वैलेंटाइन डे: मनानेवाले और विरोध करनेवाले दोनों ही सच्चाई से अनजान

वैलेंटाइन डे मनानेवाले और विरोध करनेवाले दोनों ही सच्चाई से अनजान है। जानिए, क्या है वैलेंटाइन डे की सच्चाई...!!!

वैलेंटाइन डे: मनानेवाले और विरोध करनेवाले दोनों ही सच्चाई से अनजान
14 फरवरी को ‘वैलेंटाइन डे’ कई देशों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। भारत में भी इसे एक बड़े उत्सव के रुप में मनाया जा रहा है। आजकल सभी लोगों को वैलेंटाइन डे का इंतजार रहता है। प्यार करनेवाले हर दिल को भी, वैलेंटाइन डे का विरोध करनेवालों को भी और इस नीमित्त से अपनी दुकानदारी चलाने वालों को भी। प्यार करनेवाले इस दिन को अपने प्यार का इज़हार करने हेतु… विरोध करने वाले समाज में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने हेतु...और दुकानदार अपनी बिक्री बढ़ाने हेतु...सभी इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते है। हम भारतीय लोगों में कमाल का उत्सव प्रेम है। बारा महीने के इतने सारे त्योहार, विभिन्न महापुरुषों की जयंतियां और राष्ट्रीय पर्व हमें उत्सव मनाने के लिए कम लगते है, इसलिए हम नए उत्सव मनाने के लिए भी सदा तत्पर रहते है!! लेकिन वैलेंटाइन डे को मनानेवाले और विरोध करनेवाले दोनों ही सच्चाई से अनजान है...।

वैलेंटाइन डे का असली मतलब
लोगों को लगता है कि ऋषि वैलेंटाइन ने प्यार करनेवालों को हरी झंडी दिखाई थी...उन्हें प्यार करने की आज़ादी दी थी! वैलेंटाइन डे मानो प्यार करने की स्वतंत्रता एवं स्वच्छंदता का प्रतीक बन गया है। कॉलेज पढ़ने वाले लड़के-लड़कियाँ एक-दूसरे को वैलेंटाइन कार्ड दे रहे है जिस पर लिखा रहता है “Would you be my valentine” जिसका असली मतलब होता है “क्या आप मुझसे शादी करेंगे”। लेकिन इन लोगों को लगता है कि इसका मतलब है “क्या आप मुझसे प्यार करती/करते हो” इस तरह असली मतलब पता न होने से इन लोगों को तो लगता है कि वैलेंटाइन याने प्यार करने की आजादी! और आजादी पाने के लिए तो इंसान कूछ भी करने के लिए तैयार रहता है। इसलिए ही आज का युवावर्ग इसे जोरशोर से मना रहा है। कुछ लोगों को तो लगता है कि वैलेंटाइन याने 'प्यार'... फ़िर वो चाहे युवक-युवतियों का हो, भाई-बहन का हो या माँ-बेटे का हो! इसलिए वे यह कार्ड माँ-बाप, भाई-बहन, दादा-दादी सभी को देते है! अब आप ही बताइए, क्या आप अपने माँ-बाप, भाई-बहन, दादा-दादी को यह कहेंगे कि “क्या आप मुझसे शादी करेंगे??” सिर्फ़ ऐसा सोचकर ही इस नासमझी पर हंसी आती है। कितने भेडचाल के रुप में चलते है हम!! कोई वैलेंटाइन डे मना रहा है तो हमें भी मनाना है...बिना यह जाने कि यह क्यों मनाया जाता है! 

जिन लोगों को लगता है कि समाज में लोगों को प्यार करने की खुल्लमखुल्ला आज़ादी नहीं मिलनी चाहिए... इससे समाज में अराजकता फैलेगी...हमारी संस्कृति का विनाश होगा...वे लोग इसका विरोध करते है। जबकि वैलेंटाइन ने खुल्लमखुल्ला प्यार का विरोध किया था। उन्होंने प्यार करनेवालों की बाक़ायदा शादियाँ करवाई थी!

वास्तव में, वैलेंटाइन डे का असली मतलब है, यूरोप की ‘लीव इन रीलेशनशिप’ का विरोध और भारत की ‘शादी’ जैसी पवित्र संस्था का समर्थन! ‘लीव इन रीलेशनशिप’ का मतलब है,"बिना शादी किए पति-पत्नी की तरह रहना"

