जानिए, आज के जमाने की अच्छाइयां...!!!

आज हम यहीं सुनते है कि जमाना बहुत ख़राब हैं। लेकिन यह सिक्के का एक पहलू हैं। जानिए, सिक्के के दूसरे पहलू के तरफ़ की आज के जमाने की अच्छाइयां!

जानिए, आज के जमाने की अच्छाइयां...!!!
अच्छाइयाँ और वो भी आज के जमाने की… हो ही नहीं सकता! आज तो सभी ओर अराजकता फैली हुई है। किसी को किसी से मतलब नहीं है। हरेक बंदा अपने-आप में मग्न है। हर रिश्ता जैसे स्वार्थ से ही बंधा हुआ है! चाहे वह भाई-बहन का रिश्ता हो या पति-पत्नी का, बाप-बेटे का हो या दोस्ती का। हर रिश्ते की नींव में ऐसा प्रतीत होता है कि सिर्फ जरुरत ही सबसे अहं चीज हो गई है। फ़िर भी मैं आज बात करना चाह रही हूं, आज के जमाने के अच्छाइयों की...!! हम वो ही देखते और सुनते है, जो हमें दिखाया और सुनाया जाता है या जो हम देखना और सुनना चाहते है। हमारा मीड़िया ज्यादातर नकारात्मक ख़बरें ही हमें दिखाता और सुनाता है। लेकिन जैसे कि मैं पहले भी बता चुकी हूं, "आपकी सहेली" की हमेशा यहीं कोशिश रहती है कि समाज में सकारात्मकता फैले। अच्छी घटनाओं से किसी को प्रेरणा मिलें। यदि ऐसी घटनाओं से सिर्फ़ किसी एक व्यक्ति को भी प्रेरणा मिलती है, तो ‘’आपकी सहेली’’ अपने उद्देश में सफ़ल हो जाएगी।

नाबालिग रेप पीड़िता के बच्चे को गोद लेने आगे आएं दर्जन भर दंपती
बरेली की रहने वाली 14 साल की रेप पीड़िता को कोर्ट ने अबॉर्शन की अनुमती नहीं दी थी। जब लोगों को पता चला कि रेप पीड़िता के आर्थिक हालात ठीक नहीं है और वो खुद अभी एक बच्ची ही है, ऐसे में उस नाजायज बच्चे का तिरस्कार करने की बजाय, हिंदू-मुस्लिम, अमीर-गरीब, करीब एक दर्जन लोग बच्चे को गोद लेने आगे आएं!
आज भी जब समाज में रेप पीड़िता को ही पुर्णत: दोषी माना जाता है, उसे तिरस्कार भरी नजरों से देखा जाता है, आज भी जब इंसान की ख़्वाहिश यहीं रहती है कि उसके बच्चे में उसका अपना अंश या खून मौजूद हो, तब इतने सारे लोगों का बच्चे को गोद लेने के लिए आगे आना किस बात का सबूत है? यहीं न, कि आज इंसान दूसरे के दु:ख-दर्द को समझ रहा है!! आज भी अच्छाई जिंदा है!

