व्यंग- जमाना बहुत खराब आ गया है...!!!

जमाना बहुत खराब आ गया है!! लेकिन क्या वास्तव में, आज का ही जमाना खराब है? आज के ही लोग खराब है? पहले के जमाने के सभी लोग बिल्कुल अच्छे थे? आइए, हम थोड़ा इस बात पर गौर फरमाते है।

व्यंग- जमाना बहुत खराब आ गया है...!!!
जमाना बहुत खराब आ गया है, जनाब! आज कोई भी किसी की नहीं सुनता! बेटा, बाप की नहीं सुनता और बहू, सास की नहीं सुनती!! भाई, भाई पर ही मुकदमा करता है! चोरी, डकैती, बलात्कार ये घटनाएं तो आम हो गई है! बहन-बेटियों का तो घर से निकलना ही दुश्वर हो गया है! जमाना बहुत खराब आ गया है!!
ये सब जुमलें हम आए दिन सुनते रहते है। लेकिन क्या वास्तव में, आज का ही जमाना खराब है? आज के ही लोग खराब है? पहले के जमाने के सभी लोग बिल्कुल अच्छे थे? आइए, हम थोड़ा इस बात पर गौर फरमाते है।

चोरी, डकैती एवं लूटपाट
आज हम कहते है, सभी को गाड़ी, मोबाईल एवं सुख सुविधा के सारे साधन चाहिए। मन में समाधान ही नहीं है, इसलिए ये सब घटनाएं बढ़ रहीं है। लेकिन क्या ये सब घटनाएँ पहले नहीं होती थी? हमारे पोथी-पुराणों में इनका उल्लेख नहीं है? क्या वाल्मिकी जी ऋषी बनने के पहले ये ही काम नहीं करते थे? ओशो की एक किताब "नये भारत की खोज" में एक जगह पढ़ा था कि बेविलोन में पुरातत्व की खोज करने वालों को पंद्रह हजार साल पुरानी एक ईट मिली। ईट पर मोटो लिखा हुआ है "चोरी करना पाप है!" मतलब बिल्कुल साफ है कि पंद्रह हजार साल पहले के लोग भी चोरी करते थे! लोग कहते है पहले के लोग ताला नहीं लगाते थे। तो शायद उन्हें ताला लगाने की तकनीक मालुम न थी या ताले में रखने लायक उनके पास कुछ न था।

अश्लिलता
यदि हम फिल्मों व टेलिविज़न धारावाहिकों में बढ़ रहीं अश्लीलता की बात करें तो हिंदु मंदिरों में रखी और खजुराओं की उन अश्लील मूर्तियों को हम क्यों भूल जाते है, जिन्हें हम अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर मानते है। संस्कृत साहित्य के महाकवि कालिदास क्या आज के जमाने के थे, जिन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना "अभिज्ञान शंकुतलम" में नारी देह का वर्णन अत्यंत ही अश्लीलता से किया है?
नारी का सम्मान
ब्रम्हापुत्रि देवी अहिल्या को भी देवराज इंद्र की काम लोलुपता का शिकार होना पडा था। गलती देवराज इंद्र ने की और ऋषि गौतम के कोप का शिकार होना पडा अहिल्या जी को! ऋषि के पास तो दिव्य शक्तियां होती थी। वे चाहते तो दिव्य दृष्टि से देख कर, सत्यता जांच सकते थे, लेकिन नहीं। उनको सत्यता परखने की ज‌रुरत ही महसूस नहीं हुई। क्यों? क्योंकि नारी की कोई अहमियत ही नहीं थी। अत: जो कुछ भी भला-बुरा होता था, उसके लिए सर्वदा नारी को ही दोषी मान लिया जाता था। चाहे वह दोषी हो या न हो!! इसी तरह, जो समाज सीता जी की अग्निपरिक्षा पर, युधिष्ठर के अर्जुन की जीती हुई द्रोपदी पर (सिर्फ बड़ा भाई होने के नाते) कब्ज़ा करने पर और द्रोपदी चिरहरण पर भी चूप रह गया, वो समाज भला किसी साधारण नारी के मान सम्मान की क्या रक्षा करता होगा?
इंसानियत
आज हम कहते है, लोग बदले की भावना के वशिभूत होकर इंसानियत की सभी हदे पार कर देते है। तो फिर जब भीम ने दु:शासन की छाती से लहू निकालकर द्रौपदी के केश धोए थे तब भीम की इंसानियत कहा गई थी? आज भी जब टी. व्ही. धारावाहिक में ही उस दृश्य को देखते है तो आत्मा कांप उठती है!
बुजुर्गों का सम्मान
आज पत्र-पत्रिकाओं में नई पीढ़ी द्वारा बुजुर्गों पर हो रहे अत्याचारों के क़िस्से कहानी प्रकाशित हो रहे है। किंतु यह सिक्के का एक पहलू भर है। यदि बडे‌ आज की भाग-दौड वाली मशीनी जीवन की विवशता समझे, सामजस्य बैठाए तो ऐसी स्थिति ही न हो! वास्तव में बहुत ही भावुक, समर्पित और स्पष्ट सोच वाली है नई पीढ़ी। जो बड़ो का आदर भी करती है तो बुजुर्गो की सेवा भी। ये तो कुछ बुजुर्ग है जो अपना सनकीपन छोड़ने तैयार ही नहीं है। जैसा कि पिक्चर "पीकू" में दिखाया गया है। कब्ज से परेशान एक बाप, अपनी बेटी की खुशियों को अनदेखी कर सिर्फ अपनी ही सोचता है।
वास्तविकता
हाल ही में, चेन्नई में भयानक बाढ़ आई। इस बाढ़ में नाविकों ने सैकडों जिंदगीयां बचाई, तो कई लोगों ने खाना पका कर ज़रूरतमंदों में वितरीत किया। युवाओं ने सोशल साइट्‌स पर अपने घर और स्कूलों का पता लिखा और लोगों को ठहरने के लिए बुलाया। सभी ने बता दिया कि कैसे मुसीबत के समय साथ दिया जाता है। आज का जमाना भी अच्छा है, लोग अच्छे है इसका ये बेहतरीन उदाहरण है। 
वास्तव में अच्छाईयां और बुराईयां ये तो किसी भी समाज में, किसी भी युग में साथ-साथ चलती है। हर युग में सज्जन, चरित्रवान लोग है तो दुर्जन और चरित्रहिनों की भी कमी नहीं है। लेकिन बुजुर्ग लोग हमेशा अपने पहले के जमाने को अच्छा बताते है। 
Keywords:Jamana, New generation, old generation, humanity

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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: व्यंग- जमाना बहुत खराब आ गया है...!!!
व्यंग- जमाना बहुत खराब आ गया है...!!!
जमाना बहुत खराब आ गया है!! लेकिन क्या वास्तव में, आज का ही जमाना खराब है? आज के ही लोग खराब है? पहले के जमाने के सभी लोग बिल्कुल अच्छे थे? आइए, हम थोड़ा इस बात पर गौर फरमाते है।
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
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