क्या ईश्वर भी अपवित्र हो सकते है?

दूसरे मंदिर या दूसरे भगवान नारी के स्पर्श से अपवित्र नहीं होते, तो शनि मंदिर ही क्यों अपवित्र होना चाहिए? क्या कहेंगे ऐसी दोहरी और स्त्री विरोधी मानसिकता पर?

                             क्या ईश्वर भी अपवित्र हो सकते है?

हाल ही में महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर के मंदिर में एक महिला के शनि देव को तेल चढ़ाने से विवाद शुरु हो गया है। खबरों के मुताबिक, 400 वर्षों से इस मंदिर के भीतर महिला के पूजा की परंपरा नहीं रही है। ऐसे में महिला द्वारा मंदिर के चबुतरे पर चढ़कर शनि महाराज को तेल चढ़ाने पर पुजारियों ने मूर्ति को अपवित्र घोषित कर दिया। मंदिर प्रशासन ने 6 सेवादारों को निलंबित कर दिया है और मूर्ति का शुद्धिकरण किया गया है।
यह खबर पढ़ कर, आप क्या सोच रहे है? क्या सचमुच शनि महाराज अपवित्र हो गए? पुरुष अपवित्र हो सकते है, नारी अपवित्र हो सकती है लेकिन ईश्वर कैसे अपवित्र हो सकते है? जो ईश्वर सभी पापियों के पाप धोता है, वो स्वयं कैसे अपवित्र हो सकते है? ईश्वर एक दिव्य शक्ति है, वो पवित्रता-अपवित्रता जैसी तुच्छ चीज़ों के भी उपर है। दूसरी बात, क्या संसार की किसी भी चीज जैसे कि जल, दूध, गो-मुत्र और गंगाजल आदि में इतनी शक्ति है कि वो साक्षात ईश्वर को पवित्र कर सके? हम इंसान को पवित्र-अपवित्रता के दायरे में रख सकते है लेकिन उस दिव्य शक्ति को हम इतना संकुचित कैसे कर सकते है? क्या कोई ईश्वर स्त्री-पुरुष में भेद कर सकता है? यह कैसा धर्म है, जो एक नारी को ईश्वर की पूजा आराधना करने से रोकता है? जब शनि की साढे‌-साती महिला को लग सकती है, तो महिला शनि की पूजा क्यों नहीं कर सकती? जब बाजार, दफ्तर, दुकान, स्कूल, अस्पताल ही नहीं दूसरे मंदिर या दूसरे भगवान नारी के स्पर्श से अपवित्र नहीं होते, तो शनि मंदिर ही क्यों अपवित्र होना चाहिए? क्या कहेंगे ऐसी दोहरी और स्त्री विरोधी मानसिकता पर?
हम सभी का इस संसार में होने का कुछ उद्देश है। जो चीज़ उस उद्देश के अनुकूल है उसे हम स्वीकार करते है और बाकी चीज़ों को छोड़ते चले जाते है। जो हम छोड़ते है, वो सब हमारे लिए अपवित्र है। लेकिन ईश्वर के लिए इस संसार का कोई उपयोग नहीं है। इसलिए ईश्वर को इस संसार को पकड़ने की या इस संसार को छोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसलिए ईश्वर के लिए इस संसार की कोई भी चीज़ या कोई भी व्यक्ति अपवित्र नहीं हो सकती! चाहे वह नर हो या नारी!
सूर्य की किरणें जहां नहीं पहुँचती, वहां रोगों के किटाणु पैदा हो जाते है। मतलब सूर्य गंदगी को समाप्त करता है। अपवित्रता को समाप्त करता है। परंतु क्या आपने कभी भी सूर्य की किरणों को गंदे होते देखा है? कभी देखा है कि वे अपवित्र हो गई है? नहीं। जैसे सूर्य की किरणें अपवित्रता को दूर करती है, परंतु स्वयं कभी अपवित्र नहीं होती, ठीक वैसे ही ईश्वर चाहे वह किसी भी रुप में क्यों न हो, कभी भी अपवित्र नहीं हो सकते!!!
यह मेरे अपने विचार है। ज़रुरी नहीं कि आप इससे सहमत ही हो। आप क्या सोचते है? क्या ईश्वर भी अपवित्र हो सकते है?