नोटबंदी के दौरान हो रहीं अच्छाइयां
नोटबंदी से पूरा देश कतार में लगा हुआ है। आम जनता को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे वक्त में कुछ छोटे-छोटे आम इंसान महान कार्य कर रहे हैं। पटना की रहने वाली रेखा मोदी एवं उनकी बेटी ने घर में रखें चेंज के पांच हजार रुपये इकट्ठा किए। बैंक जाकर 10-10 हजार रुपये अपने-अपने खाते से निकाले। चार-चार हजार रुपये भी बदलवाए। फिर सोसायटी के वॉट्सएप ग्रुप पर मैसेज डाला कि वे रुपए चेंज करने जा रही हैं। इसके बाद सोसायटी के तीन अन्य लोग भी एक्सचेंज करवाए हुए रुपयों के साथ उनकी मदद के लिए पहुंचे। इस तरह उनके पास 50 हजार रुपए चेंज करने के लिए हो गए। इन लोगों ने पर्थला मार्केट के रेहड़ी पटरी वालों को और झुग्गियों में रहने वालों को उनके 500 और 1000 रुपए के नोट के बदले 100-100 के नोट दिए। ऐसा कार्य सिर्फ रेखा मोदी ने ही नहीं किया तो और भी कई जगहों से ऐसी ख़बरें आई है। 
जैसे, रायपुर के संदीप माखीजा एवं उनके चार साथी हर रोज बैंक की लाइन में लगते है। 500 और 1000 रुपए के खुल्ले करवाकर अस्पताल में दूसरे गांव से आए मरिजों में यह बांटते है ताकि उन्हें नोटबंदी के कारण असुविधा न हो।
शुरवात में ऐसी ख़बरें पढ़ कर हमें लगता हैं कि इसमें कौनसी महानता है? लेकिन जरा उन ग़रीबों से पुछिए कि ऐसे छोटे से कार्य से उनको कितनी सहायता मिली है? कहने का तात्पर्य यहीं है कि आज इंसान दूसरे के दु:ख-दर्द को समझ कर अपने तरीके से उसे दुर करने की सोच रहा है! आज भी जमाना अच्छा है!

कोच्चि का चर्च बांट रहा है छोटे मुल्य के नोट
आज तक हम मंदिरों, मस्जितों, चर्च और गुरुद्वारे में दक्षिणा चढ़ाते आएं है। लेकिन इस दक्षिणा का ऐसा सदुपयोग आपने पहले कभी नहीं देखा होगा। केरल के कोच्चि के थेवाक्कल स्थित सेंट मार्टिन साइरोमालाबार चर्च ने लोगों के लिए अपना दान पात्र खोल दिया था। लोगों से कहा कि अपनी दैनिक जरुरतों को पूरा करने के लिए जिसे जितने पैसे की जरुरत है वह चर्च के कैश बॉक्स से ले सकता है। पैसे लेने के बदले चर्च ने ना ही उनसे किसी तरह का कोई डॉक्यूमेंट साइन करवाया और ना ही किसी से पूछा गया कि उसने कितने पैसे लिए। चर्च के पादरी जिमी का कहना है कि, "मुझे पूरा यकीन है कि इन सभी लोगों को जब बैंक से उनके पैसे मिल जाएंगे तो वे चर्च के पैसे लौटा देंगे।" अब सिर्फ जनता ही नहीं, चर्च भी जनता के लिए सोचने लगे हैं।

नेकी की दीवार
आजकल लोग कई जगह नेकी की दीवार बना रहे हैं। इस दीवार पर जिसके पास ज्यादा के कपड़े आदि है वे अपने कपड़े यहां छोड़ कर जा सकते है। और जिन ग़रीबों को इन कपड़ों की जरुरत है वे इन कपड़ों को यहां से ले जा सकता है। क्या पहले के जमाने में कभी ऐसा होता था?
हर कालखंड़ में अच्छाइयां और बुराइयां दोनों का अस्तित्व बना रहता है। मगर मीड़िया और बुजुर्गों के नकारात्मक रवैये के कारण हमें लगता है कि आज का ही जमाना ख़राब है।
 लेकिन उपरोक्त सभी घटनायें इस बात का सबूत हैं कि आज भी जमाने में अच्छाई बरकरार हैं!!!

Keywords:Real heroes, goodness in today's era,demonitization, rape 

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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: जानिए, आज के जमाने की अच्छाइयां...!!!
जानिए, आज के जमाने की अच्छाइयां...!!!
आज हम यहीं सुनते है कि जमाना बहुत ख़राब हैं। लेकिन यह सिक्के का एक पहलू हैं। जानिए, सिक्के के दूसरे पहलू के तरफ़ की आज के जमाने की अच्छाइयां!
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
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