निर्भया उर्फ ज्योति सिंह के माता-पिता को पत्र

निर्भया उर्फ ज्योति सिंह का नाम उजागर करने की उसके माता-पिता ने जो हिम्मत दिखाई, उस हिम्मत को श्रद्धापुर्वक नमन!

                             
निर्भया उर्फ ज्योति सिंह के माता-पिता को पत्र
आदरणीय आशा और बद्री सिंह पांडेय जी,
सादर नमस्कार।
आप मुझे नही जानते। लेकिन जैसे कि आज पूरा देश आपको निर्भया के माता-पिता के रुप में जानता है, मैं भी आपको जानती हूं। आपके बयान,
"मेरी बेटी का नाम ज्योति सिंह है और मुझे उसका नाम उजागर करने में जरा भी शर्मिंदगी नहीं है। आपको भी उसका नाम लेना चाहिए।"
                                   एवं
"बलात्कार जैसा घिनौना काम करनेवालों को अपना सिर शर्म से झुका लेना चाहिए। पीड़ित या उनके परिवार शर्मिंदा क्यों हो?"
दिल को छू गए। ऐसा लगा मानो तपती धूप में बारिश की ठंडी-ठंडी फुहारे तन-मन को भिगो गई हो!!


सच बताऊ, जब यह घटना हुई थी, तब 'निर्भया' नाम जान कर ऐसा लगा था कि उस लड़की ने बिल्कुल निर्भय हो कर बलात्कारीयों से आखिर तक संघर्ष किया, इसलिए ही उसे निर्भया नाम दिया गया। निर्भया नाम उस पर बिल्कुल फिट होता था। लेकिन मन में कहीं न कहीं कांटा चुभ रहा था। आखिरकार उस लड़की की क्या गलती थी, जो हर कोई उसका असली नाम, उसकी असली पहचान छुपा रहा है! तब पता चला कि पीड़िता के परिवार को होने वाले मानसिक आघातों के मद्देनज़र हमारे क़ानून में भी बलात्कार पीड़ितों का नाम सार्वजनिक करना एक अपराध माना गया है! तब मन-ही-मन बहुत दु:ख हुआ था। आखिर क्यों है, हमारे क़ानून में ऐसा प्रावधान? इस प्रावधान के मुताबिक तो जैसे सारा कसूर बलात्कार पीड़ित का ही है। इसलिए लज्जा वश होकर हमें उसका नाम छुपाना पड रहा है! लेकिन कानुन बनाने वाले भी क्या करें? आज भी बलात्कार पीड़ितों को हमारा समाज सामान्य नागरिकों की तरह स्वीकार नहीं करता। हमारे समाज में आज भी कई जगह पीड़िता को ही दोषी माना जाता है। कभी उसके पहनावे पर, तो कभी उसके व्यवहार पर सवाल उठाए जाते है। पीड़ितों पर ही आरोप लगाया जाता है कि उन्होंने ही अपराधियों को उकसाया होगा! जहां पीड़ितों को इस नज़रिए से देखा जाता है, वहां उनकी पहचान उजागर होना, उनकी मुश्किलें और बढ़ा देता है।



इन सब मुश्किलों के बावज़ूद, समाज के व्यंगबाण सहने के बावज़ूद, अपनी बलात्कार पीड़ित बेटी का नाम उजागर करना, सच में अपने-आप में एक बहुत ही हिम्मत का काम है। क़ानूनन चाहे एक आरोपी, कम उम्र के कारण जेल से बाहर आ गया हो, लेकिन अपनी बेटी का नाम उजागर कर-कर, मुझे लगता है कि आपने अपनी बेटी को, कम से कम अपनी तरफ से न्याय दे दिया! क्योंकि आज भी हमारे समाज में ऐसे बहुत से माता-पिता है जो बेटी का दोष नहीं है, यह जानते हुए भी उसका नाम उजागर करना तो दूर की बात है, ऑनर कीलिंग के तहत बेटी की खुद ही हत्या कर देंगे या उसे घर में बंद रहने को मजबूर कर देंगे!! आपका यह कदम समाज को जागरुक करनेवाला, एक मिसाल कायम करनेवाला है। इस कदम से लोगों के हृदय में निर्भिकता आयेंगी। ज्योति की आत्मा को भी थोड़ा ही सही, सकून ज़रुर मिला होगा! सच में, ऐसा सिर्फ और सिर्फ आप ही कर सकते थे!!!

आपके इस निर्भिक कदम को मेरा श्रद्धापुर्वक नमन!
-आपके दु:ख में शामिल एक महिला,

ज्योति देहलिवाल।
keywords: Nirbhaya, rape,Women

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