काश, ऐसी खबरे बार-बार पढने मिले---!!! भाग-3

हाल ही में हुए जाट आंदोलन के बाद दो बहुत अच्छी खबरें पढ़ी। इतनी अच्छी की मन कह रहा है सबको सुनाऊं। आप सोच रहे होंगे करोडों रुपए की संपती का नुकसान होने के बाद, इतने लोगों की जान जाने के बाद भी मैं कह रहीं हूं कि अच्छी खबरें! हां, अच्छी खबरें!

काश, ऐसी खबरे बार-बार पढने मिले---!!! भाग-3
हाल ही में हुए जाट आंदोलन के बाद दो बहुत अच्छी खबरें पढ़ी। इतनी अच्छी की मन कह रहा है सबको सुनाऊं। आप सोच रहे होंगे करोडों रुपए की संपती का नुकसान होने के बाद, इतने लोगों की जान जाने के बाद भी मैं कह रहीं हूं कि अच्छी खबरें! हां, अच्छी खबरें! क्योंकी जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई तो किसी भी हालात में नही हो सकती! लेकिन यदि ऐसी घटनाओं से हमने कुछ सबक लिए, आगे भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो इसके इंतजाम किए तो क्या यह अच्छी खबरें नहीं है? आपको भी उत्सुकता हो रही है न सुननेकी। तो पेश है हमारे भारतवासियों के लिए दो ऐसी खबरें जिससे हमारा सबका बहुत-बहुत फायदा होगा।
पहली खबर-
जाट आंदोलन के कारण हूई हिंसा का विरोध करते हुए हरियाणा के 35 समुदायों ने जाटों को सभी सामाजिक गतिविधियों से निष्कासित करने का फैसला किया है। हरियाणा के 100 से अधिक गांवों ने साथ मिलकर एक महापंचायत के जरिए यह निर्णय लिया। गांववाले दंगाइयों से बेहद नाराज है और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कारवाई चाहते है।
दूसरी खबर-
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि आंदोलनकारियों को राष्ट्र की संपत्ति जलाने और आंदोलन के नाम पर देश को बंधक बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। और वह सार्वजनिक संपत्ति को क्षतिग्रस्त करनेवालों को दंडित करने के लिए दिशानिर्देश जारी करेगा। न्यायाधिशों ने संकेत दिया कि इसके तहत संभव है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को क्षतिपुर्ति देनी पड़े!

है न एक अच्छी खबरें! आज जो इतने बड़े पैमाने पर दंगे-फसाद हो रहे है, छोटी सी चिंगारी को ज्वालामुखी बनते देर नहीं लग रहीं है तो इसके पिछे दंगाइयों की यहीं सोच काम कर रहीं है कि कोई भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता न कानुन और न ही समाज! उलटे पूरे देश की मीड़िया हमें रातोंरात हीरो बना देगीं! अखबारों में, सोशल मीड़िया पर, टी. व्ही. पर हमारी फोटों दिखने लगेगी! और वो भी बिना कूछ मेहनत किए, बिना कूछ खोए। हां, बिना कूछ खोए! क्योंकि दंगाइयों ने तो कूछ भी नहीं खोया! खोया तो देश ने, समाज के निरपराध, मासुम और निर्दोष लोगों ने! ऐसे दंगो के वक्त कहीं कारों के शो रुमों और गोदामों को फूंक दिया जाता है, तो कहीं मॉल्स और शॉपिंग सेंटर्स आग के हवाले कर दिए जाते है। कहीं डेपों में खड़ी कई सरकारी बसों को फूंका जाता है, तो कहीं दुकानों को। इस दौरान सैकड़ों ट्रेने रद्द करनी पड़ती है। यातायात रोकने से हजारों लोगों के समय और धन की बर्बादी होती है। साथ ही उन्हें एवं उनके परिजनों को गहरी मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती है। हाल ही के सिर्फ एक जाट आंदोलन से पूरे राज्य में कई हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, 19 लोगों की मौत हुई और तीन दर्जन से अधिक लोग घायल हुए। मैं यहां पर यह नहीं कहना चाह रहीं हूं कि जाटों को आरक्षण मिलना चाहिए या नहीं, यह एक स्वतंत्र विषय है। मेरा कहना सिर्फ इतना ही है कि हमें कुछ तो ऐसा करना पड़ेगा कि भविष्य में इस प्रकार के दंगा-फसाद वाले आंदोलन ही न हो, जिसमें जन-माल की हानी हो! हम बचपन से सुनते आ रहे है कि,"जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा, वो भारत देश है मेरा..." लेकिन कहा जाता है कि सोना तो अंग्रेज अपने साथ ले गए अब सिर्फ चिड़िया बची है। भई, अंग्रेजों को जो ले जाना था, वो वे ले गए! लेकिन क्या वास्तव में अब सिर्फ चिड़िया ही बची है? जरा सोचिए, जो देश सिर्फ एक आंदोलन के नाम पर कई हजार करोड़ रुपए बर्बाद कर सकता है क्या वो देश गरीब है? नही, अभी भी मेरा भारत देश "सोने की चिड़िया" है। लेकिन यदि हमें हमारी "सोने की चिड़िया" बचानी है तो ऐसे दंगो पर, आंदोलनों पर रोक लगानी ही होंगी। लेकिन वोट बैंक की चिंता में रहनेवाली पार्टियों से हम यह उम्मीद नहीं कर सकते।

दंगा-फसाद वाले आंदोलनों पर रोक लगाने का नेक काम उपरोक्त दो खबरें कर सकती है। पहली खबर के मुताबिक सामाजिक बहिष्कार से दंगाइयों के मन में कूछ न कूछ सामाजिक ड़र पैदा होने से वे दंगे करने से पहले चार बार सोचेंगे। और दूसरी खबर के मुताबिक यदि दंगाइयों से क्षतिपुर्ति की वसुली की जाने लगी तो क्या कोई भी ऐसे दंगे करने की सोच भी सकेगा? काश, वास्तव में ऐसी वसुली शुरु हो सके!! काश, ऐसी खबरें बार-बार पढ़ने मिले, ताकि मेरा देश और मेरे देशवासी हमेशा खूश रहें!!!
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: काश, ऐसी खबरे बार-बार पढने मिले---!!! भाग-3
काश, ऐसी खबरे बार-बार पढने मिले---!!! भाग-3
हाल ही में हुए जाट आंदोलन के बाद दो बहुत अच्छी खबरें पढ़ी। इतनी अच्छी की मन कह रहा है सबको सुनाऊं। आप सोच रहे होंगे करोडों रुपए की संपती का नुकसान होने के बाद, इतने लोगों की जान जाने के बाद भी मैं कह रहीं हूं कि अच्छी खबरें! हां, अच्छी खबरें!
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
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