राजस्थानी समाज के शादी-ब्याह में लिए जानेवाले झाले-वारणे: भाग 2

राजस्थानी समाज में शादी-ब्याह में झाले-वारणे लेने की प्रथा है। लेकिन आजकल की पीढ़ी को झाले न आने के कारण झाले सिर्फ़ शगुन के तौर पर होने लगे है। अत: ...पेश है झाले...!

राजस्थानी समाज के शादी-ब्याह में लिए जानेवाले झाले-वारणे: भाग 2
राजस्थानी समाज के शादी-ब्याह में झाले-वारणे लेने की प्रथा है। लेकिन लेडिज संगीत के चलते झाले-वारणे सिर्फ़ रस्म-अदायगी के तौर पर होने लगे है। वारणे तो फ़िर भी लिए जाते है लेकिन आजकल की पीढ़ी को झाले न आने के कारण झाले सिर्फ़ शगुन के तौर पर होने लगे है। झाले के बारे में विस्तृत जानकारी एवं झाले क्रमांंक 1-60 पढ़ने के लिए यहां क्लिक करिए। 

61) मंदर उपर सुंदर खड़ी जी ओ राज भंवरजी खड़ी सुकाव केस।
केसा केसा घुंघरा जी ओ राज भंवरजी चमक चारों देश॥

62) मंदर उपर सुंदर खड़ी जी ओ राज भंवरजी खड़ी सुकाव केस।
राजिंद फेरी दे गया जी ओ राज भंवरजी कर जोगी रो भेष॥

63) मंदीर म मंदीर जी ओ राज भंवरजी मंदीर म भगवान।
म म्हारी काम करती जी ओ राज भंवरजी खड्या-खड्या निखरं साहेबान॥

64) दुधा भरी बाटकी जी ओ राज भंवरजी शिवजी पुजन जाय।
पार्वती म्हाने यु कहे जी ओ राज भंवरजी रहियो अमर सुहाग॥

65) डूंगर उपर डूंगर जी ओ राज भंवरजी जिसपर नाच मोर।
मोर बिचारा काई कर जी ओ राज भंवरजी बाईजी चुगलीखोर।।

66) डूंगर उपर डूंगर जी ओ राज भंवरजी जिसपर पड्यो बदाम।
ऐसी चतर आजकल की लुगाई जी ओ राज भंवरजी मर्द करे सलाम॥
                            (चतर-होशियार)
7) डूंगर उपर डूंगर जी ओ राज भंवरजी जिसपर पड्यो कोट।
ऐसा साजन पालं पड्या जी ओ राज भंवरजी नितरा देवे नोट॥

68) डूंगर उपर डूंगर जी ओ राज भंवरजी म्हासु चढ्या न जाय।
म्हे म्हार साजन की लाडली जी ओ राज भंवरजी गोद्या ले कर जाय।।

69) चप्पल म्हारी भाग की जी ओ राज भंवरजी रोज सिनेमा जाय।
इसा चतर म्हारा सायबा जी ओ राज भंवरजी सामन मोटर लाय॥

70) चप्पल उंची हील की जी ओ राज भंवरजी गाऊन झालरदार।
इसा चोखा म्हारा सायबा जी ओ राज भंवरजी रोज सिनेमा ले जाय।।
                                 (चोखा-अच्छा)
71) आजकल र छोरा-छोरी जी ओ राज भंवरजी बाहर पढ़बा जाय।
माँ-बाप की ममता छुटी जी ओ राज भंवरजी बाहर का ही हो जाय।।

72) आजकाल री छोरया जी ओ राज भंवरजी राख खुला केस।
कलयुग को काई केवणो जी ओ राज भंवरजी जींस टॉप रो ड्रेस॥

73) आजकल री छोरया जी ओ राज भंवरजी कॉलेज पढ़बा जाय।
छोरा देखन आवं तो जी ओ राज भंवरजी छोरया कर नापास॥

74) आजकल री छोरया जी ओ राज भंवरजी नौकरी करबा जाय।
होटलसु खानो मंगाव जी ओ राज भंवरजी टाबर नौकरानी क पास छोड़ जाय॥

75) बनडी तो दुबली घनी जी ओ राज भंवरजी दो ही फ़लका खाय।
बनडा न चिंता पडी जी ओ राज भंवरजी वैद्य बुलाकर लाय।।

76) बैंगन तो काचा भला जी ओ राज भंवरजी पाकी भली अनार।
प्रीतम तो मोटा भला जी ओ राज भंवरजी दुबला फ़ूंक मारता गंडल जाय॥
                                       (काचा-कच्चे)
77) बैंगन तो काचा भला जी ओ राज भंवरजी पाकी भली अनार।
प्रीतम तो दुबला भला जी ओ राज भंवरजी मोटा जाट गंवार।।