Keywords:shani signapur,God, iishvar,holiness,sacred

COMMENTS

BLOGGER: 19
  1. जय मां हाटेशवरी....
    आप ने लिखा...
    कुठ लोगों ने ही पढ़ा...
    हमारा प्रयास है कि इसे सभी पढ़े...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना....
    दिनांक 06/12/2015 को रचना के महत्वपूर्ण अंश के साथ....
    चर्चा मंच[कुलदीप ठाकुर द्वारा प्रस्तुत चर्चा] पर... लिंक की जा रही है...
    इस चर्चा में आप भी सादर आमंत्रित हैं...
    टिप्पणियों के माध्यम से आप के सुझावों का स्वागत है....
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    कुलदीप ठाकुर...


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    1. ब्लॉगर भाई कुलदीप जी, मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

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  2. डायनामिक
    सुन्दर लेख कुछ पवित्र चीज़े , अपवित्र चीज़ो को जलाकर भी पवित्र रहती है

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    1. ब्लॉगर भाई मनिष जी, बिल्कुल सही कहा आपने...

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  3. Really I don't understand this type of attitude! Does Gods discriminate between men and women? Or they treat both as the same human beings.... I wonder...

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  4. Pavitra, Apavitra bhagwan ne nahi balki insaan ne khud banaye hain. Bhagwan ke aage to sab ek barabar hi hain. tabhi to Surdas ne likha hai "Prabhuji mere awhun chit na dharo samdarshi hain naam tiharo.."

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  5. ये सब इन्सानों का किया धरा है। महिला हो या पुरुष पूजा क अधिकार सब को है। क्या पुरुष को ईश्वर ने बनाया और महिला को नही।

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  6. हम सभी का इस संसार में होने का कुछ उद्देश है। जो चीज़ उस उद्देश के अनुकूल है उसे हम स्वीकार करते है और बाकी चीज़ों को छोड़ते चले जाते है। जो हम छोड़ते है, वो सब हमारे लिए अपवित्र है। लेकिन ईश्वर के लिए इस संसार का कोई उपयोग नहीं है। इसलिए ईश्वर को इस संसार को पकड़ने की या इस संसार को छोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसलिए ईश्वर के लिए इस संसार की कोई भी चीज़ या कोई भी व्यक्ति अपवित्र नहीं हो सकती! चाहे वह नर हो या नारी!
    कुछ मान्यताएं अपने आप में बड़ी विचित्र होती हैं जिन्हें समझ पाना मुश्किल होता है किन्तु नारी , जिसे सृष्टि जन्मदाता माना जाता है , जो सबसे पवित्र मानी जाती है उसके छूने मात्र से कोई मूर्ति कैसे अपवित्र हो सकती है !! सही सवाल उठाये हैं आपने ज्योति जी !!

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  7. Impure is the attitude of those who perpetrate such discrimination.

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  8. बहुत ही सुंदर और सार्थक लेख। इंसानों का बनाए सिस्‍टम में सब कुछ मुमकिन है पर ईश्‍वर को सिर्फ अपने बंदों से प्‍यार है। उसे अपवित्रिता का कोई भय नहीं है।

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  9. ज्यादा समझदारों को कौन समझाए। .
    चिंतनशील प्रस्तुति
    जन्मदिन की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं

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  10. Bahut hi achhi post hai. God Sabhi ke hote hai. God Sabhi insaan se prem karte hai. Thanks

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  11. आप ने बहुत हिम्मत से अपना तर्क रखा है---
    भगवान के नाम पर मानव जाति का शोषण करने वाला पुजारी वर्ग वास्तव में उन लोगों में से है जो बेहद कमजोर होते हैं--नारी को देख कर ही जिनके दिल-दिमाग और मन में बहुत कुछ ऐसा दौड़ने लगता है जिसे दुनिया अपवित्र कहती है--यह लोग ऊपर से कोई न कोई जाप कर रहे होते हैं लेकिन मन ही मन किसी न किसी से कुछ ऐसा कर रहे होते हैं जिसकी आज्ञा इनका परिवेश भी इन्हें नहीं देता---इस लिए इनकी सोच का भगवान भी ऐसा ही होगा जो महिला के छूने से अपवित्र हो जाता होगा---इन बेचारों पर तो तरस आता है--कितना कमज़ोर है इनका भगवान---
    सन 1964 में आई फिल्म चित्रलेखा में एक गीत था जानेमाने शायर साहिर लुधियानवी साहिब का लिखा हुआ---उसी की पंक्तियाँ आज फिर याद आ रही हैं--
    संसार से भागे फिरते हो
    भगवान को तुम क्या पाओगे
    इस लोक को भी अपना न सके
    उस लोक में भी पछताओगे
    संसार सेे भागे फिरते हो...