वैलेंटाइन डे की कहानी
ऋषि वैलेंटाइन का जन्म 478 A D (after death) याने ईसा के मृत्यु के 478 साल बाद हुआ था। उन दिनों यूरोप और अमेरिका के लोगों को ‘शादी’ की परंपरा के बारे में जानकारी नहीं थी। वे नहीं जानते थे कि व्यक्ति की एक पत्नी हो सकती है या किसी महिला का एक ही पति हो सकता है। जिनसे जन्म लेनेवाले संतानो के साथ मिलकर एक ‘परिवार’ का निर्माण होता है। वे ‘परिवार’ की कल्पना भी नहीं कर सकते थे। युरोपिय दार्शनिक प्लेटो ने लिखा है कि “मेरा 20-22 स्त्रियों से संबंध रहा है।“ अरस्तु का कथन है कि उसने कितने ही स्त्रियों से संपर्क किया। देकार्ते भी यहीं कहते है! रुसो ने तो अपनी आत्मकथा में लिखा है कि “एक स्त्री के साथ रहना तो कभी भी संभव नहीं हो सकता!” उन दिनों यूरोप में महिलाओं को एक इंसान के रुप में मान्यता नहीं थी। दार्शनिकों के मुताबिक स्त्री में आत्मा ही नहीं होती थी। उन्हें मेज-कुर्सी के समान माना जाता था। जब पुरानी से मन भर जाए तो नई ले आओ! यूरोप और अमेरिका में शायद ही ऐसा कोई पुरुष या महिला थी जिसकी शादी हुई हो! ऋषी वैलेंटाइन ने देखा कि लोग पशुओं की भांती रहते है और उन्ही की भांती संभोग करते है। जब वैलेंटाइन ने भारतीय संस्कृति और सभ्यता का अध्ययन किया तब उन्हें पता चला कि भारत में ‘शादी’ होती है जिससे ‘परिवार’ नाम की पवित्र संस्था का निर्माण होता है। परिवार के अंतर्गत एक स्त्री को एक पुरुष के साथ आजीवन के लिए बंधना पड़ता है। परिवार के फ़ायदे उनके ख्याल में आए। सबसे बड़ा फायदा यह कि एक ही स्त्री या पुरुष से बंधे रहने के कारण सेक्स जनित रोग नहीं होंगे। इस तरह भारतीय परंपरा ‘शादी’ और ‘परिवार’ का महत्व समझ में आने से उन्होनें इसे पूरे यूरोप में लागू करने की ठानी। वे पूरे यूरोप में घूम घूम कर लोगों को जागृत करते। लोगों को उनकी बातें समझ में आने लगी। उनकी प्रतिभा को देखकर उन्हें चर्च का पादरी बनाया गया। जिन लोगों को उनकी बातें सही लगती वे चर्च में आकर उनसे अपनी शादी करवाने लगे। उस समय रोम का राजा क्लौडियस था। क्लौडियस का मानना था कि विवाह करने से पुरुषों की शक्ति एवं बुद्धि खत्म हो जाती है। इसी वजह से उसने पूरे राज्य में आदेश जारी किया था कि उसका कोई भी सैनिक या अधिकारी शादी नहीं करेगा। क्लौडियस ने वैलेंटाइन को शादी करवाने का कार्य रोकने की हिदायते दी। लेकिन महापुरुष कहां किसी धमकी से डरते है! तब राजा ने उन्हें यूरोपियन समाज को, भारतीय विवाह प्रणाली को अपनाकर अपसंस्कृति फ़ैलाने के आरोप में 14 फरवरी 498 A D को सार्वजनिक रुप से फ़ांसी दी। फाँसी के वक्त उनकी उम्र सिर्फ़ 20 साल थी।

जिन बच्चों ने वैलेंटाइन के कहने पर शादी की थी वो बहुत दु:खी हुए और उन लोगों ने ही उनकी याद में वैलेंटाइन डे मनाना शुरु किया। इसका साफ़-साफ़ मतलब है कि शादी करनेवाले लोग वैलेंटाइन डे मनाते है। भारत में तो शादी होना आम बात है...फ़िर कॉलेज के युवक-युवतियां वैलेंटाइन डे क्यो मनाते है और विरोध करनेवाले विरोध क्यों करते है?? आजकल 14 फरवरी के दिन हर तरफ़ वैलेंटाइन डे का जो जश्न दिखाई देता है, जो दिवानगी दिखाई देती है वो बाजारवाद की देन है। ये बाजारवाद है, जो गंजे को भी कंघे बेचता है। अपना सामान बेचने हेतु ये लोग वैलेंटाइन डे का इतना प्रचार करते है कि जनता उनकी बातों में फ़ंस जाती है। फरवरी महिने के शुरवात में ही हर तरफ़ वैलेंटाइन डे संबंधीत विभिन्न विज्ञापनों, जोक्स एवं मैसेजेस की भरमार हो जाती है। 
एक जोक्स पढ़िए, 
दो दोस्त आपस में बात कर रहे थे...
पहला- भाई ये 14 फरवरी को क्या है?
दूसरा- तेरे पास बीवी है या गर्लफ्रेंड?
पहला- बीवी है।
दूसरा- तो फ़िर महावीर जयंती है।
इस तरह के जोक्स ये ही बात साबीत करते है कि हम वैलेंटाइन डे का गलत मतलब निकाल रहे है। दरअसल वैलेंटाइन डे शादी-शुदा लोग ही मनाते है। प्यार पहले भी होता था। हमारे पिता ने भी हमारी माँ से प्यार किया था तो हमारी माँ ने भी हमारे पिता से प्यार किया था। लेकिन उनका प्यार किसी वैलेंटाइन डे का मोहताज नहीं था! अत: खुद सोचिए...भारत में, जहां शादी होना आम बात है, वहां के लोगों ने बाजारवाद के शिकार होकर क्या इसे मनाना चाहिए? और जिन वैलेंटाइन ने ‘लीव इन रिलेशनशिप’ का विरोध कर भारतीय परंपरा “शादी या विवाह” का समर्थन किया था उन वैलेंटाइन का विरोध करना चाहिए??

Keywords: Valentine day, 14 February, Wedding, live in relationship, love

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वैलेंटाइन डे: मनानेवाले और विरोध करनेवाले दोनों ही सच्चाई से अनजान
वैलेंटाइन डे मनानेवाले और विरोध करनेवाले दोनों ही सच्चाई से अनजान है। जानिए, क्या है वैलेंटाइन डे की सच्चाई...!!!
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