78) राजन चाल्या चाकरी जी ओ राज भंवरजी पग म उलझी डोर।
पाछा फ़िरण देखिया जी ओ राज भंवरजी सामन उभी गणगौर॥
                                        (चाकरी-नौकरी) 
79) डाळम फ़ुले डागळ जी ओ राज भंवरजी रस डाळम क माय।
गोरी सूखे बाप क जी ओ राज भंवरजी जीव पिया रे माय॥
                                         (डाळम-अनार) 
80) चंद्रबदनी मृगलोचनी जी ओ राज भंवरजी है सुख-दु:ख की खान।
जो बस चालो मेरो जी ओ राज भंवरजी तुझ पे देऊ जान॥

81) रतन जडायो पोलको जी ओ राज भंवरजी घडी मोडी न जाय।
थार सरिखा सायबा जी ओ राज भंवरजी घडी भर छोड्या न जाय॥
                                          (पोलको-ब्लाउज)
82) घड्याळ म्हार हाथ म जी ओ राज भंवरजी बज गई साढे-सात।
लिखता-लिखता सो गई जी ओ राज भंवरजी रह गई मन की बात।।

83) महला महला म फ़िरू जी ओ राज भंवरजी महला टंगियो हार।
म म्हारी हार पेरती जी ओ राज भंवरजी बाईजी न लागी खार।।
                                           (खार-इर्ष्या‌) 
84) महला महला म फ़िरू जी ओ राज भंवरजी महला टंगियो हार।
देखनवाला घर नहीं जी ओ राज भंवरजी पेरण म काई सार।।
                                          (सार-मतलब) 
85) आटी डोरा कांगसी जी ओ राज भंवरजी सिस गुथाबा जाय।
सामन मिल गया सायबा जी ओ राज भंवरजी म्हारी छाती धडका खाय॥

86) प्रितम तुम मत जायजो जी ओ राज भंवरजी दूर देश को वास।
खोड़ हमारी यहां पड़ी जी ओ राज भंवरजी प्राण आपके पास॥
                                            (खोड़-शरीर) 
87) बर्तन भांडा मोकळा जी ओ राज भंवरजी घर म ह कढ़ाई।
बनडो घनो चोख्यो जी ओ राज भंवरजी बनडी की करे बढ़ाई॥
                            (मोकळा-बहुत)
88) नया घडाया झुमका जी ओ राज भंवरजी मोती लगाया ग्यारा।
गोरी सोयगी महल म जी ओ राज भंवरजी राजींद घाले चाकरा॥
                              (चाकरा-चक्कर)
89) नया घडाया गोखरू जी ओ राज भंवरजी रवा दिलाया चार।
निरखनवाला घर नहीं जी ओ राज भंवरजी पेरण म काई सार॥
                                  (निरखनवाला-देखनेवाला)
90) नया घडाया पाटला जी ओ राज भंवरजी हीरा लगाया चार।
म राजिंद की लाडली जी ओ राज भंवरजी पेरूं बार त्योहार॥

91) फ़ुला भरियो बाटको जी ओ राज भंवरजी दुर्गा पुजन जाय।
दुर्गा माता यूं कहे जी ओ राज भंवरजी रहियो अमर सुहाग॥

92) फ़ुला भरियो बाटको जी ओ राज भंवरजी दुर्गा पुजन जाय।
सामन मिल गया सायबा जी ओ राज भंवरजी कळी-कळी खिल जाय॥

93) काळी हांडी कांच री जी ओ राज भंवरजी बिन पटक्या फ़ुट जाय।
आजकल क टाबर जी ओ राज भंवरजी काम कह्यो की नट जाय।।
                                 (टाबर-बच्चे)
94) काळी हांडी कांच री जी ओ राज भंवरजी बिन पटक्या फ़ुट जाय।
आजकाल क टाबरा को टाइम जी ओ राज भंवरजी फ़ेसबुक व्हाट्स एप्प म ही बीत जाय॥

95) कागद लिख्यो प्रेम स जी ओ राज भंवरजी अधबिच लिख्यो प्रणाम।
बेग्या आयजो सायबा जी ओ राज भंवरजी नही तो छोडू प्राण॥
                               (बेग्या-जल्दी)
96) ले कुंकु ले चोपडो जी ओ राज भंवरजी सुरज पुजन जाय।
सामन मिल गया सायबा जी ओ राज भंवरजी म्हारी छाती धड़का खाय॥

97) आळा भरियो खोबरो जी ओ राज भंवरजी खिडकी भरी बदाम।
गोरी चाली बाप क जी ओ राज भंवरजी राजिंद करे सलाम॥

98) पक्यो लिंबु रस भरो जी ओ राज भंवरजी नख लाग्या टिच जाय।
गोरी चाली बाप के जी ओ राज भंवरजी छाती धडका खाय॥

99) माय रंगियो पोमचो जी ओ राज भंवरजी नानी बंधन बंधाय।
राजिंद कंय्या ओढु जी ओ राज भंवरजी सासु जी सेक्या खाव॥

100) घेवर भरियो बाटको जी ओ राज भंवरजी पड्यो पलंग र हेट।
लेती तो लाजा मरू जी ओ राज भंवरजी देख देवर-जेठ॥