    ये पाप है क्या, ये पुण्य है क्या
    रीतों पर धर्म की मोहरें हैं
    हर युग में बदलते धर्मों को
    कैसे आदर्श बनाओगे
    संसार से भागे फिरते...

    ये भोग भी एक तपस्या है
    तुम त्याग के मारे क्या जानो
    अपमान रचेता का होगा
    रचना को अगर ठुकराओगे
    संसार से भागे फिरते...

    हम कहते हैं ये जग अपना है
    तुम कहते हो झूठा सपना है
    हम जन्म बिता कर जायेंगे
    तुम जन्म गँवा कर जाओगे
    संसार से भागे फिरते...
    अगले वक्तों के हैं ये लोग इन्हें कुछ न कहो--ये लोग तो खुद भी अपने आप से आँख नहीं मिला सकते---
    हमारे पास--इस दुनिया के पास आप जैसी हिम्मतवर ब्लागर है---यह बहुत बड़ी बात है--हम आप से सहमत हैं--इस दलेरी को बनाये रखना--और तर्क की धार को तेज़ करते रहना--- पीपुल्ज़ मीडिया लिंक आप के साथ है--

    उत्तर देंहटाएं
  12. बिल्कुल सच कहा आपने,
    21 सदी में अगर हम धर्म मे लॉजिक नही लगा सकते तो कम से कम अपने कर्मो मैं तो लगाये।
    यही घटनाये हमे फिर पीछे धकेलती हैं।सैकड़ो साल लग गये इंसान को अंध विश्वास से बाहर निकलने मे,मगर जाने क्यों हम वही जाना चाहते हैं।

