़ूलखर्ची का बिल
बिहार के बाहुबली नेता पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन ने लोकसभा में यह बिल पेश किया है। इस बिल में शादियों में होनेवाली फ़िज़ूलखर्ची पर नकेल कसने की बात की गई है। बिल के मुताबिक 5 लाख से ज्यादा खर्च करने पर उसका 10% ग़रीबों को दान करना होगा। इतना ही नहीं, शादी में कितने मेहमान बुला सकते है एवं खाने के मेन्यु में कितने व्यंजन होंगे ये भी इस बिल में होगा। जम्मू-कश्मीर की सरकार ने तो इस कानून को लागू भी कर दिया है। जिसके मुताबिक लड़के की शादी में 400 मेहमान और लड़की की शादी में 500 मेहमानों की संख्या निर्धारित की है। खाने के मेन्यू में 2 स्वीट डिश के साथ 7 शाकाहारी और 7 मांसाहारी व्यंजन ही परोसे जा सकते है।

क्या कानून से शादी की फ़िज़ूलखर्ची पर रोक लग सकती है?
हमारे देश में कानून की हालत यह है कि वहां पर संसद में एक कानून पास भी नहीं होता उसके पहले ही उस कानून से बच निकलने के दस रास्ते हमारे होनहार वकील ढूंढ निकालते है। क्या हमारे यहां कन्या-भ्रूण हत्या, बाल विवाह, दहेज़, भ्रष्टाचार इन पर कानून नहीं बने है? क्या कानून बनने से इन पर रोक लग सकी है? नहीं न? आज किसी भी कानून की असलीयत यह हो गई है कि जितना हम कानून को कठोर बनायेंगे, उतना ही उसे तोड़ने के लिए हम लोगों को प्रोत्साहित करेंगे। लेकिन यह बात सच है की कानून बनने से अपराधो पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकती, पर अपराधों में कमी जरुर आती है। ठीक उसी प्रकार कानून बनने से शादी की फ़िजूलखर्ची पर भी सिर्फ़ कुछ प्रमाण में रोक लग सकती है।

इन वजहों से किया जाता है शादियों में ज्यादा खर्च
शादी की फ़िजूलखर्ची पर रोक लगाने के रास्ते ढूंढने से पहले हमें यह देखना चाहिए कि आखिर ऐसी कौन सी वजहे है जिस कारण इंसान अपने खुन-पसीने की कमाई को शादी में फ़िजूलखर्ची कर उडाता है।
• परंपरावादी सोच
हम भारतीय ग़जब के परंपरावादी लोग है। परंपरा निभाने के लिए हम कुछ भी कर सकते है...कुछ भी...!!! हमारे मन में बहुत गहरे में कहीं यह बात घर बना कर बैठी है कि मेरी शादी किसी राजकुमार या राजकुमारी से बड़ी धूमधाम से होगी। हमारी ऐसी परंपरावादी सोच को दुनिया का कोई भी कानून बदल नहीं सकता। ऐसी कई परंपरावादी रीति-रीवाजे है जिसके आगे हमारे कानून ने घुटने टेके है। जैसे कि मध्यप्रदेश के छिंदवाडा का गोटमार मेला जिसमें पांढुरना और सांवरगांव के लोग एक दूसरे के उपर पत्थर बरसाते है। जिससे सैकड़ो लोग घायल होते है लेकिन कानून अभी तक इसे नहीं रोक पाया है। वैसे ही तामिलनाडु का जल्लीकट्टू का खेल जिसमें बैलों को काबू में किया जाता है, जिसके कारण कुछ लोगों की जान जाती है, तो कई लोग घायल होते है। लेकिन कानून ऐसे भयानक खेलों के आयोजनों पर रोक लगाने में असफल रहा है। ऐसी ही एक परंपरावादी सोच कि शादी धूमधाम से ही होनी चाहिए के वशीभुत होकर इंसान शादी में फ़िज़ूलखर्ची करता है।
• अपने अरमान पूरे करने के लिए
भई, शादी हमारी...पैसा हमारा...हमने बड़ी मेहनत से पाई-पाई जोड़ कर जमा किया कि बच्चों की शादी धूमधाम से करेंगे... तो फ़िर लोकतांत्रिक देश में भी ये कैसी हिटलरशाही कि हम हमारा ही पैसा अपनी मनमर्जी से खर्च न कर सके! हमारे अरमान हम बच्चों की शादी में ही पूरे नहीं करेंगे तो भला कब करेंगे? हर इंसान धुमधाम से शादी कर अपने अरमान पुरे करना चाहता है।
• अपना स्टेट्स दिखाने के लिए
अब आप ही बताइए...इंसान जी तोड मेहनत कर कर, पाई-पाई जोड कर पैसा क्यों बचाता है? इसलिए ही न कि अपने बच्चों की शादी में खूब खर्च कर अपने वैभव का प्रदर्शन करें! अरे...लोगों को भी तो पता चले कि आखिर हमारे पास कितना पैसा है! यदि हम बच्चों की शादी सादगी से करेंगे तो लोगों को हमारा स्टेट्स कैसे पता चलेगा? कहा जाता है कि अमीरों का ज्यादातर समय और पैसा यहीं बात बताने में खर्च होता है कि वे कितने अमीर है!!