101) घेवर भरियो बाटको जी ओ राज भंवरजी बर्फ़ी रव्वादार।
उठो राजिंद जीम लेवो जी ओ राज भंवरजी गोरी करे मनवार॥

102) घेवर भरियो बाटको जी ओ राज भंवरजी टपकन लाग्यो घी।
गोरी चाली बाप क जी ओ राज भंवरजी तरसन लाग्यो जी॥

103) प्रेमनगर रा पावना जी ओ राज भंवरजी हृदय थाको विशाल।
हिवरा म थोडी जगा दिज्यो जी ओ राज भंवरजी राखियो म्हारो ख्याल।।
                                        (हिवरा-हृदय)
104) पान मळाम जावता जी ओ राज भंवरजी आडो पसरियो नाग।
मरती पण बच गई जी ओ राज भंवरजी राजिंद थाको भाग।।

105) आडी-तिरछी कुलड्या जी ओ राज भंवरजी आम को अचार।
नितरा पेढ़ा लावता जी ओ राज भंवरजी अब काई पड़ गयो काळ॥
                                  (नितरा-रोज)
106) बागा झुलो घालियो जी ओ राज भंवरजी डोर हिंडारे माय।
किंवकर खेलु एकली जी ओ राज भंवरजी मन सहेल्या माय॥
                                (किंवकर-कैसे)
107) मेला फ़ोडी काकडी जी ओ राज भंवरजी झरोखा डाल्या बीज।
बेगा आयजो सायबा जी ओ राज भंवरजी पेली सावन री तीज॥

108) झिरमिर झिरमिर मेघ बरसे जी ओ राज भंवरजी हुयो अंधेरो खुब।
इतनो सोला-श्रृगार करी जी ओ राज भंवरजी कंय्या निरखोगा रूप।।

109) झिरमिर झिरमिर मेघ बरसे जी ओ राज भंवरजी हुई अंधेरी रैन।
मति जाओ राजिंद चाकरी जी ओ राज भंवरजी डबडब भरे मोरे नैन।।

110) मति जाओ गोरी बाप क जी ओ राज भंवरजी कारण नहीं है खास।
जठ थे रवो वठ मौज जी ओ राज भंवरजी नही तो म्हे रवा उदास।।

111) चमचा आइसक्रिम खावता जी ओ राज भंवरजी आइसक्रिम थंड़ीगार।
बनडो आयो मांडवा जी ओ राज भंवरजी बनडी घाल्यो हार॥

112) एडी म्हारी चिकनी जी ओ राज भंवरजी पंजो सटवा सूट।
ऐसी चालु झुमती जी ओ राज भंवरजी दुश्मन छाती कुट।।

113) तारा भरियो ओढ़नो जी ओ राज भंवरजी भेजु किसके साथ।
खोड हमारी यहां पडी जी ओ राज भवरजी प्राण पिया रे पास॥

114) अनाज री खोली रो चुहो जी ओ राज भंवरजी पापड खुळ-खुळ खाय।
बाईजी सासुजी न सिखावता जी ओ राज भवरजी सासुजी बड़-बड़ करती जाय॥

115) ऐसी चुडिया म्हे पहनु जी ओ राज भंवरजी नवरंगी नवरंग।
बार-त्योहार पैरती जी ओ राज भंवरजी कर चमाचम चम॥

116) लाल-गुलाबी ओढ़नो जी ओ राज भंवरजी पटल्या घालु चार।
म्हारा साजन दुलळा घना जी ओ राज भंवरजी पटल्या म छीप जाय॥

117) जितनी पायरी पगा धरूं जी ओ राज भंवरजी उतना देवर-जेठ।
बिचला म्हारा सायबा जी ओ राज भंवरजी छोड़ चाल्या परदेश॥

118) हरी मिरची लाल मिरची जी ओ राज भंवरजी मिरची बड़ी तेज।
म तो भोली भाली हूं जी ओ राज भंवरजी साहेब तेजमतेज॥

119) चार जलेबी रस भरी जी ओ राज भवरजी भेजु किसके साथ।
बाईजी तो घर नहीं जी ओ राजभंवरजी देवर बिच म खाय॥

120) आगंन म री निंबडी जी ओ राज भंवरजी पीछवाडारो नींब।
म्हारी सहेल्या हार गई जी ओ राज भंवरजी म्हे ले आया गढ़ जीत॥

ये आखरी वाला झाला जो ग्रृप जीतता है वो बोलता है।

Keywords:Rajsthani samaj, shadi, jhaale-varne, wedding celebration

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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल: राजस्थानी समाज के शादी-ब्याह में लिए जानेवाले झाले-वारणे: भाग 2
राजस्थानी समाज के शादी-ब्याह में लिए जानेवाले झाले-वारणे: भाग 2
राजस्थानी समाज में शादी-ब्याह में झाले-वारणे लेने की प्रथा है। लेकिन आजकल की पीढ़ी को झाले न आने के कारण झाले सिर्फ़ शगुन के तौर पर होने लगे है। अत: ...पेश है झाले...!
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आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
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