    उत्तर देंहटाएं

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बर्फ़ी,1,नारी,44,नारी अत्याचार,10,नारी शिक्षा,1,नाश्ता,1,निंबु का अचार,1,निचली जाती,1,निर्णयक्षमता,1,निर्भया,2,निवाला,1,नींबू,1,नेत्रदान,1,नेपाल त्रासदी,1,नेल आर्ट,1,पकोडे,2,पक्षी,1,पढ़ा-लिख़ा कौन?,1,पढ़ाई,1,पति,1,पति का अहं,1,पति-पत्नी,1,पत्ता गोभी,1,पत्ता गोभी की मुठिया,1,पत्नी,1,पत्र,1,पपीता,1,परंपरा,2,परवरिश,4,पराठे,1,परीक्षा,1,परेशानी,1,पल्ली उत्सव,1,पवित्र,1,पवित्रता,2,पसंदीदा शिक्षक को पत्र,1,पापड़,3,पालक,1,पालक के नमक पारे,1,पालक बडी,1,पाश्चात्य संस्कृति,1,पिता,1,पुण्य,1,पुरानी मान्यताएं,1,पुलवामा हमला,1,पूडी,1,पेढे,1,पैड्मैन,1,पैनकेक,1,पैरेंटीग,1,पोर्न मूवी,1,पोषण,1,पोहा,1,पोहे के कुरकुरे,1,प्याज,3,प्याज की चटनी,1,प्यार,1,प्यासा कौआ,1,प्रत्यूषा,1,प्रद्युम्न,1,प्रसन्न,1,प्राणियों से सीख,1,प्री वेडिंग फोटोशूट,1,फर्रुखाबाद,1,फलाहार,1,फल्लिदाने,1,फादर्स डे,1,फूल गोभी के परांठे,1,फेसबुक,2,फैशन,1,फ्रिज,1,फ्रेंडशीप डे,1,फ्रेंडशीप डे शायरी,1,बकरीद,1,बची हुई सामग्री का उपयोग,1,बच्चे,5,बच्चे की ज़िद,1,बच्चें,1,बछबारस,1,बटर,1,बड़ा कौन?,1,बढ़ती उम्र,1,बदला,1,बधाई संदेश,4,बरबादी,1,बर्फी,2,बलात्कार,8,बहू,2,बाजरा,1,बाल शोषण,2,बाहर का खाना,1,बिल्ली के गले में घंटी,1,बुढ़ापा,1,बुलंदशहर गैंगरेप,1,बेटा,1,बेटा पढाओ,1,बेटी,6,बेटी बचाओ अभियान,2,बेसन,2,बैंगन,1,ब्रेकअप,1,ब्रेड,4,ब्रेड की रसमलाई,1,ब्रेड पकोडा,1,ब्रेड पिस्ता पेढे,1,ब्लॉगअद्दा एक्टिविटी,1,ब्लॉगर ऑफ द इयर 2019,1,ब्लॉगर्स रिकोग्निशन अवार्ड,1,ब्लॉगिंग,5,ब्ल्यू व्हेल गेम,1,भक्ति,1,भगर,3,भगर की इडली,1,भगर के उत्तपम,1,भगर के कटलेट,1,भगवान,3,भजिए,1,भरवां मिर्च,1,भाई दूज शायरी,1,भाकरवड़ी,1,भाभी,1,भारत,1,भारतीय मसाले,1,भुट्टे के पकोड़े,1,भूकंप,1,भोजन,1,भ्रुण हत्या,1,मंदसौर गैंग रेप,1,मंदिर,2,मंदिरों में ड्रेस कोड़,1,मंदिरों में दक्षिणा,1,मकई,4,मकई उपमा,1,मकई चीला,1,मकई पकोडे,1,मकर संक्रांति,2,मकर संक्रांति की शुभकामनाएं,1,मकर संक्राति,1,मटर,3,मटर के अप्पे,1,मदर्स डे,3,मम्मी,1,मलाई,2,मलाई फ्रूट सलाद,1,महानता,1,महाराजा अग्रसेन जी,1,महिला आजादी,1,महिला आरक्षण,1,महिला सशक्तिकरण,4,महिला सुरक्षा,1,महिलाओं का पहनावा,1,माँ,3,माता यशोदा,1,मातृभाषा,1,मायका,2,मारवाड़ी,1,मार्केट जैसे साबूदाना पापड़,1,माला,1,मावा कुल्फी,1,मासिक धर्म,2,माहवारी,3,मिठाई,17,मित्र,2,मिलावट,1,मिलावट पहचानने के घरेलू तरीके,1,मुक्ति,1,मुबारकपुर कला,1,मुस्लिम मंच,1,मुहूर्त,1,मूंग की सूखी दाल का हलवा,1,मूंगफली,1,मूंगफली की सूखी चटनी,1,मूली,3,मूली का अचार,1,मूली के पत्तों के कुरकुरे कटलेट्स,1,मेंस्ट्रुअल कप,1,मेंहदी,6,मेडिसिन बाबा,1,मेथी,1,मेथी दाना चुर्ण,1,मेथी मटर मलाई,1,मेनु,1,मेरा मंत्र,3,मेरी बात,15,मैंगो श्रीखंड,1,मैनर्स,1,रंग,1,रंग पंचमी,1,रक्तदान,1,रक्तदान के फायदे,1,रक्षाबंधन,1,रक्षाबंधन शायरी,1,रजस्वला नारी,3,रवा इडली,1,रसोई,90,रांगोली,3,राखी,1,राजभाषा,1,राजस्थानी समाज,2,राम रहीम,1,राशी-भविष्य,1,राष्ट्रगान,1,राष्ट्रगीत,1,राष्ट्रभाषा,1,रिती-रिवाज,1,रीतिरिवाज,1,रुपया-पैसा,1,रोटी,2,रोस्टेड मूंगफली,1,लघुकथा,9,लड्डू,2,लहसुन,1,लाइटर,1,लाल मिर्च की सूखी चटनी,1,लीव इन रिलेशनशिप,1,लेसुए,1,लॉटरी,1,लोकल ट्रेन,1,लोग क्या कहेंगे?,1,लौकी,2,लौकी का हलवा,1,लौकी की बड़ी,1,वक्त,1,वटसावित्री व्रत,1,वर,1,वर्जिनिटी टेस्ट,1,वर्तमान,1,वारी के हनुमान,1,विधवा,1,विधवा ने किया कन्यादान,1,विधवा विवाह,1,विशाखापट्टनम रेप 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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: क्या ईश्वर भी अपवित्र हो सकते है?
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दूसरे मंदिर या दूसरे भगवान नारी के स्पर्श से अपवित्र नहीं होते, तो शनि मंदिर ही क्यों अपवित्र होना चाहिए? क्या कहेंगे ऐसी दोहरी और स्त्री विरोधी मानसिकता पर?
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