इन तरीकों से लग सकती है शादी की फ़िजूलखर्ची पर रोक
हम किसी की खुशी पर क़ानूनन रोक नहीं लगा सकते। जिसका जितना बजट है वो उतना खर्च करेगा। आखिरकार भारत में लोकतंत्र है और हर इंसान को इतनी तो स्वतंत्रता होनी ही चाहिए कि वो अपना खुद का पैसा अपने मन मुताबिक खर्च कर सकें। लेकिन हम कुछ तरीके अपना कर शादी की फ़िज़ूलखर्ची पर रोक लगा सकते है।
• कुछ अलग हटकर करने के लिए प्रेरित कर
आज का युवा कुछ अलग हट कर करना चाहता है, जिससे उसकी शादी एक यादगार बनी रहे। ये अलग हट कर कुछ भी हो सकता है। कुछ अलग करने के चक्कर में कभी-कभी ये लोग अजीब सी हरकते करने को भी तैयार रहते है। जैसे कि अभी हाल ही में एक युवक द्वारा काटे गए जन्मदिन के केक का किस्सा बताती हूं। होस्टल में रह रहे इस युवक के मुताबिक वो और उसके दोस्त हर बार जन्मदिन का केक कुछ अलग अंदाज में काटते है। कभी बाइक की सीट पर तो कभी कार के सामने के बाज़ू में या कार की छत पर...। लेकिन इस बार कुछ और अलग करना था। ये लोग घुमते-घुमते एक दोस्त के फार्म हाउस पर पहुंच गए। वहां पर केक काटने की जगह ढुंढने लगे...और अंत में जिस जगह पर इन लोगों ने केक काटा, वो जगह मुझे बताने में भी संकोच हो रहा है...इन लोगों ने गाय के गोबर पर केक रख कर काटा! जिस गोबर के नाम से ही आज की पीढ़ी तुनकती है, उस गोबर पर केक काटा! मेरे यह पूछने पर कि तुम लोगों को घिन नहीं आई? तो उसने कहा गोबर के उपर तो केक के निचे का खड्डा था न! हमें तो सिर्फ़ कुछ अलग करना था ताकि एक याद बनी रहें। ये है आज के कुछ युवा कि सोच! इस वाक़ये से मुझे लगता है कि यदि हम युवाओं के सामने कुछ अलग हट कर करने का उदाहरण पेश कर सके तो शायद ये लोग तैयार हो सकते है...! जैसे महाराष्ट्र के अजय मुनोत ने अपनी बेटी की शादी मे 90 बेघर लोगों को घर दिया। साथ ही HIV ग्रस्त और अनाथालयों के बच्चों को शादी में VIP बना कर बुलाया। यदि उन्होनें यहीं पैसा धुमधाम से शादी करने में लगाया होता तो लोग सिर्फ़ चर्चा कर कर रह जाते कि बाप रे...कितनी भव्य शादी की! लेकिन जिन 90 बेघर लोगों को उन्होनें घर बना कर दिया सिर्फ़ वे ही लोग नहीं तो उनकी आने वाली पीढ़ी भी दिल से उनका शुक्रिया अदा करेगी एवं दुआएं देगी। साथ ही जिन HIV ग्रस्त और अनाथालयों के बच्चों को उन्होनें शादी में VIP बना कर बुलाया वे भी ताउम्र इन यादों को दिल में संजो कर रखेंगे। क्योंकि जिन लोगों को सारी उम्र सिर्फ़ तिरस्कार का सामना करना पडता है, उन लोगों के लिए ये शादी स्वर्ग मिलने की खुशी से कम नहीं होगी! इसी प्रकार कुछ लोगों ने शादी से पहले समाज के गरीब घरों में जाकर टॉयलेट बनवायें।

• अमीरों द्वारा सादगी और कम खर्चों में हुई शादियों का बड़े पैमाने पर प्रचार कर कर
यदि हम अमीर लोगों द्वारा सादगी से हुई शादियों का सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर प्रचार करेंगे, तो सोशल मीडिया पर हुए नाम से युवा प्रभावित होंगे। क्योंकि नाम के लिए ही तो इंसान सब कुछ करता है! जैसे कि जब मैने अखबार में पढ़ा कि सलमान खान के पिता सलीम खान ने अपनी बेटी अर्पिता की शादी सादगी से करने का निर्णय किया तो इस ख़बर पर मैने एक ब्लॉग पोस्ट लिख कर इसे प्रसारित करने का प्रयत्न किया। हालांकि बाद में यह शादी धूमधाम से ही हुई थी। आप कह सकते है कि तुम्हारा ब्लॉग आखिर पढ़ते ही कितने लोग है? लेकिन मुझे लगता है कि सिर्फ़ एक व्यक्ति ने भी मेरा ब्लॉग पढ़ कर सादगी से शादी कि तो मेरा उद्देश सफल हो गया! इस बारे में मेरी ब्लॉग पोस्ट "काश, ऐसी खबरे बार-बार पढने मिले---!! - ( भाग - 2 )"  पढ़िए।

• समाजसेवा के लिए प्रेरित कर
आज के पीढ़ी के मन में समाजसेवा का ज़ज़्बा है। लेकिन वास्तव में यह हमारी कमजोरी ही है कि हम उनके इस जज़्बे को सही दिशा नहीं दे पा रहे है। यदि हम युवाओं को यह बताने में कामयाब रहें कि शादी के माध्यम से भी समाजसेवा की जा सकती है तो शायद इन फ़िजूलखर्ची पर रोक लग सकती है। इसका बेहतरीन उदाहरण पेश किया है मध्यप्रदेश के इंदौर में रहने वाले आदित्य तिवारी ने। इनके बारे में और अधिक जानकारी के लिए पढ़िए "इसे कहते है सच्ची समाजसेवा!"

• सादगी से भी शादी में मौज़-मस्ती की जा सकती है यह समझाकर 
जब हम किसी अमीर की शादी में जाते है तो मुंह से निकलता है...वा...ऊ...! लेकिन जब हम किसी ग़रीब की शादी में जाते है तो वहां दिल को छुने वाला मंजर होता है। दिल को एक तरह का सुकून मिलता है। वास्तव में मौज़-मस्ती दिल से की जाती है न कि पैसों से...! यहीं बात हमें सभी को समझानी होगी।

• यह कानून जनता की बेहतरी के लिए है यह समझाकर
मोदी जी ने अपने लगभग तीन वर्षों के कार्यकाल में सबसे महत्वपुर्ण बात यहीं की है कि भारत की जनता को विश्वास दिलाया है कि वे जो कुछ कर रहें है वो हमारी बेहतरी के लिए है। इसलिए ही नोटबंदी के बाद लाखों लोग अपने ही खुन-पसीने की कमाई का पैसा बैंक से निकालने के लिए घंटों लाइन में लगे रहे। लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन लोगों ने इतनी तकलीफे सिर्फ़ इसलिए सहीं कि उन्हें भरोसा हो गया था की ये उनकी बेहतरी के लिए है। ठीक उसी प्रकार यदि हम लोगों को यह बताने में कामयाब रहें कि सादगी से शादी करने में उनका स्वयं का क्या-क्या फ़ायदा है तब ही लोग सादगी से शादी करने के लिए प्रेरित हो सकते है!

निवेदन-
यदि आप के पास सादगी से शादी करने के लिए एवं कुछ अलग हट कर करने के लिए नए आइडिया है तो कृपया टिप्पणी द्वारा बताइएगा। 

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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: सिर्फ़ कानुन से नहीं... इन तरीकों से लग सकती है शादी की फ़िजुलखर्ची पर रोक!
सिर्फ़ कानुन से नहीं... इन तरीकों से लग सकती है शादी की फ़िजुलखर्ची पर रोक!
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